23 अगस्त, 2020

तेंदुए और रीछ के अंग के साथ 4आरोपी गिरफ़्तार

 तेंदुए  और रीछ के अंग के साथ  4आरोपी गिरफ़्तार

बैतूल /MP/  22अगस्त/ जिले के दक्षिण वनमण्डल के साकली गांव से वन्य जीवों के अंग जप्त किये है। मेलघाट टाइगर रिजर्व के वन्यजीव अपराध सेल ने महाराष्ट्र वन विभाग की सूचना पर वन्यजीवों के अंगों को जप्त करने और 4 आरोपियों को गिरफ्तार करने मे सफलता पाई।


शुक्रवार को   जिले के भैसदेही गाँव  में छापेमारी मे भालू के बच्चे के, बाघ के तेंदुए की हड्डियाँ, जंगली सूअर के जबड़े और 3 पंजे जप्त किये। इस मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार किये गए हैं।वन विभाग ने चारो आरोपियों को  रिमांड पर लिया है ।

सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र  वन विभाग ने सूचना दी थी कि मेलघाट टाइगर क्षेत्र में वन्य जीवों के अंगों की तस्करी की जा रही है। 

21 अगस्त, 2020

राजीव गांधी से मेरी पहली मुलाक़ात

 राजेश बादल   

बात 1985 के फ़रवरी महीने की है ।तारीख़ याद नहीं । मैं उन दिनों नई दुनिया में सह संपादक था ।छुट्टी लेकर छतरपुर आया था । इसी दौरान पता चला कि प्रधानमंत्री  राजीव गांधी ज़िले के बिजावर में सभा को संबोधित करने आ रहे हैं । उन दिनों मोबाइल फ़ोन नहीं होते थे ।स्थानीय कॉल तो आसानी से लग जाते थे ,लेकिन दूसरे शहरों के लिए ट्रंक कॉल बुक करना पड़ता था ।यह बातचीत टेलीफ़ोन विभाग के ज़रिए होती थी ।मैंने इंदौर कॉल बुक किया और संपादक अभय छजलानी से की अनुमति ली कि मैं उस सभा को कवर करना चाहता हूं ।ज़ाहिर है अनुमति मिल गई ।


उन दिनों श्री जी एल सोनाने जनसंपर्क अधिकारी थे ।उनकी मदद से पास बनवाया और उन्हीं की गाड़ी से अपने फ़ोटोग्राफ़र वरिष्ठ मित्र ओम प्रकाश अग्रवाल (आर के के नाम से मशहूर ) को लेकर बिजावर जा पहुंचा । सभा कवर की । उन्होंने अपने भाषण में प्रदेशों में साफ़ सुथरी सरकारों पर ज़ोर दिया था ।वे सिद्धांतहीन और गंदी सियासत के  घनघोर विरोधी थे । 

