बुंदेलखंड के सूर्य मंदिर
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड इलाके में सृष्टी के देवता सूर्य के पूजन के अनेकों दुर्लभ प्रमाण मिलते हें | जो यह बताते हें की यहाँ के लोग अनादि काल से सूर्य की पूजा करते आ रहे हें | और यही वह इलाका है जहाँ ज्योतिषाचार्य वराहमिहिर ने विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत की रचना की थी | भविष्य पुराण की माने तो कालपी के निकट यमुना के तट भगवान् श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब ने सूर्य उपासना करके कुष्ट रोग से मुक्ति पाई थी |
वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है.पहले यह सूर्योपासना मंत्रों से होती थी.बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो सूर्य मन्दिरों का निर्माण हुआ..अनेक पुराणों में यह लेख भी मिलता है,कि ऋषि दुर्वासा के शाप से कुष्ठ रोग ग्रस्त श्री कृष्ण पुत्र साम्ब ने सूर्य की आराधना कर इस भयंकर रोग से मुक्ति पायी थी.प्राचीन काल में भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर भारत में बने हुए थे.उनमे आज तो कुछ विश्व प्रसिद्ध हैं देश में बने लगभग १४० सूर्य मंदिरों में यदि किसी इलाके में ये सवाधिक हें तो वह है बुंदेलखंड |.वैदिक साहित्य में ही नही आयुर्वेद,ज्योतिष,हस्तरेखा शास्त्रों में सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है
देश में सूर्य मंदिरों का निर्माण अल्प संख्या में हुआ है | १९८४ इ.तक देश में मात्र १४० सूर्य मंदिर के प्रमाण मिलते हें | पर बुंदेलखंड में सूर्य मंदिर की संख्या सर्वाधिक है |
इस हिसाब से देखा जाय तो बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में ९ ,छतरपुर जिले में पाँच, दतिया जिले में ३, सागर ,भिंड ,झाँसी और हमीरपुर में२- २,पन्ना नरसिंह पुर,दमोह,गुना, मुरेना ,बांदा,और जिला जालोन में एक -एक सूर्य मंदिर और विग्रह है | शिवपुरी में ४,और ललितपुर में ७ मंदिरों और विग्रहों का उल्लेख मिलता है | इनमे टीकमगढ़ के मड्खेरा के और खजुराहो के सूर्य मंदिर को पुरातात्विक द्रष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है | वहीँ दतिया के बाला जी सूर्य मंदिर का धार्मिक द्रष्टि से महत्त्व है |
पहुज नदी के तट उन्नाव कस्बा में सूर्य देव का बाला जी मंदिर है | कहते हें की एक टीले की खुदाई करने पर ब्राह्मण बालक को ६ इंच व्यास का सूर्य यंत्र मिला था , इस चक्र के चारों ओर २१ त्रिभुज हें जो सूर्य के २१ मुखों के प्रतिक हें |जिसे एक छोटा चबूतरा पर स्थापित किया गया था | उस समय झांसी नरेश नारू शंकर कुष्ट रोग से पीड़ित थे , उन्होने यहाँ आकर प्रार्थना की , सूर्य देव की कृपा से वे निरोगी हो गए | उन्होने ही यहाँ मंदिर निर्माण शुरू कराया , तब दतिया के राजा ने उनसे कार्य बंद कराने का निवेदन किया और स्वयं मंदिर का निर्माण कराया | यहाँ हर रवि वार को मेला सा लगता है | लोक मान्यता है की यहाँ से कोई खाली हाथ नहीं जाता है | उसकी मनोती पूर्ण अवश्य होती है |
छतरपुर जिले के मऊ सहानिया सूर्य भगवान् का छोटा सा मंदिर है , कहते हें की यहाँ शादी के बाद यहाँ के लोग आशीर्वाद लेने आते हें |
कालपी (उ.प्र.) यमुना नदी के तट पर काल्प्रियानाथ मंदिर है | भविष्य पुराण के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र साम्ब ने यही सूर्य उपासना की थी , ज्योतिषाचार्य वराहमिहिर ने यहीं विश्व प्रसिद्द सूर्य सिद्धांत का प्रति पादन किया था |
सूर्य ,चन्द्र ,भूमि ,जल,वायु ,अग्नि आदि ये पांच तत्व सृष्टी के मूल कारक माने जाते हें | सिन्धु घाटी की सभ्यता की खुदाई में भी सूर्य पूजा के प्रमाण मिले हें |
.वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता धर्ता मानते थे.|.ऋग्वेद में देवताओं कें सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है.\सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है.सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं|

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