19 दिसंबर, 2010

News

  दिग्विजय   सिंह के बयान पर उमा भारती का  पलट वार 
 कांग्रेश कुछ राज्यों में घुसपेठियों के सहयोग से चुनाव जितने लगी है कुछ राज्यों में सिमी और नक्सलवादी संगठनों के सहयोग से चुनाव जितने की तयारी में है | उनको प्रशन्न करने के  लिए हिन्दुओं को बदनाम  कररही है |  इससे हिन्दू का नुकशान नहीं बल्कि देश का नुकशान होगा | स्पेक्ट्रम घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को प्रवक्ता बनाया है | हिन्दू मुस्लिम की खून की होली खेलकर उनका आपस में झगडा करवाकर भ्रष्टाचार  के मुद्दे से लोगों का ध्यान  हटाना चाहते हें | 
सरस्वती शिशु मंदिर के बारे में जो उन्होने कहा हे , दिग्विजय सिंह को कहूँगी की गोलवलकर जी को पंडित नेहरु ने धन्यबाद  पत्र लिखा था | क्योंकि  १९४९ में पाक ने गलत तरिके से काश्मीर को कब्जाने की कोशिस की थी | उस समय संघ के स्वयं सेवक ने  सेनिकों के साथ लड़ाई में भाग लिया था |,उस समय  २६ जनवरी की परेड में  गोलवलकर ने स्वयं सेवकों को बुलाया था | सरस्वती शिशु मंदिर में  कांग्रेश नेताओं के बच्चे भी पड़ते हें |
  स्पेक्ट्रम घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने का बहुत ही घिनोना प्रयाश है | और भ्रष्टाचार को  छिपाने के लिए वे हिन्दू और मुस्लिम  में जहर घोलकर वे देश को बहुत बड़ा नुकशान पहुंचा सकते हें | आप लोगों से निवेदन है की  दिग्विजय सिंह के बयानों को तबज्जो ना दीजिये | अगर कांग्रेस के नेता इस बयान को दोहराते हें तब जर्रूर  देश के राजनेतिक दलों को बयान जबाब देना चाहिए |
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16 नवंबर, 2010

Fwd: story script

 अनोखा दिल 
रवीन्द्र व्यास 
  मध्य प्रदेश के छतरपुर  जिले में सोमवार (15 nov10) को  एक अनोखे बच्चे ने जन्म लिया | जिसका दिल { ह्रदय } शरीर के अन्दर नहीं बाहर है|कोई भी इसके धड़कते  हुए दिल को देख सकता है   | दुनिया में इस तरह के सिर्फ आठ दस मामले ही सामने आये हें |  जिले के अनगोर गाँव के रहने वाले  अशोक साहू की पत्नी सीता  ने आज एक शिशु को जन्म दिया | अनगोर के स्वास्थ केंद्र में जन्मे इस बालक को जिसने भी  देखा हेरान रह गया | क्योंकि इसका दिल बाहर था | इसे तत्काल ही छतरपुर जिला अस्पताल लाया गया | जहाँ डाक्टरों ने इसे इलाज के लिए देहली ले जाने की सलाह दी है |अशोक के यह तीसरी संतान है एक लड़की और एक लड़का पहले से है | गरीब मजदूर के लिए यह एक बड़ा संकट है | की ले जाने के लिए पेसे नहीं हैं और इलाज के अभाव में उसका बचना मुश्किल है |सहयोग से आज मंगजिला प्रशासन के लवार को उसे दिल्ली इलाज के लिए भेजा गया | 

       जिला अस्पताल के सर्जन डॉ .के.के.चतुर्वेदी  कहते हैं की  बच्चा बड़ा ही अद्भुत है |इसके सीने की हड्डी जिसको स्टर्नम कहते हैं ,वह नहीं बनी है ,और पूरा ह्रदय इसके शरीर के बाहर है , ये ह्रदय  कॉम्पेक्ट  हो रहा है , स्पेंड   हो रहा है ,बच्चा स्वास्थ है ,रो रहा है ,इसको सिनोसिस नहीं है ,बाकी पेरामीटर इसके सब नोर्मल हैं परन्तु ह्रदय इसका शरीर के बाहर है | एसे केस दुनिया में  बहुत कम देखने को मिलते हैं | करीब ८-१० केस ही रिकॉर्ड में हैं |इस तरह से ये बहुत ही अदभुत केस है जो देखने को मिला है | इसकी सर्जरी होना बहुत आवश्यक है जो बडे स्तर पर जहाँ कार्डियोथोरिक सर्जन हैं वहां  संभव है | हमने इसे A.I.M.S.  ले जाने के लिए अग्रेसित किया है ||ये एक तरह का पेदाइसी डिफ्फेक्ट है |
दिल बाहर की जानकारी लगते ही बालक का पिता  अशोक साहू  हेरान रह गया वो कहता है की ये तो हमे मालुम नहीं ह्रदय बाहर है वो कह रहे हैं की दिल्ली ले जाओ ,हम लोग मजदूरी करते हैं हमारी हेसियत नहीं है की दिल्ली ले जाएँ |
बहर हाल जिला प्राशासन ने बच्चे को इलाज के लिए एम्बुलेंस से दिल्ली भेजा | उसके साथ एक डॉ .भी गए हैं |

