18 अक्टूबर, 2023

Crime_Rape_MP_ गेंग रेप मामले में चार आरोपी २४ घंटे में गिरफ्तार

 गेंग रेप मामले  में चार आरोपी २४ घंटे में गिरफ्तार 

 छतरपुर// // 17 /१० /२३  से ५० किमी दूर बड़ामलहरा थाना क्षेत्र में  हुए एक सामूहिक बलात्कार  मामला सामने आया है | पुलिस ने इस मामले में   चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि एक अब भी फरार है | 

महराजगंज की रहने वाली 42 वर्षीय महिला ने  पुलिस को बताया है कि  शनिवार की दोपहर में गांव की टेक्सी में बैठकर बड़ामलहरा जा रही थी । तभी बड़ी टीक के पास  एक युवक आया जो महिला को जबरन टेक्सी से उतारकर , मारपीट करते हुए जंगल मे ले गया |  वहां पर  पहले से मौजूद  लोगो ने मिलकर  महिला को जबरन शराब पिलाई , उसके कपड़े फाड़े और उसके साथ  सभी ने  गैंगरेप किया। जबकि टेक्सी चालक वहां से टैक्सी लेकर भाग खड़ा हुआ था ।

  बड़ामलहरा ठान प्रभारी कमल सिंह ने बताया कि  पुलिस ने घायल महिला का चिकित्सीय परीक्षण कराते हुए पीड़िता के महिला अधिकारी के समक्ष बयान दर्ज कराये ,पुलिस ने सभी पाँचों आरोपियो के विरुद्ध सामूहिक दुष्कर्म व मारपीट का प्रकरण दर्ज  कर लिया है | 

छतरपुर एसपी अमित सांघी ने बताया कि  दो दिन पूर्व बड़ामलहरा थाना में एक महिला ने रिपोर्ट की थी ,बहुत स्पष्ट नहीं बता पा रही थी जब महिला सब इन्स्पेक्टर ने उसे विशवास में लेकर बात की तो ये मामला सामूहिक गेंग रेप ३७६ के अंतर्गत आया | ये घटना बड़ामलहरा से महराजगंज के बीच की है | पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है , उन्होंने अपना जुर्म भी स्वीकार कर लिया है |

                गेंग रेप के इस मामले में साहू समाज ने एक ज्ञापन सौंप कर आरोपियों के घर गिराने और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है |  


15 अक्टूबर, 2023

EL_2023धर्म और अधर्म का चुनावी रण

 

EL_2023धर्म  और अधर्म  का  चुनावी रण 

ravindra vyas

18/09/23

 वीरों और  शूरवीरों की धरती   बुंदेलखंड में  मुझे तो महीने भर में दूसरी बार सागर आकर आप सभी के दर्शन का सौभाग्य मिला है।  पिछली बार(12 अगस्त 23 ) में संत रविदास जी के  स्मारक के भूमिपूजन के लिए  आपके बीच आया था। और आज मुझे मध्य प्रदेश के विकास को नई गति देने वाली अनेक परियोजनाओं का भूमिपूजन करने का अवसर मिला है। चुनावी दौर में पीएम नरेंद्र मोदी जी 14 सितम्बर को बीना में आये तो थे 49 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले पेट्रो केमिकल कॉम्पेल्क्स और मध्य प्रदेश की दस नई औद्योगिक परियोजनाओं की रखने , पर चुनावी दौर में उन्होंने बुंदेलखंड से धर्म युद्ध का आगाज भी कर दिया |  

             चुनावी दौर में  पीएम मोदी ने धर्मयुद्ध का शंखनाद करते हुए  सनातन  विरोधी आई एन डी आई ए गठबंधन पर जमकर हमला किया | इस मसले पर उनके लम्बे  मौन के बाद  उन्होंने बुंदेलखंड की धरा से गठबंधन को घमंडिया गठबंधन कहते हुए कहा सनातन को खत्म करना चाहता है यह  घमंडिया गठबंधन ये लोग  देश और  समाज को विभाजित करने में जुटे हैं।  मुंबई में मीटिंग कर  घमंडिया गठबंधन ने जो  नीति और रणनीति बना ली है | जिसके तहत  भारत की संस्कृति पर हमला करो । उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य है कि  भारत को जिन  विचारों नेजिस संस्कारों ने जिन  परंपराओं ने  हजारों वर्ष से जोड़ा हैउसे तबाह कर दो। उन्होंने  सनातन धर्म के प्रति आस्थावान , संत रविदास देवी अहिल्या बाई होलकर,झांसी की रानी लक्ष्मी बाई,महात्मा गांधी ,लोकमान्य तिलक ,माता शबरी और महर्षि वाल्मीकि जैसे संत महापुरुषों  के उदाहरण देकर घमंडिया गठबंधन के सनातन विरोधी चेहरे को उजागर किया उन्होंने कहा  जिस सनातन से प्रेरित होकर स्वामी विवेकानंद ने लोगों को जागरूक कियाइंडिया गठबंधन के लोग उसे समाप्त करना चाहते हैं, | यह  सनातन की ताकत थी कि स्वतंत्रता आंदोलन में फांसी पाने वाले वीर कहते थे कि अगला जन्म मुझे फिर भारत मां की गोद में देना। यह गठबंधन उस सनातन को खत्म करने के लिए  अब खुलकर  बोलने लगे  हैं। उन्होंने लोगों को आगाह भी किया कि ये  लोग  अब हम लोगों पर हमला और बढ़ाने वाले है इसलिए  देश के हर सनातनी को, और देश को प्यार करने वाले को सतर्क रहने की जरूरत है। 

