बुन्देलखण्ड से भगवान श्री राम का नाता
रवीन्द्र व्यास
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम का जितना नाता अयोध्या से माना जाता है , उतना ही नाता उनका बुंदेलखंड से भी माना जाता है । बुंदेलखंड की पावन धरा चित्रकूट में उन्होंने अपना वनवास काल बिताया । दैत्यों के संहार के लिए उन्होंने पन्ना के सारंग धाम में उन्होंने दैत्यों के सर्वनाश के लिए धनुष उठाया ।। पन्ना के सलेहा से दस किमी दूर अगस्त ऋषि आश्रम हैं , उनसे मिलने स्वयं श्री राम गए । यहां उन्हें अगस्त ऋषि दिव्यास्त्र और धनुष बाण भेंट किया था | बुंदेलखंड के ही गोस्वामी तुलसी दास ने राम चरित् मानस लिख कर भक्ति की गंगा दुनिया भर में प्रवाहित कर दी ।कहते तो ये भी हैं कि रामलला असल में अपना दिन बुंदेलखंड के ओरछा में बिताते हैं | 5 अगस्त को जब दिव्य राम देवालय की आधार शिला रखी जाएगी तब वहां बुंदेलखंड की ही प्रमुख नेता उमा श्री भारती भी मौजूद रहेंगी |
तपो भूमि बुंदेलखंड
बुंदेलखंड इलाका ऋषि मुनियों की तपो भूमि रहा है इसका वर्णन सतयुग से लेकर आज तक के अनेकों धर्म ग्रंथों में मिलता है । चित्रकूट में भगवान् श्री राम , सीता और लक्षण जी ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय बिताया था । यहां के कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा कर उन्होंने बुंदेलखंड की धरा को पावन किया था । यहां से वे आगे बड़े और पन्ना जिले के सारंग पहाड़ इलाके में पहुंचे | जिसे अब सारंग धाम कहते हैं यहाँ भगवान् राम ,सीता जी और लक्ष्मण जी से जुडी कई यादे आज भी ताजा हैं । यही वो स्थान भी माना जाता है जहां श्री राम ने दैत्यों के संहार के लिए धनुष उठाया था ।
धनुसाकार पहाडियों की आकृति की तलहटी में बने आश्रम मे अगस्त मुनी के शिष्य सुतीक्ष्ण मुनी नें वर्षों तपस्या की थी | कहते हैं कि जब भगवान राम यहां पहुचे और उन्होंने दैत्यों के आतंक को जाना तो उन्होंनें धनुस उठा कर दैत्यों के स्रहार का यही संकल्प लिया था |
राम चरित्र मानस के अरण्य काण्ड में सुतीक्ष्ण मुनी से मिलने का वर्णन मिलता है | श्री राम वन गमन का जो मार्ग बना है उसमे भी इस स्थान का विषेस उल्लेख है । सारंग धाम के महंतो और पुजारियों का मानना है कि त्रेता युग में जब भगवान श्री राम को 14 वर्स का वनवास मिला था । उस समय सुतीक्ष्ण मुनी यहां उन्ही के लिये तपस्या कर रहे थे । रामचंद्र जी , सीता जी , लक्ष्मण जी, ने आकर उन्हें दर्शन दिए और कुछ समय साथ में बिताया | मुनी की तपस्या में राक्षस गण व्यवधान पैदा करते थे ,इस कारण उन्होंने यहां पर धनुस उठा कर संकल्प लिया था कि इस देस को हम राक्षसों से विहीन कर देंगे । राम का वह धनुष आज भी शिला पर अंकित हैं | यहां का राम कुण्ड सीता कुण्ड,लक्ष्मण कुण्ड , सीता रसोई ,राम बैठका आज भी उनकी उपस्थिति का अहसास दिलाते हैं । वे बताते हैं कि इन कुण्डों की महिमा भी अपरंपार है, चाहे जितना सूखा पढ जाये इनसे चाहे जितना पानी निकाल लो पर ये कभी खाली नहीं होते |
स्थानीय निवासी राम कुण्ड में साक्षात गंगा मैया का वास मानते है,| 1970 की बात हे जब कुछ लोगों ने इसे अपवित्र कर दिया था जिस कारण राम कुण्ड सूख गया था । तीन वर्ष तक अखण्ड रामायण और राम धुन के बाद गगा जी पुन; आई थी ,तब से यह कुण्ड यथावत है । राम जी कुछ समय रहने के बाद आगे चले गये थे ।वर्तमान में राम वनगमन मार्ग का जो नक्शा तैयार किया गया है उसमें इसका उल्लेख है। दिल्ली से आये रामऔतार शर्मा और संत टोली व्दारा इस स्थान का 5 बार सर्वेक्षण किया गया ,और सभी बातें प्रमाणिक पाई गई ।
आश्रम में जिस तरह से राम की यादों को सहेज कर रखा गया ठीक उसी तरह से यहां मुनी की यादों को भी सहेजा या है। सुतीक्ष्ण मुनी की सगंमरमर की प्रतिमा बरबस ही लोगों का ध्यान खींच लेती है। यहां के बाबा कहते है कि हमें तो आज भी यही लगता है जैसे राम जानकी और लक्ष्मण जी हमारे आस पास ही हों वे दावा करते है कि मुनी के समय की धूनी आज भी वे जला रहे है ।