10 अक्टूबर, 2010

Anokha School


एक स्कूल जहाँ दीवालों से मिलता ज्ञान
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06 अक्टूबर, 2010

,RAHUL Gandhi


सिमी और आर.एस.एस.एक समान = राहुल गाँधी 
रवीन्द्र व्यास 
 कांग्रेस के  युव राज राहुल गाँधी ४से ६  अक्तूबर के   मध्य प्रदेश दौरे  की शुरुआत श्योपुर  से की |अपने मध्य प्रदेश के दौरे में उनने  नोजवानो को कांग्रेस की रीति निति  समझाई और युवक  कांग्रेस में शामिल   होने की अपील भी की  |ये अलग बात हे की इस अपील में उनने एक एसा राजनेतिक बयान टीकमगण  में दे दिया की जिससे आर.एस .एस. के लोगों की भोंहे तन गई |उनने कहा कि सब के लिए दरवाजे खुले हें ,पर क्रिमिनल ना हो विचारधारा कांग्रेस पार्टी जेसी हो ,आर.एस.एस.कि ना हो, सिमी  कि ना हो|
                            गोर तलब हे कि सिमी एक राष्ट्र द्रोही प्रतिबंधित संगठन हे जिसके साथ आर.एस.एस. का नाम जोड़े जाने से संघ के नेताओं का नाराज होना लाजमी हे | हालाँकि टीकमगण  कि सभा का बयान तो एक तरह से शांत  हो गया था | भोपाल कि पत्रकार वार्ता में  उनने इस बयान कि एक तरह से पुष्टि करते हुए कहा  दोनों ही घोर कट्टरवादी संगठन हें |
 अयोध्या काण्ड के बाद से उनका यह बयान एक सोची समझी राजनेतिक समझ का ही हिस्सा माना जा रहा हे | जिसके तहत वे बिहार कि  चुनावी राजनीति  को कहीं ना कहीं प्रभावित करना चाहते हें | उनके इस बयान से भड़के बी.जे.पी. के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कह डाला कि राजनीती में राहुल का जादू नहीं चलने से  वे अपना दिमागी संतुलन खो बैठे हें |एम्.पी.बी.जे.पी.के अध्यक्ष प्रभात झा ने उनके इस बयान को राष्ट्र वाद के मुंह पर तमाचा करार दिया | 
उनके इस तीन दिवसीय राजनेतिक यात्रा का मकसद युवा वर्ग को कांग्रेस कि तरफ खींचना था | हर जगह उनने युवा वर्ग को उसके संख्या बल का हिसाब समझाया | कि देश में ७० फीसदी युवा हें और उनका राजनेतिक अस्तित्व नगण्य हे | कांग्रेस पार्टी ऐसी हे जिसने युवाओं पर भरोषा किया हे | अब नेता थोपे नहीं जायेंगे आप चुनेंगे | उनने ये भी भरोषा दिलाया कि कोई भाई भतीजा वाद नहीं चलेगा |जो काम करेगा चुनाव लडेगा वो आगे बढेगा |
एक मझे हुए कार्पोरेट जगत के सी.इ.ओ.कि तरह उन्होने अपने हर कार्यक्रम से मिडिया को दूर रखा | कार्यक्रमों में पार्टी के लोगों ने केमरे लगवाये और मिडिया को फुटेज उपलब्ध कराये | 

 


06 सितंबर, 2010

Thelisemiya_थेलिसिमिया पीड़ित पांच वर्षीया अनिष्का को जिले के नोजवान देंगे जिंदगी



