17 अक्टूबर, 2014

मंडी पर महाभारत


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रवीन्द्र व्यास 

मंडी की अध्यक्षी पाने के लिए इन दिनों जिले में महाभारत मची है /सियासत हम करते हैं तो घर फूंक तमाशा देखने के लिए नहीं करते , अपने वर्तमान और भविष्य को धन -धान्य से परिपूर्ण करने के लिए करते हैं / अब इसमें अपने यार दोस्त नामक जीव अगर अड़ंगा लगाएं तो भला कौन समझदार व्यक्ति होगा जो मौन रह जाएगा / ऐसी ही कहानी के इर्द गिर्द छतरपुर जिले की कृषि उपज मंडियां और उसके अध्यक्ष घूम रहे हैं /  जिला को -आप बैंक, नगर पालिका  के बाद कृषि उपज मंडी ही सर्वाधिक उपजाऊ ( संस्थान )स्थल माने जाते हैं / आखिर सियासत का यह चोला सुख के समुन्दर में गोते लगाने के लिए ही तो पहनते हैं / अब इन  की अध्यक्षी आसंदी पाने के लिए भला कौन मूर्ख सियासत का महारथी होगा जो मौन बैठेगा /
          हाल ही में छतरपुर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष ब्रजेश राय को अविश्वास प्रस्ताव के बाद अपनी कुर्सी त्यागना पड़ी / 12 सदस्यों में से 8 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया जिनमे 7 ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया / ब्रजेश को हटाने में कांग्रेसियों के साथ बीजेपी का भी एक गुट जुटा था / दरअसल ब्रजेश का दोष सिर्फ इतना था की वह अपनी कमाई में समाजवादी व्यवस्था नहीं ला पाये जिस कारण उन्हें जिस राजनैतिक आका ने इस पद पर आसीन कराया था वो नाराज हो गए , और राय साहब राय मशविरा कर दूसरे सत्ता के केंद्र में पहुँच गए / /दूसरी तरफ कांग्रेस का भी एक गुट जो आज के दौर में अपने को धन के बल पर सबसे ज्यादा चतुर समझता है इस खेल में बीजेपी के ब्रजेंद्र राय का समर्थन करने  में जुटा रहा / राय की इस हरकत को लूट में लिप्त राजनैतिक आका बर्दास्त नहीं कर पाये और उन्होंने वही किया जो उन्हें करना था
            छतरपुर जिले में सियासत का संघर्ष कोई नई बात नहीं है- जिले की यह कोई अकेली मंडी नहीं है , इसके पूर्व भी राजनगर कृषि उपज मंडी में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका  है / ये अलग बात है की वह पास नहीं हो पाया और अध्यक्ष  ने सत्ता धारी दल के साथ ही  अपनी दोस्ती बंनाने में अपनी भलाई समझी / 
        आने वाले समय में इसी तरह का राजनैतिक घमासान हरपालपुर कृषि उपज मंडी में  भी देखने को मिल सकता है / यहां के  बब्बू गुप्ता ने  अध्यक्ष पद पाने के लिए कांग्रेस और सपा से हाथ मिला लिया था अध्यक्ष बनने के बाद वे वापस अपनी पार्टी बीजेपी में आ गए , वर्तमान में गुप्ता जी  विधायक मानवेन्द्र सिंह के ख़ास माने जाते हैं /हाल ही में उनके सात समर्थकों में से एक ने बागी स्वर अपना लिए हैं , इस बागी साथी को मनाने के लिए बब्बू भाई ने गरौली मार्ग पर दरगाह के समीप लम्बी चर्चा भी , आपस के गिले -शिकवे दूर करने का प्रयास भी किया // अध्यक्ष जी की बात का कितना असर बागी साथी पर पड़ा इसकी  बानगी थोड़ी ही देर में देखने को मिल गई / बागी ने अध्यक्ष की बातों को जस का तस मणि कान्त गुप्ता तक पहुंचा दिया / 
सरकार ने कृषि उपज मंडिया बनाकर किसानो को यह भरोषा दिलाने का प्रयास किया था की अब उसे बिचोलियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी ,उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा / आज ये मंडियां किसानो के शोषण का सबसे बड़ा अड्डा बन गई हैं , इनमे पदासीन होने वाले राजनैतिक नेता शोषकों के संरक्षक बनकर सामने आ रहे हैं / यही कारण है कि मंडी अध्यक्ष का पद पाने के लिए लाखो रु एक-एक सदस्य पर बरसाए जाते हैं / मंडी में अनाज ही नहीं----- बहुत कुछ नीलाम होता है , जरुरत है तो सिर्फ खरीदारों की /

