लक्ष्य कोई भी आसान नहीं होता और न ही असंभव। हम एक ही लक्ष्य को लेकर चलें तो वह और भी आसान हो जाता है। यह लड़ाई साढ़े 7 लाख और पचास लाख लोगों के बीच है। साढ़े सात लाख लोगों के एक एक जन प्रतिनिधि ने पचास लाख लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा दी और पचास लाख लोगों के 17 रहनुमा मौन साधे बैठे हैं। ऐसे में हम सब को आगे बढ़कर अपने लक्ष्य को पाने के लिए अकेले जागरूक ही नहीं होना आवश्यक है बल्कि अपने भाग्य विधाताओं को साते से जगाना भी जरूरी है।
मेडीकल कॉलेज दतिया में खुल रहा है और वहां की आवादी 786754 है और उसमें से भी काफी बड़ी जनसंख्या वाला क्षेत्र ग्वालियर के मेडीकल कॉलेज के नजदीक है। जबकि छतरपुर की आवादी 1762857 जो दतिया से दो गुनी है। यही नहीं छतरपुर जिले पर टीकमगढ़ जिले की 14 लाख 44 हजार 920, पन्ना जिले की 1 लाख 16 हजार 520, महोबा, बांदा और हमीरपुर की लगभग 30 लाख आवादी भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है। ऐसी स्थिति में 50 लाख आवादी वाले जनप्रतिनिधि का ठगा जाना चिंताजनक है।
मेडीकल कॉलेज की आवश्यकता पत्रकार, जनप्रतिनिधियों या धनाढ्य लोगों की नहीं है बल्कि इसकी आवश्यकता उन लोगों को अधिक है जो कीमती इलाज कराने और दूर दराज जाकर अपना इलाज कराने में असमर्थ हैं। गंभीर बीमारी से पीडि़त अधिकांश पत्रकार, जनप्रतिनिधि और धनाढ्य वर्ग या तो स्वयं के खर्चे से या शासन के खर्चे पर इलाज करा सकते हैं। किंतु गरीब, प्रभावहीन, मध्यम वर्ग अपना इलाज मेडीकल कॉलेज में करा सकता है जिसकी संख्या सर्वाधिक है। इसलिए इस लड़ाई में हम सब को एक जुट होकर खड़ा होना होगा तभी हम लक्ष्य पा सकते हैं। हम आम जन को यह भी बताने की आवश्यकता इसलिए समझते हैं ताकि कुछ लोग भ्रमित कर आंदोलन को दबाने, विफल करने का प्रयास करेंगे। इसके लिए यह समझना होगा कि इस लड़ाई के लिए किसी न किसी को अगुवा बनना ही पड़ता। जिसके लिए जुझारू जननेता जगदम्बा प्रसाद निगम की अगुवाई में पत्रकारों ने यह बीणा उठाया है। पत्रकारों को अपना इलाज कराने के लिए कई साधन है। न भी हों तो शासन ने पत्रकार बीमा, पत्रकार कल्याण चिकित्सा उपलब्ध कराई है। निगम साहब को पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता होने के कारण चिकित्सा सुविधा के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है। न ही कोई पत्रकार चिकित्सा व्यवसाय में शामिल है जिन्हें लाभ उठाने के लिए इस संघर्ष की आड़ लेनी पड़े फिर भी जन भावना के लिए हम सब एक जुट होकर इस आंदोलन में जुड़े हैं। निगम साहब की इतनी उम्र हो गई है कि वे चुनाव लडऩा तो दूर राजनीति भी नहीं कर सकते और न ही उन्हें किसी नाम कमाने की भूख है। क्योंकि वे तो छतरपुर के जुझारू नेता के नाम से पिछले 40 वर्षों से विख्यात हैं। रही बात पत्रकारों की तो पत्रकारों का नाम तो रोज हजारों पाठक पढ़ते हैं। इस स्वार्थ के लिए उनका अखबार ही पर्याप्त है। उन्हें किसी आंदोलन की आवश्यकता नहीं है।
अब आपको एक जुट करने का प्रयास कर रहे हैं। जो भी इस मुहिम को सही मानते हैं वे आगे आयें। अपने तरीके से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजें, रैलियां निकालें, हस्ताक्षर अभियान चलाएं क्योंकि यह लक्ष्य आसान नहीं है इसलिए सभी को एक जुट होकर बिना स्वार्थ के आगे बढऩा होगा। हम सभी उनके साथ हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हमने तो आग लगा दी और दूर हो गए। हम सभी जो भी इस अभियान से जुड़े हैं आपके कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहेंगे। यह लड़ाई जारी रहेगी जब तक छतरपुर में मेडीकल कॉलेज की घोषणा नहीं हो जाती।
श्याम किशोर अग्रवाल,
वरिष्ठ पत्रकार
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें