51वाँ खजुराहो नृत्य समारोह में
खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर एवं देवी जगदंबा मंदिर के मध्य मंदिर प्रांगण में 51वाँ खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन होगा | 20 से 26 फरवरी 2025 को प्रतिदिन सायं 6ः30 बजे से आयोजित किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय समारोह में इस वर्ष कई नए आयाम तथा गतिविधियां जोड़ी गई हैं। इस कार्यक्रम में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। जिसके तहत 19 फरवरी को शाम 4 बजे से 26 घंटे की एक मैराथन डांस परफोर्मेंस दी जाएगी | खजुराहो नृत्य समारोह में प्रारंभ से ही नृत्य जगत के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं। इस वर्ष भी यह परम्परा जारी रखते हुए पद्म पुरस्कार एवं संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड प्राप्त नृत्य कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।
संस्कृति विभाग के सहायक संचालक अमित यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भोपाल द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन एवं जिला प्रशासन छतरपुर के सहयोग से यह आयोजन 20 से 26 फरवरी, 2025 तक होगा ।
नृत्य संसार में खजुराहो नृत्य समारोह के मंच को बहुत ही सम्मान और आदर के साथ देखा जाता है। यहां प्रस्तुति करना किसी भी नृत्य कलाकार के लिए गर्व की बात होती है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए 51वें खजुराहो नृत्य समारोह में होने वाली गतिविधियों को विस्तार एवं व्यापकता देने का प्रयास किया गया है, ताकि नृत्य के साथ ही अन्य कला माध्यमों के भी विभिन्न पहलुओं का आस्वादन कलाप्रेमी कर सकें। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार अलंकरण समारोह भी आयोजित किया जाएगा।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह में देश, प्रदेश के विभिन्न जगहों से प्रसिद्ध कलाकार आके शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसमें अधिक से अधिक नवाचार करने का प्रयास किया गया है। जिसमें बाल नृत्य महोत्सव प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। साथ ही स्थानीय कलाकार है उनकों भी उचित मंच कार्यक्रम में दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य लोकल कलाकार एवं शिल्पकार एक स्टॉल दिया जाएगा। जिससे वह अपने प्रोडेक्ट को डिस्प्ले कर सकेंगे और प्रचार करेंगे। उन्होंने सभी से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। इस कार्यक्रम में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। जिसके तहत 19 फरवरी को शाम 4 बजे से 26 घंटे की एक मैराथन डांस परफोर्मेंस दी जाएगी। साथ ही बुंदेली एवं लोकल कलाकारों को भी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।
वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास
विभाग द्वारा सभी प्रमुख भारतीय शास्त्रीय नृत्यों यथा कथक, भरतनाट्यम, कुचीपुड़ी, ओडिसी आदि के साथ सबसे लम्बा वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन (रिले) प्रस्तुति की जा रही है, जिसे गिनीज बुक ऑफ वलर््ड रिकार्ड में दर्ज करने का प्रयास रहेगा। जिसमें निरन्तर 24 घंटे से भी अधिक नृत्य प्रस्तुतियां होंगी। यह गतिविधि आदिवर्त संग्रहालय, खजुराहो में होगी। गतिविधि का शुभारम्भ 19 फरवरी, 2025 को दोपहर 2ः00 बजे होगा जो निरन्तर 20 फरवरी, 2025 को सायं 5ः00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसका नृत्य निर्देशन या संयोजन कथक नृत्यांगना तथा फिल्म अभिनेत्री श्रीमती प्राची शाह, मुम्बई एवं संगीत निर्देशन या संयोजन श्री कौशिक बसु, मुम्बई द्वारा किया जाएगा। प्रारंभिक रूप से 5-5 कलाकारों के मान से 25 ग्रुप तैयार किये जायेंगे, जिसमें लगभग 125 कलाकार प्रतिभागिता करेंगे। विभागीय संगीत महाविद्यालय या विश्वविद्यालय एवं नृत्य के वरिष्ठ कलागुरुओं के साधनारत शिष्यों को प्रस्तुति के लिए अमांत्रित किया गया है।
स्थानीय कलाकरों को भी मौका
जिला प्रशासन छतरपुर के प्रयासों से स्थानीय कलाकारों का प्रोत्साहन बढ़ाने इस बार 10 शिल्पियों के लिए स्टॉल का आरक्षण एवं 21 से 26 फरवरी, 2025 में परिसर में स्थापित मंच पर सायं 4ः30 से 6ः00 बजे के मध्य प्रति दिवस एक-एक स्थानीय नृत्य प्रस्तुति के लिए व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे स्थानीय शिल्पियों एवं नृत्य प्रस्तुति के कलाकारों मंच मिलेगा और बुंदेली संस्कृति का बढ़ावा मिलेगा।
खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव
खजुराहो नृत्य समारोह जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से स्थानीय युवाओं को जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने "खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव" के नाम से पहली बार एक नई गतिविधि जोड़ी है।इसमें मध्यप्रदेश के मूल निवासी 10 से 16 साल के युवा नृत्य कलाकार एक पृथक मंच पर अपनी प्रस्तुति दे सकेंगे। इसका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परम्परा को संरक्षित करना और युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के प्रति प्रोत्साहित करना है। ये प्रस्तुतियां खजुराहो नृत्य समारोह परिसर में स्थित पृथक मंच पर सायं 5 से 6 बजे तक होंगी। इस महोत्सव हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें 310 नृत्य कलाकारों के आवेदन प्राप्त हुए थे। वरिष्ठ नृत्य गुरुओं की चयन समिति द्वारा 15 नृत्य कलाकारों को चयनित किया गया है।
प्रणाम: वरिष्ठ भरतनाट्यम नृत्यांगना पद्मविभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम के जीवन एवं कला अवदान एकाग्र प्रदर्शनी एवं व्याख्यान
51वें खजुराहो नृत्य समारोह में इस वर्ष एक नई अनुषांगिक गतिविधि प्रणाम को जोड़ा गया है। इस गतिविधि के अंतर्गत सुविख्यात नृत्यांगना और पद्मविभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम के जीवन और कला अवदान को अभिव्यक्त करते आयोजन होंगे। जिनमें डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम के जीवन और कला अवदान पर एकाग्र प्रदर्शनी, व्याख्यान एवं संवाद सह प्रदर्शन भी शामिल होंगे।
प्रदर्शनी में डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम की कला यात्रा को दर्शाया जाएगा, जिसमें उनकी प्रस्तुति के फोटो, किताबें, उनके द्वारा डिजाइन नृत्य परिधान एवं उन्हें प्राप्त अवार्ड शामिल होंगे। डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम भरतनाट्यम नृत्य की सुप्रसिद्ध कलाकार हैं। वह एक रिसर्च स्कॉलर, कोरियोग्राफर, म्यूजिक कंपोजर, गायिका, शिक्षिका, इंडोलॉजिस्ट और लेखिका भी हैं। वह भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों द्वारा उनके सम्मान में कई फिल्में और वृत्तचित्र बनाए गए हैं। हाल ही में वर्ष 2024 के पद्म विभूषण पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा हुई है। वे खजुराहो नृत्य समारोह में पूर्व में प्रस्तुति दे चुकी हैं।
