03 अक्टूबर, 2011

कुबेर का कुआँ




कुआँ  (कूप) /  लोगों की प्यास  बुझाने वाले कुआँ की कहानी भी कितनी अजीब है  | पहले कुआँ खुदवाकर लोग पुण्य कमाते थे | राजा अपनी प्रजा के लिए कुँए खुदवाते थे , ताकि उसकी प्रजा प्यासी ना रहे | लोग जब घर से निकलते थे तो अपने सामान के साथ लोटा ,डोरिया साथ रखते थे ताकि किसी कुँए पर अपनी प्यास बुझा सकें | दुनिया में कुआँ के महत्त्व का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है  की कुँए को लेकर कई तरह की कहावतें समाज में प्रचलित हें | 
बुंदेलखंड में एक इलाका है नोगांव यहाँ अंग्रेजों का पोलिटिकल एजेंट रहता था , उसने भी इस इलाके में कई कुँए बनवाये | 
समय बदला देश आजाद हो गया जनसेवक का तमगा लगा कर लोग देश चलाने लगे | पर उनका व्यवहार क्रूर राजा की तरह हो गया ठीक वेसे ही जैसे अंग्रेजो और लुटेरे मुगलों का रहा | दान धर्म से इन्हे भला क्या वास्ता ये तो स्वयं को भगवान् मानने लगे | इनकी दिलचस्पी पानी वाले कुआँ से ज्यादा तेल वाले कुँए के लिए हो गई | जनता जनार्दन की प्यास बुझाने के लिए इन्होने धरती के सीने पर अनगिनत छेद करवा दिए| बापू का नाम ले-ले कर गाँव में पंचायतें बनवा दी | पंचायतों को पंच  परमेश्वर के हवाले कर दिया | इन पर्मेश्वारों ने भी अपना  आदर्श जनसेवकों को मान लिया | जिन कुओं के खुदवाने से  पुण्य मिलता था ,ये वे कुँए ही डकारने लगे |
पिछले दिनों पन्ना में एक जनसेवक के भाई के द्वारा सात कुँए डकारने का मामला अभी निपटा भी नहीं था , की 
छतरपुर  जिले की काबर ग्राम पंचायत का कुआं का मामला सामने आ गया |  गाँव वालों के लिए यह कुआँ  रहस्यमय हो गया है | १९८३ -८४ में बना यह कुआँ अब तक बन रहा है | दरअसल यह कुआँ सरपंचों के लिए किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं है |
१९८३-८४ में जब यह गाँव सीलोन पंचायत में आता था तब सरपंच परम लाल मिश्रा ने इसे १५ हजार की लागत से बनवाया था | 
१९९५- यह  गाँव एक अलग पंचायत हो गया , गाँव के सरपंच बने बालकिशन गौड़  जो २००४ तक रहे | इस दौरान इस कुँए के निर्माण पर मूलभूत और जे आर.वाई.योजना की राशि का ८५ हजार रुपये खर्चा दिखाया गया | 
२००७ में  यहाँ की सरपंच बनी कट्टु बाई अहिरवार  ,इसी योजना के तहत इसमे ४० हजार की राशि खर्च दिखाई गई 
२०१० में अब यहाँ के सरपंच बने हें हरिशंकर पटेल , उन्होने अब इसे नरेगा के तहत बनाने का फैसला किया है , इसके लिए उन्होने ३लाख ६ हजार का प्रस्ताव किया था | उनके प्रस्ताव को तकनिकी स्वीकृति  एस.ड़ी.ओ. पटेरिया ने दे दी है  | 
 जब हम इस गाँव में पहुंचे तो एक अजब नजारा देखने को मिला | बने बनाये कुँए को तोड़ा गया , उसमे लगी ईंटें बाहर निकाल ली गई | कुँए को चीपों से ढक दिया गया | 
अब सरपंच जी और एस.डी.ओ. और सचिव महोदय इस बने बनाये कुँए के नाम पर सरकार को ३लाख का छुना लगायेंगे | 
एसा नहीं की यह मामला जिले के मुखिया की जानकारी में ना हो , मुखिया जी को भी पता है किन्तु क्या करें वे भी जनसेवक के भय से भयभीत हें | आखिर पहली बार मुखिया बने हें कहीं मुखिया गिरी ना चली जाए |

21 सितंबर, 2011

चीन की दादागिरी पर भारत का दमदार जबाब

चीन की दादागिरी पर भारत का दमदार जबाब 
रवीन्द्र व्यास 
भारत ने काफी समय बाद कुटनेतिक तरीके से अपने पडोसी चीन को उसकी तस्वीर दिखाई है | भारत ने वियतनाम  के साथ तेल खोज के करार पर काम करना शुरू किया है | वह भी उस इलाके में जिस पर  चीन अपना दावा जताता है | तेल और प्राक्रतिक गेस का  यह  भण्डार दरअसल वियतनाम का इलाका है | तेल के पीछे चीन हर हाल में इस पर अपना कब्जा ज़माना चाहता है |
 दरअसल पिछले कुछ समय से  चीन ने भारत की घेरा बंदी शुरू की है , कूटनैतिक और सामरिक रण निति के तहत उसने  पहले पाकिस्तान को बल प्रदान किया ,  परमाणु  बम्ब बनाने में उसकी मदद की , यहाँ तक की उसका परमाणु परीक्षण भी अपने यहाँ करवाया | इसके पाक अधिकृत काश्मीर जो भारत का अभिन्न अंग है में सड़क ,रेल मार्ग और बाँध का निर्माण शुरू किया | जब की यह इलाका पाक गैर कानूनी तरीके से कब्जाए है | और एसे इलाके में किसी तीसरे देस जेसे चीन द्वारा कुछ भी करना अंतरास्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है | पाक के बाद चीन ने भारत के सबसे करीबी नेपाल में घुश पैठ की , वहाँ  आज के हालात में चीन का सबसे ज्यादा दखल माना जाता है | इसके बाद चीन ने श्री लंका को भी अपने  कुटनेतिक जाल लपेटा | दूसरी तरफ वह भारत की भूमि गाहे बगाहे अपना दावा ठोकता रहता है , कभी सिक्किम ,अरुणाचल प्रदेश ,तो कभी लेह लद्दाख तो कभी काश्मीर पर |  यहाँ के लोगों को  वह नत्थी बीजा देकर भारत को हमेशा से चिडाता आ रहा है | भारत की सीमा घुस कर उसके सैनिक अपनी नापाक हरकतें करने से भी बाज नहीं आते | हद तो तब हो गई थी जब उसने सिक्किम में देश के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के जाने पर ही आपत्ति की थी | 
भारत की तेल कम्पनी ओ.एन.जी.सी. ने  वियतनाम की  पेट्रो वियतनाम के साथ एक करार किया था | इस अनुबंध के अनुसार वियतनाम के समुद्र तट पर पेट्रोल और गैस  निकालने की योजना है | इस योजना पर दोनों देशों ने बड़ा निवेश किया है । चीन  इसे दक्षिण चीन सागर का हिसा बताते हुए  इस पर अपना हक़ जताता है | उसने इस पर आपत्ति भी जताई थी |  भारत ने उसके इस विरोध को दरकिनार करते हुए साफ़ तौर पर कह दिया की वह पी.ओ.के. से दूर रहे |
दक्ष्णि  चीन सागर तेल और गैस का प्रमुख्य गढ़ माना जाता है |इस इलाके को लेकर चीन और वियतनाम के मध्य विवाद काफी समय से चला आ रहा है |१९८२ के संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत इस इलाके के दो तेल क्षेत्रों पर  वियतनाम का अधिकार माना गया है | भारत इन्ही क्षेत्रों में तेल खोज अभियान में वियतनाम के साथ जुटा है | जब की चीन को तो इस इलाके से जहाज़ों की आवाजाही पर भी आपत्ति है | पिछले महीने चीनी नौसेना ने भारतीय जहाज को रोकने का दुसाहस भी किया था |चीन के इस दादागिरी पूर्ण रुख को लेकर आशियान देश भी काफी नाराज हें | 
हालांकि चीन के अलावा इस इलाके पर मलेसिया , ताइवान ,फिलिपिन्स और वियतनाम भी अपना दावा करते हें |
 विश्व का हर सम्रध देश हर हाल में घटते तेल भंडारों को लेकर अपनी रण निति के तहत चल रहा है | हर देश चाहता है की उसका ऊर्जा के सबसे बडे स्रोत पर कब्जा हो | विश्व में अब तक अधिकाँश युद्ध सिर्फ तेल के लिए ही हुए हें |  आने वाले दिनों में जैसी की चीन की मीडिया ने चेतावनी दी है की इसको लेकर युद्ध भी हो सकता है | इस चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए  क्योंकि चीन हर कीमत पर यहाँ से भारत को दूर भगाना चाहेगा  जिसके परिणाम खतारनाक होंगे , क्योंकि कोई भी लोकतांत्रिक सरकार अपनी जनता की अजर में दब्बू का तमगा नहीं लेना चाहती | और यदि इसको लेकर युद्ध होता है तो यह युद्ध सिर्फ चीन भारत तक सिमित नहीं रहेगा बल्की इसमें दुनिया के कई देश शामिल हो जायेंगे ,|
चीन की हरकतों को और अमेरिका की रिपोर्ट को यदि देखा जाये तो कई तथ्य उजागर होते हें | पेंटागन की रिपोर्ट में काफी पहले इस बात का खुलासा किया था की चीन भारत की सीमा पर आधुनिक मिसाइलें तैनात कर रहा है | इसके अलावा चीन बड़ी तादाद में पाक को हथियार भी दे रहा है | मतलब साफ़ है की भारत की बढती शक्ति को वह कुचलने पर आमादा है | भारत पर दबाव बनाने के लिए वह हिंद माहा सागर में भी अपनी गतिविधियाँ बड़ा सकता है | 
इन हालातों में भारत को अपना कूटनैतिक अभियान जारी रखना जरुरी माना जा रहा है , हालांकि यह मुददा २४ से २६ सितम्बर की भारत चीन वार्ता में छाया रहेगा , जब मोंटेक सिंह चीन जायेंगे |