थेलिसिमिया पीड़ित पांच वर्षीया अनिष्का को जिले के नोजवान देंगे जिंदगी 
अभिषेक व्यास  
छतरपुर  से एक अच्छी खबर आई हे ये उन लोगो के लिए भी हे जो आज के नोजवानो को कोसते हें |यहाँ की रहने वाली पांच वर्षीया अनिष्का बचपन से ही थेलिसिमिया से पीड़ित हे | ६ जुलाई २००५ को उसके पिता अरविन्द खरे को इस बीमारी के बारे में पता चला था | एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले अरविन्द ने अपनी सारी पूंजी उसके इलाज पर खर्च कर दी थी |५० हजार खर्च कर हेदराबाद में अनिष्का के शारीर का ब्लड बदलवाया था | आर्थिक रूप से जिंदगी से हार चुके अरविन्द को छतरपुर की कम्युनिटी हेल्थ केयर संस्था मिल गई | जिसके नोजवान साथियों ने अनिष्का की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया हे | संस्था के पास ४२ लोगो ने ब्लड देने का संकल्प पत्र भरा हे |
संस्था के प्रमुख दीपक तिवारी के अनुसार ,इस कार्य के लिए एक हेल्प लाइन सेवा शुरू कि गई हे जिसमे लोग संस्था के मोबाईल नंबर 9753344434,,9926903939,,9826211631 पर  संपर्क कर रक्त दान कर सकते हें |
 डाक्टर लखन तिवारी  का कहना  हे की ये बीमारी लाइलाज होती हे | इस बीमारी के जीवाणु रक्त बनाने की प्रक्रिया रोक देते हें , ब्लड के  व्हाइट ब्लड सेल कम होते जाते हें | एसे में इसे मरीज को  नया ब्लड देने की जर्रूरत पड़ती हे | पीड़ित व्यक्ति को समय पर नया ब्लड मिलता रहे तो वे अपना पूरा जीवन बिना किसी तकलीफ के गुजार देते हें |  


23 अगस्त, 2010

Welcom firing


 स्वागत में  चली गोलियां
रवीन्द्र व्यास  
वो दिन था एक अगस्त २०१० का ,अगस्त माह यानि कि क्रांति माह ,आजादी के माह ,  का पहला दिन , मध्य प्रदेश के छतरपुर में आज खुले आम गोलियां चलाई गई | यहाँ के प्रमुख छत्रसाल चोराहे पर पुलिस की मोजूदगी में ये गोलियां चलती रही |यहाँ ना किसी क्रांतिकारी का सम्मान था ना बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कोई क्रांति का आगाज था |  था स्वागत का जस्न,  बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अपने राष्ट्रीय सह संयोजक राजेश पांडे के स्वागत के नाम पर ये सब किया |
दरअसल  विश्व हिन्दू परिषद्  ने  यहाँ के नगर भवन में संत अर्चक ,पुरोहित सम्मान समारोह आयोजित किया था | इस समारोह में जिले भर से तक़रीबन दो सो  से ज्यादा साधू संत आए थे | इसी समारोह में भाग लेने  बजरंग दल के पांडे जी यहाँ आये थे | उनका स्वागत बंदूक कि गोलियों से हवाई फायर कर के किया गया | हालांकि बजरंगियों को उनका स्वागत हिन्दू धर्म कि उस रीति निति के अनुसार करना चाहिए ,जो हिन्दू धर्म में आदि अनादि काल से चली आई हे | पर वे भी क्या करें मीडिया में वह खबर प्रमुखता नहीं पा सकती थी ,इस लिए आधुनिक हथियारों से स्वागत कर दिया | बजरंग दल के जिला संयोजक  सुरेन्द्र तिवारी गर्व से  कहते हें की रेली  निकलने की हमने कोई परमिशन नहीं ली फायरिंग के सवाल पर भी उनका कहना था इसके लिए क्या जरुरत सब के पास लाइसेंसी  बंदूक थी \ स्वागत में फायरिंग की है |
 ये है मध्य प्रदेश का जंगल राज कानून  यहाँ के पुलिस की मोजूदगी में ये सब होता है | हो भी क्यों नहीं अब अगली बार राम मंदिर के नाम की फिर से तैयारी  जो करनी है |इसी तरह कि तैयारी के लिए ही यहाँ साधू संतों का सम्मलेन बुलाया गया था | हालांकि पुलिस ने हमेशा कि तरह ही इस बार भी मामला अज्ञात के खिलाफ कायम कर लिया हे |