सभा के बाद हम सरकारी विश्राम गृह भागे ।वहां वे तनिक देर रुकने वाले थे । मैं अख़बार के लिए साक्षात्कार लेना चाहता था । विश्राम गृह में खानसामे से लेकर कलेक्टर तक सब अच्छी तरह मुझे जानते थे इसलिए एक पर्ची वी आई पी कक्ष क्रमांक एक तक भेजने में कोई मुश्किल नहीं आई ।मैंने चाय की ट्रे ले जा रहे रसोइए की ट्रे में अपने नाम की पर्ची अनुरोध के साथ लिखकर रख दी । बाक़ी का काम श्री सोनाने ने आसान कर दिया । पर्ची देखकर राजीव जी ने कलेक्टर से मेरे बारे में पूछा । उन्होंने सकारात्मक टिप्पणी दी ।फिर भी कहा कि एक बार जन संपर्क अधिकारी से भी पूछ लें ।इसके बाद श्री सोनाने को तलब किया गया । यह उनकी मेहरबानी है कि उन्होंने भी मेरे बारे में अच्छी टिप्पणी कर दी ।उन्होंने प्रधानमंत्री को यह भी बताया कि श्रीमती इंदिरा गांधी शहादत से एक सप्ताह पहले मध्यप्रदेश के भीकनगांव आईं थीं और उस यात्रा का कवरेज़ भी इन्हीं पत्रकार ने किया था ।उन्होंने इंदिरा जी के दो और साक्षात्कारों का हवाला दिया ,जो मैंने किए थे ।इतना सुनते ही राजीव गांधी ने मुझे  अंदर बुलाया और बड़े सम्मान से छोटा सा साक्षात्कार दिया ।पैंतीस बरस पहले मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी । मैंने उन्हें बताया कि इंदिरा जी की करीब आधा दर्जन सभाओं को मैं कवर कर चुका था और तीन या चार बार उन्होंने मुझे संक्षिप्त साक्षात्कार दिए थे । इस पहले साक्षात्कार में उन्होंने राजनीति में मूल्यों और शुचिता की बात कही थी, दल बदल की प्रवृति का विरोध किया था और छोटे राज्यों के गठन पर ज़ोर दिया था ।उनका मानना था कि इससे विकास तेज़ होता है । प्रतिपक्ष में वे अटल बिहारी वाजपेई के प्रशंसक थे । इस सूचना से कि मैं उनकी मां की  मध्यप्रदेश की आख़िरी यात्रा को कवर कर चुका हूं, प्रधानमंत्री राजीव गांधी के चेहरे पर मैं संतोष का भाव पढ़ सकता था ।

साक्षात्कार पूरा होते ही मैं और श्री सोनाने छतरपुर भागे ।  यह दोपहर की बात थी । छतरपुर से भोपाल कार्यालय के विशेष प्रतिनिधि श्री उमेश त्रिवेदी को ट्रंक कॉल लगाया ।उन्होंने उदारता पूर्वक फ़ोन पर पूरी खबर लिखी और कहा कि जल्द से जल्द फोटो कैसे मिल सकते हैं । मैंने कहा ,छुट्टी रद्द करके कैमरे की रील लेकर मैं ही भोपाल आ जाता हूं । लेकिन भोपाल कार्यालय में डार्क रूम नहीं था । भोपाल से इंदौर के बीच उन्हीं दिनों फोटो फेसीमाइल मशीन लगी थी । वह हमारे लिए एक चमत्कार से कम नहीं थी ।फैक्स तो उन दिनों नहीं था ।जब भी भोपाल से कोई फोटो आता ,इसी मशीन में लगा देते । इधर से फोटो लगाते,उधर इंदौर में प्रिंट निकलने लगता था । हमें किसी भी सूरत में 9.30 बजे तक फोटो भोपाल भेज देना था । यह तभी संभव था जब हम हर हाल में एक बजे छतरपुर से निकल जाते तब कहीं बिना रुके रात नौ बजे भोपाल पहुंचते । हम इस उधेड़बुन में थे कि फोटो की रील कैसे धुलेगी ।श्री कमलेश जैमिनी के स्टूडियो में धुलती तो देर हो जाती । क्या करें ?

अचानक हमारे छायाकार ओमप्रकाश अग्रवाल हाथ में फोटो लिए प्रकट हो गए । हम तो दंग थे । ओम प्रकाश जी याने आर के ने कहा कि बिजावर से छतरपुर जीप में बैठे बैठे मैंने आपकी बातें सुन ली थीं ।इसलिए जब आप उमेश जी को खबर लिखा रहे थे तो मैं सीधा अपने डार्क रूम में घुस गया था और इस तरह प्रिंट मेरे सामने थे ।मैंने गले लगकर आर के का एहसान जताया और हमारी जीप सीधे भोपाल दौड़ पड़ी । कुछ समोसे,भजिए और बर्फी पैक करा ली थी क्योंकि रास्ते में रुकना नहीं था । हमारे ड्राइवर साब बड़े सहयोगी थे ।उनके कारण ही हम ठीक साढ़े आठ बजे भोपाल की प्रोफेसर कॉलोनी में नईदुनिया कार्यालय में थे । नौ बजते बजते हम अपना समाचार और फ़ोटो इंदौर पहुंचा चुके थे ।

