03 अक्टूबर, 2016

Bundelkhad Dayri_Bundelkhand State


प्रथकता  की आग में सुलगता  बुन्देलखण्ड 

रवीन्द्र व्यास 
पृथक बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण की मांग को लेकर बुंदेलखंड सुलग रहा है । चुनावी मौसम में इसकी तपन कुछ ज्यादा ही तीव्र हो जाती है । दो राज्यों में बटे हुए बुंदेलखंड को एक अलग राज्य का दर्जा देने की मांग काफी समय से की जा रही है , चुनावी मौसम में हर दल और उसका नेता  इसका समर्थन भी करता है । वोट डलने के बाद हर नेता इसे भूल जाता है । फिर वो चाहे उमा भारती हो या मायावती , राहुल गांधी हो या बीजेपी का घोषणा पत्र हो । यही कारण है की बुंदेलखंड राज्य आंदोलन की मांग को लेकर अब लोग नेताओं को घेरने लगे हैं ।  अक्टूबर माह में झाँसी आये कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को इसी मुद्दे पर बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओ ने घेरा था । जिस बुंदेलखंड में आजादी की चिंगारी 1857 से 15 वर्ष पहले केवल हरबोलों की जागरूकता के कारण फैली थी उसी बुंदेलखंड में आजादी के बाद अलग राज्य का आंदोलन टुकड़ों में विभक्त हो गया  है , जिसके चलते हर कोई इस मांग को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाता है । 
                                        उत्तर प्रदेश में चुनावी संग्राम शुरू होते ही बुंदेलखंड राज्य की मांग जोर पकड़ती है । उमा भारती ने जब झाँसी से लोकसभा चुनाव लड़ा तो उन्होंने मतदाताओ  से वायदा किया था की केंद्र में सरकार बनने के तीन माह के अंदर प्रथक बुंदेलखंड राज्य बनवा दूंगी । उनके चुनाव जीतते ही कहानी बदल गई और कहा जाने लगा की उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड क्षेत्र का अलग राज्य बनेगा । यह उन्होंने किस कारण से कहा था ये तो वही जाने पर राजनीतिक जानकार कहते हैं चंद वर्षों के बनवास के बाद अब उमा के तेवर वैसे नहीं रह गए हैं । यही कारण है की ढाई साल बाद भी इस दिशा में कुछ नहीं हुआ । जबकि बीजेपी के अतीत के घोषणा पत्र इस बात के प्रामाणिक दस्तावेज हैं की बीजेपी छोटे राज्यों की पक्षधर रही है । जहां तक उमा भारती की बात है वे व्यक्तिगत तौर पर प्रथक राज्य की पक्षधर रही हैं । 1994 में उन्होंने इस मसले पर सार्थक पहल भी की थी । पर शायद अब मोदी की माया के आगे वे अपने को इस मसले पर और मंत्रियों की तरह बेबस पाती हैं । 
                                      इसी साल जब  अक्टूबर माह  में राहुलगांधी जब खाट लेकर  झांसी आये तो बुंदेलखंड मुक्तिमोर्चा   कार्यकर्ताओं ने उन्हें सर्किट हाउस में घेर लिया और बुंदेलखंड राज्य की मांग करने लगे । उन पर आरोप लगाया की जब बसपा सरकार ने अलग बुंदेलखंड राज्य का प्रस्ताव दे दिया था तो फिर क्या वजह है की आपकी तत्कालीन मनमोहन सरकार ने इसे अनदेखा किया जब की तेलंगाना राज्य बना दिया गया । मुक्ति मोर्चा सहित तमाम संघटन अर्शे से देश में राज्य पुनर्घटन आयोग की मांग कर रहे हैं पर उनकी मांग हमेशा अनदेखी की जाती रही है ।  देखा जाए तो चुनाव के समय उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड में हल्ला तो खूब होता है पर जब वोट डलते हैं तो अलग राज्य और सुनहरे सपने पर जाति हावी हो जाती है । यही वो सबसे बड़ी वजह है की प्रथक बुंदेलखंड राज्य की मांग दबकर रह जाती है । 
