31 दिसंबर, 2017

किसानो की मौत पर भी संवेदन हीन होती सियासत

बुंदेलखंड की डायरी 

 किसानो की मौत पर भी संवेदन हीन होती सियासत


रवींद्र व्यास 

 क्या अजब हालात हैं , कही लोग नव वर्ष के जश्न की तैयारी में मशगूल हैं वहीँ  बुंदेलखंड के अन्नदाता की आहों से वातावरण गुंजायमान हो रहा है | टीकमगढ़ जिले में एक किसान  ने फिर  मौत को गले लगा लिया है | शायद  हमारी संवेदनशील  सरकारों को   अन्नदाता की मौत आहत नहीं करती | देश की मोदी सरकार और उनके प्रदेश के मुख्य मंत्री किसानो की आय दुगनी करने की बात कर रहे हैं , पर  हालात ये हैं की मोदी सरकार के काल में किसानो की आत्म ह्त्या की दर बड़ी है |   सरकार और उसके प्रशासन तंत्र की संवेदनाओ को जाग्रत करने के लिए  बुंदेलखंड के किसान  "त्राहि त्राहि पुकारें नाथ " नाटक का मंचन ३१ दिसंबर और  नववर्ष के प्रथम दिवस दमोह जिला में करेंगे | शायद   बुंदेलखंड के  अन्नदाता की आह अब मंच पर  देख कर तंत्र की संवेदनाये जाग्रत हो जाएँ  | 


                    किसी पिता के लिए इससे बड़ी जीवन की  कोई त्रासदी नहीं होती की उसकी आँखों के सामने उसके इकलौते बेटे का शव हो | टीकमगढ़ जिला के पृथ्वीपुर थाना क्षेत्र के बरगोला खिरक गाँव में मिट्ठूलाल कुशवाहा के घर जब उसके ही जवान बेटे धनीराम (28 ) का शव रखा गया  तो  वह एकदम से चेतना शून्य हो गया |  धनीराम की पत्नी  ने पास के कुँए तरफ दौड़ लगा दी यदि वहां मौजूद महिला उसकी चोटी पकड़ कर कुँए के किनारे से नहीं खींचती तो शायद उसको भी बचाना संभव नहीं होता | मृतक अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री वा पत्नी को छोड़ गया है | धनीराम ने अपने ही घर के पास लगे  नीम के पेड़ पर फांसी लगाकर गुरूवार की रात  आत्म ह्त्या  कर ली थी |

                                        मिट्ठूलाल के मुताबिक़  परिवार की  दो एकड़ जमीन पर पिछले तीन साल से सिर्फ लागत ही लगी फसल का दाना नहीं हुआ | ऐसे हालात में वह यही मजदूरी कर हम सब का पेट पाल रहा था , पर ना मजदूरी इतनी मिलती थी की घर का खर्च चल सके और ना सरकार की सहायता | वह बार बार दिल्ली जा कर मजदूरी करने की बात कहता था हम ही उसे मना करते थे कि वहां भी अब काम नहीं मिल रहा है कई लोग वापस आ गए हैं | अब प्रशासन को यह एक मुद्दा मिल गया है की उसकी मौत की वजह भूख ,बेरोजगारी , लाचारी नहीं थी बल्कि उसे दिल्ली जाने से रोकने के कारण ही उसने आत्म ह्त्या की है | 

टीकमगढ़ जिला में वर्षा के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष २०१६ में भी जिले में पूर्ण औसत वर्षा नहीं हुई थी , और इस वर्ष भी औसत से 45 फीसदी कम बारिस हुई है | ये हालात पिछले तीन चार साल से लगातार चल रहे हैं , जिसके चलते टीकमगढ़ जिले में पिछले तीन सालों में 120 किसान मौत को गले लगाने को मजबूर हुए | मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के इस जिले को भी सूखा ग्रस्त घोषित किया गया है | पर संभाग के अन्य जिलों की तरह इस जिले के किसानो को खरीफ फसलों की सूखा राहत राशि नहीं बांटी गई है | इस मामले प्रशासन तंत्र गोल मोल जबाब देकर  अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता हे | दूसरी तरफ राहत राशि ना बांटने के पीछे राजनैतिक कारण बताये जा रहे हैं | सूत्र बताते हैं की चुनावी वर्ष होने के कारण बीजेपी वा उसकी  सरकार  राहत राशि का भी चुनावी फायदा लेने का जतन कर रही है , जिसके चलते खरीफ फसल की सूखा राहत राशि  समारोह पूर्वक बांटने की तैयारी अंदर खाने में चल रही है | अब इस दौरान अगर कुछ किसान हताशा में अपनी जान दे भी दें तो क्या फर्क पड़ता है , जिनको पैसा मिलेगा वे तो सरकार की जय जय कार करेंगे ही | 
  
                                                             देखा जाए तो   टीकमगढ़ जिला बुंदेलखंड का ऐसा एकमात्र जिला है जहां सर्वाधिक चन्देली तालाब यहां के लोगों को विरासत में मिले हैं | ये अलग बात है की लोगों की नासमझी , और प्रशासन के अनदेखे रवैय्ये के कारण  अनेको तालाब  नष्ट कर दिए  गए | आज जब प्रकृति  कहर बरपा रही है तो ऐसे में वे तालाब  जो इस समय जल सराबोर रहते थे अब सूखे पड़े हैं | तालाबों के सूखने से  ना सिर्फ यहां की रवि फसल  प्रभावित हुई है बल्कि इसके कारण सिंघाड़ा और  मछली का कारोबार भी प्रभावित हुआ है  | इस कारोबार में लगे लोगों के सामने भी रोजी संकट आया है | 
 
                                                              कमोवेश  बुंदेलखंड इलाके  की तस्वीर ऐसी ही है  चाहे वह मध्य प्रदेश वाला बुंदेलखंड हो अथवा उत्तर प्रदेश वाला बुन्देलखंड | दोनों ही इलाकों में रवि फसल की बुवाई का औसत २० से ४० फीसदी ही है |  इसी माह महोबा जिले के श्रीनगर में  किसान हरगोविंद यादव ने खेत पर लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर ली थी | 40 बीघा जमींन के मालिक इस किसान  के खेत  की फसल सूखे में सूख गई थी |  महोबा जिले में भी   किसान की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं था पिछले दो  साल में यहां भी ९० से ज्यादा किसान मौत को गले लगा चुके हैं   | इसी माह  झाँसी जिले के  मऊरानीपुर ब्लॉक के  उल्दन थाना क्षेत्र के ग्राम विजना निवासी धनकु पत्नी हरप्रसाद (67)   सूखे की चपेट में बरबाद हुई फसल को देख उसने रस्सी से रात्रि के समय फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली।वह खेत पर ही बने मकान में रहती थी |  घटना की सूचना सुबह जब हुई जब मृतिका का पुत्र अर्जुन खेत पर पहुचा। 
 अर्जुन  ने बताया कि उसकी मां के नाम एक एकड़ जमीन है तथा पिता के नाम 8 बीघा जमीन है। जिस पर   करीब सवा लाख का केसीसी का कर्ज है। कुओ का पानी सूख जाने व फसल की बर्बादी के चलते उसकी माँ ने यह कदम उठाया।
                        दरअसल किसानो की आत्म ह्त्या  के तथ्यात्मक विश्लेषण में एनसीआरबी ने किसानो के आत्महत्या की मुख्य वजह बेंको और माइक्रो फाइनेंस को माना है देश के 80 फीसदी किसानो की मौत की वजह कर्ज है | तो वहीँ फसलों का कम उत्पादन भी किसानो की आत्म ह्त्या की वजह बने हैं | खेतीहर मजदूरों की आत्महत्या के पीछे एनसीआरबी बीमारी और पारिवारिक समस्या को मुख्य कारण मानता है | मोदी जी  ने 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान यूपीए सरकार को किसानो की आत्म ह्त्या के मामले पर जम कर घेरा था , और किसानो को भरोषा दिलाया था की उनकी सरकार बनी तो किसानो को उनकी उपज की लागत निकालने के बाद 50 फीसदी मुनाफ़ा दिलाया जाएगा | मध्य प्रदेश में भावान्तर योजना शुरू की गई जिन किसानो ने नवम्बर में छतरपुर , टीकमगढ़ , पन्ना , दमोह और सागर में अपनी उपज बेचीं है उनमे अधिकाँश किसान अब भी अपनी उपज की राशि पाने के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं | 

                                                           दमोह जिला के पथरिया के मेलवारा गाँव में किसान 31 दिसंबर  और 1  जनवरी  2018 की रात  किसानो के इस असली दर्द को मच पर दिखाएँगे | हालांकि यह नाटक हैदराबाद सेन्ट्रल एक्टिंग   युनीवर्सिटी के छात्रों में तैयार किया गया है पर  इलाके के 30 से ज्यादा किसान अपना किरदार निभाएंगे | सवा घंटे के इस नाटक में बुंदेलखंड के  किसान के आर्थिक हालात , प्रकृति के प्रकोप शासन -प्रशासन के रवैये , पर  जम कर व्यंग्य बाण चलाये गए हैं | खाश बात ये भी है कि इस नाटक में रमतूला हो , एकतारा , नगड़िया ,सारंगी ,मजीरा जैसे  बुंदेलखंड के पारम्परिक वाद्य यंत्रो का सहारा लिया गया है |  ३१ दिसंबर की शाम  जब लोग नव वर्ष की तैयारियों के नाम शाम रंगीन करने का सपना साकार कर रहे होंगे समय बुंदेलखंड के किसान लोगों को अपने दर्द की मंचीय प्रस्तुति दे रहे होंगे |  
                                    किसानो के दर्द को आस्वसनो की मीठी गोली देकर शांत तो कर दिया जाता है पर उसके स्थाई समाधान की तलाश नहीं की जाती |  जब कि बुंदेलखंड भूसंरचना  हिसाब से ऐसा इलाका है जहां कम लागत में बहुत  अच्छे जल श्रोत विकसित किये जा सकते हैं जरुरत है तो सिर्फ ईमानदार पहल की |  
                                                                
                   
                 रवीन्द्र व्यास 

24 दिसंबर, 2017

Desart Of Bundelkhand



सूखा ग्रस्त बुंदेलखंड में खजुराहो की सुनहरी शाम 

 रवीन्द्र व्यास 
वो सात दिनों की खजुराहो की सुनहरी शाम थी , सरकार की रंगीन दुनिया में  खजुराहो  में  फ़िल्मी दुनिया के सितारे छटा बिखेर रहे थे  | | इसी दौरान  खजुराहो के रेलवे स्टेशन पर बुंदेलखंड के किसानो वा खेत मजदूरों की भीड़ अपने पेट की आग बुझाने के लिए दिल्ली जाने की जद्दोजहद में जुटे थे | दोनों ही नज़ारे  चौंका देने वाले थे  | यहां से जाने वाली संपर्क क्रान्ति  की जनरल बोगी में घुसने के लिए  किसान और खेत मजदूर जद्दो जहद करते दिखे | पर शायद रंगीन चश्मे से देखने वाली सरकार  और  उसके तंत्र  के लिए फिल्म महोत्सव तो नजर आता है पर बुंदेलखंड के इन किसानो के दर्द को देखने और समझने की उसके पास फुर्सत नहीं है | 



                                खजुराहो रेलवे स्टेशन पर संपर्क क्रान्ति ट्रेन का इन्तजार करते  मिले पन्ना जिले के बराच गाँव के किसान  बसंत लाल साहू (३५ )  बताने लगे की क्या करे इस बार पानी हे ही नहीं पहले की फसल भी बर्बाद हो गई थी इस बार भी पानी नहीं है जिस कारण खेत खाली पड़े हैं , ले देकर मजदूरी का ही सहारा है सो मजदूरी के लिए दिल्ली जा रहे हैं | गाँव में मनरेगा जैसी योजनाओं से काम मिलने अथवा पन्ना में मजदूरी करने के सवाल पर उसका जबाब भी कम चौकाने वाला नहीं था ,बताने लगा की काहे का मनरेगा काम करो तो छह माह में मजदूरी मिलती है , पन्ना में तो कोई काम ही नहीं है | उसके ही साथ जाने वाले पवन साहू , जगदीश साहू  और उसकी पत्नी वंदना का भी यही दर्द था | बच्चो को अपने बूढ़े माँ बाप के भरोषे गाँव में छोड़ आये हैं | जिसका दर्द भी उनके चेहरों पर साफ़ पड़ा जा सकता था |जगदीश ने बताया की उनके गाँव के लगभग ६० फीसदी जवान लोग पलायन कर गए गाँव में सिर्फ बुजुर्ग और आसक्त लोग ही अधिकांश बचे हैं |