पेट्रोकेमिकल परियोजना 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितम्बर 23 को सागर के बीना में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड रिफाइनरी में 49  हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले पेट्रो केमिकल प्लांट की आधारशिला रखी। रिफाइनरी से 3 किलोमीटर दूर हड़कलखाती गांव में सभा को संबोधित किया और यही से  मोदी ने 1800 करोड़ रुपए के  नर्मदापुरम के ऊर्जा एवं नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन प्रक्षेत्रआईटी पार्क- 4 इंदौरमेगा इंडस्ट्रियल पार्क रतलामनर्मदापुरमगुनाशाजापुरमऊगंजआगर-मालवा और मक्सी इंडस्ट्रियल पार्क  का  शिलान्यास भी  किया

                            सभा में पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों  और  जी 20 सम्मलेन से बड़े देश के मान और गौरव को भी बताया | उन्होंने भविष्य की उपलब्धियों की बात भी कही | इस मौके परे उन्होंने  स्पष्ट किया कि इस परियोजना से क्षेत्र में उद्योगों का जाल  फैलेगा  , लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे | मोदी जी के सामने सभा में भाषण देने आये केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी , और मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुनने में लोगों का विशेष उत्साह नहीं दिखा

मोदी की सभा के सियासी मायने :  

               पीएम मोदी की बीना में सभा और उनका सनातन धर्म पर ढाल बनकर खड़े होने के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं पीएम मोदी ने 6 सितंबर 2023 को जी20 को लेकर हुई एक  बैठक में उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म विरोधी बयान पर अच्छे से जवाब देने को कहा था बुंदेलखंड के बीना में पीएम मोदी ने सार्वजनिक रूप से सनातन विरोधियों पर सीधा हमला बोला था

     दरअसल तमिलनाडु के मुख्य मंत्री के पुत्र  उदयनिधि स्टालिन का बयान ऐसे समय  आया  जब  देश के प्रमुख राज्य   मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़,और राजस्थान में भी  चुनाव का शंखनाद हो चुका है | स्टालिन का बयान , खरगे की टिप्पणी , और बिहार के मंत्री का बयान और कांग्रेस की रहस्य मय चुप्पी  ,  बीजेपी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है  |  ये तीनो वे राज्य हैं जहां  बहुसंख्यक आबादी सनातन  है. कांग्रेस ने कुछ समय पहले  ही यूपीए की जगह  इंडिया गठबंधन की नीव रखी थी , बयान देने वाले  इसी गठबंधन के नेता हैं | इस पर ना तो राहुल बोले ना प्रियंका और ना ही सोनिया गांधी

सनातन के मुद्दे पर  पीएम मोदी का यह कहना कि  ये  लोग  अब हम लोगों पर हमला और बढ़ाने वाले है इसलिए  देश के हर सनातनी को, और देश को प्यार करने वाले को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने  सनातन धर्म के प्रति आस्थावान , संत रविदास देवी अहिल्या बाई होलकर,झांसी की रानी लक्ष्मी बाई,महत्मा गांधी ,लोकमान्य तिलक ,माता शबरी और महर्षि वाल्मीकि जैसे संत महापुरुषों  के उदाहरण देकर घमंडिया गठबंधन के सनातन विरोधी चेहरे को उजागर किया उनके इस कथन के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं | असल में कांग्रेस इस मुद्दे पर बाइक फुट पर आ गई है | असल में यह तय माना जा रहा है कि 2023 और 2024 के चुनाव में सनातन के मुद्दे पर बीजेपी कांग्रेस और उसके गठबंधन को किसी भी तरह से छोड़ने वाली नहीं है इन चुनावों में यह मुद्दा प्रमुखता से जन जन तक पहुंचाया जाएगा

तीसरे पीएम का बीना दौरा

कांग्रेस नेता और तत्कालीन पीएम  पीवी नरसिंह राव ने  1995 में  बीना में महत्वाकांक्षी परियोजना बीना रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।  2011 में डा. मनमोहन सिंह ने  रिफाइनरी का लोकार्पण किया। 14 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोकेमिकल प्लांट का भूमिपूजन किया तीसरे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 सितंबर को पेट्रोकेमिकल प्लांट का भूमिपूजन करेंगे।

