बुंदेलखंड की डायरी
बुंदेलखंड में समाप्त होता भू जल
रवीन्द्र व्यास
सूखे रेगिस्तान सहित देश के अधिकाँश इलाके के लोग पानी से परेशान हैं तो बुंदेलखंड के लोग पानी के लिए परेशान हैं | फिलहाल बुंदेलखंड इलाके में औसत से आधा पानी ही इंद्र देव ने दिया है | ऊपर से घटते भूजल ने भविष्य के लिए बड़ी चेतावनी दे डाली है | बुंदेलखंड में पानी के हालात जानने के बावजूद जल प्रबंधन से उदासीन तंत्र भविष्य के लिए गंभीर संकट निर्मित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है | यह वह समय है जब छोटे से प्रयास से भविष्य की एक मजबूत नीव रखी जा सकती है |
विपदाओं से संघर्ष का दूसरा नाम है बुंदेलखंड सदियों तक यहाँ की वीरता की कहानिया खूब सुनी जाती रही हैं | बुन्देलखण्ड के लोगों का प्रकृति से जुड़ाव भी सदियों तक रहा है , इसी की चलते यहाँ की सीमा का निर्धारण भी नदियाँ करती हैं | विपदाओं से हार ना मानने वाले बुंदेलखंडी जल के महत्व को बहुत पहले समझ चुके थे , इसी के चलते यहां हजारों की संख्या में तालाबों और कुओं का जाल बिछाया गया | तालाब , नदियों और कुओं को पूजने की परम्परा शुरू हुई | पर अतीत की धरोहर धरासाई होती गई , जल की बून्द बून्द को तरशने लगे बुंदेलखड के लोग | आज हालात कुछ इस तरह गंभीर हो गए कि बुंदेलखंड के 13 _14 जिलों में भूमिगत जल पाताल की तरफ बढ़ रहा है | भूजल वैज्ञानिको की माने तो बुंदेलखंड के जिलों में 75 से 65 फीसदी भूजल का दोहन हो चुका है मात्र 25 से 35 फीसदी ही भूजल बचा है | भूजल विशेषज्ञों की माने तो भूजल के अत्याधिक दोहन से अनेक तरह की प्राकृतिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है | भूजल स्तर में कमी के कारण जमीन की नमी समाप्त होती है परिणामतः हरे भरे वृक्ष भी सूखने लगते हैं | वर्षा का चक्र अनियमित हो जाना | बारिश में कमी के कारण जल स्तर और कम होता जाता है जो आने वाले समय के लिए और कठिन स्थितियां निर्मित कर देता है | इन हालातो में खेती पर गंभीर संकट उत्पन्न होता है , जिसके चलते किसान आत्म ह्त्या तक को मजबूर होता है वही संम्पन्न वर्ग यहां से पलायन में ही अपनी भलाई समझता है |
70 हजार वर्ग किमी में फैले बुंदेलखंड ( यूपी और एमपी ) की औसत वर्षा 800 से 1100 मिमी की होती थी | 2000 से वर्षा के औसत में जो गिरावट का दौर शुरू हुआ वह जारी है , कभी अत्याधिक तो कभी अलप वर्षा ने किसानो और मजदूरों को दाने दाने के लिए मोहताज बनाया | अनियमित वर्षा चक्र के कारण सूखा की निरंतरता बढ़ गई | जब जब सूखा के हालात बने अधिकारियों के खजाने भरे , नेताओं ने इलाके को सूखा ग्रस्त घोषित कराने का काम कर जनता पर बड़ा भारी अहसान जताया | दूसरी तरफ सूखा की निरंतरता बरकरार रहे इसके जतन जरूर प्रशासन और राज तंत्र ने की | बुंदेलखंड की कल कल बहती नदियों की धाराओं से खिलवाड़ किया गया , नदियों की रेत निकालने के लिए नदियों का सीना ही छलनी किया जाने लगा | जैव विविधिता के पर्याय बुंदेलखंड के पहाड़ों को खोद कर अकूत धन तो कमाया गया , जंगलों को साफ़ किया गया , अब तो पन्ना टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं है वहा से हाल ही 600 से ज्यादा सागौन के वृक्ष कट गए | जल स्तर बढ़ाने के लिए सरकार ने स्टाप डेम जरूर बनवाये पर उनमे से कितने उपयोगी हो पाते हैं इसकी गवाही वे खुद दे देते हैं | शहरी और बड़े ग्रामीण क्षेत्रो के तालाब अतिक्रमण की चपेट में हैं |