सुतीक्ष्ण मुनी यहां क्यों आये थे,और क्यों राम से मिलने की जिद में तपस्या की इस सवाल को जानने के लिए अनेकों लोगों से चर्चा की लोगों ने बताया कि , सुतीक्ष्ण मुनी,अगस्त मुनी के शिष्य थे ।एक बार गुरू कही भ्रमण को जा रहे थे,जाते समय उन्होने शालिग्राम ’ भगवान को सुतीक्ष्ण मुनी को सौपते हुये कहा कि जब तक हम लौट कर नही आ जाते तब तक तुम शालिग्राम जी की पूजा करते रहना ,सुतीक्ष्ण मुनि नें पूजा करने की बजाए शालिग्राम से जामुन तोडने लगे जिस कारण शालिग्राम जी गायब हो गये | अगस्त मुनी जब लौट कर आए तो उन्होंने पूछा कि शालिग्राम जी कहां गये ,तो उन्होने जबाब दिया कि ‘पुन पुन चंदन पुन पुन पानी , शालिग्राम हिरा गए हम का जानी,| ’ 1 इस बात से नाराज हो कर गुरू जी ने उन्हे अपने आश्रम से निकाल दिया और कहा कि यहां तभी आना जब भगवान को ले कर आओ तभी से सुतीक्ष्ण मुनी ने यहां तपस्या की और जब प्रभु श्री राम यहां आये तो उन्हे लेकर अपने गुरू के पास गये थे ।
अगस्त मुनि का आश्रम
पन्ना के सलेहा से दस किमी दूर अगस्त मुनि का आश्रम हैं ,| सिद्ध नाथ का यह स्थान अपनी अलग पहचान बनाये है | मंदिर के गर्भगृह में एक प्राचीन शिव प्रतिमा , मंदिर परिसर में भगवान राम, ऋषि अगस्त के छोटे-छोटे मंदिर और मूर्तियां मौजूद हैं, | अगस्त मुनि के 108 शिष्य भी यहां साधना किया करते थे,| यहां की कथा भी लोग बताते है कि जब शिव विवाह हो रहा था तो धरती का संतुलन बिगड़ गया था, तब भगवान के कहने पर ऋषि अगस्त यहां आये और उन्होने धरती का संतुलन बनाया और यहां तपस्या की।
उन्हें मालूम था दशरथ पुत्र राम वनवास काल में यहाँ आएंगे | इसीलिए उन्होंने सुतीक्ष्ण मुनि को इसके लिए यह दंड दिया था | सुतीक्ष्ण मुनि के साथ स्वयं श्री राम अगस्त मुनि के आश्रम में पहुंचे । ऋषि ने दिव्यास्त्रों के साथ उन्हें एक धनुष बाण भेंट किया था यही से वे नासिक की ओर गए थे । यहाँ आज भी भगवान् श्री राम की वनवासी वेश में एक मात्र दुर्लभ प्रतिमा है । दक्षिण भारतीय लोगों में अगस्त मुनि की अत्याधिक मान्यता के कारण बड़ी संख्या में दक्षिण भारत से लोग इस दुर्गम स्थल तक आते हैं ।
446 वर्ष से रामराजा ओरछा में
हमारे मित्र राजेंद्र अध्वर्यु ने पिछले दिनों सोशल मीडिया में एक पोस्ट की थी | उसका उल्लेख किये बगैर श्याद बुंदेलखंड से राम के नाते की कथा अधूरी लगती | उन्होंने लिखा है कि ओरछा के रामराजा मदिंर मे लगे शिलालेख के अनुसार भगवान श्रीरामराजा सरकार को 446 वर्ष पूर्व ओरछा राज्य के तत्कालीन शासक महाराजा मधुकर शाह जू देव की रामभक्त पत्नी महारानी गणेश कुंअर भगवान श्री राम प्रभू की मूल (असली प्रतिमा) को अपनी गोद मे लेकर अयोध्या से ओरछा तक 8 माह 28 दिनों तक पैदल चलकर लायीं थीं। प्रभु श्री राम ओरछा कैसे आये और कैसे महल में रुक गए इसकी अपनी एक अलग कथा है |
ऐसी मान्यता है कि रात्रि विश्राम के लिए हनुमान जी महाराज ओरछा में रात्रि भोजन के बाद अपने आराध्य श्री राम प्रभु को लेकर अयोध्या जाते हैं और प्रातः पुनः ओरछा लाकर उन्हें रामराजा मंदिर में विराजमान करा देते हैं।
आज भी प्रतिदिन प्रातः और सन्ध्यां आरती के समय पुलिस द्वारा ’’रामराजा सरकार को गार्ड ऑफ आनर देने की परम्परा चैत्र शुक्ल रामनवमीं विक्रम संवत् 1631 से लगातार चलीं आ रही है ।
उन्होंने इस लेख के साथ पी एम् नरेंद्र मोदी ,यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ,एमपी सीएम शिवराजसिंह चौहान अध्यक्ष जी राम जन्मभूमि न्यास न्यास नई दिल्ली, महंत नित्यगोपाल दास जी महाराज अयोघ्या को पत्र लिख कर अनुरोध किया है कि पवित्र वेत्रवती सरिता के तट पर ओरछा धाम में बिराजमान साक्षात भगवान ’’श्रीरामराजा सरकार के पवित्र चरणरज और पवित्र वेत्रवती सरिता के शुद्ध जल तथा चित्रकूट धाम के कामतानाथ की पावन रज व रामगंगा नदी के पवित्र जल को श्री रामजन्म मंदिर के अलौकिक भूमि पूजन कार्यक्रम में अयोध्या पहुचांने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को तत्काल देने की कृपा करें।
बुंदेलखंड के जिस इलाके से स्वयं श्री राम की यादे जुडी ऐसे स्थलों की स्मृतियाँ राममंदिर निर्माण से जुड़ना आवश्यक ही कहा जाएगा |