1995 में जब भारत ओमान रिफाइनरी का शिलान्यास हुआ था , तब इसकी लागत साढ़े पांच हजार करोड़ रुपए थी पांच वर्ष में इसका निर्माण  पूरा होना था, |  वर्ष 2005 में  जब कार्य शुरू हुआ  तो  इसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए हो गई थी। 

परियोजना से बुंदेलखंड में क्या बदलेगा 

बीना के इस  पेट्राेकेमिकल्स परियोजना  से बुंदेलखंड के  सागरविदिशा व अशाेकनगर जिलाें काे  औद्योगिक क्षेत्र में नै पहचान मिलेगी ।  5 साल  में पुरे होने वाली इस परियोजना से  सागर के बीनाखुरईविदिशा के सिराेंजकुरवाई और अशाेकनगर के मुंगावली क्षेत्र में  पेट्रोकेमिकल्स  पर आधारित लगभग २०० से ज्यादा उद्योग लग सकते हैं | जिनमे लगभग दो लाख से ज्यादा को रोजगार मिल सकेगा | अच्छी बात ये है कि मप्र सरकार भाेपाल से विदिशाबीनाखुरई व सागर तक इंडस्ट्रियल काॅरिडाेर बनाने की तैयारी भी कर रही  है। पेट्रोकेमिकल से जुड़े लगभग 80 उद्योगपतियों ने सीधे टूर पर यहाँ उद्योग लगाने में सरकार के सामने अपनी रूचि भी दर्शाई है

EL_2023सन्यासी की सियासत

 बुंदेलखंड की डायरी 

EL_2023सन्यासी की सियासत 

रवीन्द्र व्यास 

25/9/23

सनातन धर्म में  संन्यास का  बीजेपी की राष्ट्रीय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री  साध्वी उमा भारती  फिर चुनाव के समय पार्टी के सामने  मुश्किलें खड़ी करती नजर आ रही हैं | इस बार उनके निशाने पर केंद्र की मोदी सरकार है | उनका यह  राजनैतिक  अभियान क्यों और किसके इशारे पर चल रहा है  इसको लेकर सियासी अटकलों का दौर जारी है  पिछड़ा वर्ग के  नाम पर अपनी ही पार्टी के विरुद्ध अब वे हमलावर हो गई हैं वह भी ऐसे समय में जब तीन प्रमुख राज्यों में चुनावी शंखनाद हो चुका है 

                           उमा श्री भारती एक सन्यासी हैं और सनातन धर्म में  संन्यास का अर्थ सांसारिक बन्धनों से मुक्त  जीवन की सर्वोच्च अवस्था माना  गया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि  सन्यासी  एक साधारण जीवन जीता हैउसे ना  किसी भौतिक संपत्ति की चाहत होती और ना ही किसी से भावनात्मक लगाव होता है  वह अपने में ही मस्त होता है |  वर्तमान दौर के सन्यासी  कुछ अलग तरह से सांसारिक बंधनों में लिप्त नजर आते हैं संन्यास लेकर अपना शेष जीवन परम तत्व की अनुभूति प्राप्त करने में लगा देने वाला काल कलयुग में समाप्त हो गया आजकल  ज्यादातर  लोगों  के लिए  यह  प्रतिष्ठा और  हित साधना  का एक साधन बन गया है.|| 

                                     बीजेपी की साध्वी उमा भारती ने चुनाव के ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार के सामने मुश्किलें  खड़ी  करने का काम शुरू कर दिया है हालंकि यह उनका कोई पहला विद्रोह नहीं है इसके पहले भी वे अनेक मौकों पर पार्टी और प्रदेश  सरकार की रीति  नीति पर सवालिया निशान खड़ी  करती रही हैं  देश के सर्वोच्च सदन में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद उमा जी ने महिला आरक्षण बिल  पर मीडिया से कहा कि  ओबीसी महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए  कांग्रेस की मांग पर सुर मिलाने वाली  उमा भारती ने हालांकि यह भी कहा कि वह पार्टी को कमजोर नहीं करना चाहती ,  महिलाओं को ओबीसी आरक्षण दिलवाकर रहूंगी  सियासत में सत्ता का  विरोध करना  विपक्षी दल का  दाइत्व माना जाता है  उनका यह दर्द समझा भी जा सकता है कि जिस बिल को को वर्षो तक  सदन में पास नहीं करा पाए उस बिल को पी एम् नरेंद्र मोदी ने एक झटके में  दोनों सदनों में पास करा दिया बीजेपी सरकार ने ऐसी स्थितियां निर्मित कर दी थी की सभी को बिल के समर्थन में आना पड़ा 

