बुंदेलखंड की डायरीनाम बुंदेलखंड का सीमित जिले तकरवीन्द्र व्यासपिछले दिनों गुजरात के बड़ोदरा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की राष्ट्रीय बैठक में भाग लेने पहुंचे प्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी भाग लिया | बैठक में भाग लेने की खबर को इस तरह से प्रचारित किया गया कि प्रदेश के गृह मंत्री ने बुंदेलखंड के लिए बड़ा भारी पैकेज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से माँगा है | जबकि प्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री जी बैठक में सिर्फ शिवराज सरकार का यशोगान ही करते रहे और बुंदेलखंड के नाम पर सिर्फ सागर जिला और खासकर खुरई विधान सभा क्षेत्र तक सीमित रहे | भूपेंद्र सिंह का यह दृष्टिकोण बताता है कि बुंदेलखंड के नेताओं में विकास कराने की दृष्टि कैसी है |सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी सम्हालने वाले जनसम्पर्क विभाग ने एक विज्ञाप्ति जारी कर प्रेस को बताया था कि मंत्री जी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग की है , उन्होंने राहतगढ़ -खुरई -खिमलासा सड़क मार्ग ,बीना -कटनी रेल मार्ग पर और खुरई नगर में खेरा नाका पर ओवर ब्रिज निर्माण कराये जाने की मांग की है |खुरई विधानसभा क्षेत्र में पांच मुख्य मार्गों के निर्माण और उनकी पुल पुलियों के निर्माण की मांग की | इसी के साथ उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खुरई विधान सभा क्षेत्र में खोलने की मांग की | मंत्री जी ने जिस इलाके में विकाश कार्यों की इतनी मांग की है वह सागर जिले के खुरई विधान सभा क्षेत्र में आता है और उनका निर्वाचन क्षेत्र है | अपने इस विधान सभा क्षेत्र को अगले चुनाव में अपने लिए पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए साम दाम दंड भेद नीति का सहारा लेने से भी नहीं चूक रहे हैं | साम दाम दंड भेद नीति का सहारा लेने से भी नहीं चूक रहे हैं | असल में खुरई मे काग्रेस के दिग्गज नेता अरूणोदय चौबे की सक्रियता से मंत्री जी की बेचैनी बड़ी है । अब खुरई इलाके का हर कोई जानने लगा है कि हत्या के जिस मामले मे चौबे जी आरोपी बनाए गए थे वह उन पर राजनैतिक इशारे पर मामला दर्ज किया गया है । दूसरा बड़ा कारण यह भी माना जाता है किस्थानीय स्तर पर सत्ता(स्थानीय निकाय ) और संघठन की बागडोर उन्होंने अपने रिश्तेदारो को दिलवाई, जिसके चलते उनकी बिरादरी के लोग ही उनसे खफा हो गए है ।राजनैतिक सूत्रों का कहना है कि इस विधान सभा चुनाव के पहले खुरई को मंत्री जी के प्रभाव से अलग जिला भी बनाया जा सकता है | इसके पीछे तर्क दिए जा रहे हैं की शिवराज के सबसे ख़ास मंत्री जी की जीत पर किसी तरह का प्रश्न चिन्ह नहीं लगना चाहिए | दूसरा 1961 में बनी खुरई तहसील सागर की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ी तहसील है | ,1965 से इसे जिला बनाये जाने की मांग उठ रही है | पिछले चुनावों के भी अनुभव बताते हैं की बीजेपी ने चुनावी दौर में जहां जहां अलग जिला बनाने की घोषणा की उसका लाभ पार्टी को मिला | चुनावी साल में अब अगर मंत्री जी द्धारा प्रदेश और बुंदेलखंड के अन्य इलाके को दरकिनार कर सिर्फ अपने विधान सभा क्षेत्र के लिए मांग की है तो यह विपक्ष के लिए तो मुद्दा हो सकता है पर उनके राजनैतिक भविष्य के लिए लाभ दायक ही कहा जाएगा |बुंदेलखंड मे बीजेपी की जद्दोजहदबुंदेलखंड इलाके के सागर संभाग की 26 विधान सभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस और 20 पर बीजेपी को पिछले