                                                   ऐसी ही व्यथा कथा  छतरपुर जिले के बिजावर विकाश खंड के अमरपुरा गाँव के आदिवासी राम राजा सोर , पप्पू  और वीरेंद्र की भी थी | आदिवासी बाहुल्य इस गाँव के अधिकांश आदिवासी मजदूरी के लिए गाँव छोड़ कर जा चुके हैं | रामराजा ने बताया की पानी की हालात ये है की पिछली साल हम अपने पडोसी खेत वाले को सिचाई के लिए पानी देते थे इस बार हालत ये है की हमें पीने  का पानी दूसरों से मांगना पढ़  रहा है  | दो हजार की आबादी वाले इस गाँव में भी वही मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है |  इसी रेलवे स्टेशन पर हमें खजुराहो के ही राकेश अनुरागी और कालीचरण भी मिले , ये दोनों भी मजदूरी की तलाश में दिल्ली ही जा रहे थे | पर्यटन नगरी के पास इनकी बेशकीमती जमीन तो थी  पर उनके गाँव के पास बने बाँध ने उनके और उनके परिवार का जीने का सहारा ही छीन लिया | उनकी सारी जमीन बाँध की भेंट चढ़ गई और जो मुआवजा मिला उससे प्लाट भी खरीदने लायक स्थिति नहीं थी |  अब मजदूरी ही जीने का सहारा है  मजदूरी के लिए दिल्ली जा रहे  हैं | 

                                                   ट्रेन के प्लेट फ़ार्म पर आते ही भगदड़ सी मच गई हर कोई जल्द से जल्द बोगी में सवार होने के लिए इधर से उधर  सर पर बड़ी सी पोटली रखे दौड़ लगा रहा था | ठसा ठस भरे रेल के इस जनरल कम्पार्टमेंट में पैर रखने के लिए भी जगह नहीं थी | पर पेट की आग बुंदेलखंड के किसानो को मजबूर कर रही है की या तो मौत को गले लगा लो या घर छोडो | 


                                                    खजुराहो रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर राजकुमार बताने लगे की हर रोज लगभग एक हजार टिकिट दिल्ली के लिए कटते हैं  | इनमे अधिकाँश यात्री मजदूर वर्ग के ही रहते हैं | स्टेशन पर ही कुली का काम करने वाले बताने लगे की दरअसल एक टिकिट पर दो से चार लोगों के टिकिट रहते हैं , औसतन रोजाना १५०० _ से २००० मज़दूर  यहां से रोजाना जाते हैं  यह सिलसिला  पिछले  तीन माह से चल रहा है , जाते पहले भी थे पर उनकी संख्या इतनी ज्यादा नहीं होती थी | देखा जाए तो पलायन की  यह स्थिति  सिर्फ खजुराहो रेलवे स्टेशन भर की नहीं है बल्कि ऐसे ही हालात , दमोह , टीकमगढ़ , चित्रकूट ,बांदा , महोबा ,मऊरानीपुर, झाँसी और ललितपुर रेलवे स्टेशनों पर भी देखने को मिलते हैं | 
                                 बुंदेलखंड और सूखा एक स्थाई नियति बन चुके हैं ,| रसातल में पहुँचते भू जल ने स्थिति और भी गंभीर बना दी है | बुंदेलखंड के सागर संभाग में इस बार पिछले साल की तुलना में औसत से ४० फीसदी कम वर्षा हुई है | अनियमित और रुक रुक कर हुई 60 फीसदी बारिश का जल काम नहीं आया | उस पर सरकारी तंत्र के मैनेजमेंट ने इस जल को भी व्यर्थ बहाने में सहयोग किया | अब तक बुवाई के जो आंकड़े सामने आये हैं वो बताते हैं कि बुंदेलखंड के सागर ,दमोह , छतरपुर , पन्ना और टीकमगढ़ में मात्र ३० से ४० फीसदी ही रवि फसलों की बुवाई हुई है |  बुवाई करने वाले किसानो में अधिकांश वे लोग हैं जिनके पास खुद के जल श्रोत हैं , क्योंकि तालाब और बाँध खाली पड़े हैं , शुरू में चली नहर एक पानी के लिए ही हुई दूसरे पानी की उम्मीद किसानो को नहीं थी | सबसे ज्यादा त्रासदी के हालात टीकमगढ़ जिले में बने हैं जहां 16 _17 में भी औसत से कम वारिश हुई थी , और इस बार तो औसत से आधी वारिस ही हुई है | हालात ये बने हैं कि जो तालाब कभी नहीं सूखे थे वह भी सूख गए |

 सरकार ने सागर संभाग के छतरपुर जिला के लिए 6878 लाख रु , टीकमगढ़ जिला के लिए 7334 लाख रु,  सागर जिला के लिए 8116 लाख रु  और दमोह जिला के लिए 5655 लाखरु  किसानो को मुआवजा देने के लिए स्वीकृत किये हैं | सूखा ग्रस्त पन्ना जिला के लिए , कोई राशि स्वीकृत ना होना  लोगों के समझ से परे है | हालंकि पन्ना से निकलते समय मुख्य मंत्री शिवराज सिंह  से जब पन्ना के पत्रकारों ने सूखे को लेकर  सवाल किये कि पन्ना जिला को सूखा ग्रस्त तो घोषित किया गया किन्तु मुआवजा राशि स्वीकृत नहीं हुई ? इस पर शिवराज ने लोगों को गोलमोल जबाब देते हुए कहा कि किसानो के हित में सरकार काम करेगी | मुख्य मंत्री के इस जबाब को लेकर पन्ना के  कांग्रेस नेता  सवाल खड़े कर रहे है , वे अब पूंछने लगे हैं कौन सा हित सरकार किसानो का कर रही है , क्या जब पन्ना के सारे गाँव पलायन से खाली हो जाएंगे तब मुआवजा राशि स्वीकृत होगी |   

  दरअसल बुंदेलखंड के दर्द पर संसद से लेकर सेमिनारों में जम कर घड़ियाली आंशु बहाये जाते हैं पर  दर्द की दवा नहीं मिल पाती | 

08 अक्टूबर, 2017

बुंदेलखंड मे किसान आन्दोलन _ बीजेपी डेमेज कंट्रोल मे जुटी


बुंदेलखंड की डायरी



रवीन्द्र व्यास 

 उमा भारती के गृह नगर में किसानो के साथ हुई बर्बरता के पीछे की कहानी भी कम चौकाने वाली नहीं है | बुंदेलखंड में लगातार पड़ते सूखे और सरकार की मनमानी ने कांग्रेस को मौका दिया | कांग्रेस ने " खेत बचाओ _किसान बचाओ " का नारा दिया | बेबस किसानो को कांग्रेस की इस बात पर भरोषा हुआ और वह बड़ी तादाद में टीकमगढ़ में पहुंचे |  यह भी पहला मौका था कि किसी बड़े  राष्ट्रीय कांग्रेसी नेता के ना होने  के बावजूद  10 _12 हजार किसान सभा में पहुंचे | किसानो की यही संख्या बीजेपी नेताओं की चिंता का कारण  बन गई |  फिर शुरू हुआ सियासत का ऐसा खेल जिसमे बीजेपी तो उलझी पर बुंदेलखंड में कांग्रेस को संजीवनी प्रदान कर गई  |बुंदेलखंड के अन्नदाता को कूटने पीटने और कपडे उतारने  के बाद अब बीजेपी के दिगज्ज नेता डेमेज कंट्रोल में जुट गए हैं | 