                                           महिला आरक्षण बिल  के अनुसार यह परिसीमन के बाद 2029 से लागू होगा पर विपक्षी दल के नेताओं को लगता है कि इससे  बीजेपी 2023 ,2024 और 2029 के चुनावों  में  लाभ ले लेगी  ये नेता यह भी जानते हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया चुनाव आयोग करता जिसमे सरकार का दखल ना के बराबर होता है सदन में भी विपक्षी दल के नेताओं को यह बात सरकार ने समझाने का  जतन भी  किया था इस मुद्दे को लेकर जिस तरह से राजनैतिक बयान बाजी हो रही हैं उससे तो यही लगता है कि सरकार अपनों को ही सही ढंग से समझा नहीं पाई 

 सन्यासी  उमा भारती  ओबीसी नेताओं के साथ  बैठक करती  है. और दावा करती हैं  की 60% आबादी को उनके अधिकार दिलाकर रहूंगी.साध्वी उमा ने   33%  में से 27% ओबीसी महिला  को आरक्षण की  मांग की साथ ही  मध्य प्रदेश में बीजेपी जनरल सीटों पर भी SC,ST और OBC को टिकट देने की मांग करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल हम ओबीसी आरक्षण संशोधन के साथ ही लागू होने देंगे  | उनका यह बयान सीधे तौर पर मोदी सरकार को चुनौती देने वाला माना जा रहा है | उनके बयान बाजी के बाद सियासी दलों की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन देखने को आने वाले समय में मिलेगा |  सियासत के जानकार मानते हैं कि उमा भारती दबाव की राजनीति करती हैं इसी के चलते उन्होंने अपने भतीजे राहुल को मंत्री बनवाया था | जब उन्हें लगने लगा कि  उनका दबाव काम करेगा तो उन्होंने मोदी सरकार के विरुद्ध ही मोर्चा खोल दिया | 

लोधी वर्ग की  उमा भारती  

 लोधी वर्ग से आने वाली साध्वी उमा भारती  जानती हैं कि  एमपी और यूपी में पिछड़ा वर्ग का  लोधी समाज  बीजेपी का एक बड़ा वोट बैंक है। इस वोट बैंक को बनाने में  बीजेपी  नेता कल्याण सिंह और उमा भारती की अहम भूमिका मानी जाती है ये दोनों ही  अपने अपने राज्य में पार्टी का ओबीसी का बड़ा चेहरा थे । उमा भारती यह भी जानती हैं कि  कल्याण सिंह के बाद  लोधी समाज की वे ही  बड़ी नेता हैं इसके बावजूद भी जब उन्हें पार्टी से विशेष महत्व नहीं मिला  तो उनका नाराज होना स्वाभाविक माना जाता है । यही कारण है कि वे समय समय पर   अपनी राजनैतिक शक्ति का प्रदर्शन करती रहती हैं लोधी समाज के एक कार्यक्रम में तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि  चुनाव के समय मेरी फोटो दिखाकर लोधियों के वोट लिए जाते हैं।  सभाओं में हम  भाजपा के लिए वोट मांगेंगेक्योंकि मैं पार्टी की निष्ठावान सिपाही हूं। फिर भी आप अपना हित देखकर वोट देनाक्योंकि आप भाजपा के निष्ठावान सिपाही नहीं हैं।

दरअसल साध्वी उमा भारती  जन आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत का निमंत्रण नहीं मिलने  से नाराज हो गई थी उन्होंने   दिग्गज नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उमा को यहाँ तक कहना पड़ा था कि  औपचारिकता ही  निभा देते  भले ही  आने के लिए मना कर देते मैं नहीं आती।  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार बनवाई तो हमने भी बीजेपी को एक पूरी सरकार बनाकर दी थी। वर्तमान में मध्य प्रदेश की एक दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहाँ  लोधी समाज के मतदाता हार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं इसी को देखते हुए उन्होंने अपने 19 समर्थकों को टिकट के लिए दावेदारी भी ठोकी है बीजेपी भी यह जानती है कि उमा भारती को एकदम से अलग करना पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है इसी को देखते हुए उनकी बात को पार्टी और शिवराज सरकार द्वारा  अनदेखा भी नहीं किया जाता है मामला चाहे प्रीतम लोधी का हो अथवा शराब  का शिवराज को अपना बड़ा भाई कहने वाली उमा भारती यह भी कहती हैं अगर शिवराज कहेंगे तो प्रचार करने भी जाउंगी शिवराज भी यह जानते हैं कि उमा जी का स्वास्थ  इतना अच्छा नहीं है कि उन्हें पहले से चुनावी प्रचार में लगा दिया जाए और  एन  वक्त पर उन्हें कोई समस्या हो जाए 

