रवीन्द्र व्यास
सरकार की मंशा कितनी ही साफ़ सुथरी क्यों ना हो पर जब तक धन बल पर टिकिट पा कर चुने जाने वाले लोग जन सेवक का स्वांग रचते रहेंगे और जनता से जुडी संस्थाओ में पहुँचते रहेंगे तब तक नगर का विकाश का सरकार का सपना चौपट होता रहेगा /
मध्य प्रदेश में नगर निगम , नगर पालिका, और नगर परिषद ,नगर विकास में कितनी खरी और कितनी खोटी साबित हुईं हैं ,यह सब जानने और कसौटी पर कसने का वक्त नजदीक आ गया है / एम पी के बुंदेलखंड इलाके की अधिकाँश परिषदों पर बीजेपी का कब्जा है / लिहाजा वे अपने को विकास का सबसे बड़ा पुरोधा बताने में जुटे हैं / पर देखा जाये तो टीकमगढ़ को छोड़ कर बुंदेलखंड की किसी नगर पालिका के वर्तमान अध्यक्ष के पास इतना साहस और सामर्थ्य नहीं है की वह यह दावा कर सके की हमने नगर का काया कल्प कर दिया है /
देश में नगर पालिकाओं का गठन नगर के सुनियोजित विकाश के लिए हुआ था / इनका काम नगर वासियों की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना और उन्हें बुनियादी सुविधाऐं उपलब्ध कराना था /, ताकि आम आदमी को साफ़ सुथरा वातावरण मिल सके ,सड़क ,पानी और प्रकाश की व्यवस्था हो सके / नगर में सार्वजनिक पार्क, पुस्तकालय,संग्रहालय ,अनाथालय ,महिला वसति गृह , और वृद्धाश्रम का निर्माण हो सके / लोक तंत्र का आधार मानी जाने वाली बुंदेलखंड की नगर पालिकायें अपने इस दायित्व में कितनी सफल और कितनी असफल रही ,इसका आंकलन हालांकि सामाजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन ने किया है उसकी पूरी रिपोर्ट आना अभी बाकी है /
टीकमगढ़ के अलावा अधिकाँश नगर पालिकाओं में जनता के धन का बेजा तरीके से दुरूपयोग हुआ है / सरकार ने इन नगर पालिकाओं को करोडो रुपये ,नगर विकाश के लिए दिए / ,टीकमगढ़ के अलावा हर नगर में खाना पूर्ति कर अपने -जन सेवक के कर्तव्य को पालिका और परिषद अध्यक्ष ने पूर्ण कर लिया / हद तो तब हो जाती है जब ऐसी नगर पालिकाओं और नगर परिषद अध्यक्षों के लूट के इस खेल में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी और ऑडिटर और पार्षद भी सहयोगी हो जाते हैं / हाल ही का एक मामला सामने आया जो बढ़ा ही दिलचस्प है , बड़ी तादाद में मुख्य नगर पालिकाओं के सी एम ओ बदले गए , इनमे से अधिकांश ने कीमती कुर्सियों की खरीद करवाई / कारण पता किया तो पता चला की साहब पुरानी कुर्सी पर नहीं बैठते / एक साथ दो तीन काम हो गए साहब को नई कुर्सी मिल गई , कमीशन वालों को कमीशन मिल गया और कारोबारी का कारोबार चल गया / कमीशन ले कर ऑडिट करने वाले भी मौन रहे , अब इन ऑडिटरों की ऑडिट कौन करे ?.
नगर के सुनियोजित विकास में नगर परिषदों की अहम भूमिका मानी जाती है / यह भूमिका तभी सार्थक हो पाती है जब इन परिषदों में चुने जाने वाले जन सेवकों की निष्ठा जनता के प्रति हो - अन्यथा नगर की दशा और दिशा चौपट होने में देर नहीं लगती / ऐसा ही पिछले कुछ समय से इन नगरो में देखने को मिल रहा है / आज चुने हुए अध्यक्ष सिर्फ वर्तमान को देख कर विकास का ताना बाना बुनते हैं ,और अपने खानदान का भविष्य सुदृढ़ करने में जुट जाते हैं / आज के इस
सरकार की मंशा कितनी ही साफ़ सुथरी क्यों ना हो पर जब तक धन बल पर टिकिट पा कर चुने जाने वाले लोग जन सेवक का स्वांग रचते रहेंगे और जनता से जुडी संस्थाओ में पहुँचते रहेंगे तब तक नगर का विकाश का सरकार का सपना चौपट होता रहेगा /
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