व्याख्यान एवं संवाद हेतु डॉ. जयश्री राजगोपालन, सुश्री अनुराधा विक्रांत, सुश्री महती कन्नन, श्री अरविंथ कुमारस्वामी, श्री पियाल भट्टाचार्य, डॉ. राजश्री वासुदेवन, श्री अर्जुन भारद्वाज एवं डॉ. सच्चिदानंद जोशी पधारेंगे।
पद्म पुरस्कार प्राप्त और एसएनए अवॉर्डी कलाकार देंगे नृत्य प्रस्तुतियां
खजुराहो नृत्य समारोह में प्रारंभ से ही नृत्य जगत के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं। इस वर्ष भी यह परम्परा जारी रखते हुए पद्म पुरस्कार एवं संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड प्राप्त नृत्य कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।
पद्म पुरस्कार प्राप्त और एसएनए अवॉर्डी कलाकार देंगे नृत्य प्रस्तुतियां
खजुराहो नृत्य समारोह में प्रारंभ से ही नृत्य जगत के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं। इस वर्ष भी यह परम्परा जारी रखते हुए पद्म पुरस्कार एवं संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड प्राप्त नृत्य कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।
कुचिपुड़ी की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मभूषण विदुषी राधाकृराजा रेड्डी, मणिपुरी नृत्य कलाकार पद्मश्री दर्शना झवेरी, छाऊ नृत्य कलाकार पद्मश्री शशधर आचार्य, ओडिसी नृत्य कलाकार प्रवत कुमार स्वाइन, मोहिनीअट्टम नृत्य कलाकार पद्मश्री विदुषी भारती शिवाजी, कथक नृत्य कलाकार पद्मश्री विदुषी शोभना नारायण, सत्रीय नृत्य कलाकार पद्मश्री गुरु जतिन गोस्वामी शामिल हैं।
एसएनए अवॉर्डी में मोहिनीअट्टम नृत्य कलाकार सुश्री पल्लवी कृष्णनन, भरतनाट्यम नृत्य कलाकार डॉ.संध्या पुरेचा, कुचिपुड़ी नृत्य कलाकार सुश्री दीपिका रेड्डी, कथकली नृत्य कलाकार श्री सदानम के.हरिकुमार, कथक नृत्य कलाकार सुश्री अदिति मंगलदास, मणिपुरी नृत्य कलाकार गुरु कलावती देवीकृबिम्बावती देवी का नाम शामिल है। साथ ही फिल्म अभिनेत्री और भरतनाट्यम की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री मीनाक्षी शेषाद्रि की एकल नृत्य प्रस्तुति भी होगी।
नाद: भारतीय लोक एवं शास्त्रीय संगीत में उपयोगी वाद्यों की प्रदर्शनी
भारतीय लोक एवं नृत्य कृ संगीत में विभिन्न प्रकार के वाद्यों का प्रयोग किया जाता है। अलगकृअलग अंचलों, क्षेत्रों और परंपराओं में विशेष वाद्यों का प्रयोग होता है, जिनकी बनावट, ध्वनि इत्यादि लोगों को आकर्षित करती है। संगीतप्रेमी वाद्ययंत्रों के बारे में जान सकें, उन्हें देख सकें इसी उद्देश्य के साथ खजुराहो नृत्य समारोह में इस वर्ष संस्कृति विभाग द्वारा संकलित 600 से अधिक वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी नाद भी लगाई जाएगी। इसमें भारतीय लोक, जनजातीय एवं शास्त्रीय संगीत में उपयोग किए जाने वाले वाद्ययंत्र सम्मिलित होंगे। कई वाद्ययंत्र दुर्लभ भी होंगे।
चित्र कथन: नृत्योत्सव का सजीव चित्रांकन
51वें खजुराहो नृत्य समारोह में देहगति, भाव, मुद्राओं का सौंदर्य और भव्यता सिर्फ मंच पर ही नहीं, बल्कि कैनवास पर भी प्रदर्शित होगी। देश के ख्यातिलब्ध 10 चित्रकार खजुराहो नृत्य समारोह के मंच पर होने वाली नृत्य प्रस्तुतियों को रंग और कूची की सहायता से कैनवास पर सजीव चित्रण करेंगे। इन चित्रकारों में पद्मश्री श्रीमती शान्ति देवी, श्री राजेश श्याम, श्री एल. रजनीकांत सिंह, श्री कुडलयया महंतयया हीरेमठ, श्री किशन सोनी, डॉ सुनील विश्वकर्मा, श्री महेश कुमार कुमावत, श्री श्याम पुंडलिक कुमावत, श्री रघुवीर, श्री सुभाष पवार शामिल हैं।
