गुफरान की हिम्मत और हिमाकत



रवीन्द्र व्यास

 अपने गुफरान भाई जान ने पार्टी के आला नेताओं को आइना दिखाने की हिम्मत क्या की उन्हें बाहर का रास्ता ,पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने दिखा दिया /दरअसल  गुफरान मियां पिछले काफी समय से गांधी -नेहरू राज परिवार को आइना दिखाने की हिमाकत करते चले आ रहे थे / हिमाकत इस लिए कहा क्यों की इस राज  परिवार के विरुद्ध बोलने वाले  किसी भी कांग्रेसी नेता को बक्शा नहीं जाता / यह सब जानने के बावजूद गुफरान भाई ने कांग्रेस  अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ यह कह कर कांग्रेस में राजनैतिक तूफ़ान ला दिया था ,कि  जिस तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने पद से इस्तीफा दे दिया था उसी तरह पार्टी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को भी पद से हट जाना चाहिए। राजनीति के यह बोल गुफरान को मीडिया में तो हीरो बनने के लिए ठीक थे ,किन्तु कांग्रेस नेताओं को  गुफरान के ये बोल बेचैन कर गए / उन्हें अपनी स्वामी भक्ति दिखाने का मौका जो मिल गया था / आनन -फानन में गुफरान मियां के खिलाफ सारे बोलों के सबूत जुटाए गए और हाई कमान को भेज दिए गए , लगे हाथ हाई  कमान ने प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को उनको पार्टी से बाहर निकालने के लिए अधिकार दे  दिया /
                              अरुण जी ने भी अपनी अरुणिमा का विस्तार कर गुफरान को पार्टी से बाहर निकाल दिया /गुफरान ए आजम मध्य प्रदेश विधान सभा और लोक सभा में मिली कांग्रेस को करारी पराजय के बाद से ही सोनिया और राहुल के  खिलाफ जम कर अपनी भड़ास निकालते  रहे हैं /  जुलाई 14 में उन्होंने  सोनिया और राहुल गांधी दोनों को उन्होंने चिट्ठी भी लिखी थी / इसके बाद बाद पत्रकारों से चर्चा में कहा  कि सोनिया गांधी अपने बेटे को नेता बनाने की कोशिश करती रही हैं। 10 साल से  यह कोशिश कर रही हैं लेकिन इसके बाद भी राहुल को भाषण तक देना नहीं आया है।
                       अब भला देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी की मुखिया एक प्रदेश के छोटे से नेता के बेलगाम बोल को कैसे बर्दास्त कर पाती , अगर इन्हे क्षमा कर दिया जाता तो कल दूसरे नेता भी कांग्रेस के इस राज वंश पर ऊँगली उठाने की जुर्रत करने लगते लिहाजा ऐसे नेताओं को अपने दल से दूर ही रखा जाये /
                    एक समय  भोपाल यूनिवर्सिटी के छात्र नेता रहे गुफराने आजम , संजय गांधी के समय से ही कांग्रेस से जुड़ गए थे , भोपाल के छात्रों पर अपनी गहरी पकड़ रखने वाले गुफरान भाई ने कभी भी अपने विचारो से समझौता नहीं किया / " मुँह में राम बगल में छुरी " वाली राजनीति से दूर रहने वाले गुफरान भाई शायद वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था में फिट नहीं बैठ पा रहे हैं , इसी कारण वे अब भी वह सब कुछ बोल जाते हैं जो आज के दौर की राजनैतिक  व्यवस्था के लिए उचित नहीं मानी जाती /  
                  यदि ये कहा जाए की यह सिर्फ गांधी -नेहरू परिवार के  राज तंत्र  तक ही सिमित है तो ऐसा भी नहीं है / देखा जाए तो छोटे से कस्बे से लेकर देश की राजधानी तक कुछ ऐसी ही राजनैतिक बयार बह  रही है , जिसमे आइना दिखाने का साहस करने वालों को उसकी हिमाकत समझा जाता है , और इस हिमाकत के लिए उसे दण्डित भी किया जाता है / आईने में अपनी तस्वीर से मुंह मोड़ने वालों की राजनैतिक दशा क्या होती है इसके गवाह वे लोग ,वे दल ,वे कस्बे वे नगर ,और वे राजधानियाँ  सभी हैं जो उनके विनाश की गवाह बनती हैं //
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