नगर सरताज के लिए संघर्ष


रवीन्द्र व्यास 
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सियासत के इन तथाकथित सामाजिक संतो से जनता सिर्फ प्रवचन ही ना सुने बल्कि अपनी जिज्ञासाओं का भी समाधान करे / यह ना सिर्फ मतदाता जागरूकता का परिचायक होगा बल्कि लोकतंत्र के लिए भी एक शुभ लक्षण होगा / आखिर देश के हर नागरिक को यह जानने का अधिकार है की वह अपने प्रतिनिधि से पूंछे की पांच वर्षो में उसने अथवा उसकी पार्टी ने नगर और समाज के विकाश के लिए क्या किया और अपने और अपने समर्थको के विकाश के लिए क्या किया ? कौन से दस अच्छे काम किये जिसमे धन का दुरूपयोग नहीं हुआ ? ऐसा कौन सा कार्य किया जो समाज को सदा याद रहेगा ?
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मध्य प्रदेश में नवम्बर- दिसंबर में नगरीय निकाय चुनाव होना है / इन चुनावो को लेकर कांग्रेस और बीजेपी अपनी -अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है / कांग्रेस  इस बार  उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रचार के अभियान तक में फूंक -फूंक कर कदम रखने की नीति पर चल रही है / वहीँ बीजेपी हर दरवाजे तक पहुँचने और देश ,प्रदेश , नगर-पालिका ,नगर परिषद और नगर निगम में (बीजेपी काल ) किये गए कार्यो और उपलब्धियों को बताने का अभियान आज से  शुरू कर दिया  है / राजनैतिक दलों की तरह मतदाताओ का भी यह दायित्व बनता है कि वे इन रहनुमाओ से सवाल पूंछें कि नगरीय क्षेत्र के विकाश और स्वयं के विकाश के लिए क्या क्या किया  आपकी पार्टी के प्रतिनिधि ने /जब आप संतुष्ट हो जाएं इनके जबाबों से तब चुने अपने नगर का सरताज /
                                      मध्य प्रदेश में जमीन छोड़ती कांग्रेस के लिए नगर निकाय के चुनाव अपना आधार बनाने का एक बड़ा मौका होगा / इसी लिए कांग्रेस ने इस बार प्रत्याशी चयन में अतरिक्त सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है / आया -राम गया -राम  और दो नावों पर सवारी करने वालो से कांग्रेस पार्टी दूरी बनाएगी / ऐसे लोगों को अब कांग्रेस टिकिट नहीं देगी जो बीजेपी से कांग्रेस में आए / और ऐसे लोगो को भी टिकिट नहीं दी जायेगी जिनके परिवार के कुछ सदस्य बीजेपी में और कुछ कांग्रेस में होंगे / वार्ड में सिर्फ उसी वार्ड के निवासी कांग्रेस कार्यकर्ता को टिकिट दी जायेगी / चुनाव जितने के लिए कांग्रेस दो तरह के घोषणा पत्र बनएगी एक स्थानीय और एक प्रदेश स्तर का होगा / साथ ही इस बार कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को आर्थिक मदद भी नहीं करेगी / चुनाव लड़ने वाला अपने स्तर पर आर्थिक संसाधन जुटाएगा / पार्टी  नेताओ को शायद यह ज्ञान बीजेपी से मिल गया है की जनता से ही मदद और वोट लेकर उसी पर पांच साल शासन करो / इस लिए कांग्रेस भी अब हर द्धार पर वोट और नोट मांगती नजर आएगी /
                                      बढ़िया है अरुण बाबू देर आये दुरुस्त आये ? वहीँ बीजेपी  इस बार के नगरीय निकाय चुनाव में किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है / शिवराज  काल के भक्त ये जानते हैं कि  यदि इसमें चूक हुई तो इसका असर उनकी छवि पर पडेगा /और केंद्र में विराजमान मोदी की सेना उन्हें  कुचलने में कोई कोताही नहीं करेगी / आखिर मोदी का सपना जो साकार करना है कांग्रेस मुक्त भारत का / इस लिए बीजेपी ने अभी से हर नगरीय क्षेत्र के लिए प्रभारी बना दिए / नवरात्रि के शुभ दिनों में अपना अभियान शुरू कर दिया हर परिवार से मिलने का / बीजेपी नेता हर परिवार को अपने किये कार्यो की कथा बताएँगे /
                                    सियासत के इन तथाकथित सामाजिक संतो से जनता सिर्फ प्रवचन ही ना सुने बल्कि अपनी जिज्ञासाओं का भी समाधान करे / यह ना सिर्फ मतदाता जागरूकता का परिचायक होगा बल्कि लोकतंत्र के लिए भी एक शुभ लक्षण होगा / आखिर देश के हर नागरिक को यह जानने का अधिकार है की वह अपने प्रतिनिधि से पूंछे की पांच वर्षो में उसने अथवा उसकी पार्टी ने नगर और समाज के विकाश के लिए क्या किया और अपने और अपने समर्थको के विकाश के लिए क्या किया ? कौन से दस अच्छे काम किये जिसमे धन का दुरूपयोग नहीं हुआ ? ऐसा कौन सा कार्य किया जो समाज को सदा याद रहेगा ? 
                                     लोकतंत्र की नीव मजबूती के लिए शुरुआत कही से तो करनी होगी ,-/ अन्यथा इन राजनैतिक संतों के प्रवचन हम सुनेगें हमारी आने वाली पीढ़ी सुनेगी और स्थितियां जस की तस बनी रहेंगी । 