07 जुलाई, 2010

Riksha

चलाते हें रिक्शा बोलते हैं विलायती 
[रवीन्द्र व्यास ]

खजुराहो 
इस छोटे से कस्बे का दुनिया में बड़ा नाम है | यहाँ आने वाले हर देशी -विदेशी पर्यटक का यहाँ के रिक्शा चालकों ,हाकरों से वास्ता पड़ता है |हर कोई इनकी वाक् पटुता से मोहित भी होता है | पर जब उसे यह पता चलता है कि विलायती जुबान में बोलने वाले ये लोग पड़े लिखे नहीं बल्कि अंगूठा छाप हैं ,तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता है | पर यह उनकी मार्केटिंग का तरीका  है जो ग्राहकों को उन्ही कि भाषा में बोल कर प्रभावित करता है |
 यहाँ सौ से ज्यादा रिक्शा ,ऑटो चलाने वाले वा दो सो से ज्यादा  हाकर हैं | इनमे से ज्यादातर सिर्फ अंगूठा छाप हैं | पर जब भी कोई विदेशी टूरिस्ट इन्हें मिलता है ये उसी कि जुबान में उससे बात करने लगते हैं | अंग्रेजी ,जापानी ,फ्रेंच,स्पेनिश,जर्मन,इटेलियन ,कोरियाई ,इजरायली जेसी भाषाएँ बेधड़क होकर बोलते हैं | टूरिस्ट भी रिक्शे वालों के मुह से अपनी भाषा सुनकर सहज ही आकर्षित हो जाता है ,और रिक्शा पर बैठने को मजबूर हो जाता है |
गाँव से रोजगार कि तलाश में खजुराहो आये रामलाल को जब कोई काम नहीं मिला तो  रिक्शा चलाने लगा | वो अपनी जिन्दगी कि दास्तान कुछ इस तरह व्यक्त करता है कि लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है | कहता है कि जब हमने रिक्शा चलाना शुरू किया था मुझे कोई विदेशी भाषा नहीं आती थी ,इस कारण में सिर्फ देशी सवारियों कि तरफ ही ध्यान देता था | पर इतने में गुजारा नहीं चल पाता था | धीरे-धीरे हमने भी कई भाषाएँ सीख़ लीं हैं | अब हम  सबसे पहले यह जानने का प्रयास  करते हैं कि वह किस मुल्क का है फिर उससे उसी कि भाषा में बोलकर अपने रिक्शा में बैठने के लिए कहते हैं | जब उसे खजुराहो घुमाते हैं तो उसे कहाँ क्या है , ये सब भी बताते जाते हैं | कई बार अच्छे लोग मिल जाते हैं तो किराया के अलावा कुछ इनाम वगेरह भी मिल जाता है |
"चलना ही जिंदगी है चलती ही जा रही है " जिंदगी कि गाड़ी चलाने के लिए रिक्शा चालकों का यह दर्शन उनकी किस्मत तो चमका ही रहा है |
[बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क ]

