बुंदेलखंड की डायरी
पानी की पहरेदारी करती सेना
रवीन्द्र व्यास
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की सुरक्षा के लिए अबतक पुलिस ही पहरेदारी करती थी , अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सेना के जवान पहरेदारी कर रहे हैं | हाल ही में सागर जिले के चितोरा एनीकट बाँध का पानी गाँव वाले चुरा ना लें इसलिए सेना के जवान पहरेदारी कर रहे हैं |यह हाल तब हैं जब कि सागर जिले में औसत से 593 मिमी अधिक वर्षा हुई है | औसत से ज्यादा पानी बरसने के कारण बुवाई का रकबा तीन लाख से बढ़कर 3.5 लाख हेक्टेयर होगया । पर पानी पर पहरा लगा है | बुंदेलखंड अंचल में पानी को लेकर अब तक लोगों को पुलिस का ही पहरा देखने को मिलता था | २०१६ से टीकमगढ़ नगर प्यास बुझाने वाली जामुनी नदी पर गर्मियों के दिनों में सुरक्षा गार्ड लगाए जाते हैं ,इसी साल मई महीने में बांदा में केन नदी के पानी की सुरक्षा के लिए पुलिस जवान तैनात किये गए थे|
सागर छावनी के लगभग 8 हजार सेना के जवानो के लिए पानी की व्यवस्था हेतु | चितौरा में बेबस नदी पर एक एनीकट बाँध बनाया गया था, इस एनीकट में राजघाट बाँध के ओवर फ्लो का पानी भी आकर मिलता है | इसके लिए 1995 में नगर निगम सागर और सैन्य अधिकारियों के बीच एक अनुबंध 2045 तक के लिए हुआ था | सेना को रोजाना 16 लाख गैलन पानी लगता है ,जिसकी आपूर्ति इसी एनीकट बाँध से होती है | सेना के जवान और छावनी से लगे हुए 12 गांवों के लोग चितौरा स्टॉप डेम के जल से अपनी प्यास बुझाते हैं |बीती गर्मियों में पानी की समस्या का सामना कर चुकी सैन्य छावनी , दिसम्बर महीने से ही सतर्क हो गई और उसने इसकी पहरेदारी शुरू कर दी | दर्जन भर सेना के जवानों को स्टॉपडैम की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है।
गाँव वाले ये देख कर हैरान है कि सेना के लोग स्टॉप डेम और उसके आसपास के इलाकों में गश्त के लिए तैनात किया गया हैं | सेना के ये जवान गाँव वालों को पानी लेने से रोकते हैं,| सेना के जवानो पर गाँव वालों ने पानी के पंप और पानी के पाइप जब्त करने के भी आरोप लगाए हैं। गांव के किसान इस डेम केपानी से अपनी फसलों की सिंचाई की मांग कर रहे हैं | इस साल सेना की सख्ती के कारण, किसान डेम के आस पास के नालों का पानी भी नहीं ले पा रहा है ।
1995 में सागर नगरनिगम सेना की जल समस्या के समाधान के लिए चितौरा डेम को सेना को सौंप दिया था | बीती गर्मियों में सेना को पानी के लिए खासी समस्या का सामना करना पड़ा था | संभवतः इस समस्या ने निजात पाने के लिए सेना के अधिकारियों ने अभी से पानी पर पहरेदारी शुरू करा दी है | सागर नगर निगम के अधिकारी भी मानते हैं कि सेना को चितोरा स्टॉप डैम से पानी लेने की अनुमति दी है,| विवाद बढ़ता देख अब वे कहते हैं कि ग्रामीणों को नहरों और बांध से पानी लेने से नहीं रोकना चाहिए |
दूसरी तरफ गाँव के किसान कहते हैं कि हमारे जीवन का केवल एक ही मुख्य सहारा है खेती अब पानी नहीं मिलेगा तो हम क्या करेंगे | इस बाँध से सुल्तानपुर,अगरा, चितहरी ,बेरखेरी,गोसरा,सल्लया सहित 12 गाँवों की 14 -15 सौ हेक्टेयर फसल प्रभावित होती है | किसान यदि बाँध और इसमें मिलने वाले नालों के पानी का उपयोग करने का प्रयास करता है तो उसके पम्प और पाइप जप्त कर लिए जाते हैं ,मारपीट करते हैं |