दायित्वों से दूर नगर पालिकाऐं



रवीन्द्र  व्यास 

सरकार की मंशा कितनी ही साफ़ सुथरी क्यों ना हो पर जब तक धन बल पर टिकिट पा कर   चुने जाने वाले लोग जन सेवक का स्वांग रचते रहेंगे और  जनता से जुडी संस्थाओ में पहुँचते रहेंगे तब तक नगर का विकाश का सरकार का सपना  चौपट होता रहेगा /  

मध्य प्रदेश में नगर निगम , नगर पालिका, और नगर परिषद   ,नगर विकास में कितनी खरी और कितनी खोटी साबित हुईं हैं ,यह सब जानने और कसौटी पर कसने का वक्त नजदीक आ गया है / एम पी के  बुंदेलखंड इलाके  की अधिकाँश परिषदों पर बीजेपी का कब्जा  है / लिहाजा वे अपने को विकास का सबसे बड़ा पुरोधा बताने में जुटे हैं / पर देखा जाये तो  टीकमगढ़ को छोड़ कर बुंदेलखंड की किसी नगर पालिका के  वर्तमान अध्यक्ष के पास इतना साहस और सामर्थ्य नहीं है की वह यह दावा कर सके की हमने नगर का काया कल्प कर दिया है /
                                   देश में नगर पालिकाओं का गठन नगर के सुनियोजित विकाश के लिए हुआ था /  इनका काम नगर वासियों की बुनियादी समस्याओं का समाधान  करना और उन्हें  बुनियादी सुविधाऐं  उपलब्ध कराना था /, ताकि आम आदमी को साफ़ सुथरा वातावरण मिल सके ,सड़क ,पानी और प्रकाश की व्यवस्था हो सके / नगर में सार्वजनिक पार्क, पुस्तकालय,संग्रहालय  ,अनाथालय ,महिला वसति  गृह , और वृद्धाश्रम का निर्माण हो सके / लोक तंत्र  का आधार मानी जाने वाली बुंदेलखंड की  नगर पालिकायें अपने इस दायित्व में कितनी सफल और कितनी असफल रही ,इसका आंकलन हालांकि  सामाजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन ने किया है उसकी पूरी रिपोर्ट आना अभी बाकी है /
                                  टीकमगढ़ के अलावा अधिकाँश नगर पालिकाओं में जनता के धन का बेजा तरीके से दुरूपयोग हुआ है /  सरकार ने इन नगर पालिकाओं को करोडो रुपये ,नगर विकाश के लिए दिए / ,टीकमगढ़ के अलावा हर  नगर में खाना पूर्ति कर अपने -जन सेवक के कर्तव्य को पालिका और परिषद अध्यक्ष ने पूर्ण कर लिया / हद तो तब हो जाती है जब ऐसी नगर पालिकाओं और नगर परिषद अध्यक्षों के लूट के इस खेल में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी और ऑडिटर और पार्षद भी  सहयोगी हो जाते हैं / हाल ही का एक  मामला सामने आया जो बढ़ा ही दिलचस्प है , बड़ी तादाद में मुख्य नगर पालिकाओं के सी एम ओ बदले गए , इनमे से अधिकांश ने  कीमती कुर्सियों की  खरीद करवाई / कारण पता किया तो पता चला की साहब पुरानी कुर्सी पर नहीं बैठते / एक साथ दो तीन  काम हो गए साहब को नई कुर्सी मिल गई , कमीशन वालों को कमीशन मिल गया और कारोबारी का कारोबार चल गया / कमीशन ले कर ऑडिट करने वाले भी मौन रहे , अब इन ऑडिटरों की ऑडिट कौन करे ?. 
                                     नगर के सुनियोजित विकास में नगर परिषदों की अहम भूमिका मानी जाती है / यह भूमिका तभी सार्थक हो पाती है जब इन परिषदों में चुने जाने वाले जन सेवकों की निष्ठा जनता के प्रति हो  - अन्यथा नगर की दशा और दिशा चौपट होने में देर नहीं लगती / ऐसा ही पिछले कुछ समय से इन नगरो में देखने को मिल रहा है / आज चुने हुए अध्यक्ष सिर्फ वर्तमान को देख कर विकास का ताना बाना बुनते हैं ,और अपने खानदान का भविष्य सुदृढ़ करने में जुट जाते हैं / आज के इस 
                                           सरकार की मंशा कितनी ही साफ़ सुथरी क्यों ना हो पर जब तक धन बल पर टिकिट पा कर   चुने जाने वाले लोग जन सेवक का स्वांग रचते रहेंगे और  जनता से जुडी संस्थाओ में पहुँचते रहेंगे तब तक नगर का विकाश का सरकार का सपना  चौपट होता रहेगा /  