                                                        बुंदेलखंड  सहित  टीकमगढ़  जिला के किसान    पिछले दस सालों में सात बार  सूखे की त्रासदी झेलते झेलते  टूट चुके हैं | उस पर सरकार के थोथे आश्वासनों ने उस के घावों पर नमक छिड़कने का ही काम किया |  बीमा और मुआवजा के नाम पर , २४ घंटे बिजली के नाम पर  उसे करेंट मारने वाले बिजली बिल थमाए गए , दिन बा दिन खेती में लागत बड़ी और आमदनी घटी , इन सब हालातों  से भी उसने लड़ने का प्रयास किया | कभी कर्ज लिया तो कभी  मजदूरी भी की टीकमगढ़ में नहीं मिली तो बाहर जा कर मजदूरी की |  जिन लोगों को इन सबके बावजूद  जिंदगी में सुरक्षा  की  कोई आस नजर नहीं आई  और कर्ज  से हार मानने को मजबूर हुए ऐसे  अनेकों  किसानो ने मौत को गले लगा लिया |  जिले के  किसानो  वा उनके परिवार  के सामने इस बार  की अवर्षा ने  एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है |  यह फसल तो गई आगे भी कुछ मिलने की उम्मीद नहीं , सिवाय सरकार के शब्दों के भ्रम जाल के | हालातों से हताश किसानो का  बीजेपी सरकार से होते मोह भंग में एक बड़ा कारण बेलगाम ब्यूरो क्रेसी भी मानी जा रही है  | 
          बीते दिनों टीकमगढ़ के राजेंद्र पार्क में  नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) मंच से मध्य प्रदेश की शिवराज  सरकार  को  किसान विरोधी बता रहे थे | वे किसानो को मंदसौर में किसानो पर हुए गोली काण्ड की याद भी ताजा कर रहे थे | शायद उन्हें पता नहीं था कि जो शब्द वे मंच से बोल रहे हैं  उसकी एक बानगी टीकमगढ़ में ही कुछ समय बाद देखने को मिलेगी | सभा के बाद  कांग्रेस नेता , अजय सिंह , पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह , कुणाल चौधरी , कांग्रेस के महामंत्री ब्रजेन्द्र सिंह राठौर , के नेतृत्व में   किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे |  मुख्य द्धार पर  इनको रोक दिया गया  कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने ज्ञापन लेने के लिए एस डी एम्  आदित्य सिंह को भेज दिया था | नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री ने इसे किसानो का अपमान मानते हुए कलेक्टर को बुलाने की मांग की | लगभग घंटे भर तक यह सब चलता रहा , बड़ी मशक्कत के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को कलेक्ट्रेट में प्रवेश दिया गया l लम्बे इतजार के बाद  कलेक्टर साहब ज्ञापन लेने नीचे उतरे ।  कलेक्टर ने पांच सूत्री मांगो वाला यह ज्ञापन भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चैनल के पीछे से लिया ।   ज्ञापन में कांग्रेस नेता मांग कर रहे थे की जिले को सूखा ग्रस्त घोषित किया जाए , खराब फसलों का मुआवजा दिया जाए ,  फसल बीमा की राशि खातों में डाली जाए ,बिजली बिल माफ़ किये जाएँ , और बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए | जिस समय ज्ञापन लेने देने का कार्यक्रम चल रहा था उसी समय पुलिस की लाठियां किसानो पर पड़ रही थी |   
                                                      
                                        यहां आये किसानो की बातों  को माने तो किसानो ने पुलिस पर पथराव नहीं किया , पथराव की शुरुआत  नगर पालिका परिषद् की दीवाल के पीछे से हुई थी |  पुलिस पर पथरों के बाद पुलिस उग्र हो गई और उसने किसानो पर लाठी चार्ज कर दिया ,,किसानो को दौड़ा दौड़ा कर पीटा जाने लगा | जबाब में किसान भी पथराव करने लगे , पुलिस ने अश्रु गैस के गोले छोड़ कर लोगों को तितर बितर करने का प्रयास किया | किसानो को उन्ही के टेक्टरों में पकड़ कर थाने ले जाया गया और  थाने में उनके साथ मारपीट कर उनके कपडे उतरवाकर लाकअप में बंद कर दिया गया | कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह के थाना  पहुँचने के बाद पीड़ित किसानो को लाकअप से  और  पुलिसिया बदसलूकी से मुक्ति मिली | 
                                        टीकमगढ़  की इस घटना ने शिवराज  सरकार को तो  शर्म सार  किया ही  साथ ही  बीजेपी को भी बचाव की मुद्रा  में ला दिया , वहीँ   बुंदेलखंड में कांग्रेस को एक संजीवनी प्रदान कर दी | कांग्रेस इस मुद्दे को  गरमाये रखना चाहती है , इसी के चलते बुंदेलखंड के साथ मध्य प्रदेश में जगह जगह इस घटना के विरोध में शिवराज सरकार के पुतले फूंके जा रहे हैं और प्रदर्शन किये जा रहे हैं  | कांग्रेस के  बड़े नेता टीकमगढ़ की घटना को मदसौर की घटना से जोड़ कर यह बताने मे जुटे है कि शिवराज सरकार किसान विरोधी है । कमलनाथ ने तो किसानो के मसले पर मुख्य मंत्री  शिवराज सिंह से सवाल कर उनकी किसानों के हमदर्द होने की छवि पर ही बट्टा लगा दिया है । 
 टीकमगढ़ में सियासत के जानकार और पुलिस का खुफिया तंत्र  इस बात से हैरान है की किसी राजनैतिक दल के सामन्य से प्रदर्शन को विफल करने के लिए इस स्तर  के राजनीतिक षड्यंत्र भी  अब रचे जाने लगेगे । सरकार ने तीन दिन मे जाच करा कर रिपोर्ट देने की बात कही थी । अब तक हुई जांच मे  यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि जिनके कपड़े लाकअप मे  उतरे वह काग्रेसी थे,   और सुनियोजित तरीके से  इस मामले को तिल का ताड़ बनाया गया । असल में यह मामला मुख्य मंत्री की छवि के साथ गृह मंत्री की छवि पर भी  आघात करने वाला माना जा रहा है । गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह के संभाग क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर  जहा काग्रेस  आक्रामक हो गई है वहीं बीजेपी बचाव के रास्ते तलाश रही है ।  बीजेपी  के स्थानीय नेताओ  से लेकर सागर संभाग के दिग्गज  नेता  इस  आग को हर तरीके से ठंडा करने में जुटे हैं | समय बताएगा  कौन कितना सही था?  2017  Oct 08