18 सितंबर, 2011

SUn Tempal of Bundelkhand_बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर

बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर
रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड इलाके में सृष्टी के देवता सूर्य के पूजन के अनेकों दुर्लभ प्रमाण मिलते हें | जो यह बताते हें की यहाँ के लोग अनादि काल  से सूर्य की पूजा करते आ रहे हें | और यही वह इलाका है जहाँ ज्योतिषाचार्य  वराहमिहिर ने  विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत की रचना की थी  | भविष्य पुराण की माने तो कालपी के निकट यमुना के तट भगवान् श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने सूर्य उपासना करके कुष्ट रोग से मुक्ति पाई थी |
 वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है.पहले यह सूर्योपासना मंत्रों से होती थी.बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो सूर्य मन्दिरों का निर्माण हुआ..अनेक पुराणों में यह लेख भी मिलता है,कि ऋषि दुर्वासा के शाप से कुष्ठ रोग ग्रस्त श्री कृष्ण पुत्र साम्ब ने सूर्य की आराधना कर इस भयंकर रोग से मुक्ति पायी थी.प्राचीन काल में भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर भारत में बने हुए थे.उनमे आज तो कुछ विश्व प्रसिद्ध हैं देश में बने लगभग १४० सूर्य मंदिरों में यदि किसी इलाके में ये सवाधिक हें तो वह है बुंदेलखंड |.वैदिक साहित्य में ही नही आयुर्वेद,ज्योतिष,हस्तरेखा शास्त्रों में सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है
देश में सूर्य  मंदिरों का निर्माण अल्प संख्या में हुआ है | १९८४ इ.तक देश में मात्र १४० सूर्य मंदिर के प्रमाण मिलते हें |  पर बुंदेलखंड में सूर्य मंदिर की संख्या सर्वाधिक है | 
इस हिसाब से देखा जाय तो बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में ९ ,छतरपुर जिले में पाँच, दतिया जिले में ३, सागर ,भिंड ,झाँसी और हमीरपुर  में२- २,पन्ना  नरसिंह पुर,दमोह,गुना, मुरेना ,बांदा,और जिला जालोन में एक -एक सूर्य मंदिर और विग्रह है  | शिवपुरी में ४,और ललितपुर में ७ मंदिरों और विग्रहों  का उल्लेख मिलता है |  इनमे टीकमगढ़ के मड्खेरा के और खजुराहो के  सूर्य मंदिर   को पुरातात्विक द्रष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है | वहीँ दतिया के  बाला जी सूर्य मंदिर का धार्मिक द्रष्टि से महत्त्व है |
पहुज नदी के तट उन्नाव कस्बा में सूर्य देव का बाला जी मंदिर है | कहते हें की एक टीले की खुदाई करने पर ब्राह्मण बालक को ६ इंच व्यास का सूर्य यंत्र मिला था , इस चक्र के चारों ओर २१ त्रिभुज हें जो सूर्य के २१ मुखों के प्रतिक हें |जिसे एक छोटा चबूतरा पर स्थापित किया गया था | उस समय झांसी नरेश नारू शंकर कुष्ट रोग से पीड़ित थे , उन्होने यहाँ आकर प्रार्थना की , सूर्य देव की कृपा से वे निरोगी हो गए | उन्होने ही यहाँ मंदिर निर्माण शुरू कराया , तब दतिया के राजा ने  उनसे कार्य बंद कराने का निवेदन किया और स्वयं मंदिर का निर्माण कराया | यहाँ हर रवि वार को मेला सा लगता है | लोक मान्यता है की यहाँ से कोई खाली हाथ नहीं जाता है | उसकी मनोती पूर्ण अवश्य होती है | 
छतरपुर जिले के मऊ सहानिया  सूर्य भगवान् का छोटा सा मंदिर है , कहते हें की यहाँ शादी के बाद यहाँ के लोग आशीर्वाद लेने आते हें | 
कालपी (उ.प्र.)  यमुना नदी के तट पर  काल्प्रियानाथ मंदिर है | भविष्य पुराण के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र  साम्ब ने यही सूर्य उपासना की थी , ज्योतिषाचार्य  वराहमिहिर ने यहीं विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत का प्रति पादन किया था |

सूर्य ,चन्द्र ,भूमि ,जल,वायु ,अग्नि  आदि ये पांच तत्व  सृष्टी के मूल कारक माने जाते हें | सिन्धु घाटी की सभ्यता की खुदाई में भी सूर्य पूजा के प्रमाण मिले हें | 
.वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता धर्ता मानते थे.|.ऋग्वेद में  देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है.\सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है.सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं|

18 अगस्त, 2011

अन्ना प्रकरण / जन से बड़ी नहीं हो सकती कोई संस्था


रवीन्द्र व्यास 
इन दिनों देश में जिस की सरकार है देखा जाये तो वह दोहरे मुखोटे वाली सरकार है | जिसका दिखाने का मुखोटा अलग है और करने का अलग | जिसे  लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन करने वाली नहीं बल्की राजतांत्रिक व्यवस्था वाली सरकार कहा जा सकता  है | इसी लिए उसे लोक से और लोक आंदोलनों से अपने सिंहासन  पर कोई असर समझ नहीं आता | उसे अंग्रेजी हुकूमत की तरह इस तरह के जन आंदोलनों को कुचलने में ही आनंद आता है | पर इस बार उसका दाव उलटा पड़ गया , आजादी के  अहिंसक आन्दोलन की तर्ज पर शुरू हुए अन्ना के इस आन्दोलन ने सरकार की नीव हिलाकर रख दी |
रामदेव के आन्दोलन को कुचलने के बाद सत्ता के मद में चूर हो गई है  सरकार | यही कारण है की सरकार और कांग्रेस के परम ज्ञानी सलाहकारों ने जिन्हे आम जन से कभी कोई सरोकार ही नहीं रहा , ने अपनी ज्ञान की गठरी खोली और ऐसी -ऐसी नायब सलाह दी और दे रहे हें की सरकार की हालत देखते ही बनती है | जिसका परिणाम ये हुआ की देश की जनता ने देखा की ये कैसी सरकार है जो सामने -सामने कहती कुछ है और करती कुछ है | और बेशर्म इतनी की उसे अपने इस दोहरे चरित्र पर कोई शर्म भी नहीं है |
अन्ना हजारे ने जब तपती दोपहर में जंतर -मंतर पर  जन लोकपाल के लिए अनशन किया तो सरकार की नींद उडी , उसके मंत्रियों ने वायदा किया की लोकपाल बिल संसद में रखा जाएगा | जिसमे जनता के लोगों को भी रखा जाएगा | इस मसले को लेकर कई दौर की बातचीत तब तक ठीक ठाक चलती रही जब तक सरकार ने रामदेव के आन्दोलन को कुचल नहीं दिया |  इसके बाद सरकार के मंत्री और प्रवक्ता तो मानो अपने को सुपर पावर समझने लगे | सत्ता बल के  मद में चूर होकर इन लोगों ने दिखावटी लोकपाल बिल संसद में रखा जिसे स्टेंडिंग कमेटी  को सोंपा गया है ,| इस कागजी लोकपाल के विरोध में जब अन्ना ने आमरण अनशन की घोषणा की तो सरकार के कपिल सिब्बल ,पी.चिदम्बरम ,जैसे  इन्ही ज्ञानी सलाहकारों ने फिर सलाह दे डाली   |
सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस के ज्ञानियों की सलाह कितनी बेहतर रही होगी ये सब देश की जनता अब देख रही है | लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के विरोध के अधिकार पर अंग्रेजों की तरह पाबंदी लगा दी , | अन्ना हजारे के प्रति अपमानजनक आरोप लगाये , हद तो तब हो गई जब उन्हे उनके ही घर से गिरफ्तार कर लिया गया | इसके बाद सरकार को शायद ये उम्मीद थी की जन मानस उग्र हो जाएगा और हम उस पर अपनी खाकी वर्दी वाली फोज से हमला कर नेस्तनाबूद कर देंगे | पर अन्ना के सन्देश को लोगों ने स्मरण रक्खा और अहिंसात्मक तरीके से सड़कों पर आ गए | सारे देश के लोग सड़कों पर , अन्ना के लिए लोग तिहाड़ जेल के बाहर बैठे ,हजारों  की संख्या में लोग इंडिया गेट पर जुटे | पर कहीं हिंसा का रत्ती मात्र नजारा देखने को नहीं मिला | 
ये सब देख कर हैरान सरकार के मुखिया और उसके संचालन कर्ताओं ने  इस आन्दोलन के पीछे अमेरिका का हाथ बताने से भी परहेज नहीं किया | शायद उन्हे लगा होगा की आर.एस.एस. का हाथ कहना लोगों को हजम नहीं होगा  | सब ओर से हारकर सरकार ने बुधवार की रात  अन्ना को रामलीला मैदान में १५  दिनों की अनुमति दी है | एक बच्चे ने सवाल किया की अंकल हमे अब तक ये समझ नहीं आ रहा की सरकार संसद में कहती है की हम भ्रष्टाचार के विरोध में हें , फिर उसने अन्ना की बात क्यों नहीं मानी , क्या अन्ना ने भ्रष्टाचार के दायरे में सब को लाने की बात कह कर कुछ गलत कर दिया था ? जिसके कारण उन्हे पकड़ लिया  गया | हमने उसी बालक से पूंछ लिया की बेटा तुम्ही बताओ  की तुम्हे गलत कौन लगता है , हमे तो इसमे सरकार बेवकूफ लगती है | 
लोकपाल बिल को लेकर सियासत भी केसे -कैसे रंग दिखाती है , | जो राजनैतिक दल इस मसले पर गोलमोल जबाब दे रहे थे वे भी  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोगों के जन आक्रोश को देख कर सरकार पर हमला करने से नहीं चूके | जन दबाव ने ये साबित कर दिया है की कोई भी सत्ता जन मानस से ऊपर नहीं हो सकता \

