25 अगस्त, 2019

दुनिया के बेहतरीन हीरे हैं बन्दर हीरा खदान में

बुंदेलखंड की डायरी 
दुनिया के बेहतरीन हीरे हैं बन्दर हीरा खदान में 
रवींद्र व्यास 

सरकार अगले महीने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की  वन क्षेत्र में स्थित बन्दर हीरा खदान सहित 13 खनिज ब्लॉकों की नीलामी करेगा बुंदेलखंड की   लगभग 34.20 मिलियन कैरेट हीरे के  भंडार  वाली इस खदान की खोज  ऑस्ट्रेलियन कम्पनी रिओ टिंटो ने लगभग 20  वर्ष पहले की थी काल का पहिया कुछ ऐसा घूमा कि देश की सियासी और ब्यूरो क्रेसी की तिकड़मों से त्रस्त हो कर रिओ टिंटो का इस खदान से मोह भंग  हो गया |  रिओ टिंटो के खदान छोड़ने के बाद हालांकि  पर्यावरण मंत्रालय से भी स्वीकृति मिल गई थी अब बक्स्वाहा ब्लाक की इस हीरा खदान  को अगले महीने 60 हजार करोड़ से ज्यादा में  नीलाम किया जाएगा | इस खदान से निकलने वाले हीरे दुनिया के बेहतरीन हीरों में से एक माने जाते हैं 


 रियो टिंटो एक्सप्लोरेशन लिमिटेड द्वारा छतरपुर जिले की   बक्स्वाहा की हीरा खदान की  खोज के बाद इसका नाम बन्दर हीरा खदान दिया गया |   364.00 हेक्टेयर वाली बन्दर हीरा खदान में सरकार ने   34.20 मिलियन कैरेट हीरा  भण्डार का आंकलन  किया  है। जिनका अनुमानित खनिज संसाधन मूल्य लगभग रूपये 60  हजार करोड रखा गया  है। रिओ टिंटो  कंपनी ने 2200  करोड़ की  इस परियोजना को  2016 के  साल के अंत तक बंद करने और किसी तीसरे पक्ष को देने का विचार करने का कहकर  देश की निवेश नीति पर सवालिया निशान लगादिया  था । रियो टिंटो के इस कदम के पीछे माना जा रहा था  की पिछले कुछ समय से इस हीरा खदानको लेने के लिए देश के कई बड़े उद्योगिक घराने लगे थे । इन उद्योग पतियों  की ऊँचीराजनीतिक पहुँच भी मानी जाती है । अब इस खदान के लिए देश के कई नामी उद्योगपतियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है जिनमे  एंसल ग्रुपरूंगटाआडानीफ्यूरावेदांता समूह तथा एनएमडीसी  जैसे ग्रुप ने  इस हीरा खदान में  गहरी रूचि दिखाई है | 20 अगस्त  को इन व्यापारिक समूहों ने पन्ना में बन्दर प्रोजेक्ट से निकले हीरों को देखा और परखा भी सरकार ने  हीरों के 11 बाक्स  में कुल  3333 नग  वजन 1708. 02  कैरेट के हीरे  प्रदर्शित किए गए हीरा देखने के बाद ये लोग छतरपुर जिले की बन्दर हीरा खदान को देखने भी गए |
पर्यावरण विनाश में विकाश की नई इबारत देखते अधिकारी



पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने मीडिया  को बताया  कि पडोसी जिले में प्रारंभ होने वाले प्रोजेक्ट से शासन को जो राजस्व मिलेगा उससे क्षेत्र का विकास होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने से पन्ना जिले के विकास के नये मार्ग प्रशस्त होंगे। इससे पर्यटन बढावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिले में डायमण्ड पार्क की स्थापना होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ व्यवसायियों को आना जाना प्रारंभ हो जाएगा। जिससे क्षेत्र के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ जिले का विकास होगा। इसके लिए मेरे द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिले के ऐतिहासिक पुरातात्विक एवं आकर्षक प्राकृतिक स्थलों का चयन कर उनकी जानकारी एवं छायाचित्र सहित पुस्तिका का प्रकाशन किया जा रहा है। इसे प्रदेश के साथ-साथ प्रदेश से बाहर के पर्यटन स्थलों मेें भेजकर पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा।

प्रदेश शासन के खनिज सचिव नरेन्द्र सिंह परमार मानते हैं  कि यह छतरपुर ही नही पन्ना जिले के विकास के लिए भी प्रभावी पहल है। जिले में  डायमण्ड पार्क की स्थापना किए जाने के लिए मेरे द्वारा पूरे प्रयास किए जाएंगे। अभी तक हीरों के आभूषणों को खरीदने के लिए जयपुर आदि शहरों में जाते हैं। डायमण्ड पार्क बन जाने पर दुनियाभर के लोग हीरे के आभूषण खरीदने के लिए पन्ना आएंगे। नीलामी की प्रक्रिया के तहत 05 अक्टूबर  2019 को प्रीबिड सम्मेलन का आयोजन भोपाल में किया गया है |
दूसरी तरफ छतरपुर कलेक्टर मोहित बुन्दस भी इस योजना को क्षेत्र के विकाश  के लिए  एक बड़ा कदम मानते हैं वे कहते हैं की जोभी कम्पनी यहां कार्य करेगी उसे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जायेगी चाहे भूमि सम्बन्धी हो अथवा वन सम्बन्धी इससे छतरपुर और बक्स्वाहा का नाम पूरे विश्व में होगा स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे |

बुंदेलखंड का हीरा किस व्यापारिक घराने के होगा अनकूल
 ग्रहों की चाल और ज्योतिष में भरोषा करने वाले ज्ञानी मानते है की हीरा एक रत्न है जो नीलम जैसेरत्न की तरह हर किसी  के अनकूल नहीं होता । यह शुभ और अशुभ फल देता है ।  जिसकेकारण आपको आर्थिक ,मानसिक और शारीरिक  नुक्सान  और परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं। शायद रियो टिंटो के साथ भी ऐसा ही हो गया ,उनकी गृह दशा हिंदुस्तानी हीरे के अनकूल नहीं थी जिस कारण २०  वर्ष के लम्बे संघर्ष के बाद भी उन्हें हीरा खोदने का स्थाई अधिकार नहीं मिल पाया ।
   बुंदेलखंड की इस धरा में  हीरा सिर्फ पन्ना और छतरपुर जिला भर में ही नहीं हैं बल्कि हीराभंडारो की खोज टीकमगढ़ और दमोह जिलो में भी हो चुकी है । कीमती खनिज संपदा से भर पूरइस इलाके  के लोगों को सपने दिखा कर बहलाया जाता है । पर लोग नहीं समझ पाते की सुबहहोते ही सपने टूट ही जाते हैं । और फिर  यहाँ के लोग को  अभावो और बदनसीबी में जीने कीवास्तिकता को स्वीकारना पड़ता  है । पिछले दो  दशक से ज्यादा समय से लोगो को  हीरा चकाचौन्ध में भ्रमित किया जाता  रहा  ।
दरअसल सागर के एक भूगर्भ शास्त्री  डॉ स्थापक की रिपोर्ट पर  आस्ट्रेलिया की प्रमुख कंपनी रियो टिंटो ने(रियो टिंटो एक्सप्लोरेशन इंडिया प्रा.ली.) ने २००४ से इस जिले के बक्सवाहा इलाके में हीरा खोजने का काम शुरू किया था । कम्पनी को इस एरिया में ८ किम्बरलाईट रोक्स (चट्टान ) का समूह मिला कम्पनी ने इस प्रोजेक्ट का नाम "बन्दर परियोजना" दिया  था |   33   करोड़ की लागतके हीरा सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट का उदुघाटन  मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिव राज सिंह चौहान ने२७ अक्तूबर2009  को किया था |  इस आधुनिक प्लांट को रियो टिंटो ने ऐसे ही नही लगाया था ।। ,कम्पनी  को जो प्रारंभिक रिपोर्ट मिली थी  उसके मुताबिक यहाँ ३७ मिलियन टन हीरा के भंडारहै ,। हीरे की गुणवत्ता को  भी दुनिया   के हीरा से बेहतर बतया गया था  । ,कम्पनी को भरोषा था   की यहाँ का हीरा पन्ना हीरा खदान से ७ गुना ज्यादा मूल्यवान होगा यहाँ की उत्पादन क्षमता  भी पन्ना से २० गुना ज्यादा होगी । और  यह एरिया विश्व के १० शीर्ष हीरा उत्पादकक्षेत्रो में  शामिल हो जाएगा  । लोगों को खुद मुख्य मंत्री ने भरोषा दिलाया था की इस  परियोजनाके कारण स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा बुंदेलखंड की किस्मत हीरा की तरह चमकनेलगेगी । 2016 का वह साल भी आया जब  कंपनी ने २२०० करोड़ की  इस परियोजना को  साल के अंत तक बंद करने का एलान कर दिया |
सामाजिक संघर्ष
दरअसल  रियो टिंटो को 26 मई 2006 को हीरे की तलाश के लिए  सर्वे लायसेंस की अनुमति मध्यप्रदेश सरकार ने जारी की थी। कंपनी को  बकस्वाहा ईलाके की भूमि पर यह सर्वे करना था जिसमें अधिकाँश . भूमि वन परिक्षेत्र की थी। । प्लांट स्थापना के बाद रियोटिन्टो ने 5 अप्रेल 2012 को 954 हे. राजस्व भूमि को अधिकृत करने के लिये कलेक्टर छतरपुर को आवेदन दिया था । अब सरकार ने  364 हेक्टेयर में हीरा खदान के लिए नीलामी की स्वीकृति प्रदान की है |   

देखना ये है कि  छतरपुर जिले के इस सर्वाधिक पिछड़े क्षेत्र बक्स्वाहा और बुंदेलखंड की तक़दीर और तस्वीर हीरा परियोजना से कितनी  बदलती है | हालांकि बन्दर हीरा  खनन  परियोजना को पर्यावरण प्रेमी जहां इसे पर्यावरण संतुलन के विनाश का आधार बता रहे हैं वही  हर कीमत पर विकाश चाहने वाले  लोग  इस परियोजना को बुंदेलखंड के लिए एक  आवश्यक परियोजना मानते हैं । वे तर्क देते हैं कि  यह परियोजना ऐसे इलाके में लग रही थी जिसका अधिकाँश क्षेत्र बंजर है अथवा कम उपजवाला है । 81 हजार की आबादी वाले इस विकाश खंड की आधी से ज्यादा आबादी बेरोजगारी और बेकारी की शिकार है |  ऐसे इलाके में जब यह योजना शुरू होगी तो  स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही  साथ ही आस पास काकारोबार भी बढ़ेगा ।

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