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रवीन्द्र व्यास
मंडी की अध्यक्षी पाने के लिए इन दिनों जिले में महाभारत मची है /सियासत हम करते हैं तो घर फूंक तमाशा देखने के लिए नहीं करते , अपने वर्तमान और भविष्य को धन -धान्य से परिपूर्ण करने के लिए करते हैं / अब इसमें अपने यार दोस्त नामक जीव अगर अड़ंगा लगाएं तो भला कौन समझदार व्यक्ति होगा जो मौन रह जाएगा / ऐसी ही कहानी के इर्द गिर्द छतरपुर जिले की कृषि उपज मंडियां और उसके अध्यक्ष घूम रहे हैं / जिला को -आप बैंक, नगर पालिका के बाद कृषि उपज मंडी ही सर्वाधिक उपजाऊ ( संस्थान )स्थल माने जाते हैं / आखिर सियासत का यह चोला सुख के समुन्दर में गोते लगाने के लिए ही तो पहनते हैं / अब इन की अध्यक्षी आसंदी पाने के लिए भला कौन मूर्ख सियासत का महारथी होगा जो मौन बैठेगा /
हाल ही में छतरपुर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष ब्रजेश राय को अविश्वास प्रस्ताव के बाद अपनी कुर्सी त्यागना पड़ी / 12 सदस्यों में से 8 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया जिनमे 7 ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया / ब्रजेश को हटाने में कांग्रेसियों के साथ बीजेपी का भी एक गुट जुटा था / दरअसल ब्रजेश का दोष सिर्फ इतना था की वह अपनी कमाई में समाजवादी व्यवस्था नहीं ला पाये जिस कारण उन्हें जिस राजनैतिक आका ने इस पद पर आसीन कराया था वो नाराज हो गए , और राय साहब राय मशविरा कर दूसरे सत्ता के केंद्र में पहुँच गए / /दूसरी तरफ कांग्रेस का भी एक गुट जो आज के दौर में अपने को धन के बल पर सबसे ज्यादा चतुर समझता है इस खेल में बीजेपी के ब्रजेंद्र राय का समर्थन करने में जुटा रहा / राय की इस हरकत को लूट में लिप्त राजनैतिक आका बर्दास्त नहीं कर पाये और उन्होंने वही किया जो उन्हें करना था
छतरपुर जिले में सियासत का संघर्ष कोई नई बात नहीं है- जिले की यह कोई अकेली मंडी नहीं है , इसके पूर्व भी राजनगर कृषि उपज मंडी में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है / ये अलग बात है की वह पास नहीं हो पाया और अध्यक्ष ने सत्ता धारी दल के साथ ही अपनी दोस्ती बंनाने में अपनी भलाई समझी /
आने वाले समय में इसी तरह का राजनैतिक घमासान हरपालपुर कृषि उपज मंडी में भी देखने को मिल सकता है / यहां के बब्बू गुप्ता ने अध्यक्ष पद पाने के लिए कांग्रेस और सपा से हाथ मिला लिया था अध्यक्ष बनने के बाद वे वापस अपनी पार्टी बीजेपी में आ गए , वर्तमान में गुप्ता जी विधायक मानवेन्द्र सिंह के ख़ास माने जाते हैं /हाल ही में उनके सात समर्थकों में से एक ने बागी स्वर अपना लिए हैं , इस बागी साथी को मनाने के लिए बब्बू भाई ने गरौली मार्ग पर दरगाह के समीप लम्बी चर्चा भी , आपस के गिले -शिकवे दूर करने का प्रयास भी किया // अध्यक्ष जी की बात का कितना असर बागी साथी पर पड़ा इसकी बानगी थोड़ी ही देर में देखने को मिल गई / बागी ने अध्यक्ष की बातों को जस का तस मणि कान्त गुप्ता तक पहुंचा दिया /
सरकार ने कृषि उपज मंडिया बनाकर किसानो को यह भरोषा दिलाने का प्रयास किया था की अब उसे बिचोलियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी ,उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा / आज ये मंडियां किसानो के शोषण का सबसे बड़ा अड्डा बन गई हैं , इनमे पदासीन होने वाले राजनैतिक नेता शोषकों के संरक्षक बनकर सामने आ रहे हैं / यही कारण है कि मंडी अध्यक्ष का पद पाने के लिए लाखो रु एक-एक सदस्य पर बरसाए जाते हैं / मंडी में अनाज ही नहीं----- बहुत कुछ नीलाम होता है , जरुरत है तो सिर्फ खरीदारों की /