बुंदेलखंडी साध्वी उमा भारती 

बुंदेलखंड  के टीकमगढ़ जिले के डूंडा गाँव की रहने वाली उमा भारती  ने अपनी राजनैतिक यात्रा 1984 से शुरू की थी २५ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस की विद्यावती चतुर्वेदी से चुनाव हार गई थी | 1989 में  उन्होंने विद्यावती को हराकर अपनी हार का बदला चुकता कर लिया था | 1991, 1996 और 1998 के चुनावों में इस सीट से लगातार जीती । 1999 में वे भोपाल लोकसभा से चुनी गई 2003 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उमा भारती को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में मैदान में उतारा था इस चुनाव में उनके प्रचार अभियान ने कांग्रेस की दिग्विजय सरकार को इतनी बुरी तरह से पराजित किया कि दिग्विजय ने १० वर्ष तक कोई चुनाव ना लड़ने की बात कह डाली मध्य प्रदेश की मुख्य मंत्री बनी आजादी के बाद पहली बार बुंदेलखंड को यह बड़ा दाइत्व मिला था पर दुर्भाग्य से यह बुंदेलखंड के भाग्य में नहीं रहा | 1994 के हुबली के  मामले में उनके विरुद्ध  गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ  था अगस्त 2004 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कुछ समय बाद ही पार्टी से उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया उन्होंने राम रोटी यात्रा भी निकाली 2006 में उन्होंने अपनी खुद की पार्टी भारतीय जनशक्ति पार्टी भी बनाई जिन लोगों के सहयोग से उन्होंने यह पार्टी बनाई थी वह भी ज्यादा दिन तक उनके साथ नहीं रहे 2008 के चुनाव में उन्होंने अपने प्रत्याशी भी उतारे थे 2011 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया और बीजेपी ने २०१२ में उन्हें उत्तर प्रदेश के चरखारी विधानसभा से प्रत्याशी बनाया 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें झांसी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीती |  बीजेपी की नरेंद्र मोदी  सरकार में केंद्रीय जल संसाधननदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री बनाया गया |  2019 में उमा भारती को भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया था ।2019 के लोकसभा चुनावों के  पहले उन्होंने घोषणा कर दी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगी 

                                                    अपने राजनैतिक जीवन से लेकर सामाजिक जीवन में अनेको उतार चढ़ाव देखने वाली साध्वी उमा श्री भारती को  एक जुझारू नेता के रूप में  जाना जाता है 

EL_2023 बुंदेलखंड में बदलाव की बयार

 बुंदेलखंड की डायरी

EL_2023 बुंदेलखंड में  बदलाव की बयार 

रवीन्द्र व्यास 

2/10/23

  बुंदेलखंड में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं , बदलाव की बयार हर स्तर  पर देखने को मिलने लगी है |  सागर संभाग के नेताओं में भी बदलाव का असर तो काफी पहले से  था ,| सागर के कई नेताओं ने कांग्रेस पार्टी से पाला बदल कर बीजेपी का दामन थामा तो कुछ ने बीजेपी त्याग कर कांग्रेस का दामन थामा | दमोह ,टीकमगढ़ ,निवाड़ी पन्ना के बाद अब छतरपुर में भी बदलाव की बयार ने असर दिखाना शुरू कर दिया है | हाल ही में बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष डॉ घासीराम पटेल ने बीजेपी से त्याग पत्र दे दिया | जिले के कुछ और बीजेपी नेताओं और कांग्रेस के कुछ नेताओं के भी हृदय परिवर्तन की चर्चाएं जोरों पर हैं | 

 भारतीय जनता पार्टी के दो बार  जिलाध्यक्ष और एक बार खजुराहो विकाश प्राधिकरण के अध्यक्ष  रह चुके डॉ  घासीराम पटेल ने एक बार  फिर  भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ लिया  है। डॉ पटेल  अपने इस कदम के लिए एक तरह से संघठन  और आला नेताओं को ही दोषी मानते हैं |  दरअसल  २०१८ के चुनाव में राजनगर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी हमेशा की तरह कांग्रेस से हार गई थी | सियासी जानकारों का कहना है कि बीजेपी के आला नेताओं ने इस पराजय के लिए उन्हें ही दोषी ठहराया था | इस बार वे बीजेपी से सशक्त दावेदार थे , कहते हैं को जो पहली सूचि जारी होना  थी उसमे डॉ पटेल का नाम था, पर  एन  मौके पर उनका नाम काट दिया गया | इसके पीछे सियासी कारण बताये जाते हैं कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा नहीं चाहते थे कि राजनगर से अरविन्द पटेरिया के अलावा किसी और को प्रत्यासी बनाया जाए |  दूसरी सूचि में  अरविन्द पटेरिया का नाम घोषित हो गया | इस घोषणा के बाद से ही अटकलें लगने लगी थी कि अब घासीराम जी बीजेपी को राम राम कह  ही देंगे  , और हुआ भी वही |  असल में वे यह जानते हैं कि अरविन्द पटैरिया ने अपने पिछले पांच साल के काल में जो  अच्छा बुरा किया है उसका खामियाजा पार्टी को भुगतना  होगा और उसका दोष पटेल के सर पर आता ,  इसीलिए उन्होंने पार्टी से दूर होने में ही अपनी भलाई समझी | हालंकि यह उनकी कोई पहली बगावत नहीं है , 1998 के चुनाव में भी उन्होंने बगावत की थी और निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में छतरपुर विधानसभा सीट से  चुनाव लड़ा था , चुनाव में उन्हें  ५८३६ वोट से ही संतोष करना पड़ा था | इस चुनाव में बीजेपी के उमेश शुक्ला चुने गए थे | 