30 जुलाई, 2011

khajuraho,


योग के नाम पर ठगी 
अभिषेक व्यास 

खजुराहो से अठारह किलो मीटर दूर ,जंगल में योग के नाम पर ठगी का एक शिविर चल रहा है | इस शिविर में १४५० यूरो डालर दीजिये , सिर्फ एक माह का प्रशिक्षण लीजिये और योग गुरु बन जाईये |है ना ये योग की माया  , रामदेव ने  देश विदेश में योग को इतना लोकप्रिय बना दिया की लोग अब इसका धंधा करने लगे हें |\  हालेंड की फर्म के इस शिविर के बारे में यहाँ के लोग और प्रशासन को भी जानकारी तब लगी जब यहाँ से भागी दो युवतियों ने पुलिस को शिकायत की | अब आप ही अंदाजा लगा सकते हें की देश की ख़ुफ़िया तंत्र और सुरक्षा तंत्र कितना चाक चोबंद है |
                           हालेंड एल्स हार्म्सन और जर्मनी की इलका ब्रास्तीन ने इन्टरनेट परwww.arhantayoga.org  
बेव साईट देखी | इसमे उन्होने खजुराहो के पास गंगवाहा  गाँव में सुन्दर आश्रम देखा \ | जिसमे तस्वीरों के जरिये यहाँ की सुविधाओं का वर्णन किया गया था | इसके लिए उन्होने  नेट से ही अपना पंजीयन करा लिया और १४५० यूरो डालर जमा करा दिए | २५ जुलाई से शुरू हुए इस योग शिविर में शामिल होने ये दोनों भी आ गई | इन्ही के तरह यहाँ कुल २३ विदेशी  भी योग सीखने आये | यहाँ इन लोगों ने जो नजारा देखा वो इन्टरनेट पर दिखाए गए नजारे से बिलकुल अलग नजर आया | जो एक  खेत की ही तरह नजर आया जहाँ ना किसी भी तरह की सुविधा नहीं थी | इन हालातों को देख कर चार पर्यटक पहले ही यहाँ से भाग गए | इन दो युवतियों ने भाग कर पुलिस थाने में शिकायत की | इन ने मांग की है की इनके विरुद्ध मामला दर्ज किया जाये और हम लोगों को धोखा देकर जो राशि वशुली गई है उसे वापस दिलाया जाये | हालाँकि इन दोनों को ही पुलिस से शिकायत करने में काफी मसक्कत करनी पड़ी | पुलिस के लोगों ने इन्हे खजुराहो और बमीठा थाने के चक्कर लगवाये | 
पुलिस अधिकारी जो इस मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे , यहाँ के अतरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील तिवारी ने बताया कि  एक शिकायत प्राप्त हुई है बमीठा थाना में की उन्हे बुलाया गया था योग शिविर के  नाम पर ,अरिहंता योगा करके कोई फर्म है हालेंड की उनने नेट पर सर्च करके देखी थी ,और उसमे इसका पूरा प्लान था | उन्होने अभी जो शिकायत दी है उसमे बताया गया की विज्ञापन   में जो सुविधाएँ  उन्होने बताई थी वो सुविधाएं  पूरी तरह से नहीं है अब जांच बमीठा थाना पुलिस कर रही है , बमीठा , टी.आई., एस.ड़ी.ओ. (पी.)  और में स्वयं भी बात की है ,अन्य किसी ने  भी  इस तरह की शिकायत नहीं की है | परन्तु हम लोग सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हें ,की ये सही है की विज्ञापन  में जो दर्शाया गया है वो सुविधा यहाँ पर उपलब्ध नहीं है फिर भी सारा मामला जांच में है और जो कुछ भी पाया जाएगा उस पर कारवाही की जायेगी | उसके ओनर प्रमोद जैन के खिलाफ १३३ सी.आर.पी.सी. का इस्तगाशा न्यायालय में पेश किया गया है ,की उन्होने इसकी कोई जानकारी नहीं दी| २९ जुलाई कि देर रात बमीठा थाना पुलिस ने प्रमोद जैन पर मामला दर्ज किया है |
 देहली  के प्रमोद जैन ने  छतरपुर जिले के गंगवाहा गाँव में १७ एकड़ की जमीन खरीदी थी इसी पर उन्होने योग सेंटर बना लिया | जिसकी  उन्होने कोई मंजूरी भी लेना उचित नहीं समझा |  यहाँ तक की विदेशियों की सूचना देना भी पुलिस को जरुरी नहीं समझा | जब इनसे बात करने का प्रयाश किया गया तो ये अपनी ४२० नंबर की गाड़ी से भाग लिए |


19 जुलाई, 2011

khajuraho

 खजुराहो   के बीजा मंडल मंदिर कि खुदाई में मिली १४ दुर्लभ मूर्तियाँ 

खजुराहो /रवीन्द्र व्यास /  खजुराहो के बीजामंडल मंदिर कि खुदाई  पिछले  एक दशक से चल रही है | शुरूआती खुदाई के बाद अब जब इसके कार्य में तेजी आई तो यहाँ दसवीं शताब्दी कि १४ दुर्लभ मूर्तियाँ  निकली |  अब इस मंदिर को दिसंबर ११ तक आकार मिलेगा | खजुराहो मिलेनियम के मौके पर इस मंदिर कि  को खोजा गया था |तब ये वायदा किया गया था कि खजुराहो में खोजे गए सभी १८ तिलों कि खुदाई कर दफ़न मंदिर खोजे जायेंगे ? तब से ए. एस. आई.  ये टीले मांग रही है और मध्य प्रदेश सरकार है की दे नहीं रही है |

 खजुराहो के इस बीजा मंडल कि खुदाई में पिछले दिनों  भगवान् विष्णु लक्ष्मी कि मानव रूप में गरुड़ पर सवार दुर्लभ प्रतिमा, के अलावा शिव , नंदी , नाग कन्या , सुर सुंदरी , कीचक , उमा महेश्वर , हाथी , और गज पट्ट मिले | यहाँ एक गज पट्ट पर ऊंट की प्रतिमा भी अंकित है | खजुराहो में ऊंट की मिली प्रतिमाओं में यह तीसरी प्रतिमा है | भारतीय पुरातत्व सरर्वेक्षण विभाग खजुराहो के  सहायक अधीक्षक राहुल तिवारी के अनुसार  यह दशवीं सदी का मंदिर है | जिसे  पूरा नहीं बनाया जा सका , क्यों  नहीं बना यह खोज का विषय है | उनका कहना है की इस वर्ष दिसंबर तक इसे पूर्ण कर लिया जाएगा | इस मंदिर से मिले अवशेषों से इसका निर्माण किया जाएगा | कोई भी अलग से पत्थर नहीं लगाया जाएगा | 
   खजुराहो में ए.एस.आई. ने अपने सर्वेक्षण में ८५ मंदिरों  और इतने ही तालाब के होने की पुष्टि की थी | जब खजुराहो सह्स्त्राब्धि वर्ष मनाया गया था तब ए.एस.आई.. ने यहाँ के १८ टीलों को चिन्हित किया था | और इन टीलों की खुदाई कर यहाँ दफ़न मंदिरों और मूर्तियों को निकालने की बात कही थी | तब के मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह ने ए.एस.आई. को सिर्फ एक टीला जठ्करा  गाँव का बीजा मंडल दिया था | विभाग के तत्कालीन महानिर्देशक अजय शंकर ने ५ मार्च १९९९ को इस टीले पर उत्खंनन का शुभारम्भ किया था | खुदाई में जो  खंडित मंदिर सामने आया वह खजुराहो का सबसे बडे आकार का मंदिर था | १९९९ से अब २०११ तक मंदिर का काम पूर्ण नहीं हो सका है | ये शायद हमारे देश की कार्य करने की गति है , | विकाश  की बात करने वाली मध्य प्रदेश की सरकार  के मुखिया शिव राज सिंह के लिए भी ये शर्म की बात है की प्रदेश सरकार ने अब तक शेष १७ टीलों को ए.एस.आई. को नहीं सौंपा है | हो सकता दफ़न धरोहर सामने आये तो और पर्यटक बढ जयेंगे |

          

