12 जनवरी, 2014

ड्रोन करेगा अब बाघो की निगरानी



पन्ना /छतरपुर  ,पन्ना और  छतरपुर जिले में फैले टाईगर रिजर्व फिर से बाघ विहीन ना हो जाए इसके लिए पार्क प्रबंधन ने कमर कस ली है /वर्ष 2009 में यह टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था, इसी के चलते अब पार्क प्रबंधन कोई भी ख़तरा मोल लेना नहीं चाहता /  बाघों सहित अन्य जानवरों की निगरानी के लिए अब ड्रोन (विमान ) मंगवा लिए गए हें /  शुक्रवार को दो मानव रहित विमान (ड्रोन )से निगरानी शुरु कि गई ।  पन्ना में हो रहा यह प्रयोग यदि सफल रहा तो आने वाले समय में इस योजना को देश के अन्य नेशनल पार्क में भी लागू किया जाएगा /
 भारतीय वन जीव संस्थान देहरादून ,विश्व प्राकृति निधि, अन्तर्राष्ट्रीय कंवर्जेशन, ड्रोंस स्वीटजरलैंड, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और मप्र वन विभाग के सँयुक्त प्रयास से  यह निगरानी प्रायोगिक तौर पर की जा रही है। कन्वर्जेशन ड्रोंस स्वीटजरलैण्ड संस्था के द्वारा दुनियाभर में अलग-अलग देशों में मानव रहित विमानों से वन्य प्राणियों का सर्वेक्षण सफ लतापूर्वक किया गया है।  इसके लिए दो मानव रहित विमान पन्ना टाइगर रिजर्व में लाये  गए हैं। इस तकनीक का पहली बार उपयोग पन्ना टाईगर रिजर्व में किया जा रहा है। इसके पहले असंम के कांजीरंगा नेशनल पार्क में इसका प्रयोग करने का प्रयाश हुआ था किन्तु सुरक्षा कारणो के चलते वहाँ इसकी अनुमति नहीं मिली थी / 
यह  मानव रहित विमान ड्रोन लगभग  वजन करीब 700  ग्राम है। इसमें संवेदनशील कैमरे लगे हुए हैं। इसकी गति अधिकतम 50 किलो मीटर प्रति घंटा है। यह रिमोर्ट से संचालित होता है। आटो पायलट होने के कारण यह भेजे जाने वाले स्थान पर दोबारा वापस आ जाता है।   वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इसे आसानी से संचालित कर सकते हैं।
इनसे दो दिनों में होने वाली निगरानी में इन विमानों के वन्य जीवों के प्रबंधन और संरक्षण में इस्तेमाल करने के संबंध में विश्लेषण किया जाएगा।  
 576 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में पन्ना और छतरपुर जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व फैला है /1981 में इसकी स्थापना हुई और १९८४ में इसे  टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला /  वर्ष 2009 में यह टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था/नवम्बर 2009 से बाघ पुनस्र्थापना योजना शुरू की गई थी।  बाघ पुनस्र्थापना योजना के तहत  बाघों की संख्या बढ़ाने  में मिसाल पेश की है। । अब यहां बाघों की संख्या 23 तक पहुंच गई है।   
  बाघ पुनस्र्थापना योजना के मुताबिक कुल 6 संस्थापक बाघों को पन्ना लाया जाना था लेकिन पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी से एक नर एवं कान्हा और बांधवगढ़ से चार बाघिन सहित 5 संस्थापक बाघ यहां लाए गए थे। तकनीकी कारणों से एक अन्य नर बाघ को पन्ना लाने की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया था।
बाहर से यहां पर लाई गई चार बाघिनों में से अभी तक बाघिन टी.1 ने दो बार तथा टी.2 व टी. 4 ने तीन-तीन बार शावकों को जन्म दिया है। इस योजना के तहत पन्ना में कई अभिनव प्रयोग भी हुए हैं। इनमें पालतू अनाथ दो बाघिनों को जंगली बनाने का प्रयोग भी शामिल है।

पार्क के संचालक श्रीनिवास मूर्ति बताते हें कि  ये वन एवं वन्य प्राणी प्रबंधन  यू ए वी तकनिकी है  un mend  vhical  का इसको ड्रोन भी कहते हें इसको प्रयोगात्मक तौर  पर भारत में दूसरी बार चलाया जा रहा है पन्ना टाइगर रिजर्व में / पन्ना टाइगर रिजर्व  में बाघों के पुनर्स्थापन का काम चल रहा है जिसमे उच्च तकनिकी का उपयोग हो रहा है इस तकनिकी से बाघों के अनुश्रवण में कितना बेहतर उपयोग कर सकते हें उस बात को देखा जाएगा / अन्य वन  सम्बंधित काम हें उसको भी टेस्ट किया जाएगा /सुरक्षा में कितना सफल साबित होता है उसके बारे में टेस्ट किया जाएगा /  
ये प्रयोग जून तक चलेगा।  बीच- बीच में ये लोग आकर हैम लोगो को प्रशिक्षण देते रहेंगे /ये प्रयोग बहुत अच्छा साबित होगा पन्ना टाइगर रिजर्व  में बाघों कि स्थिति बहुत अच्छी है , जो डिस्पर्सबिल में आज कि जो स्थिति है हर  टाइगर रेडिओ कालर पहना हुआ है उसमें जो मानव संसाधन लगता है उसकी जगह इसका उपयोग करने का रास्ता खुला है /

वहीँ भारतीय वन्य जीव  संस्था के डॉ ई।  रमेश कुमार कहते हें कि ड्रोन बेसिकली काफी काम कर सकता है वीडिओ डॉक्युमेंटेशन फ़ोटो डॉक्युमेंटेशन कर सकता है / बाद में हैम लोग थर्मल केमरा लगाने की कोशिश करेंगे  रेडिओ टेलीमेट्री  जो टाइगर को मॉनिटर कर रहे उसके लिए उपयोग कि कोशिश कर रहे हें ये प्रोजेक्ट पन्ना में प्रयोग करते हुए पूरे  देश कि लिए कोशिश कर रहे हें । स्विट्जरलेंड के ड्रोन्स कन्सर्वेशन के लयान कहते हें कि  संस्था ने दो वर्ष पहले काम शुरू किया है संस्था का उद्देश्य बगैर किसी लाभ के ऐसी तकनिकी उपलब्ध कराना जिससे वन्य जीवो पर निगरानी  रखी जा सके , हमने इंडोनेशिया। , नेपाल  जैसे देशो में इसका प्रयोग किया है और अब भारत में इसका पहली बार प्रयोग किया जा रहा है /

                       वन्य प्राणी विषेशज्ञ  रघु चुणावत  पार्क प्रबंधन के इस प्रयास को सराहनीय तो मानते हें किन्तु वे कहते हें कि उन तमाम स्थितियों कि भी समीक्षा होनी चाहिए जिसके चलते पार्क बाघ विहीन हुआ / उन्होने बताया कि जो रिपोर्ट आई हे उसमे बाघो के विनाश का मुक्य कारण बाघ का पार्क एरिया से बाहर जाना बताया गया है / अब ये ड्रोन क्या पार्क के बाहर भी नजर रख पाएंगे 

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