खजुराहो में घटते पर्यटक
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड ही नहीं विश्व धरोहर खजुराहो में पर्यटन कारोबार चौपट होने से यहाँ के लोगों ने चार दिनों तक खजुराहो बंद रखा | चौथे दिन मिले आश्वासन पर रविवार से खजुराहो अपने यथा स्थिति में लौट आया | खजुराहो में पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल, गाइड , ट्रवेल एजेंसी और स्थानीय व्यापारी पिछले पांच सालों से विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या को लेकर चिंतित हैं | 2018 में तो देशी पर्यटक 2004 के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा आये पर विदेशी पर्यटक 2004 से भी कम आये | खजुराहो के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग यह नहीं समझ पा रहे कि आखिर जब आबादी बढ़ रही है , देश में अन्य जगह विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं तो फिर खजुराहो से मोह क्यों भंग हुआ | इसका उन्हें एक ही रास्ता समझ आया की कनेक्टिविटी का अभाव | अपने आंदोलन के दौरान उनकी यही मुख्य मांग भी रही , पर इसके अलावा भी बहुत से ऐसे कारण हैं जिनके चलते खजुराहो से विदेशी पर्यटकों ने दूरियां बनाई |
लगभग एक हजार वर्ष से भी प्राचीन खजुराहो के मंदिरो की हजारवीं साल गिरह भी मनाई जा चुकी है | पुरातत्व वेत्ता बताते हैं कि कभी यहां 85 से ज्यादा मंदिर हुआ करते थे | 1494 इसवीं में इनमे से अधिकांश मंदिरों को मुग़ल शासकों ने ध्वस्त कर दिया गया तो कुछ को खंडित कर दिया गया ।खजुराहो के मंदिरों में पश्चिमी समूह के मंदिर शिव और विष्णु भगवान के मंदिर हैं।खजुराहो से पांच किलोमीटर दूर दक्षिणी समूह के मंदिर , दूल्हादेव मंदिर, शिव तथा चतुर्भुज मंदिर विष्णु भगवान को समर्पित हैं। जबकि पूर्वी समूह के मंदिरों में तीन हिंदू तथा तीन जैन मंदिर हैं।
बलुआ पत्थर से बने ये मंदिर और मूर्तिया अपनी बेजोड़ पाषाण कला के लिए दुनिया भर में विख्यात हैं | इन मंदिरों के निर्माण की शिल्पकला देख कर यहां आने वाले पर्यटक मन्त्र मुग्ध हो जाते हैं |
प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन सांग ने 642 ईस्वी में खजुराहो भ्रमण के दौरान इस शहर की शिल्प कला पर मुग्ध हो कर इसका नाम चीनी भाषा में ‘चीचीतू’ रखा था। छतरपुर जिले के गजेटियर के अनुसार 1021 ईस्वी में मुहम्मद गजनी के साथ अबू रिहान उल बरौनी भी यहां आया था। बरौनी ने इस क्षेत्र को जिझौतिया वंश की राजधानी बताया था।1335 ईस्वी में इस क्षेत्र में इब्ने बतूता आया और उसने यहाँ बड़ी संख्या में खजूर के पेड़ देखकर इस जगह को ‘खजूरा’ नाम दिया। बतूता ने अपनी किताब में लिखा कि यहां करीब एक मील लंबी झील है और उसके पास मूर्तियोंवाले सुंदर मंदिर हैं।पुरातन काल में यहां दूर-दूर से साधु और योगी यहां आया करते थे। खजुराहो के मंदिर तो आजादी के बाद भी वीराने में पड़े थे यहां आये आगरा निवासी लवानिया ने इस स्थान को नई पहचान दिलाई थी |
यहां आने वाले पर्यटकों के आंकड़े बताते हैं कि 2004 में 63090 , 2005 में 70726 ,2006 में 73843 ,2007 ँमें 84887 ,2008 में 89174 ,2009 में देश में बड़ी आतंकी कार्यावहियों के कारण 68839 ही पर्यटक आये , पर 2010 में 90721, 2011 में 97356 , 2012 में बीते 16 सालों में 97688 सबसे अधिक विदेशी पर्यटक आए \| 2013 से विदेशी पर्यटकों की संख्या में जो गिरावट का दौर शुरू हुआ वह अब तक जारी है / 2013 में 89511 और 2018 में सबसे कम 60759 विदेशी पर्यटक आये | ये अलग बात है कि भारतीय पर्यटकों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हुई है | 2014 में जहाँ 140466 भारतीय पर्यटक आये वही 2018 में 361594 भारतीय पर्यटक खजुराहो के मंदिर घूमने आये | भारतीय पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी रेल सुविधा के विस्तार के कारण मानी जाती है | खजुराहो के आंदोलन कारियों की बात माने तो यहाँ का मुख्य कारोबार विदेशी पर्यटकों के आने जाने पर ही बढ़ता है | आम तौर पर भारतीय पर्यटक सुबह आता है और शाम को चला जाता है | वे विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी की मुख्य वजह कनेक्टिविटी का अभाव मानते हैं | जून माह में १५ दिनों तक खजुराहो में विमान सेवा बंद रही , हाल ही में हफ्ते में तीन दिन के लिए शुरू की गई है |