सरकारे छिड़क रही है किसानो के जख्मों पर नमक


बुंदेलखंड की डायरी 


रवींद्र व्यास 

                  बुंदेलखंड के किसान इन दिनों नेताओं के  कृषि दर्शन और किसान के प्रति व्यक्त की जा रही चिन्ता के चक्रव्यू में उलझता जा रहा है | वो बात करता है कि  बुंदेलखड को सूखा ग्रस्त घोषित करो  तो उसे बताया जाता है कि चिन्ता मत करो  हमारी सरकार का लक्ष्य ही है किसानो की आय को दोगुना करना है | पानी के संकट पर आगाह करने पर , चिंता नहीं करो सरकार हर खेत में तालाब बनाने की योजना पर काम कर रही है | जनता के इन  प्रधान सेवक से लेकर सूबे के सेवक की किसानो के प्रति व्यक्त की जा रही चिन्ता को देखकर तो लगता है की बहुत जल्द किसानो की तक़दीर और तस्वीर बदलने वाली है | पर जमीन पर हालत जस के तस दिखते हैं | 

   बुंदेलखंड के ऐसे ही  दर्द की दवा तलाशने उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधि प्रधान मंत्री के पास भी हो आये | उसी दौर में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के नेताओं के पास इतना समय नहीं था कि  वे भी अपने इलाके के आम आदमी ,और किसानो की दशा से पी एम् को अवगत करा पाते | बुंदेलखंड के किसान सूखे से बेहाल हैं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश  में विभक्त  बुंदेलखंड के किसान अपनी अपनी सरकारों से  इलाके को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं | झांसी में तो किसानो ने मुंडन तक करवा लिया है | 
                                                                  पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में सम्मलित होने के लिए  यूपी वाले  बुंदेलखंड के तीन  सांसद और 19 विधायक भी गए थे | इन जन प्रतिनिधियों ने मौके का फायदा उठाते हुए , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात की  ,इन लोगों ने  मोदी जी को बताया की इस बार भी बुंदेलखंड में बारिश कम होने से स्थिति काफी खराब है | , अन्ना मवेशियों की समस्या अलग से है जिनके कारण फसले तबाह होती हैं | इसी के साथ पानी की भी विकराल समस्या पैदा होने  संभावना भी  जताई। ,  नदियों के जल स्तर में सुधार के लिए मध्य प्रदेश के बाण सागर परियोजना से पानी दिलाये जाने की मांग की | किसानो की इन समस्याओ के अलावा इन जन सेवकों ने  दिल्ली से झाँसी तक के प्रस्तावित नेशनल हाइवे को  वाया चित्रकूट से इलाहबाद जोड़ने और सतना से वाया चित्रकूट से लखनऊ जोड़ने की मांग की | बताते हैं कि पीएम मोदी ने बुंदेलखंड के इन  सांसद और विधायकों की बातों को सुनने के बाद भरोसा  दिलाया कि बुंदेलखंड  इलाका उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है , इसके विकस  के लिए हर प्रयास होगा | पीएम द्धारा  विकास  का यह सपना कब साकार होगा और कब बुंदेलखंड के किसानो को त्रासदी से मुक्ति मिलेगी इसका इन्तजार है  | 

                                           जहां यूपी वाले बुंदेलखंड के विधायक सांसद पी एम् को अपनी समास्याएं बता रहे थे उसी दौर में  मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के नेता  चुनावी दौर को देख कर पार्टी के आला नेताओं से अपनी पीआर बढ़ाने में व्यस्त थे | इन नेताओं के   पास इतना समय नहीं था कि  वे भी अपने इलाके के आम आदमी ,और किसानो की दशा से पी एम् को अवगत करा पाते  | इन्हे शायद इस बात का डर होगा की कहीं उनसे यह ना पूंछ लिया जाए की पिछले 14 साल से मध्य प्रदेश में बीजेपी की  सरकार है और फिर भी बुंदेलखंड इलाके में 1200 से ज्यादा किसानो ने आत्म ह्त्या क्यों की  |  यह हालात तब हैं जब अकेले एम् पी के बुंदेलखंड से छः  मंत्री हैं और सभी प्रमुख मंत्री हैं , जिनके पास वित्त व्यवस्था से लेकर पेयजल,जनसम्पर्क , पंचायत , सुरक्षा  और  महिला बाल विकास  तक की महत्व पूर्ण जिम्मेदारी है | ऐसे मंत्रियों के रहते एमपी के बुंदेलखंड की तक़दीर और तस्वीर सब बदल जाना चाहिए थी |  हालंकि ये  सवाल  यहाँ के मंत्री , विधायक  और सांसद  से नहीं पूंछे जाते | इनसे अगर पूंछा जाता तो यही कैसे मध्यप्रदेश में फिर से सरकार बनेगी , और बुंदेलखंड में बीजेपी के ग्राफ गिरने का कारण क्या है | 
                          
                                          देखा जाए तो बुंदेलखंड के दोनों इलाकों में दर्द  एक सा ही है कहीं कुछ कम है तो कहीं कुछ ज्यादा है | उत्तर प्रदेश के झांसी में किसान  बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर मुण्डन करवा रहे  हैं जगह जगह प्रदर्शन कर रहें हैं | वही एमपी  के बुंदेलखंड के किसान भी  सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं | सीएम शिवराज सिंह चौहान इस बीच बुंदेलखंड के दौरे पर भी आये , उन्होंने किसानो को भरोसा  दिलाया की सरकार उनके साथ है , सरकार का लक्ष्य किसानो की आय दो गुना करना है , रही बात सूखा की तो रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जायेगी |  सीएम योगी आदित्यनाथ ने सूखे का आंकलन करने के लिए तीन टीमों का गठन किया है ,| कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  बुंदेलखंड में ४२ हजार दलहन तिलहन के मिनी किट्स  किसानो को बांटने की बात कही है | 

                                    असल में बुंदेलखंड  लगातार सूखा और प्राकृतिक प्रकोप का शिकार  है |  वर्षा की चंद बूंदें उसे राहत देती हैं तो सूरज की तीखी तपन उसकी राहत छीन लेती हैं | प्रकृति  और सरकार का रवैया भी बुंदेलखंड के प्रति एक सा ही अब यहां के किसानो को लगने लगा है | प्रकृति रुष्ट है इस कारण कभी सूखा तो कभी ओला तो कभी अतिवृष्टि का उसे सामना करना पड़ता है | सरकार चुनावी साल में उसके लिए विशेष चिंतित हो जाती है , जिस कारण उस पर मेहरबानियों की बरसात  हो जाती है जो उस तक तो नहीं पहुँचती अलबत्ता कागजो में जरूर दिख जाती है | उसे छलने के लिए भी शासन नायाब नुस्खे तलाशती है , किसान को कहा गया की फसल बीमा कराओ तो तुम्हे फसल का पूरा मुआवजा मिलेगा | बीमा करा लिया जब मुआवजा लेने गया तो उसके आने जाने का किराया भी नहीं निकला |  

