15 अक्टूबर, 2023

EL_2023सन्यासी की सियासत

 बुंदेलखंड की डायरी 

EL_2023सन्यासी की सियासत 

रवीन्द्र व्यास 

25/9/23

सनातन धर्म में  संन्यास का  बीजेपी की राष्ट्रीय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री  साध्वी उमा भारती  फिर चुनाव के समय पार्टी के सामने  मुश्किलें खड़ी करती नजर आ रही हैं | इस बार उनके निशाने पर केंद्र की मोदी सरकार है | उनका यह  राजनैतिक  अभियान क्यों और किसके इशारे पर चल रहा है  इसको लेकर सियासी अटकलों का दौर जारी है  पिछड़ा वर्ग के  नाम पर अपनी ही पार्टी के विरुद्ध अब वे हमलावर हो गई हैं वह भी ऐसे समय में जब तीन प्रमुख राज्यों में चुनावी शंखनाद हो चुका है 

                           उमा श्री भारती एक सन्यासी हैं और सनातन धर्म में  संन्यास का अर्थ सांसारिक बन्धनों से मुक्त  जीवन की सर्वोच्च अवस्था माना  गया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि  सन्यासी  एक साधारण जीवन जीता हैउसे ना  किसी भौतिक संपत्ति की चाहत होती और ना ही किसी से भावनात्मक लगाव होता है  वह अपने में ही मस्त होता है |  वर्तमान दौर के सन्यासी  कुछ अलग तरह से सांसारिक बंधनों में लिप्त नजर आते हैं संन्यास लेकर अपना शेष जीवन परम तत्व की अनुभूति प्राप्त करने में लगा देने वाला काल कलयुग में समाप्त हो गया आजकल  ज्यादातर  लोगों  के लिए  यह  प्रतिष्ठा और  हित साधना  का एक साधन बन गया है.|| 

                                     बीजेपी की साध्वी उमा भारती ने चुनाव के ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार के सामने मुश्किलें  खड़ी  करने का काम शुरू कर दिया है हालंकि यह उनका कोई पहला विद्रोह नहीं है इसके पहले भी वे अनेक मौकों पर पार्टी और प्रदेश  सरकार की रीति  नीति पर सवालिया निशान खड़ी  करती रही हैं  देश के सर्वोच्च सदन में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद उमा जी ने महिला आरक्षण बिल  पर मीडिया से कहा कि  ओबीसी महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए  कांग्रेस की मांग पर सुर मिलाने वाली  उमा भारती ने हालांकि यह भी कहा कि वह पार्टी को कमजोर नहीं करना चाहती ,  महिलाओं को ओबीसी आरक्षण दिलवाकर रहूंगी  सियासत में सत्ता का  विरोध करना  विपक्षी दल का  दाइत्व माना जाता है  उनका यह दर्द समझा भी जा सकता है कि जिस बिल को को वर्षो तक  सदन में पास नहीं करा पाए उस बिल को पी एम् नरेंद्र मोदी ने एक झटके में  दोनों सदनों में पास करा दिया बीजेपी सरकार ने ऐसी स्थितियां निर्मित कर दी थी की सभी को बिल के समर्थन में आना पड़ा 

                                           महिला आरक्षण बिल  के अनुसार यह परिसीमन के बाद 2029 से लागू होगा पर विपक्षी दल के नेताओं को लगता है कि इससे  बीजेपी 2023 ,2024 और 2029 के चुनावों  में  लाभ ले लेगी  ये नेता यह भी जानते हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया चुनाव आयोग करता जिसमे सरकार का दखल ना के बराबर होता है सदन में भी विपक्षी दल के नेताओं को यह बात सरकार ने समझाने का  जतन भी  किया था इस मुद्दे को लेकर जिस तरह से राजनैतिक बयान बाजी हो रही हैं उससे तो यही लगता है कि सरकार अपनों को ही सही ढंग से समझा नहीं पाई 

 सन्यासी  उमा भारती  ओबीसी नेताओं के साथ  बैठक करती  है. और दावा करती हैं  की 60% आबादी को उनके अधिकार दिलाकर रहूंगी.साध्वी उमा ने   33%  में से 27% ओबीसी महिला  को आरक्षण की  मांग की साथ ही  मध्य प्रदेश में बीजेपी जनरल सीटों पर भी SC,ST और OBC को टिकट देने की मांग करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल हम ओबीसी आरक्षण संशोधन के साथ ही लागू होने देंगे  | उनका यह बयान सीधे तौर पर मोदी सरकार को चुनौती देने वाला माना जा रहा है | उनके बयान बाजी के बाद सियासी दलों की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन देखने को आने वाले समय में मिलेगा |  सियासत के जानकार मानते हैं कि उमा भारती दबाव की राजनीति करती हैं इसी के चलते उन्होंने अपने भतीजे राहुल को मंत्री बनवाया था | जब उन्हें लगने लगा कि  उनका दबाव काम करेगा तो उन्होंने मोदी सरकार के विरुद्ध ही मोर्चा खोल दिया | 