अगले दिन नई दुनिया ने बाज़ी मारी थी ।शानदार फोटो और आधा पेज का कवरेज़ था । क़रीब दस दिन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से मुझे राजीव गांधी का पत्र मिला ।इसमें नई दुनिया के कवरेज़ पर प्रसन्नता प्रकट की गई थी । इसके बाद तो मुझे अगले कुछ वर्षों में दो या तीन बार राजीव गांधी से मिलने और उनका साक्षात्कार लेने का अवसर मिला । मुझे इंदिरा गांधी की याद आई ,जब 1977 और 1979 - 80 के चुनाव के दरम्यान मैंने खजुराहो और झांसी में उनके साक्षात्कार लिए थे और उन पर भी प्रधानमंत्री कार्यालय से ऐसे ही पत्र आए थे ।

16 अगस्त, 2020

आजादी के बाद से हुए अन्याय के विरुद्ध लामबंद होते किसान


रवींद्र व्यास

छतरपुर /  जिले के किसानो के साथ वन विभाग द्वारा किये गए अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध स्वतंत्रता दिवस के दिन एक जन शंखनाद  गुंजायमान हुआ | लोगों ने आजादी के बाद से जारी इस अन्याय और अत्याचार के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन की हुंकार भरी | जिले के लाखों किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय की आवाज भी छतरपुर जिले के किसी जन प्रतिनधि ने नहीं उठाई | रीवा राजदरबार से लेकर आजाद भारत की सरकार द्वारा दिए गए आदेशों और नियमों की विस्तृत जानकारी देकर बैतूल के अधिवक्ता अनिल गर्ग ने छतरपुर वन विभाग द्वारा किये जा रहे इस अन्याय के प्रति लोगों को जागरूक किया |                      

आजादी के दिन नगर की कल्याण धर्मशाला में ऐसे अनेकों  किसान  जुटे जो जिले के वन विभाग के आतंक से त्रस्त हैं | वन विभाग से पीड़ित  किसानो को उनके वास्तविक अधिकार दिलाये जाने हेतु रूप रेखा तैयार की गई |  शाम को  अनिल गर्ग ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया की   छतरपुर जिले में जब हमने यह देखा की  यहाँ के किसानो के साथ ऐतिहासिक अन्याय वन विभाग द्वारा आजादी के बाद से ही किया जा रहा है | में यहां के लोगों के इस धैर्य के लिए बारम्बार नमन करता हूँ |  8 फरवरी 1937 के रीवा राजदरबार के आदेश को मानकार वन विभाग ने 1950 में उन सारी  जमीनों  पर अपना कब्ज़ा बता दिया जिन पर  किसान पीढ़ियों  से खेती करता चला  रहा था।  इसके अलावा , निस्तार की भूमि ,चरोखर भूमि , और शमशान भूमि पर  वन विभाग ने अपना  दावा कर दिया | इन जमीनों पर वन विभाग ने ना सिर्फ अपना दवा जताया बल्कि अपने कब्जे में भी ले लिया |                                        

    गर्ग ने बताया की वन विभाग ने 70  सालों में   अधिसूचित   भूमियों की   भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4से 19  तक की जांच अब तक पूर्ण नहीं  की | इसी तरह धारा 34  के अनुसार 9 लाख एकड़  अधिसूचित  भूमियों के ड़ी  नोटिफिकेशन की प्रविष्टि दर्ज किये जाने की प्रक्रिया आज तक निर्धारित नहीं की |                  

छतरपुर जिले की लगभग  लाख एकड़ जमीन वन विभाग अपनी जमींन बता रहा है | 2004 से 2015 के बीच वन व्यवस्थापन के तहत 9 महत्व पूर्ण आदेश जारी हुए | छतरपुर जिले का वन विभाग किसी भी आदेश का पालन नहीं कर रहा है | 