15 जून, 2011

Khajuraho

अब नहीं उतरेंगे खजुराहो में हवाई  जहाज 


रवीन्द्र व्यास 
खजुराहो / में तेज गर्मी का कहर जारी है , सूरज कि तपन का असर ये हुआ कि यहाँ आने वाले बहुसंख्यक  देशी विदेशी पर्यटकों ने अब यहाँ इस मौसम में  आने से तौबा कर ली है | निजी कंपनियों ने तो पहले ही अपनी उड़ाने रद्द कर दी थी अब एयर इण्डिया  ने भी  ३० जून तक के लिए अपनी उड़ाने स्थगित कर दी हें | 
 खजुराहो में आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों के आंकडे बताते हें कि जून कि तपन में यहाँ बा मुश्किल 50 ही विदेशी पर्यटक रोजाना आ रहे हें ,जब कि जनवरी और फरवरी में यहाँ 450से भी ज्यादा विदेशी पर्यटक रोजाना आते थे |  पिछले कुछ समय में यहाँ भारतीय पर्यटकों कि संख्या में भी काफी उछाल आया है , जनवरी 2011 में रोजाना लगभग एक हजार भारतीय पर्यटकों ने  काम कला के इन मंदिरों को देखा है | 
माह              विदेशी              देशी              वर्ष 2010 में खजुराहो में 90721  विदेशी पर्यटक 
januvary      12247             32682         आये जो अबतक का एक रिकोर्ड है , 234950भारतीय           
Februvery    13610             22311         पर्यटकों  ने भी खजुराहो के मंदिरों को देखा | 
March           11264            22803      2009 में 312902  देशी पर्यटकों ने मंदिरों कि कला 
April             6224             14478      कृतियों को देखा जो अबतक कि सबसे ज्यादा  
May              2125             16248         रिकार्ड  संख्या है | 
11 June         514                6264

खजुराहो आने वाले पर्यटकों कि ये संख्या  तब है जब यहाँ हवाई सेवा  सिर्फ देहली और बनारस से है | यहाँ आने वाली किंग्फिसर ने 26 मार्च से , जेट एयर वेज ने 30 अप्रेल से और एयर इंडिया ने 15 जून  से अपनी खजुराहो कि सेवाए बंद कर दी हें | 30 जून के बाद से हवाई सेवा फिर शुरू होगी |  यहाँ ट्रेवल एजेंसी  ट्रेवल ब्यूरो के प्रबंधक  अजय कश्यप कहते हें कि  हवाई सेवाए गर्मी के महीने में बंद करने से एक दर्जन दे ज्यादा विदेशी टूरिस्ट ग्रुप ने खजुराहो कि अपनी बुकिंग केंसिल कराइ है | वे कहते हें कि यहाँ पर्यटन को बढावा देने के लिए जरुरी है कि हवाई सेवा नियमित रहे , भले ही इसके लिए छोटे विमानों का उपयोग किया जाये | दूसरा खजुराहो को मुंबई  से सीधी हवाई सेवा से जोड़ा जाये |





05 जून, 2011

baba

लोगों कि  नजर में राम देव 
बाबा रामदेव के आंदोलन को पुलिस ने रातों-रात कुचल दिया और उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज की। इस घटना पर लोग  भी हैरान हैं |नेता ,अभिनेता और जनता ने  सरकार की  आलोचना की है वहीँ कांग्रेस नेताओं ने बाबा पर लगाये आरोप ।

अनुपम खेर :  पुलिस जिस तरह से लोगों के साथ बर्ताव किया, वह शर्मनाक है। यह अन्यायपूर्ण और अलोकतांत्रिक है।

रवीना टंडनः देश हर व्यक्ति को विरोध करने का अधिकार है। याद रहे?

शेखर कपूर: रामलीला मैदान में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को सरकार ने सबसे बुरे हिंसक तरीके से कुचलने की कोशिश की है। उम्मीद है कि बाबा रामदेव के समर्थकों को यह अहसास होगा कि सरकार की हिंसा का सबसे तगड़ा जवाब शांतिपूर्ण प्रदर्शन है। अब वक्त इस सवाल को पूछने का है कि क्या सिस्टम लोगों के लिए काम करता है या फिर उस सरकार के लिए जो लोगों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। पुलिस के ऐसा करने के पीछे क्या तर्क है? क्या यह फासिस्ट देश है? सांसदों ने संविधान के मुताबिक काम करने की सारी शपथ तोड़ दी हैं और इस तरह से देशद्रोह का काम किया है। उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भूमि-अधिग्रहण में जो कुछ हुआ, वही दिल्ली के रामलीला मैदान में हो रहा है। अपनी इस एक वाहियात हरकत से सरकार ने लोगों को यह संदेश दिया है कि अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन से काम नहीं चलने वाला। सरकार ने लोगों को हिंसात्मक रवैया अपनाने के लिए उकसाया है।

विवेक ओबेरॉय: प्रदर्शन कर रहे मासूम बच्चों, महिलाओं और लोगों पर पुलिस ने आंसू-गैस के गोले छोड़े। यह बहुत भयानक है। क्या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इस तरह से बर्ताव करना चाहिए? मैं यह सब देख कर बहुत अपसेट हो गया हूं। हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। गांधीजी की अहिंसा का क्या हुआ

दिग्विजय सिंह : रामलीला मैदान में पुलिस कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव को ठग बताया और कहा कि उनके साथ वही हुआ जो एक ठग के साथ होना चाहिए। सिंह ने 1994 से लेकर अब तक की बाबा की गतिविधियों की जांच की भी मांग की।  अदालत के आदेश से राजधानी में अनशन के लिए जंतर मंतर नियत जगह है लेकिन रामदेव ने रामलीला मैदान में योग शिविर को अनशन में बदल दिया और इसलिए शायद प्रशासन को यह कार्रवाई करनी पड़ी। सिंह ने बाबा पर ठगी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली आकर स्वामी शंकर के कुशल बाग आश्रम में शरण ली लेकिन उन्हें छोड़ दिया। खुद को योग सिखाने वाले बाबा करमवीर को भी उन्होंने ठगा। सिंह ने कहा कि रामदेव के गुरु गायब हैं इस बात की जांच होनी चाहिए।  रामदेव ने बिना किसी लाइसेंस के कैंसर जैसी बीमारी को दूर करने के वादे किए और अपने अनुयायियों, जनता को भी ठगा।  वह सरकार को भी ठगना चाहते थे। 


 अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर उनसे बातचीत कर रही थी और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगाकर उनसे एयरपोर्ट पर मुलाकात की लेकिन रामदेव ने सरकार को भी ठगा। रामदेव ने कहा कि होटल में सरकार के साथ चर्चा में उन्होंने समझौता किया लेकिन जनता को अनशन करने के लिए कहते रहे और लोगों को भी ठगा। 


दिग्विजय सिंह ने अनशन समाप्त करने के लिए महिलाओं और लोगों पर पुलिस की कार्रवाई के सवाल पर कहा कि यह काम प्रशासन का है और यहां की व्यवस्थाओं को संभालने के लिए उन्होंने ऐसा निर्णय लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि योग गुरु 1994 से 2011 तक लोगों को ठग बनाते रहे हैं और पिछले सात-आठ साल में उन्होंने हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति कैसे जुटा ली, इसकी जांच होनी चाहिए। 


सिंह ने अपनी यह बात भी दोहराई कि बाबा का आंदोलन पहले दिन से आरएसएस द्वारा प्रेरित और नियंत्रित है। उन्होंने कहा, ' जब से संघ परिवार पर आतंकवाद के आरोप लगे हैं तब से वे ध्यान बांटने के लिए यह योजना बना रहे हैं। '
कपिल सिब्बल  : योग गुरु ने शासन के साथ समझौता हो जाने के बावजूद अनशन समाप्त करने के अपने वादे को पूरा नहीं किया।   रामदेव  ने न सिर्फ सरकार के साथ वादाखिलाफी की, बल्कि समझौते के बारे में अपने समर्थकों तक को नहीं बताया।  बातचीत में यह तय हो गया था कि वह शनिवार दोपहर तक अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा करेंगे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।  जिसके बाद हमने उन्हें समझौते का पत्र सार्वजनिक करने की बात के बारे में बताया और पत्र को मीडिया के सामने रखा। ' \आधी रात को रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई को जायज  बताया \ रामदेव ने प्रशासन से योग शिविर चलाने की अनुमति मांगी थी और सिर्फ पांच हजार लोगों के वहां इकट्ठा होने की बात कही थी। लेकिन रामदेव ने न सिर्फ योग शिविर को राजनीतिक शिविर में बदल दिया, बल्कि रामलीला मैदान पर 50,000 लोगों को इकट्ठा भी कर लिया
नितिन गडकरी:- भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने  केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की और कहा कि इस बर्बर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी को माफी मांगनी चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक अहिंसक अनशन को इस तरह की बर्बरता के साथ खत्म करना अलोकतांत्रिक है। उन्होंने देश की जनता से अपील की कि वे सभी सरकार की इस बर्बरता का विरोध करें।
उन्होंने बताया कि रविवार शाम सात बजे से अगले 24 घंटे तक भाजपा ने देशव्यापी सत्याग्रह का आह्वान किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राजघाट पर इस सत्याग्रह पर बैठेंगे। 