नाद: भारतीय लोक एवं शास्त्रीय संगीत में उपयोगी वाद्यों की प्रदर्शनी
भारतीय लोक एवं नृत्य कृ संगीत में विभिन्न प्रकार के वाद्यों का प्रयोग किया जाता है। अलगकृअलग अंचलों, क्षेत्रों और परंपराओं में विशेष वाद्यों का प्रयोग होता है, जिनकी बनावट, ध्वनि इत्यादि लोगों को आकर्षित करती है। संगीतप्रेमी वाद्ययंत्रों के बारे में जान सकें, उन्हें देख सकें इसी उद्देश्य के साथ खजुराहो नृत्य समारोह में इस वर्ष संस्कृति विभाग द्वारा संकलित 600 से अधिक वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी नाद भी लगाई जाएगी। इसमें भारतीय लोक, जनजातीय एवं शास्त्रीय संगीत में उपयोग किए जाने वाले वाद्ययंत्र सम्मिलित होंगे। कई वाद्ययंत्र दुर्लभ भी होंगे।
चित्र कथन: नृत्योत्सव का सजीव चित्रांकन
51वें खजुराहो नृत्य समारोह में देहगति, भाव, मुद्राओं का सौंदर्य और भव्यता सिर्फ मंच पर ही नहीं, बल्कि कैनवास पर भी प्रदर्शित होगी। देश के ख्यातिलब्ध 10 चित्रकार खजुराहो नृत्य समारोह के मंच पर होने वाली नृत्य प्रस्तुतियों को रंग और कूची की सहायता से कैनवास पर सजीव चित्रण करेंगे। इन चित्रकारों में पद्मश्री श्रीमती शान्ति देवी, श्री राजेश श्याम, श्री एल. रजनीकांत सिंह, श्री कुडलयया महंतयया हीरेमठ, श्री किशन सोनी, डॉ सुनील विश्वकर्मा, श्री महेश कुमार कुमावत, श्री श्याम पुंडलिक कुमावत, श्री रघुवीर, श्री सुभाष पवार शामिल हैं।
एक ओर खुले आसमान के नीचे मंदिर की आभा में नृत्य का सौंदर्य दिखेगा, तो वहीं दूसरी ओर कैनवास पर इसे अलगकृअलग दृष्टिकोण के साथ देखा जा सकेगा। इस गतिविधि को रचनात्मक के साथ अकादमिक बनाने का प्रयास भी किया गया है। इसमें संस्कृति विभाग के सभी ललित कला महाविद्यालयों के अध्यनरत छात्र-छात्राएं भी सहभागिता करेंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार में चयनित चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन भी होगा।
सृजन, हुनर और स्वाद
51वें खजुराहो नृत्य समारोह को भव्यता और विविधता देने के उद्देश्य से सृजन, हुनर और स्वाद गतिविधियों का आयोजन भी किया जायेगा। ताकि जो सुधिजन पधार रहे हैं वे नृत्य के साथकृसाथ भारतीय कलाओं के विभिन्न आयामों को भी जान व समझ सकें। सृजन गतिविधि में पारंपरिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन होगा, जिसमें मिट्टी, पत्ता, बांस, गोबर, लाख, गोदना इत्यादि के उपयोग से कई तरह के शिल्पों का सृजन होता दिखेगा। वहीं, हुनर गतिविधि में पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन और विक्रय भी होगा। स्वाद गतिविधि में विभिन्न प्रकार के देशज व्यंजनों का आनंद सुधिजन ले सकेंगे।
कलावार्ता: कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद
51वें खजुराहो नृत्य समारोह में पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष लोकप्रिय संवाद सत्र कलावार्ता आयोजित किया जाएगा। इस सत्र के विषय खजुराहो के मंदिरों पर केंद्रित होंगे, क्योंकि इस वर्ष मंदिरों के एक हजार वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इनमें मंदिरों की स्थापत्य कला, संगीत-नृत्य और खजुराहो के मंदिरों का सम्बन्ध प्रमुख होंगे। इन विषयों पर एकाग्र संवाद के लिए कथक नृत्यांगना सुश्री रजनी राव, दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद डॉ. शिवकांत बाजपेयी, डॉ. ओपी मिश्रा, डॉ. नारायण व्यास, डॉ. रमेश यादव एवं प्रो. शिवकांत द्विवेदी कलाकारों से संवाद हेतु पधारेंगे।