                                      
                                                     यूपीए शासन काल में बुंदेलखंड को सूखा से मुकाबला करने के लिए सात हजार करोड़ का पैकेज राहुल गांधी की पहल पर दिया गया था | इस पैकेज में प्रमुख कार्य जल  सरचनाओं के विकास  , पेयजल व्यवस्था , पशु पालन के लिए थे , उम्मीद थी कि इस व्यवस्था से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा , उनके भडारण की समस्या आएगी इसलिए वेयर हाउस बड़ी तादाद में बनवाये गए | अधिकारियों की कृपा और जन सेवकों के सहयोग से बुंदेलखंड पैकेज का ऐसा सत्यानाश किया कि  जिसकी कोई दूसरी मिसाल तलाशने पर भी नहीं मिलेगी | सरकार की इन योजनाओ का क्रियान्वयन ही सही तरीके से हो जाता तो बुंदेलखंड की तस्वीर इतनी भयानक नहीं होती | बुंदेलखंड के किसान भी  लगातार पड़ते सूखे और प्राकृतिक प्रकोप का मुकाबला करने में  कुछ तो सक्षम होते | 2017 Oct 1 
 


24 सितंबर, 2017

बुंदेलखंड के नाम पर विधान सभा क्षेत्र तक सीमित हुए मंत्री जी


बुंदेलखंड की डायरी 

नाम बुंदेलखंड का सीमित जिले तक 

रवीन्द्र व्यास 

पिछले दिनों गुजरात के बड़ोदरा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की राष्ट्रीय बैठक में भाग लेने पहुंचे प्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी भाग लिया | बैठक में भाग लेने की खबर को इस तरह से प्रचारित किया गया कि प्रदेश के गृह मंत्री ने बुंदेलखंड के लिए बड़ा भारी पैकेज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से माँगा है | जबकि प्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री जी बैठक में सिर्फ शिवराज सरकार का यशोगान ही करते रहे और बुंदेलखंड के नाम पर सिर्फ सागर जिला और खासकर खुरई विधान सभा क्षेत्र तक सीमित रहे | भूपेंद्र सिंह का यह दृष्टिकोण बताता है कि  बुंदेलखंड के नेताओं में विकास कराने की दृष्टि कैसी है | 

                                            सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी सम्हालने वाले जनसम्पर्क विभाग ने एक विज्ञाप्ति जारी कर प्रेस को बताया था कि मंत्री जी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग की है , उन्होंने राहतगढ़ -खुरई -खिमलासा सड़क मार्ग ,बीना -कटनी रेल मार्ग पर और खुरई नगर में खेरा नाका पर ओवर ब्रिज निर्माण कराये जाने की मांग की है |खुरई विधानसभा क्षेत्र में पांच मुख्य मार्गों के निर्माण और उनकी पुल पुलियों के निर्माण की मांग की |  इसी के साथ उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खुरई विधान सभा क्षेत्र में खोलने की मांग की | मंत्री जी ने जिस इलाके में विकाश कार्यों की इतनी मांग की है वह सागर जिले के खुरई विधान सभा क्षेत्र में आता है और उनका निर्वाचन क्षेत्र है | अपने  इस विधान सभा क्षेत्र  को  अगले चुनाव में अपने लिए पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए   साम दाम दंड भेद नीति का सहारा  लेने से भी नहीं चूक रहे हैं |   साम दाम दंड भेद नीति का सहारा  लेने से भी नहीं चूक रहे हैं |   असल में खुरई मे काग्रेस के दिग्गज नेता  अरूणोदय चौबे की सक्रियता से मंत्री जी की बेचैनी बड़ी है । अब खुरई इलाके का  हर कोई जानने लगा है कि हत्या के जिस मामले मे चौबे जी  आरोपी बनाए गए थे  वह उन पर राजनैतिक इशारे पर मामला दर्ज किया गया है । दूसरा बड़ा कारण यह भी माना जाता है कि  
स्थानीय स्तर पर सत्ता(स्थानीय निकाय ) और संघठन की बागडोर उन्होंने अपने रिश्तेदारो   को दिलवाई, जिसके चलते  उनकी बिरादरी के लोग ही  उनसे खफा हो गए है ।

                                             राजनैतिक सूत्रों का कहना है कि  इस  विधान सभा चुनाव के पहले खुरई को मंत्री जी के प्रभाव से अलग जिला भी बनाया जा सकता है | इसके पीछे तर्क दिए जा रहे हैं की शिवराज के सबसे ख़ास मंत्री जी की जीत पर किसी तरह का प्रश्न चिन्ह नहीं लगना चाहिए | दूसरा 1961 में बनी खुरई तहसील सागर की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से  सबसे बड़ी तहसील है |  ,1965 से इसे जिला बनाये जाने की मांग उठ रही है | पिछले चुनावों के भी अनुभव बताते हैं की बीजेपी ने चुनावी दौर में जहां जहां अलग जिला बनाने की घोषणा की उसका लाभ पार्टी को मिला |  चुनावी साल में  अब अगर मंत्री जी द्धारा प्रदेश और बुंदेलखंड के अन्य इलाके को दरकिनार कर सिर्फ अपने विधान सभा क्षेत्र के लिए मांग की है तो यह विपक्ष के लिए तो मुद्दा हो सकता है पर उनके राजनैतिक भविष्य के लिए लाभ दायक ही कहा जाएगा | 
बुंदेलखंड मे बीजेपी की जद्दोजहद 

            बुंदेलखंड इलाके के सागर संभाग की 26  विधान सभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस  और 20 पर बीजेपी को पिछले चुनाव में सफलता मिली थी | इन 20 में से सागर से दो दमोह ,छतरपुर और पन्ना जिले से एक एक मंत्री हैं | जिनमे 4 केबिनेट स्तर के वा एक राज्य मंत्री हैं | कांग्रेस मुक्त हिन्दुस्तान की बात करने वाली बीजेपी के सामने बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या यही है की उसे ही अपनी 20 सीटें बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है |    पिछले दिनों हुए एक आंतरिक सर्वे में  बुंदेलखंड में बीजेपी और उसके कई मंत्रियो और   विधायकों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं  | आर एस एस को भी जो फीड बैक मिला उसने भी बीजेपी के लिए चिंता की लकीरें बड़ा दी हैं | इसी को देख कर  यह माना जा रहा है की बुंदेलखंड की कई विधान सभा सीटों पर भारी उलट फेर हो सकता है |  सियासत के इन समीकरणों  को साधने के लिए बीजेपी की  बूथ लेबल तक की तैयारियां तो जारी हैं ही , साथ ही पार्टी ने इस इलाके के कई नेताओं और सांसदों को  उनके विधान सभा क्षेत्र में सक्रीय होने के आदेश दिए हैं | ऐसे ही कई नेताओ  ने  विधान सभा क्षेत्र के दौरे शुरू कर दिए हैं | बीजेपी   इस तरह से जनता की नाराजगी को दूर करने की जुगत में हैं , साथ  ही सर्वे को आधार मानकर बीजेपी के कई ऐसे विधायकों को ठिकाने लगा दिया जाएगा जो पार्टी वा व्यक्ति विशेष के लिए उपयुक्त नहीं माने जा रहे हैं | 