गुफरान की हिम्मत और हिमाकत



रवीन्द्र व्यास

 अपने गुफरान भाई जान ने पार्टी के आला नेताओं को आइना दिखाने की हिम्मत क्या की उन्हें बाहर का रास्ता ,पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने दिखा दिया /दरअसल  गुफरान मियां पिछले काफी समय से गांधी -नेहरू राज परिवार को आइना दिखाने की हिमाकत करते चले आ रहे थे / हिमाकत इस लिए कहा क्यों की इस राज  परिवार के विरुद्ध बोलने वाले  किसी भी कांग्रेसी नेता को बक्शा नहीं जाता / यह सब जानने के बावजूद गुफरान भाई ने कांग्रेस  अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ यह कह कर कांग्रेस में राजनैतिक तूफ़ान ला दिया था ,कि  जिस तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने पद से इस्तीफा दे दिया था उसी तरह पार्टी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को भी पद से हट जाना चाहिए। राजनीति के यह बोल गुफरान को मीडिया में तो हीरो बनने के लिए ठीक थे ,किन्तु कांग्रेस नेताओं को  गुफरान के ये बोल बेचैन कर गए / उन्हें अपनी स्वामी भक्ति दिखाने का मौका जो मिल गया था / आनन -फानन में गुफरान मियां के खिलाफ सारे बोलों के सबूत जुटाए गए और हाई कमान को भेज दिए गए , लगे हाथ हाई  कमान ने प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को उनको पार्टी से बाहर निकालने के लिए अधिकार दे  दिया /
                              अरुण जी ने भी अपनी अरुणिमा का विस्तार कर गुफरान को पार्टी से बाहर निकाल दिया /गुफरान ए आजम मध्य प्रदेश विधान सभा और लोक सभा में मिली कांग्रेस को करारी पराजय के बाद से ही सोनिया और राहुल के  खिलाफ जम कर अपनी भड़ास निकालते  रहे हैं /  जुलाई 14 में उन्होंने  सोनिया और राहुल गांधी दोनों को उन्होंने चिट्ठी भी लिखी थी / इसके बाद बाद पत्रकारों से चर्चा में कहा  कि सोनिया गांधी अपने बेटे को नेता बनाने की कोशिश करती रही हैं। 10 साल से  यह कोशिश कर रही हैं लेकिन इसके बाद भी राहुल को भाषण तक देना नहीं आया है।
                       अब भला देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी की मुखिया एक प्रदेश के छोटे से नेता के बेलगाम बोल को कैसे बर्दास्त कर पाती , अगर इन्हे क्षमा कर दिया जाता तो कल दूसरे नेता भी कांग्रेस के इस राज वंश पर ऊँगली उठाने की जुर्रत करने लगते लिहाजा ऐसे नेताओं को अपने दल से दूर ही रखा जाये /
                    एक समय  भोपाल यूनिवर्सिटी के छात्र नेता रहे गुफराने आजम , संजय गांधी के समय से ही कांग्रेस से जुड़ गए थे , भोपाल के छात्रों पर अपनी गहरी पकड़ रखने वाले गुफरान भाई ने कभी भी अपने विचारो से समझौता नहीं किया / " मुँह में राम बगल में छुरी " वाली राजनीति से दूर रहने वाले गुफरान भाई शायद वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था में फिट नहीं बैठ पा रहे हैं , इसी कारण वे अब भी वह सब कुछ बोल जाते हैं जो आज के दौर की राजनैतिक  व्यवस्था के लिए उचित नहीं मानी जाती /  
                  यदि ये कहा जाए की यह सिर्फ गांधी -नेहरू परिवार के  राज तंत्र  तक ही सिमित है तो ऐसा भी नहीं है / देखा जाए तो छोटे से कस्बे से लेकर देश की राजधानी तक कुछ ऐसी ही राजनैतिक बयार बह  रही है , जिसमे आइना दिखाने का साहस करने वालों को उसकी हिमाकत समझा जाता है , और इस हिमाकत के लिए उसे दण्डित भी किया जाता है / आईने में अपनी तस्वीर से मुंह मोड़ने वालों की राजनैतिक दशा क्या होती है इसके गवाह वे लोग ,वे दल ,वे कस्बे वे नगर ,और वे राजधानियाँ  सभी हैं जो उनके विनाश की गवाह बनती हैं //

08 अक्टूबर, 2014

महामति प्राणनाथ की सर्वधर्म समन्वय अवधारणा



प्रो. जेपी शाक्य
विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र, महाराजा महाविद्यालय
महामति प्राणनाथ आत्म के धनी, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, उच्च कोटि के साहित्यकार, नीतिकार, कलाकार, विश्व कवि, प्रख्यात संगीतकार, गंभीर चिंतक, समाज सुधारक, प्रणामी धर्म के प्रणेता, धर्म समन्वयक एवं उच्च कोटि के दार्शनिक थे। सामाजिक एवं धार्मिक सद्भाव के वे ध्वजवाहक थे। दार्शनिक और नैतिक क्षेत्र में वे समस्त जीवों के परमधाम के पथ प्रदर्शक थे।