                                     बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण को लेकर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में दो दर्जन से ज्यादा संघटन संघर्ष कर रहे हैं । यदा कदा ये संघठन मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा जाते हैं । बुंदलेखंड इलाके की बोली ,वाणी , संस्कृति ,साहित्य और संस्कार एक दूसरे के पूरक होने के बावजूद भी लोग अलग अलग राज्यों में  विभक्त हैं । ये अलग बात है की अलग अलग राज्यों की  राजनैतिक ताशीर दोनों के एकीकरण में सबसे बड़ी वाधा बनी हुई है । मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड वाले लोगों की मानसिकता भी अब बदल रही है । पांच दस वर्ष पहले जो लोग बुंदेलखंड अलग राज्य का विरोध कर रहे थे वे भी अब स्वीकारने लगे हैं की  अलग राज्य जरुरी है ।                                                               मध्य प्रदेश बुंदेलखंड विकाश प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह तो अब खुल कर बुंदेलखंड राज्य की मांग करने लगे हैं । बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों और  नेताओं में  आये इस परिवर्तन की कुछ वजह भी है ।  पिछले १२-१३ वर्षों में जिस तरह की सियासत मध्य प्रदेश में हुई है उसने भी लोगों को सोचने को मजबूर कर दिया । आजादी के बाद पहली बार बुंदेलखडं का कोई मुख्य मंत्री बना तो उसे बीजेपी की राजनैतिक कुटिलता ने चलता कर दिया । जबकि व्यापम जैसे आरोपों में घिरे लोग अब भी पद पर शोभायमान हैं । मध्य प्रदेश में विकाश कुछ सीमित जगहों पर तो हुआ किन्तु बुंदेलखंड का विकाश उस हिसाब  नहीं हुआ ।  डायमंड पार्क खुला नहीं , रियो टिंटो अपना कारोबार बंद कर चुकी है , इन्वेस्टर मीट में जितने एम् ओ यू  बुंदेलखंड के लिए किये गए एक भी साकार रूप नहीं ले सका , सागर में खोला गया मेडिकल कालेज यथार्थ में कम कागजी ज्यादा है । किसान आत्म ह्त्या को मजबूर और बेरोजगारों को मुख्य मंत्री रोजगार योजना से लोन नहीं मिलता । 
 बुन्देलखण्ड  मुक्ति मोर्चा के विक्रम प्रताप सिंह  राज्य निर्माण के आन्दोलन को गति देने के लिए  हर  परिवार से  एक सदस्य की भागीदारी आवश्यक मानते हैं । 
ई० पू० ३२१ तक वैदिक काल से मौर्यकाल तक का इतिहास वस्तुतबुंदेलखंड का पौराणिक-इतिहास माना जा सकता है। इसके समस्त आधार पौराणिक ग्रंथ है।
 दरअसल बुंदेलखंड का   इतिहास बताता है की वैदिक काल से मौर्य काल तक  पौराणिक इतिहास है । बुंदेलखंड शब्द मध्य काल में आया , इसके सीमांकन के बारे में कहा जाता है " की चम्बल से लेकर नर्वदा तक और यमुना नदी से लेकर टमस नदी तक का भूभाग बुंदेलखडं है । यह इलाका ऋषि मुनियों का तप स्थल रहा और भगवान् श्री राम ने अपना वनवास यही के चित्रकूट धाम में व्यतीत किया था । तो पांडव भी अपना अज्ञात वास यही काटा था । लगभग 70 वर्ग किमी में फैले इस भूभाग की लगभग ४ करोड़ की आबादी के लिहाज से यह देश का एक  बड़ा राज्य होगा ।  हीरा , सोना , यूरेनियम, लोह अयस्क  जैसी अमूल्य खनिज सम्पदा अपने गर्भ में धरे यह इलाका राजनैतिक नक्कारेपन के कारण देश के सबसे बदहाल इलाकों में गिना जाता है । यहाँ की बिजली से महानगर और बड़े नेताओं के इलाके  तो रोशन होते हैं पर यहां के लोग खुद अँधेरे में रहने को मजबूर हैं । 

कोई टिप्पणी नहीं:

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...