16 अक्टूबर, 2016

Bundelkhand Dayri_RLY_


पूर्णता की ओर  रेल का  अधूरा सपना 
रवीन्द्र व्यास 

 बुंदेलखंड रेलवे सुविधाओं के मामले में भी सबसे निचली पायदान पर खड़ा नजर आता है ।जबकि  किसी भी राष्ट्र के बेहतर विकाश के लिए परिवहन तंत्र एक महत्व पूर्ण कारक माना जाता है । बेहतर सड़कों और रेलवे लाइनों को उसकी धमनिया माना जाता है । इनका बेहतर तंत्र जितना विकशित होगा वह राष्ट्र प्रगति पथ पर उतनी ही तीव्रता से आगे बढेगा । यह बात प. जवाहर लाल नेहरू भी कहते रहे किन्तु खुद उनकी  ही पार्टी के लोग इस मसले पर गंभीर नहीं रहे ।  अटल जी के शासन काल में इस दिशा में काम शुरू  हुए , प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओ की शुरुआत हुई । उन्ही के काल  में २० सितंबर 1998 को ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन का शिलान्यास खजुराहों में किया गया था । लगभग छह संसदीय सीटो को प्रभावित करने वाली यह  रेल परियोजना लगभग हर चुनाव में मुख्य मुद्दा रही है । मंगलवार  की शाम सवा चार बजे ललितपुर से खजुराहो  रेल योजना का शुभारम्भ रेल मंत्री सुरेश प्रभु करेंगे । हालांकि यह छड़ भी स्वप्न के अधूरे भाग के  पूर्ण होने के समान होगा । 


                                             बुंदेलखंड और बघेलखंड को जोड़ने वाली इस रेल परियोजना के शिलान्यास मौके पर तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने ही योजना की मांग और विलम्ब पर चुटकी लेते हुए कहा था की यह मांग काफी समय से की जाती रही है , शायद इसका शिलान्यास हमारे हाथो ही लिखा था ।  उन्होंने दुःख भी जताया था की देश में रेल लाइन का जाल फैला है किन्तु कई लोगों ने रेल तक नहीं देखी । तत्कालीन रेल मंत्री नितीश कुमार ने इस मौके पर उमा भारती के प्रयासों को सराहा था । तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री और क्षेत्रीय सांसद उमा भारती ने  सबका आभार जताते हुए कहा था इससे क्षेत्र के विकाश की एक नई इबारत लिखी जायेगी ।उमा भारती का १९९८ में व्यक्त किया गया यह विश्वास अब जमीनी धरातल पर साकार रूप लेगा हालांकि  पूर्ण साकार रूप तभी मिलेगा जब यह लाइन सतना से जुड़ जायेगी ।   वही इसी मंच पर उपस्थित मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्य मंत्री  दिग्विजव सिंह जब बोलने के लिए खड़े हुए थे तो लोगों ने मुख्य मंत्री नीचे आओ के नारे लगाए । लोग दरअसल इस बात से नाराज थे की दिग्विजय ने इस शिलान्यास कार्यक्रम को रुकवाने का प्रयास किया था , और चुनाव आयोग को पत्र लिखा था ।  



                      उस समय 925 करोड़ रु की इस योजना से 541 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जाना थी ।  तीन चरणों की इस योजना में प्रथम चरण में ललितपुर से खजुराहो होते हुए सतना 282.7 किमी   लाइन बिछाई जाना थी । दूसरे चरण में महोबा से खजुराहो 64 .48 किमी  और तीसरे चरण में रीवा से सीधी 191.61 किमी रेलवे लाइन का निर्माण होना था । 
                       शिलान्यास के बाद हालात बदले और लोकसभा चुनाव में उमाभारती ने खजुराहो को छोड़ भोपाल से चुनाव लड़ा और जीता । खजुराहो से  कांग्रेस के  सत्यव्रत चतुर्वेदी सांसद चुने गए ।  सासद सत्यव्रत संसद में इस रेल परियोजना की धीमी रफ़्तार पर आक्रोश व्यक्त करते रहे । 1998  से लेकर 2001 तक इस योजना के लिए बजट के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति होती रही । 2002  रेलवे के बजट सत्र में बोलते हुए सांसद चतुर्वेदी ने   रेल मंत्री और प्रधान मंत्री पर चुटकी लेते हुए कहा की खजुराहो में जाकर ललितपुर - सिंगरौली रेल लाइन का शिलान्यास तीन चार साल पहले आप लोग करके आये थे , आपको बधाई की इस बार उस काम के लिए ३० करोड़ रु दिए हैं , हालांकि यह रकम भी अपर्याप्त है । वैसे तो पिछले कुछ सालों से  5 करोड़ रु ही दिए जाते रहे हैं । अब लगता है की आपकी नीयत उस परियोजना को पूर्ण करने की है , आप इस योजना को जल्द पूर्ण कराये तो बुंदेलखंड की जनता भी आपकी आभारी रहेगी । २००२ से २००४ तक इस योजना के नाम पर सिर्फ 108 करोड़ का ही बजट मिल पाया । 