मध्यप्रदेश पर्यटन की गतिविधियां
खजुराहो मध्यप्रदेश का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां वर्षभर लाखों पर्यटक पधारते हैं। कई पर्यटक खजुराहो की पर्यटन यात्रा कुछ इस तरह बनाते हैं कि उन्हें पर्यटन के साथ खजुराहो नृत्य समारोह भी देखने को मिल जाए। इसलिए मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इस वर्ष समारोह के दौरान स्काई डाइविंग - एमपीटी पायल रिसोर्ट खजुराहो, हॉट एयर बैलून, कैम्पिंग-पन्ना, विलेज टूर - पुराना खजुराहो गाँव, ई-बाईक टूर-खजुराहो मंदिर, सेगवे टूर - खजुराहो, वॉटर स्पोर्ट्स-कुटनी जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
विश्व का सर्वश्रेष्ठ नृत्य उत्सव खजुराहो नृत्य समारोह
खजुराहो नृत्य समारोह 1974 में आरम्भ हुआ। वर्तमान रूप की कल्पना सन् 1975 में हुई। तब से लगातार यह समारोह विस्तार पाता रहा। इसकी कीर्ति दिग-दिगन्त फैली। स्थिति यह है कि यह विश्व के श्रेष्ठ समारोहों में गिना जाता है। इसमें भाग लेने वाले नृत्यकार अपनी सम्पूर्ण रचनात्मक क्षमताओं को यहां निरूशेष करते हैं। विदेशों से आने वाले नृत्यप्रेमी-दर्शक समारोह की प्रतीक्षा करते हैं। वे यात्रा कार्यक्रम इस तरह बनाते हैं कि वे खजुराहो समारोह के दर्शक बन सकें। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की संस्कृति नीति को यह श्रेय जाएगा कि इसने इतने आयामी समारोह की संरचना की है।
भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की संगम स्थली
खजुराहो नृत्य समारोह के प्रतिष्ठित मंच को भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की संगम स्थली कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नहीं है। अपने समय के सुप्रसिद्ध नृत्य कलाकारों ने इस ढ्योढ़ी पर निश्चित ही अपना मस्तक झुकाया होगा या झुकाना न चाहा होगा। यह उन्हीं नृत्य कलाकारों की असाधारण प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन का ही परिणाम है कि खजुराहो नृत्य समारोह नृत्य संसार के गगन पर सबसे चमकदार तारे के रूप में सुशोभित है।
सृजन, हुनर और स्वाद
51वें खजुराहो नृत्य समारोह को भव्यता और विविधता देने के उद्देश्य से सृजन, हुनर और स्वाद गतिविधियों का आयोजन भी किया जायेगा। ताकि जो सुधिजन पधार रहे हैं वे नृत्य के साथकृसाथ भारतीय कलाओं के विभिन्न आयामों को भी जान व समझ सकें। सृजन गतिविधि में पारंपरिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन होगा, जिसमें मिट्टी, पत्ता, बांस, गोबर, लाख, गोदना इत्यादि के उपयोग से कई तरह के शिल्पों का सृजन होता दिखेगा। वहीं, हुनर गतिविधि में पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन और विक्रय भी होगा। स्वाद गतिविधि में विभिन्न प्रकार के देशज व्यंजनों का आनंद सुधिजन ले सकेंगे।
कलावार्ता: कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद
51वें खजुराहो नृत्य समारोह में पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष लोकप्रिय संवाद सत्र कलावार्ता आयोजित किया जाएगा। इस सत्र के विषय खजुराहो के मंदिरों पर केंद्रित होंगे, क्योंकि इस वर्ष मंदिरों के एक हजार वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इनमें मंदिरों की स्थापत्य कला, संगीत-नृत्य और खजुराहो के मंदिरों का सम्बन्ध प्रमुख होंगे। इन विषयों पर एकाग्र संवाद के लिए कथक नृत्यांगना सुश्री रजनी राव, दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद डॉ. शिवकांत बाजपेयी, डॉ. ओपी मिश्रा, डॉ. नारायण व्यास, डॉ. रमेश यादव एवं प्रो. शिवकांत द्विवेदी कलाकारों से संवाद हेतु पधारेंगे।