02 जुलाई, 2010

Bhagvaan Hue bimaar


भगवान भी हुए बीमार
रवीन्द्र व्यास 
 दुनिया के बढते तापमान से अब भगवान् भी बेहाल होने लगे हैं | वे मंदिर से बाहर क्या निकले उन्हे लू लग गई | लू भी एसी लगी की पंद्रह दिनों के लिए  वैद राज ने आराम की सलाह दे डाली  | अब भक्त भी परेशान हें  और भगवान् भी | ये सब हो रहा है मध्य प्रदेश के पन्ना में | ; यहाँ जगन्नाथ स्वामी  अपनी बहिन सुभद्रा और भाई बलदाऊ के साथ बीमार हो गए हैं |
 हर साल की तरह इस साल भी भगवान् जगन्नाथ स्वामी अपने भाई बलदाऊ .बहिन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर आते  हैं \ स्वामी जी के इस स्वरुप को देखने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटते हैं | उनका शंख झालर बजा कर स्वागत किया जाता है | उनके स्नान के बाद जब उन्हे बैठाया जाता है तभी उन्हे लू लग जाती है | और  भगवान् को वापिस मंदिर में ले जाया जाता है |मंदिर के पुजारी  राकेश गोस्वामी बताते हैं की  
भगवान् जगनाथ स्वामी  बहिन सुभद्रा ,भाई बलदाऊ  गर्भ गृह से निकल कर बाहर जाते हैं ,और स्नान करते  हैं  जब वापास गर्भ गृह में आते हैं  तो उनको लू लग जाती है | लू लगने से भगवान् बीमार पड़ जाते हैं |भगवान् का १५ दिन जड़ी बूटियों से इलाज होता है , इन १५ दिनों तक किसी को दर्शन नहीं मिलते |११ जुलाई १० को पथ प्रसाद वितिरण होगा ,१२ धूप कपूर की आरती होगी ,१३ जुलाई को उनकी रथ यात्रा शुरू होगी ,२१ जुलाई को  वापस मंदिर तक आएगी और २२ जुलाई को जगन्नाथ स्वामी का मंदिर में प्रवेश होगा | 
-पन्ना के जगन्नाथ स्वामी मंदिर का निर्माण १८१७ में यहाँ के तत्कालीन राजा  किशोर सिंह ने कराया था | चंदन की लकड़ी से बनी इन मूर्तियों को उड़ीसा के पूरी से लाया गया था | तभी से यहाँ उड़ीसा के जगन्नाथ पूरी की तरह ही  भगवान् की पूजा अर्चंना की जाती है | यहाँ  पूरी की तरह ही अटका प्रसाद बांटा जाता था ,| आज भी यह प्रसाद लुटाया  जाता है | कहते हैं की जिसको भी यह प्रसाद मिल जाता है उसकी सभी मनो कामना पूर्ण होती है |पूरी की रथ यात्रा की तरह यहाँ भी रथ यात्रा निकाली जाती है |
भक्त  राम किशोर मिश्रा  कहते हैं की पुरी से   इन  को किशोर सिंह राजा के शासन काल में लाया गया था उन्होने ही ये मंदिर बनवाया था ,  यहाँ भगवान् के प्रसाद का जो अटका बनता है वह  जब बनाया जाता था तो उसमे वो  सब भी  पाक जाता था , जिस कारण इसका बड़ा महत्त्व हो गया था , एक बार भगवान् ने स्वयं राजा को सपना दिया था की  इससे  पूरी धाम का  प्रभाव घट जाएगा , तब से इसे बनाया तो जाता है पर उस रूप में नहीं |
भगवान्  की बीमारी से भक्त लोग बेहाल हैं , अब उन्हे  १५ दिनों तक  देव दर्शन नहीं हो सकेंगे , भक्तों को एसा लगता है जेसे सारा संसार ही बीमार हो गया है |
-मनीष मिश्रा  जेसे भक्त भगवान् की बीमारी से व्याकुल हैं ,वे कहते हैं की भगवान जगन्नाथ  स्वामी  जिस दिन से बीमार पड़ जाते हैं ,हम लोग रोज दर्शन करने वाले हैं   
और जब पता चलता है की दर्शन तो मिलना नहीं क्योंकि भगवान् तो बीमार पड़ गए हैं | तब इतनी व्याकुलता होती है की कुछ कह नहीं सकते लगता है की सारा संसार बीमार हो गया है  ,तब हम लोग उन्ही से  प्रार्थना करते हैं की हे जगत के नाथ आप जल्दी ठीक  होइए  और दर्शन दीजिये | पन्ना के जगन्नाथ स्वामी जी भी बीमार हो गए , भगवान् भी जब इतना ताप नहीं सह पा रहे हैं तो आदमी की क्या बिशात है |

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14 अप्रैल, 2010

P.D.S.