                             रेलवे परियोजना के कार्यों में अस्थिरता का दौर चलता रहा और  जो काम प्रथम चरण में होना था वह दूसरे चरण में पहुंच गया । दूसरे चरण का का काम प्रथम चरण में शुरू हुआ और खजुराहो से महोबा रेलवे लाइन का उदघाटन 26 दिसंबर 08 को तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया । और विश्व विख्यात पर्यटक स्थल खजुराहो रेल मानचित्र से जुड़ पाया । 
                              ललितपुर से  खजुराहो तक 166 किमी  का निर्माण कार्य पूर्ण होने और तमाम तरह के तकनीकी परीक्षण के बाद  अब वह घडी आई है जब छतरपुर  और खजुराहो के लोग  रेल से ललितपुर _ और महोबा  की और जा सकेंगे । 18 अक्टूबर को  उमा भारती ललितपुर से हरी झंडी दिखा कर रेल रवाना करेंगी और उसी से वे आएँगी छतरपुर के रेलवे स्टेशन पर एक सभा करेंगी और खजुराहो में  शाम सवा चार बजे वे रेल मंत्री सुरेश प्रभु के साथ उदघाटन समारोह में मौजूद रहेंगी । 

                              दरअसल रेलवे की इस परियोजना के सर्वेक्षण का काम ब्रितानी शासन काल में भी हुआ था । ब्रितानी हुकूमत सिंगरौली से कोयला परिवहन के लिए इस परियोजना का नक्शा तैयार किया था । 1997 में जनता पार्टी के शासन काल में  सांसद लक्ष्मी नारायण नायक ने इस मुद्दे को संसद में उठाया । उनकी इस मांग पर सर्वेक्षण कार्य भी हुआ , तब तक सरकार बदल गई और कांग्रेस शासन काल लागू हो गया < जिसमे इस मांग पर कोई सहमति ही नहीं बनी ।  १९८० से १९८५ के दौर में कपूरचंद घुवारा के नेतृत्व में पद यात्रा और जेल भरो आंदोलन का दौर चला , लोगों ने लालितपुर में जाकर गिरफ्तारियां दी ।  उस समय के तत्कालीन विधायक  कपूर चंद्र घुवारा , सत्यव्रत चतुर्वेदी ,शंकर प्रताप सिंह बुंदेला ने विधान सभा में सर्व सम्मत प्रस्ताव ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन के लिए  पास कराया  था । इसी प्रस्ताव पर तत्कालीन मुख्य मंत्री अर्जुन सिंह ने  रीवा - सतना रेलवे लाइन स्वीकृत करा ली थी । 
                               उमा भारती ने अपने चारो लोक सभा चुनाव् में  ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन को मुद्दा बनाया था । उन्हें भी सफलता तब मिली जब केंद्र में अटल जी की  सरकार बन गई । उस समय भी उन्होंने २८ नव 1996 को संसद में उमा भारती इस योजना को जनहितकारी योजना बताते  हुए तत्काल स्वीकृति की मांग की । रेल की मांग को लेकर उन्होंने झाँसी सांसद राजेन्द्र अग्निहोत्री , मध्य प्रदेश के संघटन मंत्री कृष्ण मुरारी मोघे और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ रेल मंत्रालय में १२ जुलाई १९९६ को धरना भी दिया था । तब कहीं जाकर योजना आयोग के  तत्कालीन उपाध्यक्ष मधु दंडवते ने ११ दिसंबर १९९६ को योजना पर अपनी हरी झंडी दे दी \ 1997 _1998 के रेल बजट में उमा भारती के प्रयास से इस योजना को सम्मलित कर लिया गया । 

                                 देखा जाए तो अधिकार और आरजू के इस रेल अभियान में संघर्ष की गाथा भी है , अधिकार की आरजू भी है सियासत के षड्यंत्र भी हैं । इन सबसे निपटने में सात दशक लग गए फिर भी सपना अधूरा है । उम्मीद है की अब रफ्तार वाले प्रधान मंत्री  रेल मंत्री के काल में रेल के सपने का अधूरा भाग भी पूर्ण हो जाएगा । 










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