26 जनवरी 1950  को देश का संविधान लागू हुआ , कई कानून ,संसद और विधान सभा द्वारा बनाये गएइनमे कई संसोधन भी किये गए किन्तु पिछले 70 वर्षों से वन विभाग और राजस्व विभाग  द्वारा इनकी निरंतर उपेक्षा की जा रही है , जो एक तरह से कानून का अपमान और अवमानना का भी मामला है |  29 मई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने इस तरह के विवादों को  निपटाने के लिए  टास्क फ़ोर्स कमेटी का गठन भी किया था | कमेटी ने 15 फरवरी 2020 को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी थी | पर टास्क फ़ोर्स कमेटी के सुझाव भी नहीं माने गए |                                                                                                                                                                                अन्याय का असर : 

 छतरपुर जिले के किसानो के साथ किये गए इस अन्याय का असर  ये हुआ की सैकड़ों लोग मालिक से मजदूर बन गए | जिस  लाख हेक्टेयर में खेती कर किसान अपने परिवार और देश की प्रगति में सहायक हो सकता था वह वन विभाग से संघर्ष में जुटा रहा | वन विभाग के अन्याय और अत्याचार की कहानी सिर्फ यही समाप्त नहीं हुई , उसने अपनी जमीन पर खेती करने वालों के ट्रैक्टर वगैरह जप्त किये | एक मामला तो ऐसा भी आया जिसमे जप्त टेक्टर की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और फैसला किसान के हक में हुआ , विभाग को जप्त टेक्टर लौटाना पड़ा | इससे नाराज विभाग ने उसका दूसरा टेक्टर जप्त कर लिया और तभी छोड़ा जब 50  हजार की वसूली कर ली |  इस तरह की अनेकों कहानिया अब खुल कर सामने  रही हैं | बिजावर और किशनगढ़ इलाके में  कुछ ऐसे भी मामले सामने आये की वन भूमि में विभाग की मिली भगत से खेती की जा रही है |  

अन्याय के विरुद्ध आवाज : 

वन विभाग द्वारा किये जा रहे अन्याय के विरुद्ध अब लोग सामूहिक  तोर पर जन आंदोलन और न्याययालय का रास्ता अपनाने को मजबूर हो रहे हैं ।|                                                                           

09 अगस्त, 2020

देव स्थलों से विवाद बनाने की साजिस

  

बुंदेलखंड की डायरी 

रवीन्द्र  व्यास  


बुंदेलखंड के सागर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित कल्प वृक्ष के नीचे बना देवालय एडीएम ने रातों रात तुड़वा दिया || सागर के लोगों के विरोध को देखते हुए कलेक्टर  ने जांच कमेटी बनाई और स्पष्ट किया कि  मंदिर यथावत रहेगा । दुर्लभ कल्पवृक्ष के संरक्षण के लिए  वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है |  सागर की इस घटना के पहले छतरपुर जिले के राजनगर में शिव मंदिर में गणेश प्रतिमा का हाथ तोड़ दिया गया , मंदिर परिसर में मृत जानवर के अवशेष फेंके गए | राजनगर में यह कोई पहली घटना नहीं है | देखा जाए तो वर्तमान हालातों में देव स्थलों से विवाद की रचना रचने की साजिस चली जा रही है | 



सागर के नए  कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 700 वर्ष प्राचीन  कल्पवृक्ष   पर स्थित हमारे हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाएं हनुमान जी भोलेनाथ की प्रतिमाओं को गुपचुप तरीके से प्रशासन द्वारा हटाने का प्रयास किया गया | इस दौरान हनुमान जी की प्रतिमा भी खंडित हो गई | यह सारा कार्य सागर के एडीएम  अखिलेश जैन ने किया | इस मामले में प्रशासन के अंदर से खबर यह भी सामने आई है की ,इस मामले में एडीएम  जैन ने कलेक्टर को भी विशवास में नहीं लिया | यह भी कहा जा रहा है कि ऐसे दौर में उन्हें अन्य लोगों ने भी समझाने का प्रयास किया था |  पर उन्होंने रातों रात इस स्थल को साफ़ करने की ठान ली थी और प्रतिमाये  हटवाने  लगे इस दौरान हनुमान जी की प्रतिमा खंडित हो गई | खबर लगते ही रात में ही लोगों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने काम रोक दिया | 