गरीब कि रोटी पर भी डाका 
[रवीन्द्र व्यास ]
//गरीब कि रोटी का एक बड़ा सहारा राशन कि दुकान भी होती है पर यह एक ऐसी सरकारी व्यवस्था है जो सिर्फ हाथी के दांतों कि तरह दिखावटी है | जिस तरह हांथी के दांतों पर बाहुबलियों का कब्जा रहता है  ठीक उसी तरह इस योजना पर भी डंडा तंत्र का कब्जा है | छतरपुर जिले का  किशनगढ़  इलाका आदिवासी  बाहुल्य है | इस छेत्र में आदिवासियों के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जाता है इसकी बानगी देखने को मिली  यहाँ की सुकुवाहा ग्राम पंचायत में ७० फीसदी आदिवासी वा  ३० फीसदी हरिजन  बाहुल्य ,१२०० की आबादी वाले इस गाँव में लोगों को कई कई महीनो तक अंनाज नहीं मिलता | यहाँ पी.ड़ी.एस. वितिरण का सिस्टम भी काफी जोरदार  है| आधा सामान किसनगढ़  में मिलता है और आधा पल्कोंहा में ,दोनों की दूरी गाँव से २०-२०  कि.मी.है | नतीजतन गाँव वालों को कभी सामग्री मिल ही नहीं पाती |इसी इलाके के गाँव मेनारी,घुगरी.,भवरखुआ,नेगुआ ,पटोरी,मतीपुरा ,टिपारी, नीमखेडा, जेसे गांवों में भी लगभग यही हालात है|
 "बदहाली और बेबसी का दूसरा नाम है बुंदेलखंड"  यह एसे ही नहीं कहा जाता है यही वे सब कारण हैं जिसके कारण इसे बदहाल बुंदेलखंड कहा जाता है |,जहाँ भुखमरी के शिकार लोग आत्म ह्त्या को मजबूर होते है |  जिन कन्धों पर इस दशा के सुधार की जिम्मेदारी होती है वे ही इसे बदहाल बनाने के जिम्मेदार है |
सरकार वायदा करती है कि वह गरीबी क़ी रेखा के नीचे रहने वालों ,अति गरीबों को सस्ती दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराती है और कराएगी | सरकार क़ी नियत पर लोगों को तब शक होने लगता है जब उसे बतलाई गई सुख सुविधा नहीं मिलती |  छतरपुर जिले  में ही बी.पी.एल. के ९७३१२, ए.पी.एल.के २१९०१३ ,अन्त्योदय के ३३५९९ कार्ड धारी हैं |इन लोगों पर किये गए सर्वेक्षण में बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क को चौकाने वाले तथ्य मिले है| 
गरीब जनता के अंनाज पर दबंगों ,नेताओं ,का कब्जा है | गेहूं ,चावल ,तेल ,शक्कर ,खुले आम बाजार में बेंच दी जाती है|सत्ता के दबाव में अधिकारी उनके विरुद्ध कुछ करने क़ी स्थिति में होते नहीं इस कारण वे भी उन्ही के रंग में रंग कर मौज करते है |गांवों को छोड़िये शहर में लोगों को दो-दो माह में राशन मिल पाता है आधा अधूरा |गाँव में तो दबंगों का   जो फरमान होता है उसी के अनुसार सामग्री का वितिरण हो पाता है | बड़ा मलहरा छेत्र में एक गाँव है सूरज पुरा ,एक साल पहले इस गाँव के सेल्स मेन उमाशंकर मिश्रा को सिर्फ इसलिए पीटा गया था क़ी उसने गाँव के पप्पू राजा को तेल देने के स्थान पर बांटने क़ी जुर्रत क़ी थी | इसके बाद मामले क़ी रिपोर्ट हुई ,गाँव में वितरण व्यवस्था ना हो पाने पर यहाँ क़ी समिति को बमनी गाँव ट्रांसफर कर दिया गया था | साल भर तक लोगों को ठीक -ठाक सामान मिलता रहा | हाल में  यहाँ क़ी एम्.एल.ए.श्रीमती रेखा यादव ने इस मामले को विधान सभा में उठाया जिस कारण समिति पुनः सुरजपुरा गाँव आ गई | १७ मार्च को जब समिति के सेल्स मेन शंकर लोधी सामग्री वितरण हेतु पहुंचे तो राजा साब ५ में से ३ ड्रम जबरन उठा कर ले गए |
बिजावर में राशन सामग्री के बटने क़ी भनक लोगों को नहीं हो पाती है , इस विकाश खंड के २३ समिति प्रबंधकों ,सेल्स मेन के खिलाफ ऍफ़.आइ.आर.दर्ज कराने के आदेश हुए थे |कितु दर्ज मात्र तीन पर ही हो सकी | अंधियारा गाँव का समिति प्रबंधक जेल में है |पिपट का सेल्स मेन उसे ही बना दिया गया है जो जेल हो आया है | अंधियारा गाँव पुर्णतः आदिवासी बाहुल्य गाँव है |यहाँ लोगों को दो -तीन माह में सामग्री मिल जाती है |
पन्ना जिले के आदिवासी छेत्र कलदा ,श्यामरी ,पठार ,हल्दुआ ,खमरिया  में भी हालात बदतर है | इस इलाके का मिटटी का तेल कटनी और सतना में बिक जाता है | टीकमगण में सुधार के लिए एडवांस सिस्टम लागू किया गया है |
हालात बताते हें कि गरीब कि रोटी छीनने वालों का रेकेट इतना जबरदस्त है कि उन पर कोई कार्यवाही तो दूर उनके खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठा पाता है | ये इतने चाल बाज भी होते हैं कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सामान दो माह में सिर्फ एक बार बाँट कर अपने को पाक साफ़ बताने लगते हैं | इसी कारण १ से ७ तारीख तक बटने वाली सामग्री २५ से ३० तक बांटी जाती है | एक माह बाद वही सामग्री १से १५ के बीच बांटी जाती है |