समाजवादी पार्टी ने योगगुरू बाबा रामदेव के अनशन के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार पर सबसे बड़ा ठग होने का आरोप लगाया।
मुलायम सिंह यादव:- सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि रामदेव शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे थे फिर भी उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को क्या हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार सबसे बड़ी ठग है।
नरेन्द्र मोदी :- (मुख्यमंत्री गुजरात )
 नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जिम्मेदार हैं। उन्होंने इस घटना को रामलीला मैदान में रावण लीला करार दिया।मोदी ने बाबा और उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई को भारतीय इतिहास का सबसे खराब दिन करार देते हुए घटना की निंदा की। वह निर्दोष लोगों पर हुई लाठीचार्ज के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार पर जम कर बरसे।मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चुनावों के समय कहा था कि वह सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर ही स्वीस बैंकों में जमा काले धन को वापस ले आएंगे। मगर आज इस बात को दो साल हो गए हैं और इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। निर्दोष लोगों के साथ हिंसक कार्रवाई करने पर कांग्रेस को भारत के 120 करोड़ लोगों जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहना चाहूंगा कि आप यह कह कर बच नहीं सकते कि मुझे नहीं मालूम था। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में जो कुछ भी हुआ उसके लिए आप सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। निर्दोष लोगों पर लाठी चार्ज  दिल्ली सल्तनत ने करवाया है न कि शीला दीक्षित सरकार ने। उन्होंने कहा कि सोते हुए लोगों पर लाठीचार्ज रामलीला मैदान में रावण लीला थी। पुलिस ने पहले सोते हुए लोगों पर हमला किया और फिर वह बाबा रामदेव को कहीं ले गए। उन्होंने इस बात का खुलासा भी नहीं किया कि उन्हें कहां रखा है।मोदी ने कहा कि यहां तक कि अमेरिका ने भी लादेन को मारने के बाद पूरी दुनिया के सामने बताया था कि उसने यह काम दो घंटे में किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सल्तनत भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली सभी आवाजों को दबाने पर तुली है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव के खिलाफ सरकार की कार्रवाई ने अपातकाल के दिनों को याद दिला दी है। अपातकाल भी जून 1975 में ही लागू हुआ था। मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि 4-5 जून की रात दिल्ली सल्तनत के खात्मे की शुरुआत है।
 बी.जे. पी. नेता  जेटली / सुषमा :-लोकसभा व राज्यसभा में विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज व अरुण जेटली दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस करके शनिवार रात हुई घटना की भर्त्सना की। जेटली ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना कहा कि उनकी भाषा बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को आप क्या कहेंगे जो आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को लादेन जी और बाबा को ठग कहता है। शुषमा स्वराज ने एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती घायलों के हालात बयान किए।
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज राम लीला मैदान में शनिवार आधी रात हुई पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मिलने के लिए रविवार सुबह लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) पहुंचीं।सुषमा ने अस्पताल में घायलों से मिलने के बाद टि्वटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, एलएनजेपी अस्पताल में 35 लोग घायल अवस्था में भर्ती हैं। 31 लोगों का एक्सरे हुआ है। एक व्यक्ति गंभीर हालत में आईसीयू में है।इसके पहले सुषमा ने अपने ट्वीट में बताया था कि वह राम लीला मैदान में पुलिस लाठीचार्ज में घायल लोगों से मिलने के लिए एलएनजेपी अस्पताल जा रही हैं।रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को हटाने के लिए शनिवार की आधी रात को पुलिस ने कार्रवाई की थी। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और मैदान में आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद अनशन करने वाले लोगों को वहां से हटा दिया गया।सुषमा ने अस्पताल में भर्ती घायलों के बारे में टि्वटर पर जानकारी देते हुए बताया, एलएनजेपी अस्पताल में 35 लोग घायल हैं। गुड़गांव की एक महिला राजबाला आईसीयू में भर्ती है। उसे बुरी तरह मारा गया है। उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर है। वह जीवनभर के लिए विकलांग हो गई है।उन्होंने बताया, दो ऐसे मरीज हैं, जिनके तंत्रिका तंत्र में कई चोटें आई हैं। कइयों की हडिडयां टूट गई हैं। सुषमा ने आगे लिखा है, अब मैं 11 अशोक रोड जा रही हूं, पुलिस की बर्बरता के बारे में अभी और जानकारी दूंगी।
अन्ना हजारे  :-मशहूर गांधीवादी अन्ना हजारे बाबा रामदेव पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में आठ जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिन का अनशन करेंगे।उन्होंने कहा कि बाबा के साथ जो भी हुआ वह बहुत गलत था और हम जंतर मंतर पर एक दिन के लिए अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने सबक नहीं लिया तो बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, देश में दूसरे स्वतंत्रता संग्राम की जरूरत है जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।अन्ना हजारे ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति में शामिल समाज के सदस्य बैठक का सीधा प्रसारण किए जाने पर ही इसमें शिरकत करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से पता चलता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सरकार की मंशा ठीक नहीं है।वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि हम प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि वह देश को वे कारण बताएं जिनकी वजह से सरकार ने रामदेव के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आदेश दिए गए।
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08 मई, 2011

Sarkaari Tantr

जानवर बने अधिकारी 


मामला मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व एरिया का है | जहाँ 4/5/2011 पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कुंजवन गाँव में आतंक का एसा नंगा नाच किया कि जिसे देख कर मानवता भी शर्म शार हो जाये | सरकारी वर्दी धारियों  का ये दस्ता गाँव के राकेश अधिकारी के घर में जबरन घुस गया | उस पर आरोप लगाया कि तुमने नील गाय का शिकार किया है |  इसके नाम पर सारे घर कि तलाशी लेने लगे , जब राकेश अधिकारी ,उनकी पत्नी सीमा  वा परिवार के लोगों ने विरोध किया तो  ये  लोग जानवर बन गए | इन लोगों ने ये भी नहीं देखा कि सीमा गर्भवती है , उसके पेट में लात मार दी| नतीजतन उसका गर्भ गिर गया  और दो जुडवा बच्चे  इस दानवी दुनिया को देखने के पहले ही दुनिया छोड़ कर चले गए | 
इस मामले पर टाइगर रिजर्व के छेत्र संचालक  कृष्णा मूर्ति का कहना भी कम अमानवीय नहीं रहा < उनका ये कहना कि  राकेश अधिकारी के घर से नील गाय का पका हुआ गोस्त और चमड़ा जप्त हुआ है जिसका पी.ओ.आर.क्र.527/10 दिनांक 4/5/11 दर्ज किया गया है | उनका मानना है कि कुछ धक्का मुक्की के कारण राकेश कि पत्नी का अबोर्सन होने कि जानकारी मिली है |  घटना कि जाँच सहायक संचालक करेंगे | 
मामले कि शिकायत कोतवाली पन्ना में भी कि गई जहाँ के टी.आई. आर.एस. राजपूत का पुलिसिया जबाब था , जाँच के बाद कार्यवाही होगी | आखिर खाकी वर्दी पर जो दाग है अब पहनने वाला पुलिस का हो या वां विभाग का  वर्दी तो खाकी ही है | 
जब पन्ना का शुप्त तंत्र नहीं जागा तब मध्य प्रदेश के मानव अधिकार आयोग ने पन्ना के एस.पी. और कलेक्टर से जबाब तलब किया है |
रवीन्द्र व्यास \

12 अप्रैल, 2011

Ram

         
राम से बड़ा राम का नाम
रवीन्द्र व्यास
चैत्र शुक्ल नवमी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। आज ही के दिन तेत्रा युग में अयोध्या के रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ भगवान् श्री राम  ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था। कहते हें की दिन के बारह बजे जैसे हीशंख , चक्र, गदा, पद्म धारण कि‌ए हु‌ए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हु‌ए तो मानो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो ग‌ईं। उनके सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे।श्रीराम के जन्मोत्सव में  देवता, ऋषि, किन्नार, चारण सभी  ने शामिल होकर आनंद उठाया था | वेशे तो अयोध्या सहित सारे देश में राम नवमी का ये त्यौहार परम्परागत ढंग से मनाया जाता है ,पर  बुंदेलखंड में  राम जन्मोत्सव एक अनोखे अंदाज में मनाया जाने लगा है | छतरपुर से शुरू हुई ये परम्परा अब सारे बुंदेलखंड इलाके में फ़ैल गई है | यहाँ एसा लगने लगता है की वास्तव में क्या भगवान् श्री राम फिर से जन्म ले रहे हें , उनके जन्म के बाद लोगों के उत्साह और उम्मंग को देखकर यही लगता है जेसे भगवान् ने ही अवतार ले लिया हो | सारा शहर  राममय हो जाता है | 
भगवान् श्री राम के जन्मोत्सव पर  छतरपुर शहर को धार्मिक स्थल की तरह सजाया जाता है| जगह जगह केशरिया पताकाएं लगाईं जाती हें , नगर में वंदन वार बाँधी जाती हें , लाइट की  व्यवस्था , जगह जगह  श्री राम के कट-आउट लगाए जाते हें , नगर के मुख्य गांधी चौक बाजार में राम दरबार सजाया जाता है | राम जन्म के बाद जब श्रद्धा से सराबोर लोग केशरिया पताकाएं लेकर निकले , आगे भगवान् श्री गणेश का रथ चल रहा था , इसके बाद देवी देवताओं की झांकियां , ठीक वेसे ही जैसे  राम जन्म को देखने आये देवताओं आगमन अयोध्या में हुआ था | फर्क इतना  था वो त्रेता युग की बात थी और ये कलयुग की बात है जहाँ  उनके प्रतीक को ही मान कर मानव माँ संतोष कर लेता है | सारे नगर वासी सड़कों पर निकल कर अपनी ख़ुशी का इजहार करते हें और  राम जन्मोत्सव के इस भव्य समारोह में भाग लेते हें | इस समारोह को देखने के लिए अब दूर -दूर से लोग भी आने लगे हें | छतरपुर में यह आयोजन तो पिछले दो सौ सालों से हो रहा था ., किन्तु पिछले पांच सालों में इसे एक अनोखी भव्यता  और दिव्यता मिली ,  जिसका असर ये हुआ की यह शोभा यात्रा  अब छतरपुर ,के अलावा ,पन्ना ,टीकम गण ,सागर , मऊरानीपुर ,महोबा  में भी इसी भव्यता से निकलने लगा है |  
भगवान राम को उनके सुख-समृद्धि पूर्ण व सदाचार युक्‍त शासन के लिए याद किया जाता है। उन्‍हें भगवान विष्‍णु का अवतार माना जाता है, जिन्होंने  पृथ्‍वी पर अजेय रावण के नाश के  लिए अवतार लिया था । राम राज्‍य शांति व समृद्धि  का पर्यायवाची बन गया है\उन्होंने आजीवन मर्यादा का पालन किया, इसीलिये उनको मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहते हैं.भगवान राम  बहुत बड़े पितृभक्त थे. अयोध्या के राजकुमार होते हुए भी वे अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए संपूर्ण वैभव को त्यागकर चौदह वर्षों के लिए अपने छोटे भई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वन चले गये. वन में जाकर रक्षसों के सबसे बड़े राजा रावण का सर्वनाश करके उसका राज्य विभीषण को सौंपकर वापस अयोध्या आ गये. हनुमान भगवान श्रीराम के परमभक्त तथा सुग्रीव परममित्र थे.