लोधी वर्ग की  उमा भारती  

 लोधी वर्ग से आने वाली साध्वी उमा भारती  जानती हैं कि  एमपी और यूपी में पिछड़ा वर्ग का  लोधी समाज  बीजेपी का एक बड़ा वोट बैंक है। इस वोट बैंक को बनाने में  बीजेपी  नेता कल्याण सिंह और उमा भारती की अहम भूमिका मानी जाती है ये दोनों ही  अपने अपने राज्य में पार्टी का ओबीसी का बड़ा चेहरा थे । उमा भारती यह भी जानती हैं कि  कल्याण सिंह के बाद  लोधी समाज की वे ही  बड़ी नेता हैं इसके बावजूद भी जब उन्हें पार्टी से विशेष महत्व नहीं मिला  तो उनका नाराज होना स्वाभाविक माना जाता है । यही कारण है कि वे समय समय पर   अपनी राजनैतिक शक्ति का प्रदर्शन करती रहती हैं लोधी समाज के एक कार्यक्रम में तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि  चुनाव के समय मेरी फोटो दिखाकर लोधियों के वोट लिए जाते हैं।  सभाओं में हम  भाजपा के लिए वोट मांगेंगेक्योंकि मैं पार्टी की निष्ठावान सिपाही हूं। फिर भी आप अपना हित देखकर वोट देनाक्योंकि आप भाजपा के निष्ठावान सिपाही नहीं हैं।

दरअसल साध्वी उमा भारती  जन आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत का निमंत्रण नहीं मिलने  से नाराज हो गई थी उन्होंने   दिग्गज नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उमा को यहाँ तक कहना पड़ा था कि  औपचारिकता ही  निभा देते  भले ही  आने के लिए मना कर देते मैं नहीं आती।  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार बनवाई तो हमने भी बीजेपी को एक पूरी सरकार बनाकर दी थी। वर्तमान में मध्य प्रदेश की एक दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहाँ  लोधी समाज के मतदाता हार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं इसी को देखते हुए उन्होंने अपने 19 समर्थकों को टिकट के लिए दावेदारी भी ठोकी है बीजेपी भी यह जानती है कि उमा भारती को एकदम से अलग करना पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है इसी को देखते हुए उनकी बात को पार्टी और शिवराज सरकार द्वारा  अनदेखा भी नहीं किया जाता है मामला चाहे प्रीतम लोधी का हो अथवा शराब  का शिवराज को अपना बड़ा भाई कहने वाली उमा भारती यह भी कहती हैं अगर शिवराज कहेंगे तो प्रचार करने भी जाउंगी शिवराज भी यह जानते हैं कि उमा जी का स्वास्थ  इतना अच्छा नहीं है कि उन्हें पहले से चुनावी प्रचार में लगा दिया जाए और  एन  वक्त पर उन्हें कोई समस्या हो जाए 

बुंदेलखंडी साध्वी उमा भारती 

बुंदेलखंड  के टीकमगढ़ जिले के डूंडा गाँव की रहने वाली उमा भारती  ने अपनी राजनैतिक यात्रा 1984 से शुरू की थी २५ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस की विद्यावती चतुर्वेदी से चुनाव हार गई थी | 1989 में  उन्होंने विद्यावती को हराकर अपनी हार का बदला चुकता कर लिया था | 1991, 1996 और 1998 के चुनावों में इस सीट से लगातार जीती । 1999 में वे भोपाल लोकसभा से चुनी गई 2003 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उमा भारती को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में मैदान में उतारा था इस चुनाव में उनके प्रचार अभियान ने कांग्रेस की दिग्विजय सरकार को इतनी बुरी तरह से पराजित किया कि दिग्विजय ने १० वर्ष तक कोई चुनाव ना लड़ने की बात कह डाली मध्य प्रदेश की मुख्य मंत्री बनी आजादी के बाद पहली बार बुंदेलखंड को यह बड़ा दाइत्व मिला था पर दुर्भाग्य से यह बुंदेलखंड के भाग्य में नहीं रहा | 1994 के हुबली के  मामले में उनके विरुद्ध  गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ  था अगस्त 2004 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कुछ समय बाद ही पार्टी से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया उन्होंने राम रोटी यात्रा भी निकाली 2006 में उन्होंने अपनी खुद की पार्टी भारतीय जनशक्ति पार्टी भी बनाई जिन लोगों के सहयोग से उन्होंने यह पार्टी बनाई थी वह भी ज्यादा दिन तक उनके साथ नहीं रहे 2008 के चुनाव में उन्होंने अपने प्रत्याशी भी उतारे थे 2011 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया और बीजेपी ने २०१२ में उन्हें उत्तर प्रदेश के चरखारी विधानसभा से प्रत्याशी बनाया 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें झांसी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीती |  बीजेपी की नरेंद्र मोदी  सरकार में केंद्रीय जल संसाधननदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री बनाया गया |  2019 में उमा भारती को भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया था ।2019 के लोकसभा चुनावों के  पहले उन्होंने घोषणा कर दी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगी 

                                                    अपने राजनैतिक जीवन से लेकर सामाजिक जीवन में अनेको उतार चढ़ाव देखने वाली साध्वी उमा श्री भारती को  एक जुझारू नेता के रूप में  जाना जाता है 

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