26 मार्च, 2010

baalak ki bali

हत्या या बली
रवीन्द्र व्यास 
दुनिया भले ही  नई सदी में जा रही हो पर बुंदेलखंड इलाके के गाँव आज भी १६ वीं सदी में जी रहे हैं | नवमी के दिन एक आठ साल के बालक की बली चढ़ा दी गई |तीन दिन तक जब उसका कुछ पता नहीं चला तो उसके पिता और परिवार के लोग माता के मंदिर के पंडा पूरन के पास पहुंचे | गाँव के लोगों का विश्वास था की पूरन के सिर पर देवी आती हैं | इस कारण वह जो बताएगा वह सच होगा |अब खेल इस पूरन का था , मौत   बली ना लगे इस लिए  उसने बताया की शोभा पटेल की मौत  जहर खाने से हुई है ,आस पास तलाश करो लड़का मिल जायेगा | 
पंडा के आदेश पर जब देवी मंदिर के आस पास तलाश की गई तो मंदिर के पिछवाडे बच्चे का शव मिला |मृतक के गले पर निशान थे |आँखों में खून झलक रहा था ,जीभ बाहर निकली हुई थी| छतरपुर जिले की हिनोता थाना पुलिस ने मौके  पर पहुँच कर पंचनामा बनाया शव को पोस्ट मार्टम हेतु भेज दिया |अब पुलिस ने संदेह के आधार पर पंडा वा एक और को हिरासत में लिया है |
बेरखिया पुखरी निवासी देशराज पटेल का पुत्र शोभा  माँ महेश्वरी देवी मंदिर में प्रसाद की दुकान लगाता था | घटना वाले दिन भी वह दुकान ही गया था | शाम को ५ बजे वह अचानक दुकान से गायब हो गया था |
छतरपुर जिले की यह कोई अकेली पहली घटना नहीं है इसके पहले भी इस तरह के कई मामले हो चूके हैं | कभी धन की लालच में तो कभी दिव्य शक्तिओं को पाने के लिए तो कभी पुत्र प्राप्ति के लिए इस तरह के मामले सामने आते हैं |  

18 मार्च, 2010

shankh 18march10.

