08 अक्टूबर, 2017

सरकारे छिड़क रही है किसानो के जख्मों पर नमक


बुंदेलखंड की डायरी 


रवींद्र व्यास 

                  बुंदेलखंड के किसान इन दिनों नेताओं के  कृषि दर्शन और किसान के प्रति व्यक्त की जा रही चिन्ता के चक्रव्यू में उलझता जा रहा है | वो बात करता है कि  बुंदेलखड को सूखा ग्रस्त घोषित करो  तो उसे बताया जाता है कि चिन्ता मत करो  हमारी सरकार का लक्ष्य ही है किसानो की आय को दोगुना करना है | पानी के संकट पर आगाह करने पर , चिंता नहीं करो सरकार हर खेत में तालाब बनाने की योजना पर काम कर रही है | जनता के इन  प्रधान सेवक से लेकर सूबे के सेवक की किसानो के प्रति व्यक्त की जा रही चिन्ता को देखकर तो लगता है की बहुत जल्द किसानो की तक़दीर और तस्वीर बदलने वाली है | पर जमीन पर हालत जस के तस दिखते हैं | 

   बुंदेलखंड के ऐसे ही  दर्द की दवा तलाशने उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के जन प्रतिनिधि प्रधान मंत्री के पास भी हो आये | उसी दौर में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के नेताओं के पास इतना समय नहीं था कि  वे भी अपने इलाके के आम आदमी ,और किसानो की दशा से पी एम् को अवगत करा पाते | बुंदेलखंड के किसान सूखे से बेहाल हैं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश  में विभक्त  बुंदेलखंड के किसान अपनी अपनी सरकारों से  इलाके को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं | झांसी में तो किसानो ने मुंडन तक करवा लिया है | 
                                                                  पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में सम्मलित होने के लिए  यूपी वाले  बुंदेलखंड के तीन  सांसद और 19 विधायक भी गए थे | इन जन प्रतिनिधियों ने मौके का फायदा उठाते हुए , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात की  ,इन लोगों ने  मोदी जी को बताया की इस बार भी बुंदेलखंड में बारिश कम होने से स्थिति काफी खराब है | , अन्ना मवेशियों की समस्या अलग से है जिनके कारण फसले तबाह होती हैं | इसी के साथ पानी की भी विकराल समस्या पैदा होने  संभावना भी  जताई। ,  नदियों के जल स्तर में सुधार के लिए मध्य प्रदेश के बाण सागर परियोजना से पानी दिलाये जाने की मांग की | किसानो की इन समस्याओ के अलावा इन जन सेवकों ने  दिल्ली से झाँसी तक के प्रस्तावित नेशनल हाइवे को  वाया चित्रकूट से इलाहबाद जोड़ने और सतना से वाया चित्रकूट से लखनऊ जोड़ने की मांग की | बताते हैं कि पीएम मोदी ने बुंदेलखंड के इन  सांसद और विधायकों की बातों को सुनने के बाद भरोसा  दिलाया कि बुंदेलखंड  इलाका उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है , इसके विकस  के लिए हर प्रयास होगा | पीएम द्धारा  विकास  का यह सपना कब साकार होगा और कब बुंदेलखंड के किसानो को त्रासदी से मुक्ति मिलेगी इसका इन्तजार है  | 

                                           जहां यूपी वाले बुंदेलखंड के विधायक सांसद पी एम् को अपनी समास्याएं बता रहे थे उसी दौर में  मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के नेता  चुनावी दौर को देख कर पार्टी के आला नेताओं से अपनी पीआर बढ़ाने में व्यस्त थे | इन नेताओं के   पास इतना समय नहीं था कि  वे भी अपने इलाके के आम आदमी ,और किसानो की दशा से पी एम् को अवगत करा पाते  | इन्हे शायद इस बात का डर होगा की कहीं उनसे यह ना पूंछ लिया जाए की पिछले 14 साल से मध्य प्रदेश में बीजेपी की  सरकार है और फिर भी बुंदेलखंड इलाके में 1200 से ज्यादा किसानो ने आत्म ह्त्या क्यों की  |  यह हालात तब हैं जब अकेले एम् पी के बुंदेलखंड से छः  मंत्री हैं और सभी प्रमुख मंत्री हैं , जिनके पास वित्त व्यवस्था से लेकर पेयजल,जनसम्पर्क , पंचायत , सुरक्षा  और  महिला बाल विकास  तक की महत्व पूर्ण जिम्मेदारी है | ऐसे मंत्रियों के रहते एमपी के बुंदेलखंड की तक़दीर और तस्वीर सब बदल जाना चाहिए थी |  हालंकि ये  सवाल  यहाँ के मंत्री , विधायक  और सांसद  से नहीं पूंछे जाते | इनसे अगर पूंछा जाता तो यही कैसे मध्यप्रदेश में फिर से सरकार बनेगी , और बुंदेलखंड में बीजेपी के ग्राफ गिरने का कारण क्या है | 
                          
                                          देखा जाए तो बुंदेलखंड के दोनों इलाकों में दर्द  एक सा ही है कहीं कुछ कम है तो कहीं कुछ ज्यादा है | उत्तर प्रदेश के झांसी में किसान  बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर मुण्डन करवा रहे  हैं जगह जगह प्रदर्शन कर रहें हैं | वही एमपी  के बुंदेलखंड के किसान भी  सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे हैं | सीएम शिवराज सिंह चौहान इस बीच बुंदेलखंड के दौरे पर भी आये , उन्होंने किसानो को भरोसा  दिलाया की सरकार उनके साथ है , सरकार का लक्ष्य किसानो की आय दो गुना करना है , रही बात सूखा की तो रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जायेगी |  सीएम योगी आदित्यनाथ ने सूखे का आंकलन करने के लिए तीन टीमों का गठन किया है ,| कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  बुंदेलखंड में ४२ हजार दलहन तिलहन के मिनी किट्स  किसानो को बांटने की बात कही है | 

                                    असल में बुंदेलखंड  लगातार सूखा और प्राकृतिक प्रकोप का शिकार  है |  वर्षा की चंद बूंदें उसे राहत देती हैं तो सूरज की तीखी तपन उसकी राहत छीन लेती हैं | प्रकृति  और सरकार का रवैया भी बुंदेलखंड के प्रति एक सा ही अब यहां के किसानो को लगने लगा है | प्रकृति रुष्ट है इस कारण कभी सूखा तो कभी ओला तो कभी अतिवृष्टि का उसे सामना करना पड़ता है | सरकार चुनावी साल में उसके लिए विशेष चिंतित हो जाती है , जिस कारण उस पर मेहरबानियों की बरसात  हो जाती है जो उस तक तो नहीं पहुँचती अलबत्ता कागजो में जरूर दिख जाती है | उसे छलने के लिए भी शासन नायाब नुस्खे तलाशती है , किसान को कहा गया की फसल बीमा कराओ तो तुम्हे फसल का पूरा मुआवजा मिलेगा | बीमा करा लिया जब मुआवजा लेने गया तो उसके आने जाने का किराया भी नहीं निकला |  

                                      
                                                     यूपीए शासन काल में बुंदेलखंड को सूखा से मुकाबला करने के लिए सात हजार करोड़ का पैकेज राहुल गांधी की पहल पर दिया गया था | इस पैकेज में प्रमुख कार्य जल  सरचनाओं के विकास  , पेयजल व्यवस्था , पशु पालन के लिए थे , उम्मीद थी कि इस व्यवस्था से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा , उनके भडारण की समस्या आएगी इसलिए वेयर हाउस बड़ी तादाद में बनवाये गए | अधिकारियों की कृपा और जन सेवकों के सहयोग से बुंदेलखंड पैकेज का ऐसा सत्यानाश किया कि  जिसकी कोई दूसरी मिसाल तलाशने पर भी नहीं मिलेगी | सरकार की इन योजनाओ का क्रियान्वयन ही सही तरीके से हो जाता तो बुंदेलखंड की तस्वीर इतनी भयानक नहीं होती | बुंदेलखंड के किसान भी  लगातार पड़ते सूखे और प्राकृतिक प्रकोप का मुकाबला करने में  कुछ तो सक्षम होते | 2017 Oct 1 
 


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