प्रतिमा टूटने  पर शरु हुआ बवाल ::


 यह वह समय है जब लोग अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर खुशिया  मना रहे हैं ,समय देव स्थल की तोड़ फोड़ से लोगों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है | सनातनी  संगठनों के लोगों ने प्रदर्शन  कर   मुख्यमंत्री  के नाम एक ज्ञापन  दिया डिप्टी कमिश्नर के के शुक्ला को सौंपा |  ज्ञापन में   मांग  की गई कि   तत्काल एडीएम अखिलेश जैन के ऊपर मामला दर्ज किया जाए और  सस्पेंड किया जाए । मंदिर मैं नई मूर्ति का पुनः निर्माण किया जाए । चेतावनी दी गई कि यदि  कार्रवाई नहीं हुई  तो  उग्र  आंदोलन  होगा  । इस मसले को लेकर अंदर की कहानी कुछ अलग तरह की बताई जा रही है | सागर जिले से तीन तीन मंत्री हैं गोपाल भार्गव , भूपेंद्र सिंह और गोविन्द सिंह , इस  तोड़ फोड़ के पीछे सियासी और सामाजिक कारण भी बताये जा रहे हैं | 


 मंदिर रहेगा यथावत 


  सागर कलेक्टर दीपक सिंह ने यह कहकर मामले को शांत किया कि कल्पवृक्ष के नीचे मंदिर विवाद को लेकर एक  जांच समिति बनाई है |  कल्पवृक्ष के नीचे स्थापित मंदिर को यथावत रहेगा। कलेक्टर कार्यालय की मंदिर संरक्षण कमेटी के धर्म गुरुओं के अनुसार पूजा अर्चना सुनिश्चित करेंगे। कल्प वृक्ष के संरक्षण के लिए वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है | 


गणेश जी के हाथ तोड़े 


 4 अगस्त की रात छतरपुर जिले के  राजनगर में बीआरसी  परिसर में बने ३सौ वर्ष पुराने  शिव मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा का एक हाथ तोड़ दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज किया है | घटना के ५-६  दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस नें अब तक कोई  गिरफ्तारी नहीं की है।



 घटना से नाराज  अधिवक्ताओं नें  केंद्रीय गृह मंत्री के नाम राजनगर एस डी एम को ज्ञापन देकर जल्दी कार्यवाही करने की मांग की है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि भगवान्  गणेश जी का हाथ तोड़ा गया मंदिर परिसर में मर्त पशु के अवशेष फेंके गए | यह उस समय किया गया जब अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सब लोग हर्ष में थे | यह घटना बहुसंख्यक सनातनी लोगों की भावनाओ को आहत करने और मंदिर के विरोध स्वरुप की गई है |   राजनगर इलाके की की यह कोई पहली घटना नहीं है | जब यहां एसडीओपी मंसूरी थे उस समय राजा मार्केट में गाय के अवशेष फेके गए | यह अवशेष तब फेके गए थे जब नवरात्रि के व्रत चल रहे थे | पलया मोहल्ला में हरशंकरी मंदिर में देवी जी की प्रतिमा को खंडित किया गया था | तीन वर्ष  पहले पहाड़ी पर स्थित हनुमान मंदिर पर मोरोन को मारकर  मंदिर के आस पास फेंके गए थे | ६-७ वर्ष पहले हनुमान मंदिर में तोड़ फोड़ की गई थी | इन किसी भी मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई | 


ज्ञापन में यह भी  की पिछले १०-१५ वर्षों में इस तरह की अनेकों घटनाएं सामने आई हैं पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा एक भी मामले में अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया गया | यह घटनाएं बहुसंख्यक आबादी की भावनाओ को ठेस पहुंचाने के लिए सुनियोजित रूप से रची जा रही हैं | 


