बुंदेलखंड की डायरी
EL_2023 बुंदेलखंड में बदलाव की बयार
रवीन्द्र व्यास
2/10/23
बुंदेलखंड में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं , बदलाव की बयार हर स्तर पर देखने को मिलने लगी है | सागर संभाग के नेताओं में भी बदलाव का असर तो काफी पहले से था ,| सागर के कई नेताओं ने कांग्रेस पार्टी से पाला बदल कर बीजेपी का दामन थामा तो कुछ ने बीजेपी त्याग कर कांग्रेस का दामन थामा | दमोह ,टीकमगढ़ ,निवाड़ी पन्ना के बाद अब छतरपुर में भी बदलाव की बयार ने असर दिखाना शुरू कर दिया है | हाल ही में बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष डॉ घासीराम पटेल ने बीजेपी से त्याग पत्र दे दिया | जिले के कुछ और बीजेपी नेताओं और कांग्रेस के कुछ नेताओं के भी हृदय परिवर्तन की चर्चाएं जोरों पर हैं |
भारतीय जनता पार्टी के दो बार जिलाध्यक्ष और एक बार खजुराहो विकाश प्राधिकरण के अध्यक्ष रह चुके डॉ घासीराम पटेल ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ लिया है। डॉ पटेल अपने इस कदम के लिए एक तरह से संघठन और आला नेताओं को ही दोषी मानते हैं | दरअसल २०१८ के चुनाव में राजनगर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी हमेशा की तरह कांग्रेस से हार गई थी | सियासी जानकारों का कहना है कि बीजेपी के आला नेताओं ने इस पराजय के लिए उन्हें ही दोषी ठहराया था | इस बार वे बीजेपी से सशक्त दावेदार थे , कहते हैं को जो पहली सूचि जारी होना थी उसमे डॉ पटेल का नाम था, पर एन मौके पर उनका नाम काट दिया गया | इसके पीछे सियासी कारण बताये जाते हैं कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा नहीं चाहते थे कि राजनगर से अरविन्द पटेरिया के अलावा किसी और को प्रत्यासी बनाया जाए | दूसरी सूचि में अरविन्द पटेरिया का नाम घोषित हो गया | इस घोषणा के बाद से ही अटकलें लगने लगी थी कि अब घासीराम जी बीजेपी को राम राम कह ही देंगे , और हुआ भी वही | असल में वे यह जानते हैं कि अरविन्द पटैरिया ने अपने पिछले पांच साल के काल में जो अच्छा बुरा किया है उसका खामियाजा पार्टी को भुगतना होगा और उसका दोष पटेल के सर पर आता , इसीलिए उन्होंने पार्टी से दूर होने में ही अपनी भलाई समझी | हालंकि यह उनकी कोई पहली बगावत नहीं है , 1998 के चुनाव में भी उन्होंने बगावत की थी और निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में छतरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था , चुनाव में उन्हें ५८३६ वोट से ही संतोष करना पड़ा था | इस चुनाव में बीजेपी के उमेश शुक्ला चुने गए थे |
डॉ पटेल , बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा के संसदीय क्षेत्र राजनगर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं | शर्मा जी के खजुराहो संसदीय क्षेत्र में यह कोई पहली बगावत नहीं है इसके पहले अजा के लिए सुरक्षित पन्ना जिले की गुनौर विधान सभा सीट पर भी बगावत देखने को मिली थी | यहाँ के पूर्व विधायक महेंद्र बागरी ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है | पवई के लिए अपनी दावेदारी जाता रहे डॉ अमित खरे ने बीजेपी छोड़ समाजवादी पार्टी की सदस्य्ता ले ली | सपा के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खजुराहो दौरे के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। खरे भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जबलपुर इकाई में सहसंयोजक थे । पिछले एक वर्ष से वे अपने गृह क्षेत्र पवई में अपनी राजनैतिक जमीन तैयार कर रहे थे |
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने दल बल के साथ मध्यप्रदेश के दौरे पर आए थे, खजुराहो में उन्होंने कई मायूस कांग्रेस और बीजेपी नेता जिनमे कांग्रेस के शंकर प्रताप सिंह बुंदेला , डीलमणि सिंह , बीजेपी के घासीराम पटेल जैसे नेताओं को सियासी संजीवनी प्रदान की | हालंकि बाद में शंकर प्रताप सिंह ने कहा कि हम ना तो प्रत्याशी थे और ना हैं, हम तो सामान्य शिष्टाचार मुलाकात के लिए गए थे |
खजुराहो में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पत्रकारों के सवालों के जवाब तो दिए पर अहम् मुद्दों पर वे बातों को घुमाते रहे | हालंकि उन्होंने यह जरूर कहा कि मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी उन स्थानों पर प्रमुख तौर पर चुनाव लड़ेगी जहां बीजेपी को हम हारने की स्थिति में होंगे । पर इंडिया गठबंधन के साथ एमपी में सीटों के बंटवारे पर उन्होंने कोई साफ़ जबाब नहीं दिया, हालांकि इस मसले पर सियासी तौर पर यह माना जा रहा है कि उनकी बात कांग्रेस से चल रही है और यही कारण है कि सपा ने कुछ सीटों की घोषणा के बाद एक तरह से वेट एन्ड वॉच की पॉलसी अपना ली है | चुनावी दौर में सक्रियता दिखाने वाली सपा के अखिलेश को मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ी गुंजाइश नजर आती है, कहसकर उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों में | पत्रकार वार्ता में वे बीजेपी पर हमलावर रहे तो कांग्रेस पर कटाक्ष करने भी नहीं चूके |
आक्रोश यात्रा : बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के बाद कांग्रेस ने जन आक्रोश यात्रा निकाली है | इस यात्रा का जगह कांग्रेस के नेताओं ने स्वागत भी किया | दोनों ही यात्राओं में जुड़ा "जन" यात्रा में नदारद रहा | पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपना आक्रोश व्यक्त करते जरूर नजर आये | हालंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के व्यक्तिगत प्रभाव का असर उनकी आक्रोश यात्रा में जरूर देखने को मिला | उनके साथ जुटी भीड़ उन लोगों की जरूर थी जो पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं | जहाँ जान आशीर्वाद यात्रा में विकाश की बात हुई वही आक्रोश यात्रा में भ्रष्टाचार , बढ़ती महंगाई , बेरोजगारी ,जैसे प्रमुख मुद्दे हावी रहे , वही सागर के खुरई और बिना इलाके में राजनैतिक आतंकवाद प्रमुखता से रहे |
सियासत के इन समीकरणों के बीच अगर देखा जाए तो दोनों ही प्रमुख दल कांग्रेस और बीजेपी में आंतरिक अंतरकलह जम कर है | बीजेपी इस पर लगाम लगाने के लिए तरह तरह के जतन भी कर रही है | वहीँ कांग्रेस इस मामले में कमजोर साबित हो रही है | बीजेपी का सारा ध्यान अब जिला और ग्राम स्टार के उन प्रमुख मुद्दों की ओर है जो उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं |
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