खजुराहो पर्यटन को बचाने के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर लोगों का मानना है कि यहाँ का 80% व्यापार केवल विदेशी पर्यटकों पर निर्भर करता है। पहले, दिल्ली, आगरा, वारा णसी से खजुराहो के लिए प्रतिदिन तीन अलग-अलग एयरलाइन उड़ानें थीं, लेकिन अब केवल एयर इंडिया की उड़ान पर्यटकों को ला रही थी, वह भी सप्ताह में तीन दिन, दिल्ली और वाराणसी से। यहां तक कि ट्रेन कनेक्टिविटी भी अच्छी नहीं थी, इसलिए आगरा जाने वाले पर्यटक राजस्थान की यात्रा करना पसंद करते थे। आंदोलन कारियों की मांग थी की खजुराहो में नियमित विमान सेवा हो खजुराहो के लिए बनारस , मुंबई की सुपरफास्ट रेल सेवा शुरू की जाए इसके लिए आंदोलन कारियो को एयर इण्डिया के सीएमडी अश्वनी लोहानी ने भरोषा दिलाया है की 28 अक्टूबर से खजुराहो दिल्ली नियमीत विमान सेवा शुरू हो जायेगी | रेल सेवाओं के विस्तार के लिए डी आर एम् झांसी के नाम खजुराहो के स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंपा गया है | शनिवार को आंदोलन समाप्त हो गया और खजुराहो में फिर से चहल पहल बढ़ गई |


खजुराहो के लोगों की इन जायज मांगों का विदेशी पर्यटकों ने भी भरपूर साथ दिया | उन्होंने ना सिर्फ हस्ताक्षर किये बल्कि धरने पर भी बैठे |
क्या सिर्फ कनेक्टिविटी ही मुख्य वजह है विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या के लिए ? यह अहम सवाल है जिसका जबाब यहाँ के पर्यटन कारोबारी बखूबी जानते हैं पर इस पर मौन रहना ही बेहतर मानते हैं | असल में पिछले कुछ वर्षो में खजुराहो में विदेशी पर्यटकों के साथ धोखा धड़ी , उनके हरेशमेंट , मंदिरो के प्लेट फ़ार्म से गिरने , चिकित्सा सुविधा के अभाव और फर्जी गाइडों और लपको की समस्या से दो चार होना पड़ा | पुलिस प्रशासन ने पहले पर्यटक पुलिस का कुछ समय के लिए दिखावा किया था पर बाद में वह भी ठन्डे बस्ते में चला गया | खजुराहो के गाइड नरेंद्र शर्मा मानते हैं की यहाँ आने वाला पर्यटक एक ही दिन में वापस जाने की सोचने लगता है , असल में आस पास की साईट विकसित की जानी चाहिए | वाटर स्पोर्ट्स , जैसे कार्यक्रम आस पास के बांधों में शुरू किये जा सकते हैं | पन्ना नेशनल पार्क की टिकिट दर ज्यादा हैं उन्हें कम किया जान चाहिए |


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