मध्यप्रदेश पर्यटन की गतिविधियां
खजुराहो मध्यप्रदेश का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां वर्षभर लाखों पर्यटक पधारते हैं। कई पर्यटक खजुराहो की पर्यटन यात्रा कुछ इस तरह बनाते हैं कि उन्हें पर्यटन के साथ खजुराहो नृत्य समारोह भी देखने को मिल जाए। इसलिए मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इस वर्ष समारोह के दौरान स्काई डाइविंग - एमपीटी पायल रिसोर्ट खजुराहो, हॉट एयर बैलून, कैम्पिंग-पन्ना, विलेज टूर - पुराना खजुराहो गाँव, ई-बाईक टूर-खजुराहो मंदिर, सेगवे टूर - खजुराहो, वॉटर स्पोर्ट्स-कुटनी जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
विश्व का सर्वश्रेष्ठ नृत्य उत्सव खजुराहो नृत्य समारोह
खजुराहो नृत्य समारोह 1974 में आरम्भ हुआ। वर्तमान रूप की कल्पना सन् 1975 में हुई। तब से लगातार यह समारोह विस्तार पाता रहा। इसकी कीर्ति दिग-दिगन्त फैली। स्थिति यह है कि यह विश्व के श्रेष्ठ समारोहों में गिना जाता है। इसमें भाग लेने वाले नृत्यकार अपनी सम्पूर्ण रचनात्मक क्षमताओं को यहां निरूशेष करते हैं। विदेशों से आने वाले नृत्यप्रेमी-दर्शक समारोह की प्रतीक्षा करते हैं। वे यात्रा कार्यक्रम इस तरह बनाते हैं कि वे खजुराहो समारोह के दर्शक बन सकें। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की संस्कृति नीति को यह श्रेय जाएगा कि इसने इतने आयामी समारोह की संरचना की है।
भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की संगम स्थली
खजुराहो नृत्य समारोह के प्रतिष्ठित मंच को भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की संगम स्थली कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नहीं है। अपने समय के सुप्रसिद्ध नृत्य कलाकारों ने इस ढ्योढ़ी पर निश्चित ही अपना मस्तक झुकाया होगा या झुकाना न चाहा होगा। यह उन्हीं नृत्य कलाकारों की असाधारण प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन का ही परिणाम है कि खजुराहो नृत्य समारोह नृत्य संसार के गगन पर सबसे चमकदार तारे के रूप में सुशोभित है।
नृत्य कलाकारों में रुकमनी देवी अरुंडले, बिरजू महाराज, केलुचरण महापात्रा, पं. कार्तिक राम, सितारा देवी, मृणालिनी साराभाई, यामिनी कृष्णमूर्ति, सोवना नारायण, पद्मा सुब्रमण्यम, सोनल मानसिंह, पं. रामलाल, गुरु शंकर होम्बल सहित अनेक नाम सम्मिलित हैं। साथ ही उत्तर-पूर्वी राज्यों के मणिपुरी एवं सत्रिया नृत्य के सुप्रसिद्ध कलाकार सुन्दर और मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ नृत्य के इस कुंभ में आते रहे हैं। विगत वर्ष इस समारोह के स्वर्ण जयंती उत्सव में 1486 कथक नृत्य कलाकारों ने एक साथ नृत्य प्रस्तुत कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रचा था। यह रिकॉर्ड न सिर्फ एक रिकॉर्ड था, बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ नृत्य समारोह होने का प्रमाण पत्र भी था। खजुराहो नृत्य समारोह का मंच जहां एक ओर स्थापित नृत्य कलाकारों की अभूतपूर्व प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध है, तो वहीं दूसरी ओर युवाओं और असाधारण प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के लिए भी जाना जाता है।
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