19 मार्च, 2011

faag

सिमित होते फाग के स्वर 
रवीन्द्र व्यास 


जब मौसम में मादकता हो ,पलास फूला, हो आम बोराया हो और खेत पर गदराई फसल खडी  हो तब किसका मन मस्ती में नहीं डूबेगा | बुंदेलखंड की लोक परम्परा में फाग का अपना महत्व रहा है | कभी यह परम्परा बसंतोत्सव से शुरू हो जाती थी | बसंत के आगमन के साथ गाँव -गाँव में फाग के स्वर सुनाई देने लगते थे  जो बसंत पंचमी तक चलते रहते | अब ये सिर्फ होलिका दहन के आस पास तक सिमित हो कर रह गए हें | शुद्ध शात्रीय शैली की फागों का स्थान अब अश्लील फागों और फागों की सी.डी.ने ले लिया है |इस अंचल में बसंत पंचमी के साथ ही मस्ती का आलम शुरू हो जाता था , मस्ती के रस में सराबोर गाँव -गाँव में फागों की फड बाजी होती थी | जबाबी फागों की यह शैली अरसे से समाप्त हो चुकी है |
गाँव की चौपालों पर नगड़िया -ढोलक ,झींका,मजीरा ,की लय पर फाग की तान अब कम सुनाई पड़ती है | बुन्देली लोक जीवन से जुडी फागों का अपना एक सम्रद्ध इतिहास है | फाग की वर्तमान परम्परा ईसुरी और गंगा धर व्यास की फागों तक सिमित सिमित हो कर रह गई हें | गाँव -गाँव में मूलतः ईसुरी रचित फागें ही गई जाती हें |ठेट- बुन्देली समरसता वा माधुर्य के साथ ईसुरी की फागों में श्रृंगार वा भावों की अभिव्यक्ति का अनूठा सम्मिश्रण देखने को मिलता है | ईसुरी रचित फागों को चोकडिया   फाग भी कहते हें ,फागों को गाने वाले फगुवारे लक्ष्मण सिंह (८५) इस उत्सव में अपनी उम्र को बाधक नहीं मानते | वे कहते हें की फागों की मस्ती का आलम ही कुछ और होता है ,हम तो वेसा ही आनंद लेते हें जैसा जिन्दगी भर होली के माह में लेते रहे हें | काल गी गति के साथ अब सब कुछ बदल गया है ,अब वैसा उत्साह और उल्लास लोगों में नहीं रहा |
बुंदेलखंड में डेढ़ सौ वर्ष पूर्व ईसुरी रचित फागों  की श्रन्गारिता ने इसे लोक जीवन की फागें बना दिया | इस दौर में लोग प्राचीनतम छंद माऊ,डिडखुरयाऊ,रपयाऊ,लापडिया,और खडी फागों को भूल गए |यह ईसुरी की फागों की ही खासियत थी की लोक जीवन से सीधी जुड़ गई |फाग मंडलियों की प्रतियोगी फाग गायन के आयोजन से इसको व्यापकता मिली |पर समय के साथ यह परम्परा समाप्त हो रही है |अब गांवों में साहित्यिक  और लोक जीवन की फागों का स्थान अश्लील फागों ने और सी.डी.ने  ले लिया है  \\
प्रमुख साहित्यकार सुरेन्द्र शर्मा "शिरीष"अश्लील फाग गायन को श्रृंगार की ही उपाधि देते हें ,वे कहते हें की यह भी जीवन का एक अंग है | और इसका कोई बुरा भी नहीं मानता | है की  अब गांवों की चौपालों पर फागों के फड नहीं जमते  धोके से ही कुछ गाँवों में फागों के स्वर सुनाई देते हें |जब की बुन्देल्खाद की यह लोक परम्परा फाग गायन सबसे निराली है,यह ब्रज की होली से भी कहीं ज्यादा आकर्षक है | होली पर लोक गायन की जो परम्परा बुंदेलखंड में  है,वह अन्यत्र कहीं नहीं है | फिर भी इसे वह स्थान नहीं मिल पाया जो इसे मिलना चाहिए था |ईसुरी की फागों में लोक जीवन ही नहीं देखने को मिलता है बल्की करारा व्यंग्य भी देखने को मिलता है | 
अब लोगों के पास वक्त की कमी है ,आपसी मेल जोल का भी समय नहीं है ,घर -घर टी.वी. ,सी.डी.प्लेयर पहुँच गए हें एसे में गाँव की चौपाल पर भला किसे बैठने की फुर्सत है | 

03 मार्च, 2011

nasha nasbandi kaa

"नसबंदी" करवाओ  मोटर साईकिल मुफ्त पाओ

मध्य प्रदेश में इन दिनों नशबंदी करवाने का अभियान चल रहा है |सरकार ने  इसे  महा अभियान बना दिया है और साफ़ चेतावनी दी है कि जिन जिलों में लक्ष्य  कि पूर्ति नहीं होगी वहाँ के सी.एम्.एच .ओ . और कलेक्टर दोनों को दोषी माना जाएगा | जब सरकार इनको दोषी मानेगी तो गाज भी इन पर गिरेगी | भला कोई भी समझदार व्यक्ति मलाईदार जिले के मुखिया का पद  छोड़ कर भोपाल के मुख्यालय में बैठना क्यों पसंद करेगा | सरकार कि इस चेतावनी के बाद अधिकारी  लोग बढ चढ़ कर भाग लें रहे हें | लोगों को तरह -तरह के ऑफर दिए जा रहे हें | कंही मोटर साईकिल  दी जा रही हे तो कहीं बंदूक के लाइसेंस , कहीं लक्ष्य पाने के लिए नपुंसकों और विधवाओं की भी नसबंदी की जा रही है भिखारियों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है |
पन्ना कलेक्टर के.सी.जैन ने एक मार्च से ६ मार्च तक का मेगा नसबंदी अभियान शुरू किया है |इस अभियान में २५ से ज्यादा लोगों की नसबंदी कराने वाले को एक हीरो होंडा मोटर साईकिल ,२० के ऊपर वाले को एल.सी.डी. टी.वी.,दस से ज्यादा वाले को कलर टी.वी.,पांच से ज्यादा करवाने  वाले प्रेरक को प्रशस्ति पत्र ,शाल श्रीफल से सम्मानित किया जाएगा | ६ मार्च के  बाद लाटरी भी खुलेगी जिसमे सभी हितग्राही  होंगे   जिसमे प्रथम को मिलेगी मोपेड ,द्वितीय  को मिलेगी एल.सी.डी.टी.वी., और तीसरे को मिलेगा  कलर टी.वी., |इसके बाद प्रत्येक विकाश खंड स्तर पर पांच -पांच लाटरी निकाली जाएँगी  और पाँचों विजेताओं को एक-एक प्रेशर कुकर  दिया जायेगा | शत- प्रतिशत उपलब्धि हासिल  करने वाले विभाग को दस हजार का नगद पुरुष्कार ,प्रशस्ति पत्र ,एवं शील्ड प्रदान की जाएगी |
कलेक्टर जैन ने अमानगंज  के एम्.पी.डब्लू. सरमन नामदेव और पडेरी ए.एन.एम्. श्री मति रामकुमारी  सेनी को लक्ष्य की पूर्ति ना करने के कारण निलंबित भी कर दिया | पन्ना जिले में इस वर्ष १०५०० नसबंदी कराने का लक्ष्य तय किया गया था ,अब तक ८५०० की नसबंदी की जा चुकी है |
 पन्ना जिले में जहाँ उपहारों की बोछार है वही सागर के कलेक्टर ने भी नया फंडा अपनाया है , नसबंदी करवाओ और बंदूक का लाइसेंस पाओ | वे जानते हें की बुंदेलखंड के लोगों का सबसे बड़ा शौक क्या है ? इस लिए यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस चाहिए हो तो सागर आ जाये |
सरकार जहाँ बैठती है , जहाँ निर्णय होते हें प्रदेश के वहाँ तो और गजब का काम नसबंदी को लेकर हुआ है | भिखारियों , बुजुर्गो ,विधवाओं तक की नसबंदी करा डी गई आखिर लक्ष्य जो पाना था |
अब इस सरकार को कौन बताये की जब नसबंदी केम्पों का आयोजन होता है  तो वहां किस तरह से जानवरों की तरह व्योहार किया जाता है , नसबंदी कराने वाली महिलाओं के साथ | आपरेशन के बाद ना तो उनके लिए पलंग होते हें ना ही कपडे | ऊपर से उनको मिलने वाली मुफ्त दवा भी हड़प ली जाती है , टेस्ट के नाम पर निजी अवेध क्लीनिकों से टेस्ट कार्या जाता है | जिसका कमीशन अस्पताल के लोग लेते हें |
रवीन्द्र व्यास