जल है तो कल है यह कथन बुंदेलखंड ही देश दुनिया के लिए शासत्व सत्य है | इसी कारण देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अपने राष्ट्रीय सम्बोधनों में जल संकट से मुक्ति की बात करते हैं | मोदी जी ने 30 जून 2019 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों से जल संकट से मुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाने का अनुरोध किया है। इस अभियान को जल संचय, जल संरक्षण और जल संवर्धन पर और पानी के कुशल उपयोग पर केन्द्रित रखा गया है । तीन चरणों में संचालित होने वाला यह अभियान देश के 36 राज्यों के 255 जिलों के 1,593 विकासखंडों में संचालित होगा।
गौरतलब है कि 1,593 विकासखंडों में से 1,186 विकासखंड, भूजल के अतिदोहित श्रेणी में और 313 विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में और 94 विकासखंडों में पानी की उपलब्धता बेहद कम है।
जल संचय, जल संरक्षण , जल संवर्धन और पानी के कुशल उपयोग पर केन्द्रित प्रधान मंत्री के इस कार्यक्रम को बुंदेलखंड में कितना महत्व दिया जा रहा है ,यह सब जमीनी स्तर पर देखा और समझा जा सकता है | देश के प्रधान मंत्री भले ही जल की समस्या को लेकर चिंतित हों पर प्रशासन तंत्र , राजनैतिक तंत्र , और जनतंत्र इस गंभीर मसले पर कतई चिंतित नजर नहीं आता | विधायक और सांसद निधि से , स्थानीय नगर पालिकाओं की सौन्दर्यीकरण योजनाओं से जल को जमीन में जाने से रोकने के लिए तमाम तरह की धन राशि व्यय की जाती है | दूसरी तरफ भूजल वृद्धि की किसी भी योजना पर धन राशि व्यय करना जन सेवक शायद उचित नहीं मानते | प्रधान मंत्री की बात को ही मानते हुए बुंदेलखंड के सांसद और विधायक जन भागीदारी योजना बनाकर शहरी क्षेत्रो में वाटर हार्वेस्टिंग योजना और कुओं और बावड़ियों को छत के पानी से जोड़ने का अभियान चलाये तो एक बड़ा और सकारत्मक बदलाव देखने को मिल सकता है |
क्या हम आप कल्पना कर सकते हैं कि जल विहीन इलाके में जीवन कैसा होगा | हमें यह भी चेतावनी मिल चुकी है की देश के २१ शहरों में भूजल खत्म होने की कगार पर है.| नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है देश इस समय इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है.| देश में 70 फीसदी पानी प्रदूषित है , इसी के चलते भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें पायदान पर है. स्वच्छ पानी के अभाव में हर साल दो लाख से ज्यादा लोग जान गंवा रहे हैं.| देश की आधी आबादी पानी की किल्लत का सामना कर रही हैं.| समग्र जल प्रबंधन सूचकांक रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक देश में पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी.|
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झांसी की चुनावी सभा में पेयजल समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड को 900 करोड़ रूपये की योजनाओ का शिलान्यास किया था । बुंदेलखंड पैकेज से भी मनमोहन सिंह की सरकार ने करोडो रुपये जल समस्या के निदान के लिए दिए थे | योजनाओ की जमीनी हकीकत क्या है यह किसी से छिपा नहीं है | दरअसल जल की समस्या आने वाले समय में इतनी विकराल होने वाली है कि जिसकी हम आप कल्पना से ही सिहर उठते हैं | यह विषय भी ऐसा नहीं है की इसे सिर्फ सरकार के भरोषे छोड़ दिया जाए , जीवन चाहिए तो जल के लिए जल योद्धा बनने को तैयार रहिये |
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