03 मार्च, 2011

nasha nasbandi kaa

"नसबंदी" करवाओ  मोटर साईकिल मुफ्त पाओ

मध्य प्रदेश में इन दिनों नशबंदी करवाने का अभियान चल रहा है |सरकार ने  इसे  महा अभियान बना दिया है और साफ़ चेतावनी दी है कि जिन जिलों में लक्ष्य  कि पूर्ति नहीं होगी वहाँ के सी.एम्.एच .ओ . और कलेक्टर दोनों को दोषी माना जाएगा | जब सरकार इनको दोषी मानेगी तो गाज भी इन पर गिरेगी | भला कोई भी समझदार व्यक्ति मलाईदार जिले के मुखिया का पद  छोड़ कर भोपाल के मुख्यालय में बैठना क्यों पसंद करेगा | सरकार कि इस चेतावनी के बाद अधिकारी  लोग बढ चढ़ कर भाग लें रहे हें | लोगों को तरह -तरह के ऑफर दिए जा रहे हें | कंही मोटर साईकिल  दी जा रही हे तो कहीं बंदूक के लाइसेंस , कहीं लक्ष्य पाने के लिए नपुंसकों और विधवाओं की भी नसबंदी की जा रही है भिखारियों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है |
पन्ना कलेक्टर के.सी.जैन ने एक मार्च से ६ मार्च तक का मेगा नसबंदी अभियान शुरू किया है |इस अभियान में २५ से ज्यादा लोगों की नसबंदी कराने वाले को एक हीरो होंडा मोटर साईकिल ,२० के ऊपर वाले को एल.सी.डी. टी.वी.,दस से ज्यादा वाले को कलर टी.वी.,पांच से ज्यादा करवाने  वाले प्रेरक को प्रशस्ति पत्र ,शाल श्रीफल से सम्मानित किया जाएगा | ६ मार्च के  बाद लाटरी भी खुलेगी जिसमे सभी हितग्राही  होंगे   जिसमे प्रथम को मिलेगी मोपेड ,द्वितीय  को मिलेगी एल.सी.डी.टी.वी., और तीसरे को मिलेगा  कलर टी.वी., |इसके बाद प्रत्येक विकाश खंड स्तर पर पांच -पांच लाटरी निकाली जाएँगी  और पाँचों विजेताओं को एक-एक प्रेशर कुकर  दिया जायेगा | शत- प्रतिशत उपलब्धि हासिल  करने वाले विभाग को दस हजार का नगद पुरुष्कार ,प्रशस्ति पत्र ,एवं शील्ड प्रदान की जाएगी |
कलेक्टर जैन ने अमानगंज  के एम्.पी.डब्लू. सरमन नामदेव और पडेरी ए.एन.एम्. श्री मति रामकुमारी  सेनी को लक्ष्य की पूर्ति ना करने के कारण निलंबित भी कर दिया | पन्ना जिले में इस वर्ष १०५०० नसबंदी कराने का लक्ष्य तय किया गया था ,अब तक ८५०० की नसबंदी की जा चुकी है |
 पन्ना जिले में जहाँ उपहारों की बोछार है वही सागर के कलेक्टर ने भी नया फंडा अपनाया है , नसबंदी करवाओ और बंदूक का लाइसेंस पाओ | वे जानते हें की बुंदेलखंड के लोगों का सबसे बड़ा शौक क्या है ? इस लिए यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस चाहिए हो तो सागर आ जाये |
सरकार जहाँ बैठती है , जहाँ निर्णय होते हें प्रदेश के वहाँ तो और गजब का काम नसबंदी को लेकर हुआ है | भिखारियों , बुजुर्गो ,विधवाओं तक की नसबंदी करा डी गई आखिर लक्ष्य जो पाना था |
अब इस सरकार को कौन बताये की जब नसबंदी केम्पों का आयोजन होता है  तो वहां किस तरह से जानवरों की तरह व्योहार किया जाता है , नसबंदी कराने वाली महिलाओं के साथ | आपरेशन के बाद ना तो उनके लिए पलंग होते हें ना ही कपडे | ऊपर से उनको मिलने वाली मुफ्त दवा भी हड़प ली जाती है , टेस्ट के नाम पर निजी अवेध क्लीनिकों से टेस्ट कार्या जाता है | जिसका कमीशन अस्पताल के लोग लेते हें |
रवीन्द्र व्यास

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