                                          असल में बीजेपी के सामने इस बार दोहरी मुसीबत है , एक तो बीजेपी मुख्यमंत्री शिवराज सरकार के प्रति आंशिक नाराजी, बिजली के नाम हो रही लूट ,  दूसरे मोदी सरकार की नीतियां |  यह बात शायद प्रदेश के गृह वा परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह बखूबी समझते हैं इसी के चलते उन्होंने अपने इलाके में पार्टी जनाधार बड़ाने के साथ व्यक्ति गत जनाधार ज्यादा बढ़ाया | धर्म के कार्यक्रमों से लेकर कांग्रेसियों को बीजपी में लाने का काम उन्होंने खुरई विधान सभा में जोर शोर से किया |  मोदी की योजनाओं का बीजेपी के नेता मंच से खूब जम कर प्रचार करते हैं |  चाहे वह उज्ज्वला योजना हो , जनधन खाता , नोटबंदी , और जीएसटी  का पार्टी स्तर पर प्रचार तो खूब किया जाता है , पर बंद कमरे में बैठ कर कई नेता स्वीकारते हैं की मोदी की  इन योजनाओं के कारण बीजेपी का एक बड़ा तबका पार्टी से दूर हुआ है | इसकी वजह बताते हैं की उज्ज्वला योजना में जो गैस  चूल्हे वा सिलेंडर बांटे गए उन सिलेंडरों को खरीदने की क्षमता बुंदेलखंड के कमजोर तबके के पास नहीं हैं | इसी तरह जन धन खाते खुल तो जरूर गए  जीरो बेलेंस पर बैंक की मनमानी के कारण और ट्रांजेक्शन पर होने वाली कटौती के कारण आम आदमी भी परेशान हे | नोटबंदी के कारण  इलाके का कारोबार तो प्रभावित हुआ ही , साथ ही लोगों के घरों में जमा विपत्ति काल के लिए जमा पूंजी भी समाप्त हो गई |  इसी तरह जीएसटी पर सरकार कहती है कि एक देश एक कर पर , एक देश सात कर की प्राणली और मासिक रिटर्न ने छोटे व्यापारियों और जनता को लुटने पर मजबूर कर दिया |  
                                         इसके ठीक विपरीत कांग्रेस अपने चुनावी अभियान में बहुत ही सुस्त चाल से आगे बढ़ रही है | अनिश्चय और गुट बाजी के भंवर में फसी कांग्रेस के नेता ही तय नहीं कर पा रहे हैं कि किन मुद्दों को उठाये और किन को छोड़ें | गुटबाजी का आलम ये है कि पार्टी प्रत्याशी तो दूर की बात है पार्टी के जिला अध्यक्ष के लिए ही एक राय नहीं बन पा रही है | प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की बात तो बाद की बात है | 
                                          
                              



10 सितंबर, 2017

सूखा का संघर्ष

बुंदेलखंड की डायरी

रवीन्द्र व्यास

 उत्तर प्रदेश के सात जिले बाँदा ,हमीरपुर ,चित्रकूट ,महोबा ,झाँसी ,जालौन ,और ललितपुर , मध्य प्रदेश के छः जिले सागर ,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,पन्ना और दतिया  जिलों में फैले बुंदेलखंड  का जन मानस इन दिनोंप्रकृति के प्रकोप से चिंतित है  70 हजार वर्ग किमी में फैले और  लगभग दो करोड़ की आबादी वाले इस इलाके के नशीब में सूखा और त्रासदी एक स्थाई नियति बन गई है | मौसम विभाग की भविष्यवाणियो के बावजूद जब वर्षा नहीं हुई तो बुंदेलखंड के हर जिले में सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन होने लगे | सूखा के इस संकट में लोगों की बेचैनी को समझा जा सकता है | जनता जनार्दन के इस दर्द से बेखबर सियासत का राज रंग अपने शबाब पर चलता चला जा रहा है | यह राज रंग भी चित्रकूट में देखने को मिले |


  जिस दिन मध्य प्रदेश के बिजावर से बीजेपी विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक चित्रकूट में कामता नाथ की परिक्रमा कर बुंदेलखंड में वर्षा की कामना कर रहे थे , उसी समय चित्रकूट के कलेक्ट्रेट में लोक गठबंधन पार्टी के लोग इलाके में व्याप्त सूखे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे | लोक गठबंधन पार्टी ने राजयपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग की | ज्ञापन में मांग की गई कि किसानो को कर्ज के बोझ से मुक्ति देकर ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे खेती लाभ दायक बन सके | उपज पर इतना मूल्य किसानो को मिले जिससे लागत खर्च निकलने के बाद पर्याप्त मुनाफ़ा मिले | बिजली और सिचाई की पर्याप्त व्यवस्था , प्रमाणित बीज की व्यवस्था हो | कृषि आधारित उद्योग हर इलाके में स्थापित किये जाए | कृषि उत्पाद मूल्य का तुरंत भुगतान की प्रणाली विकसित की जाए |

                झाँसी जिले के मऊरानीपुर में भारतीय किसान यूनियन भानु ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर सात सूत्रीय ज्ञापन सी एम् एवं कलेक्टर के नाम एस डी एम् को ज्ञापन सौंपा | सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग के साथ , हर खेत का सर्वे करानेकर्ज माफ़ी की मांग की गई | उरई में शिवपाल सिंह फेन्स एसोसिएसन के बैनर टेल किसानो ने सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा |

         टीकमगढ़ में आम आदमी पार्टी ने अमित खरे के नेतृत्व में प्रदर्शन कर सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग की | प्रदर्शनकारियों ने शिवराज सरकार पर जनता और किसानो से बिजली के नाम पर हो रही लूट का मुद्दा भी उठाया | छतरपुर जिले में तो सूखे के हालात का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है की जिले के रनगुंवा गाँव के लोग प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए |रनगुंवा बाँध के किनारे बसे इस गाँव के लोगों ने युवक कांग्रेस के बैनर टेल प्रदर्शन कर जिले में सूखे की समस्या पर प्रशासन का ध्यान खींचा |जिला कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में सर्वे कर मुआवजा दिलाये जाने की मांग की | कांग्रेस के जिले से इकलौते विधायक विक्रम सिंह ने कलेक्टर को पत्र लिख कर बताया की जिले में अवर्षा के कारण फसलें नष्ट हो गई हैं , जो बची वो कीट पतंगों के कारण नष्ट हो गई हैं | किसानो का खाद बीज मेहनत सब बर्बाद हो गई है | विधायक ने भी सर्वे और मुआवजा की मांग की है |

                छतरपुर के ही किसान नेता प्रेम नारायण मिश्रा के नेतृत्व में किसानो का प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर से मिला | मुख्य मंत्री के नाम दिए ज्ञापन में स्पष्ट किया कि अवर्षा के कारण हालात अत्याधिक गंभीर हैं | जलाशय सूख रहे हैं नदी नालों में पानी नहीं हैंफसलें सारी सूख चुकी हैं पानी की कमी के कारण रवि फसल की संभावना नहीं रह गई है | इस हालात में मानव के अलावा पशुओं के लिए भी चारे पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई है | हालात से निपटने के लिए  किसानो को दीर्घ कालिक बगैर ब्याज का ऋण दिया जाए , उनके बच्चों को शिक्षा फ़ीस माफ़ की जाए , जिले के स्टॉप डेम में गेट लगाए जाएँ | राजस्व और सिचाई ऋण ,वा बिजली बिल माफ़ किये जाएँ |

                             मध्य प्रदेश विधान सभा की शासकीय उपक्रम समिति  सभापति यशपाल सिंह सिसोदिया
  के नेत्रत्व्य में आठ सदस्यीय दल   छतरपुर जिले के दौरे पर आया | बिजावर उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सभापति सिसोदिया ने जिले में किसानो की नष्ट हुई फसलों पर चिंता जताई | यहाँ ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि जहाँ किसानो की समस्या ,फसलों ,और पानी को लेकर बुंदेलखंड का हर संवेदन शील व्यक्ति चिंतित है वहीँ  बीजेपी के अधिकांश  विधायकों और नेताओं ने   इस मसले पर चुप्पी साध रखी है |                                                चित्रकूट में बीजपी किसान मोर्चा का दो दिवसीय सम्मलेन हुआ  केंद्र और प्रदेश के मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर , शिवराज सिंह भी आये पर बुंदेलखंड के वर्तमान कृषि हालातों पर इनने बोलना शायद इस लिए ठीक नहीं समझा क्योंकि ये लोग तो देश दुनिया की चिंता में व्यस्त रहते हैं देश के किसानो के लिए रीत नीत बनाते हैं इस लिए अलग बुंदेलखंड के किसानो के लिए क्या बोलना | अलबत्ता यह जरूर दोहराया गया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व वाली सरकार ने  सही अर्थों में किसानोंगरीबों और नवजवानों की चिंता की है। केन्द्र  मध्यप्रदेष की सरकार गरीबों  किसानों के लिए समर्पित है। 5 वर्शों में किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को एक अभियान के रूप में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के कार्यकर्ता किसानों तक लेकर जायेंगे और उसे धरातल पर उतारने में किसानों की मदद करेंगे।

भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने  कांग्रेस पर आरोप लगाया उसकी किसान विरोधी नीतियों के कारण बड़े स्तर पर किसान खेती से पलायन कर चुके हैं। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और प्रदेष के यषस्वी किसान पुत्र मुख्यमंत्री षिवराजसिंह चौहान ने किसानों को केंद्र में रखकर जो नीतियां तैयार की हैं उसकी बदौलत आज मध्यप्रदेष कृशि क्षेत्र में औसत 20 प्रतिषत की कृशि विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है। शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में सिंचाईबिजलीसड़क और आपदा प्रबंधन पर ध्यान दिया गया है। किसानों के लिए कृशिबागवानीपषुपालनमस्त्यपालनखाद्य प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों में किसानों के लिए नवीन योजनाएं लाकर उन्हें लाभकारी बनाया है।                                                           

                      ये सियासत का तकाजा है की जिससे अपनी और पार्टी की सियासत चमके वही बात करनी चाहिए ,इस सम्मलेन भी वही हुआ | हालांकि मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चित्रकूट जाते समय खजुराहो विमान तल पर   भाजपा नेता .श्याम त्रिवेदी ने  छतरपुर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने हेतु ज्ञापन सौंपा |  मुख्यमंत्री  ने अल्पवर्षा की स्थिति पर  सर्वे हेतु आस्वासन  दिया है |

                                             बुंदेलखंड की ७० से ८० फीसदी आबादी खेती पर आश्रित है ,| जिनमे अधिकाँश लघु और सीमांत किसान ही हैं , जिनके जीवन का आधार खेती और मजदूरी ही है | बार बार पड़ने वाले सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदा किसानो से उनके जब जीवन का आधार ही छीन लेती है तो उनका बेचैन होना स्वाभाविक है | इस बार की अवर्षा ने भी उसके सामने ऐसे ही हालात बना दिए हैं |  जहां फसलें तो नष्ट हो ही गई हैं उस पर पानी की स्थिति ने उसे चिंतित कर दिया है | बुंदेलखंड के सबसे ज्यादा बाँध वाले ललितपुर जिले के बाँध इस बार 40 फीसदी जल राशि भी संगृहीत नहीं कर पाए , जिसका सीधा असर झाँसी , ललितपुर ,बबीना जैसे नगर पर पडेगा बिजली उत्पादन प्रभावित होगा वह अलग | बांधों के यह हालात अकेले ललितपुर जिले के भर नहीं हैं बल्कि ऐसी ही दशा  झाँसी , महोबा , बांदा , हमीरपुर ,उरई , छतरपुर ,टीकमगढ़ ,दमोह और सागर जिले के बाँध और तालाबों की है |                                                                                      बुंदेलखंड के पत्रकार पिछले कई सालों से बुंदेलखंड में बने स्टॉप डेमो पर गेट ना लगने को लेकर अपने समाचारो की सुर्खिया बनाते रहे हैं | तालाबों पर हो रहे अत्रिक्रमण , नदियों और नालो के उथली करण पर पत्रकारों की कलम चलती रही है | सामाजिक संस्थाए भी इन मसलों को उठाती रही हैं | पर समाज से दूर होती सरकार और प्रशासन को इन जायज समस्यांओ के समाधान की जरुरत ही महशूस नहीं होती |
रवीन्द्र व्यास 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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