                     डॉ पटेल , बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा के संसदीय क्षेत्र राजनगर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं | शर्मा जी के खजुराहो संसदीय क्षेत्र में यह कोई पहली बगावत नहीं है इसके पहले अजा के लिए सुरक्षित पन्ना जिले की गुनौर विधान सभा सीट पर भी बगावत देखने को मिली थी | यहाँ के पूर्व विधायक महेंद्र बागरी ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है | पवई  के लिए अपनी दावेदारी जाता रहे डॉ अमित खरे ने बीजेपी छोड़ समाजवादी पार्टी की सदस्य्ता ले ली | सपा के अध्यक्ष और  उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खजुराहो दौरे के दौरान उन्होंने  समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। खरे भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जबलपुर इकाई में सहसंयोजक थे । पिछले एक वर्ष से वे अपने गृह क्षेत्र पवई  में अपनी राजनैतिक जमीन  तैयार कर रहे थे | 

                   समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव  अपने दल बल के साथ  मध्यप्रदेश के दौरे पर आए थे, खजुराहो में उन्होंने कई मायूस  कांग्रेस और बीजेपी नेता जिनमे कांग्रेस के शंकर प्रताप सिंह बुंदेला , डीलमणि सिंह , बीजेपी के घासीराम पटेल जैसे नेताओं को  सियासी संजीवनी प्रदान की | हालंकि बाद में शंकर प्रताप सिंह ने कहा कि हम ना तो प्रत्याशी थे और ना हैं, हम तो सामान्य शिष्टाचार मुलाकात के लिए  गए थे |  

 खजुराहो में  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पत्रकारों के सवालों के  जवाब तो दिए पर अहम् मुद्दों पर वे बातों को घुमाते रहे | हालंकि उन्होंने यह जरूर कहा कि  मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी  उन स्थानों पर प्रमुख तौर पर चुनाव लड़ेगी जहां बीजेपी को हम हारने की स्थिति में होंगे । पर इंडिया गठबंधन के साथ एमपी में सीटों के बंटवारे पर उन्होंने कोई साफ़ जबाब नहीं दिया, हालांकि इस मसले पर  सियासी तौर पर यह माना जा रहा है कि उनकी बात कांग्रेस से चल रही है और यही कारण है कि सपा ने कुछ सीटों की घोषणा के बाद  एक तरह से वेट एन्ड वॉच की पॉलसी अपना ली है  |  चुनावी दौर में सक्रियता दिखाने वाली सपा के अखिलेश को  मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ी गुंजाइश नजर आती है, कहसकर उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों में  | पत्रकार वार्ता में वे बीजेपी पर हमलावर रहे तो कांग्रेस पर कटाक्ष करने भी नहीं चूके | 

आक्रोश यात्रा : बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के बाद कांग्रेस ने जन आक्रोश यात्रा निकाली है | इस यात्रा का जगह कांग्रेस के नेताओं ने स्वागत भी किया | दोनों ही यात्राओं में जुड़ा "जन" यात्रा में नदारद  रहा | पार्टी के नेता और कार्यकर्ता  अपना आक्रोश व्यक्त करते जरूर नजर आये | हालंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के व्यक्तिगत प्रभाव का असर उनकी आक्रोश यात्रा में जरूर देखने को मिला | उनके साथ जुटी भीड़ उन लोगों की जरूर थी जो पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं | जहाँ जान आशीर्वाद यात्रा में विकाश की बात हुई वही आक्रोश यात्रा में भ्रष्टाचार , बढ़ती महंगाई , बेरोजगारी ,जैसे प्रमुख मुद्दे हावी रहे , वही सागर के खुरई और बिना इलाके में राजनैतिक आतंकवाद प्रमुखता से रहे |  

                                            सियासत के इन समीकरणों के बीच अगर देखा जाए तो दोनों ही प्रमुख दल  कांग्रेस और बीजेपी में आंतरिक अंतरकलह  जम कर है | बीजेपी इस पर लगाम लगाने के लिए तरह तरह के जतन  भी कर रही है | वहीँ  कांग्रेस इस मामले में कमजोर साबित हो रही है | बीजेपी का सारा ध्यान अब जिला और ग्राम स्टार के उन प्रमुख मुद्दों की ओर है जो उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं |  

EL_2023_बुंदेलखंड में २०२३ के चुनाव एक बड़े परिवर्तन का आगाज

 