चुनाव में सफलता मिली थी | इन 20 में से सागर से दो दमोह ,छतरपुर और पन्ना जिले से एक एक मंत्री हैं | जिनमे 4 केबिनेट स्तर के वा एक राज्य मंत्री हैं | कांग्रेस मुक्त हिन्दुस्तान की बात करने वाली बीजेपी के सामने बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या यही है की उसे ही अपनी 20 सीटें बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है | पिछले दिनों हुए एक आंतरिक सर्वे में बुंदेलखंड में बीजेपी और उसके कई मंत्रियो और विधायकों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं | आर एस एस को भी जो फीड बैक मिला उसने भी बीजेपी के लिए चिंता की लकीरें बड़ा दी हैं | इसी को देख कर यह माना जा रहा है की बुंदेलखंड की कई विधान सभा सीटों पर भारी उलट फेर हो सकता है | सियासत के इन समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी की बूथ लेबल तक की तैयारियां तो जारी हैं ही , साथ ही पार्टी ने इस इलाके के कई नेताओं और सांसदों को उनके विधान सभा क्षेत्र में सक्रीय होने के आदेश दिए हैं | ऐसे ही कई नेताओ ने विधान सभा क्षेत्र के दौरे शुरू कर दिए हैं | बीजेपी इस तरह से जनता की नाराजगी को दूर करने की जुगत में हैं , साथ ही सर्वे को आधार मानकर बीजेपी के कई ऐसे विधायकों को ठिकाने लगा दिया जाएगा जो पार्टी वा व्यक्ति विशेष के लिए उपयुक्त नहीं माने जा रहे हैं |असल में बीजेपी के सामने इस बार दोहरी मुसीबत है , एक तो बीजेपी मुख्यमंत्री शिवराज सरकार के प्रति आंशिक नाराजी, बिजली के नाम हो रही लूट , दूसरे मोदी सरकार की नीतियां | यह बात शायद प्रदेश के गृह वा परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह बखूबी समझते हैं इसी के चलते उन्होंने अपने इलाके में पार्टी जनाधार बड़ाने के साथ व्यक्ति गत जनाधार ज्यादा बढ़ाया | धर्म के कार्यक्रमों से लेकर कांग्रेसियों को बीजपी में लाने का काम उन्होंने खुरई विधान सभा में जोर शोर से किया | मोदी की योजनाओं का बीजेपी के नेता मंच से खूब जम कर प्रचार करते हैं | चाहे वह उज्ज्वला योजना हो , जनधन खाता , नोटबंदी , और जीएसटी का पार्टी स्तर पर प्रचार तो खूब किया जाता है , पर बंद कमरे में बैठ कर कई नेता स्वीकारते हैं की मोदी की इन योजनाओं के कारण बीजेपी का एक बड़ा तबका पार्टी से दूर हुआ है | इसकी वजह बताते हैं की उज्ज्वला योजना में जो गैस चूल्हे वा सिलेंडर बांटे गए उन सिलेंडरों को खरीदने की क्षमता बुंदेलखंड के कमजोर तबके के पास नहीं हैं | इसी तरह जन धन खाते खुल तो जरूर गए जीरो बेलेंस पर बैंक की मनमानी के कारण और ट्रांजेक्शन पर होने वाली कटौती के कारण आम आदमी भी परेशान हे | नोटबंदी के कारण इलाके का कारोबार तो प्रभावित हुआ ही , साथ ही लोगों के घरों में जमा विपत्ति काल के लिए जमा पूंजी भी समाप्त हो गई | इसी तरह जीएसटी पर सरकार कहती है कि एक देश एक कर पर , एक देश सात कर की प्राणली और मासिक रिटर्न ने छोटे व्यापारियों और जनता को लुटने पर मजबूर कर दिया |इसके ठीक विपरीत कांग्रेस अपने चुनावी अभियान में बहुत ही सुस्त चाल से आगे बढ़ रही है | अनिश्चय और गुट बाजी के भंवर में फसी कांग्रेस के नेता ही तय नहीं कर पा रहे हैं कि किन मुद्दों को उठाये और किन को छोड़ें | गुटबाजी का आलम ये है कि पार्टी प्रत्याशी तो दूर की बात है पार्टी के जिला अध्यक्ष के लिए ही एक राय नहीं बन पा रही है | प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की बात तो बाद की बात है |
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