21 फ़रवरी, 2011

: humen story


त्रासदी 
आयोग के निर्देशों को नाहीं मानती मध्य प्रदेश सरकार 
रवीन्द्र व्यास 

 ७० साल का वृद्ध जगदीश साहू उन बदनसीबों में से एक है  जिसे अपने ही जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने को मजबूर होना पडा था | पिछले  ६ साल  से वह अपने बेटे के हत्यारे पुलिस वालों को सजा दिलाने के लिए भटक रहा है | मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग से मिला अधूरा न्याय  भी न्याय प्रिय  बी.जे.पी.सरकार की फाइलों में दफ़न हो कर रह गया है |
 नोगांव  निवासी उमेश साहू को पुलिस ने ३ जून ०६ की सुबह उसके ही घर से पकड़ा था |उसे यह कह कर पुलिस लाइ थी की सी.एस.पी. साहब को कुछ पूछ तांछ  करनी है दो घंटे में छोड़ देंगे | तत्कालीन सी.एस.पी. प्रमोद सिन्हा की गाडी से उसे छतरपुर कोतवाली लाया गया |पुलिस ने मानवता की सारी हदें पार करते हुए  उसे जानवरों की तरह पीटा, उसके गुप्तांग में कोकोकोला की बोतल डाली गई , जब इससे भी वर्दी वालों को संतोष नहीं हुआ तो पेट्रोल डाला गया | ४ जून की रात  उसकी धर्मेंद्रा सोनी के साथ गाँजा रखने के आरोप में छतरपुर के कुंदन लोज के पास से  गिरफ्तारी दिखाई |  ५ जून को उसे न्यायालय में पेस कर जेल भेज दिया गया |
जेल में उसका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया ,और ना हीं उसके शरीर पर आई चोटों के निशान लिखे गए |हालात जब ज्यादा गंभीर हो गई  और उसके एनल एरिया से मवाद बहने के कारण बदबू आने लगी <तब २० जून को उसे अस्पताल भेजा गया ,जहां उसकी मोत हो गई |
प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने अपने पत्र क्र .२५७६४ दि.२०/१०/१० को इस मामले की जांच रिपोर्ट अपनी अनुशंषा के साथ प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन गृह (पुलिस) मंत्रालय  भोपाल को भेजी |पत्र में आयोग ने स्पष्ट किया की प्रमोद सिन्हा तत्कालीन नगर  पुलिस अधीक्षक छतरपुर ,राकेश तिवारी (प्रधान आरक्षक ) जितेन्द्र सिंह (आरक्षक), पर मानव अधिकार हन्नान के लिए अभियोजन की कार्यावाही की जाए  वा  उनके विभागीय  जांच की अनुशंषा की ,साथ ही उमेश साहू के आश्रितों को शासन ३ लाख की अंतरिम  छति पूर्ति  राशि प्रदान करे | शासन यदि चाहे तो यह राशी आरोपियों से वसूल कर सकता है |
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया था की अभियोजन ,विभागीय जांच ,संस्थित करने एवं मृतक के आश्रितों को अंतरिम छतिपूर्ति राशि अदा करने सम्बन्धी अनुशंषा एक माह में पूर्ण की जाए | आयोग के इस आदेश के बावजूद भी मध्य प्रदेश की जनहितकारी सरकार ने पीड़ित पक्छ को न्याय दिलाने की दिशा में कोई कार्यावाही नहीं की |आयोग ने ९ दिसम्बर को पुनः सरकार को स्मरण पत्र लिखा है | 
इस सारे मामले के पीछे की कहानी और  बाद की कहानी तंत्र के गिरोह तंत्र को उजागर करती है | उमेश साहू के पिता जगदीश साहू बताते हें  कि उमेश ने ०६-०७ के भाँग-घोंटा का ठेका  पहली बार उमेश ने लिया था | उसके इस ठेका लेने से नोगांव के वे लोग खाशे नाराज हो गए जो  अवेध रूप से गांजा बेंचने का कार्य वर्षों से करते आ रहे थे | इन लोगों से २ जून को उमेश झगडा 
भी हुआ था | अवेध काम करने वाले इन लोगों के सम्बन्ध पुलिस से काफी याराना थे | इसी के कारण पुलिस ३ जून को उमेश को वर्दी वाले गुंडों कि तर्ज पर उठा ले गई , और उसे इतना पीटा कि उसकी मोत हो गई |
उमेश कि मोत के बाद पुलिस प्रशासन ,जिला प्रशासन ने जिस तत्परता से आरोपी वर्दी धारियों को बचाने कि योजना बनाई उसकी मिशाल मिलना मुश्किल है | जिला प्रशासन ने मामले कि मजिस्ट्रियल जांच एस.ड़ी.एम्. छतरपुर से ,पुलिस जांच एस.ड़ी.ओ.पी. यू.एस.सिकरवार ,और एड्ड.एस.पी. ओ.पी.त्रिपाठी तथा जेल विभाग ने जेल उपमहानिरीक्षक से जांच कराइ | सभी जांच रिपोर्टों में पुलिस कर्मियों को बेदाग़ बताया गया |
जगदीश साहू कहते हें कि मेरे बेटे कि मोत के बाद से मेरी पत्नी भी अब बीमार रहने लगी है | बच्चे भी अब वर्दी वालों को देख कर दर जाते हें | मेरा सारा कारोबार चोपट हो गया है , मेरी जिंदगी कि सिर्फ यही तमन्ना रह गई है कि अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिला सकूँ ,ताकि फिर कोई वर्दी वाले गुंडे किसी के बेटे किसी के भाई ,किसी के पति,किसी के पिता को ना मार सकें | 

04 फ़रवरी, 2011

Dance Festival




खजुराहो  की तीसरी शाम यास्मिन सिंह के नाम
संसार सारं सदा वसंतम
रवीन्द्र व्यास
खजुराहो डांस फेस्टिवल की तीसरी शाम  की शुरुआत प्रख्यात न्रत्यांगना लीना नंदा के ऑडसी नृत्य से हुई , पर इस शाम कत्थक
न्रत्यांगना यास्मिन सिंह वा आरती सिंह  की मनमोहक और भाव पूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा | तीसरी और आखरी प्रस्तुति ज्योत्सना जगन्नाथन के भरतनाट्यम की हुई |
कथक  शास्त्रीय न्रत्य की ऐसी विधा है जिसमे  कथा के कथानक पर नृत्य की भाव पूर्ण प्रस्तुति दी जाती है | रायपुर से आई यास्मिन सिंह ,और आरती सिंह के ग्रुप ने  ये प्रस्तुतियां  दी | जिसमे अनादी अनंत प्रभु की लीलाओं को विशुद्ध गीत की बंदिशों के साथ पेश किया | राजगढ़  घराने की कत्थक
न्रत्यांगना  यास्मिन सिंह वा आरती सिंह ने शिव आराधना के साथ नृत्य पेश किया | ठाट ,सवाल जबाब ,ठुमरी ,मध्यलय, गंगा अवतरण , आदि की प्रस्तुतियां दी | उन्होने द्रोपदी के चीर हरण के प्रसंग की प्रस्तुति दे कर दर्शकों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया|
घोडे की चाल ,हिरन की चाल , के बाद  गत निकाश की प्रस्तुति दी , जिसमे उन्होने श्री कृष्ण की गत ,मयूर की गत की कैसे  बादलों की पहली बूंद जमीन पर गिरती है और मयूर मिटटी की सोंधी खुसबू से कैसे  भाव विभोर हो कर  नाच उठता है  | एसा चित्रण था मानो स्वयं  मयूर मंच  पर आ गया हो | रुक्शार की गत  जिसमे हाथ की मुद्रा बनाकर तबले के साथ चलना होता है |  उनके साजिंदों ने भी उनका भरपूर साथ दिया , |
श्रीमती यास्मिन सिंह ने  इसे अपने लिए गोरव पूर्ण छड  बताया , उनका कहना है की पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय  मंच पर प्रस्तुति देने का मौक़ा  मिला है, जिसकी अभिलाषा हर कलाकार की होती है | उनका मानना है की आज भी शास्त्रीय नृत्य शास्वत वा सत्य  है जिसे हर कोई पसंद करता है |
कार्यक्रम के प्रारम्भ में उस्ताद अलाउदीन खान संगीत एवं कला अकादमी के श्री तेलंग ने यास्मिन सिंह ,आरती सिंह,और आर.पी. सिंह का सम्मान किया |


03 फ़रवरी, 2011

( khajuraho Dance)