 महामति प्राणनाथ का जन्म सन् 1618 .में आश्विन कृष्ण चतुर्दशी रविवार को जामनगर गुजरात में हुआ था। आपके पिता श्री केशव ठाकुर जामनगर राज्य के प्रधान सामात्य (दीवान) थे तथा माता धनबाई श्रीकृष्ण भक्ति की साक्षात मूर्ति थी। बचपन में आपका नाम मिहिरराज या मेहराज था। बारह वर्ष की आयु में 1630 . में हेमराज की मुलाकात सदगुरू श्री निजानंद स्वामी, श्री देवचन्द्र जी से हुई। 1655 . में विश्व जागनी का अन्तिम संदेश मेहराज जी को देकर, श्री देवचन्द्र जी ने ÓÓसुख शीतल करूँ संसारÓÓ का दायित्व सौंपकर उन्हेंं धर्म उत्तराधिकारी घोषित किया। श्री प्राणनाथ जी सन् 1655 एवं 1663 में नवानगर के दीवान बने, लेकिन उन्होंने दार्शनिक एवं आध्यात्मिक 'ज्योति लेकर भारत ही नहीं, बल्कि अरब देशों की भी यात्रायें कीं और जागनी दर्शन का प्रचार प्रसार तथा प्रणामी धर्म की स्थापना प्रचार प्रसार किया।
महामति प्राणनाथ ने हामी और सामी दोनों प्रचलित परम्पराओं की समन्वित मान्यताओं को कुलजमस्वरूप या तारतमवाणी में अवतरित किया है। कुलजमस्वरूप में कुल चौदह ग्रन्थ-श्रीरास, प्रकाश, शट्रूती, कलश, सनंध, खुलासा, खिलवत, परिक्रमा, सागर, सिनगार, सिन्धी, मारफतसागर, किरन्तन और क्यामतनामा हैं। गुजराती से हिन्दी में रूपांतरण होने से प्रकाश और कलश हिन्दुस्तानी दो ग्रन्थ और जोड़े गये
प्रणामी वंाडमय में कवि हृदय संतों की परम्परा रही है। प्रणामी परम्परा में महामति प्राणनाथ की रचनाएं स्वयं श्रेष्ठ काव्य परम्परा में प्रणित है। महामति प्राणनाथ के पश्चात् करूणासखी (करूणावती) नवरंग स्वामी, लालदास, अहदीमुकुन्दस्वामी, सनेहसखी, महाराज छत्रसाल, स्वामीवृजभूषण, बख्शी, हंसराज, ब्रह्ममुनि ज्ञानदास, युगलदास, चैतनदास, आदि प्रमुख हैं।
प्रणामी धर्म मूलत: श्रीकृष्ण भक्ति पर आधारित है। भगवान श्रीकृष्ण का 11 वर्ष 52 दिन का पवित्र स्वरूप प्रणामी धर्म में पूज्य आराध्य है। श्री राज जी के साथ श्री श्यामा जी ही ब्रह्मात्माओं के लिए सर्वस्व है। ब्रजरास, महारास तथा जागनीरास भक्तों के लिए अखण्ड सुख का प्रदाता है। संसार के सभी धर्मो की एकता प्रणाली धर्म में देखने को मिलती है।
वस्तुत: प्राणनाथ जी का समन्वयवादी दृष्टिकोण ही सर्वधर्म समन्वय की अवधारणा विकसित करने में सहायक सिद्ध हुआ है। धर्म समन्वय की भाव भूमि पर प्रतिष्ठित है, प्रणामी धर्म। प्रणामी धर्म एक ऐसा विश्वधर्म है जहां समस्त धर्म अपनी पूरी प्रतिष्ठा के साथ संयुक्त हो जाते हैं और अपने सिद्धंातों से आगे मानव को परमधाम तक ले जाता है।  जीवात्मा परमात्मा का दर्शन कर अखण्ड सुख का अनुभव करती है। प्रणामी धर्म विश्व हितकर धर्म है इनमें केवल मानव कल्याण का भाव है बल्कि पशु पक्षियों एवं वनस्पति जगत तक महा करूणा का प्रसार होता है। संपूर्ण चर अचर जगत यहाँ अखण्ड सुख प्राप्ति का मार्ग पा सकता है। सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय को अवधारणा यहाँ साकार हो उठती है। विश्वकल्याणार्थ प्रणामी धर्म युग-युगोकं तक संसार में प्रतिष्ठित रहेगा और मनवता का पथ प्रदर्शन करता रहेगा।
प्रणामी धर्म की मान्यता है कि -
साहेब आये इन जिमी, कारज करने तीन।
सबका झगड़ा मेंटने, या दुनिया या दीन।।

आज के दिन प्रत्येक प्रणामी धनुयायी अपने जीवन के सबसे बडे उत्सव के रूप में मनाते है और पन्ना धाम आगमन पर अपने जीवन को धन्य मानते है।

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...