EL_2023_ बुंदेलखंड की डायरी 

बुंदेलखंड में २०२३ के चुनाव एक बड़े परिवर्तन का आगाज 

रवीन्द्र व्यास 

 देश प्रदेश के साथ बुंदेलखंड में जब भी  चुनावी दौर आता है तो कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं | ये वो दौर होता जब लोगों के साथ दलों के चाल चरित्र और चेहरे भी जन मानस  के सामने आ जाते हैं | 2023 का ये चुनाव  सियासी लिहाज से बड़े परिवर्तन का सन्देश देने वाला होगा | मध्य प्रदेश के दोनों प्रमुख दल हर कीमत पर सत्ता  पर कब्जा करना चाहते हैं , इसके लिए कोई मुफ्त की गारंटी दे रहा है , तो कोई कर्ज लेकर मुफ्त की रेवड़ियां बाँट रहा है , वहीँ  कुछ दल ऐसे भी हैं जो देश और जातियों को बांटने में लगे हैं ||  बगैर यह जाने कि इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे | इसी तरह स्थानीय स्तर के नेता भी अपनी अहमियत जताने से नहीं चूक रहे हैं किसी को धन का अभिमान है तो किसी को अपनी बिरादरी का अहंकार है                                      

एक बार फिर बुंदेलखंड से  बनेगा  मुख्यमंत्री ?

पिछले माह जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मध्यप्रदेश के दौरे पर आये थे तो उन्होंने पत्रकारों के एक सवाल पर  जवाब  दिया था कि अभी तो शिवराज मुख्यमंत्री हैं ,आगे कौन होगा इसे पार्टी तय करेगी इसके बाद जब बीजेपी ने दूसरी सूची जारी की तो तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित 7 सांसदों को विधानसभा का टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया | बीजेपी की इस सूची को देखकर कई तरह की  अटकलें लगाई जाने लगी है |  बीजेपी की इस रणनीति का असर जमीनी धरातल पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है | अलग अलग इलाकों के प्रमुखों को टिकट देने का असर यह हुआ कि हर क्षेत्र से  मुख्यमंत्री के दावेदार नजर आने लगे | पर इतना तो तय है कि बीजेपी  मुख्य मंत्री चयन में भी 2024 के लोकसभा के सियासी समीकरणों को साधेगी

                              बुंदेलखंड के दमोह लोकसभा से सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को नरसिंहपुर से  चुनावी मैदान में उतारा है | प्रहलाद पटेल लोधी समाज से ताल्लुक रखते हैं | बीजेपी की नजर काफी पहले से इस समाज को अपने से जोड़े रखने की थी | यही कारण है कुछ समय पहले उनको बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने की चर्चा जोरों पर थी पर बाद में बीजेपी की ही एक नेता के विरोध के चलते उनकी नियुक्ति पर विराम लग गया था | विधानसभा चुनाव में उनको उतारने के बाद पार्टी ने कई लोगों को सीधा सन्देश दे दिया है | प्रदेश की एक  नेता  जो  कभी हिंदुत्व के  पैरोकार के रूप में जाने जाते थे वर्तमान  समय में  वे सिर्फ अपनी बिरादरी तक सिमित हो गए उन्हें भी यह बता दिया गया कि उनके विकल्प कई हैं | दरअसल प्रह्लाद पटेल बीजेपी के उन नेताओ में हैं जिनकी राजनैतिक छवि कर्मवीर की और बेदाग़ मानी जाती है

पटेल के बाद  बुंदेलखंड के ही रहली से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री गोपाल भार्गव भी मुख्य मंत्री की दौड़ में शामिल हैं | भार्गव जी ने विधानसभा क्षेत्र  के रहली में  देवी सिद्ध पीठ टिकीटोरिया में  रोपवे निर्माण के लिए भूमि पूजन करने गए थे यहाँ  जन समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने  लोगों को यह जताने का प्रयास किया कि  यह चुनाव हम  गुरु जी के आदेश पर लड़ रहे और यह अंतिम चुनाव होगा | प्रदेश में  किसी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट  नहीं करना और    गुरु का आदेश ,, हो सकता है और गुरु की कुछ इच्छा हो ईश्वर की तरफ से यह बात आई हो | उन्होंने कहा कि  भगवान ने तो मुझे सब कुछ बनाया है नगर पालिका अध्यक्ष बनाया इतने साल विधायक और मंत्री  बनाया  सबसे बड़ा पद जो मुख्यमंत्री के बराबर होता है मुझे नेता प्रतिपक्ष बनाया हर चीज का मुहूर्त होता है हो सकता है कि मेरी हस्तरेखा में भाग रेखा में ना हो लेकिन समय पता नहीं कब कैसा आ जाए तो हो सकता है जगदंबा जी के  परिसर से आपकी आवाज सुन ली जाए ,| 