                          दरअसल बुंदेलखंड इलाके में इस तरह के अनेकों केंद्र बनते जा रहे हैं जहाँ कथित अल्प संख्यक समुदाय बहुसंख्यको की जन भावनाओं पर आघात पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ता | समय रहते सामाजिक सदभाव बनाने की दिशा में अगर पहल नहीं की गई तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं | 

02 अगस्त, 2020

Ram_ बुन्देलखण्ड से भगवान श्री राम का नाता

बुंदेलखंड की डायरी 
बुन्देलखण्ड से   भगवान श्री राम का नाता
रवीन्द्र व्यास 
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम का जितना नाता अयोध्या से माना जाता है उतना ही नाता उनका बुंदेलखंड से भी माना जाता है । बुंदेलखंड की पावन धरा चित्रकूट में उन्होंने अपना वनवास काल बिताया । दैत्यों के संहार के लिए उन्होंने पन्ना के सारंग धाम में उन्होंने दैत्यों के सर्वनाश के लिए धनुष उठाया  ।। पन्ना के सलेहा से दस किमी दूर अगस्त ऋषि आश्रम हैं उनसे मिलने स्वयं श्री राम गए । यहां उन्हें अगस्त ऋषि दिव्यास्त्र और धनुष बाण भेंट किया था | बुंदेलखंड के ही गोस्वामी तुलसी दास ने राम चरित् मानस लिख कर भक्ति की गंगा दुनिया भर में प्रवाहित कर दी ।कहते तो ये भी हैं कि रामलला असल में अपना दिन बुंदेलखंड के  ओरछा में बिताते हैं | 5 अगस्त को जब दिव्य राम देवालय की आधार शिला रखी जाएगी तब वहां बुंदेलखंड की ही प्रमुख नेता उमा श्री भारती भी मौजूद रहेंगी | 
  तपो भूमि  बुंदेलखंड  
 बुंदेलखंड इलाका ऋषि मुनियों की तपो भूमि रहा है इसका वर्णन सतयुग से लेकर आज तक के अनेकों धर्म ग्रंथों में मिलता है । चित्रकूट में भगवान् श्री राम सीता और लक्षण जी ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय बिताया था । यहां के कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा कर उन्होंने बुंदेलखंड की धरा को पावन किया था । यहां से वे आगे बड़े और पन्ना जिले के सारंग पहाड़ इलाके में पहुंचे |  जिसे अब सारंग धाम कहते हैं यहाँ भगवान् राम ,सीता जी और लक्ष्मण जी से जुडी कई यादे आज भी ताजा  हैं । यही वो स्थान भी माना जाता है जहां श्री राम ने दैत्यों के संहार के लिए धनुष उठाया था । 
 धनुसाकार पहाडियों की आकृति की तलहटी में बने आश्रम मे अगस्त मुनी के शिष्य सुतीक्ष्ण मुनी नें वर्षों तपस्या की थी | कहते हैं कि  जब भगवान राम यहां  पहुचे और उन्होंने दैत्यों के आतंक को जाना  तो उन्होंनें धनुस उठा कर दैत्यों के स्रहार का यही  संकल्प लिया था |
राम चरित्र मानस  के अरण्य काण्ड में सुतीक्ष्ण मुनी से मिलने का वर्णन मिलता है श्री राम वन गमन का जो मार्ग बना है उसमे भी इस स्थान का विषेस उल्लेख है । सारंग धाम के महंतो और पुजारियों का मानना है कि  त्रेता युग में जब भगवान श्री राम को 14 वर्स का वनवास मिला था । उस समय सुतीक्ष्ण मुनी यहां उन्ही के लिये तपस्या कर रहे थे । रामचंद्र जी सीता जी लक्ष्मण जीने आकर उन्हें दर्शन  दिए और कुछ समय साथ में बिताया  मुनी की तपस्या में राक्षस गण व्यवधान पैदा करते थे ,इस कारण उन्होंने यहां पर धनुस उठा कर संकल्प लिया था कि इस देस को हम राक्षसों से विहीन कर देंगे । राम का वह धनुष आज भी शिला  पर अंकित हैं | यहां का राम कुण्ड सीता कुण्ड,लक्ष्मण कुण्ड सीता रसोई ,राम बैठका आज भी उनकी उपस्थिति  का अहसास दिलाते हैं । वे बताते हैं कि इन कुण्डों की महिमा भी अपरंपार हैचाहे जितना सूखा पढ जाये इनसे चाहे जितना पानी निकाल लो पर ये कभी खाली नहीं होते 
स्थानीय निवासी  राम कुण्ड में साक्षात गंगा मैया का  वास मानते  है,| 1970 की बात हे जब कुछ लोगों ने इसे अपवित्र  कर दिया था जिस कारण राम कुण्ड सूख गया था । तीन वर्ष  तक अखण्ड रामायण और राम धुन के बाद गगा जी पुनआई थी ,तब से यह कुण्ड यथावत है । राम जी कुछ समय रहने के बाद आगे चले गये थे ।वर्तमान में राम वनगमन मार्ग का जो नक्शा  तैयार किया गया है उसमें इसका उल्लेख है। दिल्ली से आये रामऔतार शर्मा  और संत टोली व्दारा इस स्थान का 5 बार सर्वेक्षण किया गया ,और सभी बातें प्रमाणिक पाई गई ।