इस मामले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है | भाजपा विधायक प्रदीप लारिया कहते हैं कि यदि सेना दावा कर रही है कि यह उनका पानी है, तो किसानों कीसिंचाई के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्था की है | टकराव को रोकने के लिए प्रशासन को पहल करना चाहिए ।
इस मामले में सैन्य अधिकारी मानते हैं की पानी के लिए पेट्रोलिंग कोई पहली बार नहीं हो रही है | कई सालों से पेट्रोलिंग स्थानीय प्रशासन की जानकारी में होती आ रही है | मई जून में पानी की समस्या ना हो इसलिए १०-१२ जवानो को पेट्रोलिंग पर लगाया गया है | पिछले एक माह के दौरान सेना ने चार पम्प जप्त करने और दूसरे दिन लौटाने की बात सेना के अधिकारी कहते हैं | जब की किसान आरोप लगाते हैं की उनके १०-१५ पम्प जप्त कर लिए हैं |
दरअसल बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश इलाके की अधिकांश भूमि लाल दुर्मुट किस्म की है , जो पानी ज्यादा चाहती है | ऐसे हालात में किसानो को पानी की जरुरत ज्यादा होती है | अब वह पानी सिचाई के लिए है अथवा पीने के पानी के लिए इससे उसे सरोकार नहीं रहता ,और यही विवाद का बड़ा कारण बनता है | 2016 में टीकमगढ़ नगर की पेयजल समस्या के निदान के लिए जामुनी नदी पर बने एनीकट पर सुरक्षा दल नगर पालिका को तैनात करना पड़ा था | यहां दोहरी समस्या थी ,नदी उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से आती थी ,और पानी चोरी करने वाले भी अधिकाँश किसान उत्तर प्रदेश के ही होते थे | इसी साल मई जून में बुंदेलखड के बांदा में केन नदी पर बांदा प्रशासन को पुलिस बल तैनात करना पड़ा | असल में नगर के पेयजल सप्लाई के लिए बनाये गए सम्प वेळ तक पहुँचने वाला पानी खनिज माफियाओं और किसानो के कारण पहुँच ही नहीं पा रहा था |
असल में मध्यप्रदेश में गहराते जल संकट से कानून-व्यवस्था बिगडऩे की संभावना के बीच राज्य सरकार ने एडवायजरी जारी की है। इसके तहत भयंकर जलसंकट वाले क्षेत्रों में पानी के स्रोतों पर पुलिस का पहरा रहेगा। शहरी क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी में टेंकरों से पानी का वितरण कराया जाएगा। इस संबंध में सभी कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों को पानी की व्यवस्था पर बल लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
अप्रैल से जून के बीच पानी को लेकर प्रदेश में अपराधिक मामले सामने आते हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए गृह विभाग की ओर से जल आपूर्ति वाले विभाग एवं पुलिस को एडवायजरी जारी की गई है, जिसमें पुलिस को जल संकट वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी बरतने को कहा गया है।
अतीत में बुन्देलखण्ड में जल के महत्व को यहां के राज तंत्र ने बड़ी ही अच्छी तरह से समझ लिया था | जल संचय एवं जल दोहन की ऐसी वैज्ञानिक विधी बनाई गई थी कि तालाब, कुएँ, बावड़ियाँ और खेतों के निचले हिस्से में बंधियाओं तक का निर्माण कर जल संचय किया जाता था । अब विकाश की दौड़ में बुंदेलखंड में जल को लेकर जद्दोजहद एक स्थाई नियति बनती जा रही है | इसमें प्रशासन और आम आदमी की बेरुखी भविष्य के खतरे की तरफ साफ़ संकेत दे रही है | फिर भी प्यास लगने पर कुआँ खोदने की कहावत चरितार्थ करने में सब जुटे हैं |


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