भाजपा और कांग्रेस  नेता की हाथी की सवारी 

छतरपुर जिले के बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ घासीराम पटेल और कांग्रेस नेता डीलमणि सिंह खजुराहो गए तो थे साइकिल की सवारी करने पर दोनों ही नेताओं को जेट युग में साइकिल की सवारी रास नहीं आई , अब दोनों ही हाथी पर सवार हो गए | कल तक जो राजनैतिक विरोधी थे अब राजनैतिक मित्र हो गए | दोनों की मित्रता छतरपुर जिले के राजनगर और छतरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक अलग तरह के समीकरण बनेंगे  |  अब घासीराम राजनगर से ,वही डीलमणि सिंह छतरपुर से  चुनावी मुकाबले में कांग्रेस और बीजेपी  को  चुनौती देंगे

 सागर जिले की बंडा विधानसभा में भी  भाजपा को बड़ा झटका लगा है, | यहाँ भूपेंद्र सिंह के खास और  पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष रंजोर सिंह बुंदेला ने भी बीजेपी से नाता तोड़ लिया है | उन्होंने  प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर  बंडा विधानसभा से बहुजन समाज वादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर उन्होंने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है | वहीँ छतरपुर जिले के पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष गोविन्द सिंह टूरया ने भी बीजेपी की प्राथमिक सदस्य्ता से त्यागपत्र दे दिया है | आने वाले समय में बीजेपी के एक पूर्व  विधायक की भी बीजेपी छोड़ने की चर्चा  जोरों पर है

टिकट घोषित करने में बीजेपी ने बड़ाई बढ़त 

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी ने प्रत्याशी  घोषित करने में जिस तरह से तेजी दिखाई है उससे बीजेपी ने एक तरह से बढ़त जरूर बनाई है |  भाजपा ने सागर की रहली विधानसभा से 8 बार से लगातार विधानसभा चुनाव जीत रहे पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव को खुरई विधानसभा से मंत्री भूपेंद्र सिंह  का सांतवा चुनाव है ।  सुरखी से चार चुनाव ,और खुरई से लगातार तीसरा चुनाव लड़ेंगे ।  सुरखी विधानसभा से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को मैदान में उतारा है। मंत्री गोविंद सिंह का यह  सातवां चुनाव होगा। इसमें उपचुनाव भी शामिल है। पांच चुनाव  कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे ।  सागर  विधायक शैलेंद्र जैन और नरयावली से विधायक प्रदीप लारिया  दोनो लगातार चौथी दफा चुनाव मैदान में उतरे है। 

सागर की देवरी और बंडा विधानसभा में भाजपा पहले ही प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।  देवरी विधानसभा सीट पर  कांग्रेस से बीजेपी में आये  बृज बिहारी पटेरिया को  टिकट दिया गया है । उनका मुकाबला यहां के दो बार से लगातार विधायक रहे कांग्रेस के हर्ष यादव से होगा   बंडा से पूर्व सांसद और विधायक स्व शिवराज सिंह लोधी के पुत्र  वीरेंद्र सिंह लोधी को प्रत्याशी बनाया है।  वीरेंद्र सिंह को बीजेपी के आंतरिक असंतोष का सामना करना पद सकता है

बीजेपी  छतरपुर जिले की बड़ामलहरा विधानसभा सीट से प्रदुम्न लोधी को वही टीकमगढ़ जिले की खरगापुर सीट से उमाभारती के भतीजे और मंत्री  राहुल सिंह  लोधी को ,पन्ना से मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह को प्रत्यासी बनाया है | बीजेपी दमोह  की पथरिया सीट पर ही प्रत्यासी घोषित कर पाई है | बीजेपी के लिए चुनौती पूर्ण सीटों में शुमार निवाड़ी , पृथ्वीपुर , बीना , टीकमगढ़ , जतारा , पवई , हटा ,दमोह , जबेरा और छतरपुर  जिले की बिजावर ,और  चंदला विधानसभा   हैं |  

बसपा ने पथरिया से  एक बार फिर रामबाई परिहार पर विश्वास जताया है, छतरपुर से डीलमणि सिंह ,राजनगर से डॉ घासीराम पटेल ,और खरगापुर से हृदेश कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है | आम आदमी पार्टी ने भी अपने प्रत्याशी घोषित किये हैं , बिजावर से अमित भटनागर  छतरपुर विधानसभा से  सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष भागीरथ पटेल बड़ा मलहरा से  चंदा किन्नर को अपना प्रत्याशी बनाया है,|  आम आदमी पार्टी रामजी पटेल को पहली सूची में ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है छतरपुर जिले की 6 सीटों में से आप चार सीटों पर  अपने प्रत्याशी घोषित कर प्रत्याशी घोषणा में कांग्रेस व भाजपा सहित सभी दलों को काफी पीछे छोड़ चुकी है

 किसका असर कौन रहेगा बेअसर 

2023 के चुनाव को लेकर लोगों ने देखा  सरकार के खुले खजाने को जिसने बुंदेलखंड में लाखों करोड़ की योजनाओं का भूमि पूजन ,और लोकार्पण देखे हैं | वहीँ कांग्रेस भी मतदाताओं को खरीदने बनाम लुभाने में पीछे नहीं रही |   चुनाव परिणाम बताएँगे कि विकाश पर भारी क्या होगा

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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