खजुराहो नृत्य समारोह
मेरा सपना था इस मंच पर प्रस्तुति देने का *= हेमा मालिनी
 रवीन्द्र व्यास
खजुराहो में शास्त्रीय न्रत्यो के सात दिवसीय   महा कुम्भ में नृत्य समारोह का आगाज मंगलवार की शाम फिल्म अभिनेत्री हेमामलनी और उनकी बेटिया ईसा व आहना देवल के ओडिसी नृत्य के साथ हुआ ,| छत्तीसवे अंतर्राष्टीय नृत्य उत्सव का शुभारम्भ मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा ने द्वीप प्रज्जलित कर किया
इस  विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में कला और संस्कृति को नया आयाम देने के लिए खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन किया जाता है|  देश के कोने - कोने से आये कलाकार अपनी नृत्य कला को प्रस्तुत कर अपने जीवन को धन्य बनाते है , उन्ही कलाकारों में से एक है फिल्म अभिनेत्री हेमामालनी जिन्होने  अपने  नृत्य साधना के इतिहास में खजुराहो के इस मुक्ताकाशी मंच पर पहली बार कला का जोहर अपनी दोनों बेटियों के साथ दिखाया | और स्वीकारा की  खजुराहो नृत्य समारोह प्राचीन काल से चला आ रहा है ,अभी तक अच्छी  तरह से कायम  रखा हुआ है , इस नृत्य समारोह में भाग लेना ही गर्व की बात है  बहुत ही सुन्दर सा अहशास होता है , कई नर्र्त्यांगना  इसके लिए वर्षों प्रेक्टिश करती हें | और कहती  हें मुझे खजुराहो नृत्य समारोह में भाग लेने को मिल जाये  |
  बहुत साल पहले मुझे भी इक्छा थी यहाँ डांस  करने की  ,लेकिन मुझे कभी यहाँ  डांस  का मोका नहीं मिला , मेरे से मेरी बेटियां ज्यादा लकी हें जिन्हें कुछ साल पहले यहाँ डांस  करने का मोका मिला , मुझे आज ये मोका मिला |
 नृत्य समारोह का शुभारम्भ करने पहुचे मद्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री लक्ष्मी कान्त शर्मा ने अंतर्राष्टीय ख्याति प्राप्त खजुराहो नृत्य समारोह को समय के अनुसार विकसित करने की बात कही | उनका कहना है  की हेमा मालिनी सदी की महान कलाकार हें , सब चाहते थे की हेमा जी यहाँ आयें ,और कार्यक्रम की प्रस्तुति दें | तीन वर्ष पहले हमने यह तय किया था की हेमा जी यहाँ आयें | वो दिन आज साकार हुआ है |  यह मध्य प्रदेश के लिए पहला अवसर होगा | हमने देखा की समारोह का समय ठीक नहीं है इसलिए इसे एक माह पहले आयोजित किया गया है | अब हम देख रहे हें की मंच की व्यवस्था को सुधारना होगा ,विशिस्ट दीर्घा भी होना चाहिए | आगे इसके लिए प्रयाश किये जायेंगे |
समारोह की पहली शाम हेमा मालनी और उनकी बेटिया ईसा व आहना देवल के ओडिसी नृत्य के नाम रही |

1975 se खजुराहो नृत्य समारोह क़ी शुरुआत क़ी गई थी | इसका मकसद यहाँ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना था | पहले यह मंदिरों के के मध्य हुआ करता था | बाद में इसे मंदिर परिसर से बाहर किया जाने लगा | पिछले काफी समय से इसमें दर्शक तक जुटना मुश्किल हो रहा था \ जिसके चलते इसे फरवरी माह में किया जाने लगा | पर इसका भी कोई  असर इस शास्त्रीय नृत्य समारोह पर नहीं हुआ | इसी के चलते फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी को मंच  प्रदानं किया गया | ड्रीम गर्ल क़ी झलक पाने के लिए दर्शक बेताब रहे |
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09 जनवरी, 2011

Ken Betva Link Project

शनि वार १६ अप्रैल ११ को केंद्रीय मंत्री जयरामरमेश क्या आये एक नईउम्मीद लोगों में जाग गई |- केन बेतवा लिंक परियोजना पर कई सालों से चर्चा चल रही है मेने खुद सलमान खुर्सिद  जो सिचाई मंत्री हें  से चर्चा कि है ,मेने पी.एम्.. को पत्र लिखा है कि अगर ये केन बेतवा लिंक बनेगा तो ये सारा पन्ना टाइगर रिजर्व ख़त्म हो जाएगा , करीब ६० वर्ग कि.मी.एरिया जो शेरों के रहवास छेत्र का प्रमुख स्थान है  इसका सत्यानाश हो जाएगा , केन बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व को ख़तरा है हमारा मंत्रालय तो इसकी इज्जाजत  नहीं देगा | ये कहना है देश के पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री जय राम रमेश का | वे पन्ना टाइगर रिजर्व को देखने आये थे | उनके इस बयान के आते ही बी.जे.पी. सांसद जीतेन्द्र सिंह बुन्देला के नेतृत्व में बीजेपी.नेता  खजुराहो विमान तल पर  मंत्री से मिले | जय राम रमेश ने साफ़ शब्दों में कहा की ये इसी योजना है जिससे  पार्क का तीस फीसदी हिस्सा नस्ट हो जाएगा , में जानता हूँ की  हमारी पार्टी के कई नेता इस योजना को चाहते हें पर यह योजना ठीक नहीं है | 
इस साल के

 शुरुआत में इस परियोजना को लेकर हमने कुछ सवाल उठाये थे 



 केन- बेतवा लिंक परियोजना 
बुंदेलखंड के छतरपुर ,पन्ना,टीकमगण ,झाँसी जिले केलोगों की तक़दीर बदलने वाली  ,बुंदेलखंड की महत्वपूर्ण केन -बेतवा लिंक परियोजना पर भी सवाल उठने लगे हें | अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब देश की ३७ नदियों को आपस में जोडने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी | देश की इन ३७ नदियों को आपस में जोडने पर ५लख ६० हजार करोड़ रु .व्यय होने का अनुमान लगाया गया था | |यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था | परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर ३० करोड़ रु ,व्यय किये गए हें | ६ हजार करोड़ की इस परियोजना का मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व  के डोंदन गाँव में बनना है | बाँध वा नहरों के कारण सवा पांच हजार हेक्टेयर छेत्र  नष्ट हो जाएगा ,छतरपुर जिले के दस गाँव डूब जायेंगे |
केन बेतवा लिंक परियोजना में चार बाँध बनाए जायेंगे | केन नदी पर डोंदन बाँध बनेगा |७७ मी.ऊँचा वा १९६३३ वर्ग कि.मी. जलग्रहण छमता  वाले इस मुख्य बाँध में २८५३ एम्.सी.एम्.पानी भंडारण कि छमता होगी|२६१३.१९ करोड़ कि लागत वाले इस बाँध से दो  बिजली घर बनेंगे जिससे ३६ में.वा. बिजली बनेगी  |इन बिजली घर पर ३४१.५५ करोड़ कि  राशि व्यय  होगी  |इस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व  कि ५२५८ हेक्टेयर जमीन  सहित कुल ९हजार जमीन डूब जाएगी | इस जमीन पर बसे सुकुवाहा ,भावर खुवा ,घुगारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा ,डोंदन ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँव का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा | बाँध से २७०८.३६ करोड़ कि लागत से नहरें बनाई जाएँगी | २१८ कि.मी.लम्बी मुख्य  नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकर मिलेगी | इस नहर से १०७४ एम्.सी.एम्. पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमे से ६५९ एम्.सी.एम्. पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा |
डोंदन बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर  बनेंगे | रायसेन वा विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से ५६८५० हेक्टेयर छेत्र में,बरारी बेराज से २५०० हे.वा केसरी बेराज से २८८० हे. छेत्र में  सिचाई  होगी | लिंक नहर से मार्गों में ६०२९४ हे. छेत्र सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के ४६५९९ हे. वा उत्तर प्रदेश के १३६९५ हे.छेत्र में सिचाई होगी | डोंदन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि ३.२३ लाख हे. जमीन सिंचित होगी
 बाँध को पर्यावरण विद उचित नहीं मानते हें | इसे प्रकृति के के नियमों के विपरीत वा विनाशकारी  मानते हुए डॉ.वंदना शिवा  सेमिनारों में कह चुकी हें कि  सरकार यह सब विदेशी कम्पनियों के इशारे पर बुंदेलखंड कि जेव विभिद्द्ता को नष्ट करने कि साजिश कर रही हे | सरकार पानी पर से जनता के बुनियादी अधिकार को ख़त्म करना चाहती हे | केन और बेतवा  के पानी के निजीकरण की पहली सीडी है | इस परियोजना पर जितना पैसा लगाया जा रहा है यदि उसे गाँव का पानी गाँव में रोकने पर खर्च किया जाए तो बुंदेलखंड के हर गाँव में खुशहाली छा जायेगी |
अब यहाँ सरकार को यह बात समझ में शायद नहीं आती की ,या वह समझना नहीं चाहती की एक ओर पन्ना टाइगर रिजर्व हे , जिसको बचाए रखने का दावा सरकार  करती रहती है | बाघों को बचाने के लिए सरकार ने खजाना खोल रखा है  " दूसरी ओर वाही सरकार पार्क एरिया में बाँध बनाकर बाघों को भी विस्थापित करना चाहती है | 
अब लगता है जय राम रमेश के बयान के बाद की शायद यह पार्क बचा रहेगा |   

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...