आश्रम में जिस तरह से राम की यादों को सहेज कर रखा गया ठीक उसी तरह से यहां मुनी की यादों को भी सहेजा या है। सुतीक्ष्ण मुनी की सगंमरमर की प्रतिमा बरबस ही लोगों का ध्यान खींच लेती है। यहां के बाबा  कहते है कि हमें तो आज भी यही लगता है जैसे राम जानकी और लक्ष्मण जी हमारे आस पास ही हों वे दावा करते है कि मुनी के समय की धूनी आज भी वे जला रहे है ।
                सुतीक्ष्ण मुनी यहां क्यों आये थे,और क्यों राम से मिलने की जिद में तपस्या की इस सवाल को जानने के लिए अनेकों लोगों से चर्चा की लोगों ने  बताया कि सुतीक्ष्ण मुनी,अगस्त मुनी के शिष्य  थे ।एक बार गुरू कही भ्रमण को जा रहे थे,जाते समय उन्होने शालिग्राम ’ भगवान को सुतीक्ष्ण मुनी को सौपते हुये कहा कि जब तक हम लौट कर नही आ जाते तब तक तुम  शालिग्राम जी की पूजा करते रहना ,सुतीक्ष्ण मुनि नें पूजा करने की बजाए  शालिग्राम से जामुन तोडने लगे जिस कारण  शालिग्राम  जी गायब हो गये  अगस्त मुनी जब लौट कर आए तो उन्होंने पूछा कि  शालिग्राम जी कहां गये ,तो उन्होने जबाब दिया कि पुन पुन चंदन पुन पुन पानी ,  शालिग्राम हिरा गए हम का जानी,| ’ 1 इस बात से नाराज हो कर गुरू जी ने उन्हे अपने आश्रम से निकाल दिया और कहा कि यहां तभी आना जब भगवान को ले कर आओ  तभी से सुतीक्ष्ण मुनी ने यहां तपस्या की और जब प्रभु श्री राम यहां आये तो उन्हे लेकर अपने गुरू के पास गये थे ।
  अगस्त मुनि का आश्रम  
पन्ना के सलेहा से दस किमी दूर अगस्त मुनि का आश्रम हैं ,| सिद्ध नाथ का यह स्थान अपनी अलग पहचान बनाये  है | मंदिर के गर्भगृह में एक प्राचीन शिव प्रतिमा , मंदिर परिसर में भगवान रामऋषि अगस्त के छोटे-छोटे मंदिर और मूर्तियां मौजूद हैं, | अगस्त मुनि  के 108 शिष्य भी यहां साधना किया करते थे,|  यहां की कथा भी लोग बताते  है कि जब शिव विवाह हो रहा था तो धरती का संतुलन बिगड़ गया थातब भगवान के कहने पर ऋषि अगस्त यहां आये और उन्होने धरती का संतुलन बनाया और यहां तपस्या  की।
   उन्हें मालूम था दशरथ पुत्र राम वनवास काल में यहाँ आएंगे | इसीलिए उन्होंने सुतीक्ष्ण मुनि को इसके लिए यह दंड दिया था | सुतीक्ष्ण मुनि के साथ स्वयं श्री राम अगस्त मुनि के आश्रम में पहुंचे  । ऋषि ने दिव्यास्त्रों के साथ उन्हें एक धनुष बाण भेंट किया था यही से वे नासिक की ओर गए थे । यहाँ आज भी  भगवान् श्री राम की वनवासी वेश में एक मात्र दुर्लभ प्रतिमा है । दक्षिण भारतीय लोगों में अगस्त मुनि की अत्याधिक मान्यता के कारण बड़ी संख्या में दक्षिण भारत से लोग इस दुर्गम स्थल तक आते हैं ।          
446 वर्ष से रामराजा ओरछा में 
 हमारे मित्र राजेंद्र अध्वर्यु ने पिछले दिनों सोशल मीडिया में एक पोस्ट की थी | उसका उल्लेख किये बगैर श्याद बुंदेलखंड से राम के नाते की कथा अधूरी लगती | उन्होंने लिखा है कि   ओरछा के रामराजा मदिंर मे लगे शिलालेख के अनुसार भगवान श्रीरामराजा सरकार को 446 वर्ष पूर्व ओरछा राज्य के तत्कालीन शासक महाराजा मधुकर शाह जू देव की रामभक्त पत्नी महारानी गणेश कुंअर भगवान श्री राम प्रभू की मूल (असली प्रतिमाको अपनी गोद मे लेकर अयोध्या से ओरछा तक 8 माह 28 दिनों तक पैदल चलकर लायीं थीं। प्रभु श्री राम ओरछा कैसे आये और कैसे महल में रुक गए इसकी अपनी एक अलग कथा है | 
   ऐसी मान्यता है कि रात्रि विश्राम के लिए हनुमान जी महाराज ओरछा में रात्रि भोजन के बाद अपने आराध्य श्री राम प्रभु को लेकर अयोध्या जाते हैं और प्रातः पुनः ओरछा लाकर उन्हें रामराजा मंदिर में विराजमान करा देते हैं।

 आज भी  प्रतिदिन प्रातः और सन्ध्यां आरती के समय पुलिस द्वारा ’’रामराजा सरकार को गार्ड ऑफ आनर देने की परम्परा चैत्र शुक्ल रामनवमीं विक्रम संवत् 1631 से लगातार चलीं  रही है 

उन्होंने इस लेख के साथ  पी एम् नरेंद्र मोदी ,यूपी सीएम  योगी आदित्यनाथ,एमपी सीएम  शिवराजसिं  चौहान  अध्यक्ष जी राम जन्मभूमि न्यास न्यास नई दिल्ली, महंत नित्यगोपाल दास जी महाराज अयोघ्या को पत्र लिख कर अनुरोध किया  है कि पवित्र वेत्रवती सरिता के तट पर ओरछा धाम में बिराजमान साक्षात भगवान ’’श्रीरामराजा सरकार के पवित्र चरणरज और पवित्र वेत्रवती सरिता के शुद्ध जल तथा चित्रकूट धाम के कामतानाथ की पावन रज  रामगंगा नदी के पवित्र जल को श्री रामजन्म मंदिर के अलौकिक भूमि पूजन कार्यक्रम में अयोध्या पहुचांने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को तत्काल देने की कृपा करें।
                           बुंदेलखंड के जिस इलाके से स्वयं श्री राम की यादे जुडी ऐसे स्थलों की स्मृतियाँ राममंदिर निर्माण से जुड़ना आवश्यक ही कहा जाएगा | 
                                                     
                                    

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