शंखों का संसार  
रवीन्द्र व्यास 
शंख हर युग में लोगों को आकर्षित करते रहे है | देव स्थान से लेकर युद्ध भूमि तक , सतयुग से लेकर आज तक शंखों का अपना एक अलग महत्त्व है |पूजा में  इसकी ध्वनि जंहाँ श्रद्धा वा आस्था का भाव जगाती  है वहीँ युद्ध भूमि में जोश पैदा करती है |समुद्र मंथन में मिले १४ रत्नों में शंख भी एक रत्न है \ गीता में जिन पांच वाद्यों का उल्लेख है उनमे शंख प्रथम है |तंत्र शास्त्र में शंख को शुभ ,सोभाग्य   का प्रतीक माना गया है |
मध्य प्रदेश  के छतरपुर जिले में ईशानगर नामक एक क़स्बा है | यहाँ के पंडित हरसेवक मिश्रा का घर शंखों का संग्रहालय बन गया  है | बीते चालीस  सालों में उन्होने तमाम तरह के हजारों  शंख जुटाए है | उनका यह जुनून अब भी जारी है |हर साल वे तीर्थ यात्रा पर जाते है और ऐसी दुर्लभ चीजें जुटाते है | इसके पीछे वे बताते है कि उनकी पत्नी ने प्रेरणा दी थी कि  एसा कुछ करो जो हमेशा याद किया जाये|
पंडित हरसेवक मिश्रा आज ७० साल से भी ज्यादा उम्र के हो गए है | किन्तु उनका जोश और जज्बा  अनेक लोगों को प्रेरणा देता है | आज उनके इस अनोखे संग्रहालय में २५ हजार से भी ज्यादा शंखों का खजाना है |इन शंखों के बारे में मिश्रा जी बताते है कि हिन्दुओं के ३३ करोड़ देवता है सबके अपने अपने शंख है |देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन के समय  अनेक तरह के शंख निकले ,इनमे कई सिर्फ पूजन के लिए होते है |
           हिन्दू धर्म में शंख का महत्त्व अनादि काल से चला आ रहा है |इसे पूज्य और पवित्र माना गया है ,पूजन में आवश्यक माना जाता है ||महाभारत युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण ने  "पांचजन्य" शंख को बजा कर युद्ध का जयघोष किया था |कहते है कि यह शंख जिसके पास होता है उसकी यश गाथा कभी कम नहीं होती | महाभारत के इसी युद्ध में अर्जुन ने "देवदत्त "नाम का  शंख बजाया था |वहीँ  yudhisthir  के पास "अनंत विजय "नाम का शंख था ,जिसे उन्होने रण भूमि में बजाया था |इस शंख कि ध्वनि कि ये विशेषता मानी जाती है कि इससे शत्रु सेना घबडाती है और खुद कि सेना का उत्साह बढता है |भीष्म  ने "पोडरिक" नामक शंख बजाया था |इस शंख कि आवाज से कोरवों कि सेना में हलचल मच गई थी |
कहते है कि  रण भूमि में शंखों का पहली बार उपयोग देवासुर संग्राम में ही  हुआ था \ देव  दानवों के इस युद्ध में सभी देव -दानव अपने अपने शंखों के साथ युद्ध भूमि में आये थे | शंखों कि ध्वनि के साथ युद्ध शुरू होता था और उसी के साथ ख़त्म होता था |तभी से यह माना जाता है कि हर देवी देवता का अपना एक अलग शंख होता है |स्वयं भगवान् विष्णु  दाहिने हाथ में दक्षिणावर्ती शंख धारण करते है |पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय यह शंख निकला था |जिसे स्वयं विष्णु जी ने धारण किया था |यह एसा शंख है जिसे बजाया नहीं जाता ,इसे सर्वाधिक शुभ माना जाता है |
- महा लक्ष्मी शंख का आकार "श्री यंत्र" क़ी भांति होता है |इसे प्राक्रतिक श्री यंत्र भी माना जाता है |जिस घर में इसकी पूजा विधि विधान से होती है वहाँ स्वयं लक्ष्मी जी का वाश होता है \ इसकी आवाज सुरीली होती है | विद्या क़ी देवी सरस्वती भी शंख धारण करती है |वे स्वयं "वीणा" शंख कि पूजा करती है |माना जाता है कि इसकी पूजा वा इसके जल को  पीने से मंद बुद्धी भी ज्ञानी हो जाता है |
विघ्न हर्ता -मंगल कर्ता गंनेश जी का शंख स्वयं गणेश जी का रूप माना जाता है,इसकी आकृति भी गणेश जी की तरह दिखती है | |इसकी पूजा से सकल मनोरथ सिद्ध होते है | भगवान् शंकर" रूद्र शंख" को बजाते थे | जबकि उन्होने त्रिपुराशुर के संहार के समय "त्रिपुर "शंख बजाया था |
-शंख का सिर्फ धार्मिक वा देव लोक तक ही महत्त्व नहीं है |इसका वास्तु के रूप में महत्त्व भी माना जाता है |कहते है कि जिस घर में नियमित शंख ध्वनि होती है  वहां कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है इनके पूजन से श्री समृधि आती है |१९२८  में बर्लिन यूनिवर्सिटी ने शंख ध्वनि का अनुसन्धान करके यह सिद्ध किया कि इसकी ध्वनि कीटाणुओं  को नष्ट करने कि उत्तम औषधि है | शिकागो के डॉ.डी.ब्राउन ने हजारों बहरे रोगियों को शंख ध्वनि से चंगा किया है |
                                         पंडित जी के संग्रहालय में सिर्फ शंखों का ही संग्रह नहीं है बल्की राम सेतु समय के वे पत्थर भी है जो पानी में  तेरते है| 
 समुद्री प्राणी का खोल शंख जीव   कितना चमत्कारी हो सकता है ||जरुरत है इसके और अनुसन्धान वा वैज्ञानिक विश्लेषण की|
बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क



09 मार्च, 2010

ajab dastaan

फिरोती में मांगी लड़की 
रवीन्द्र व्यास 

छतरपुर जिले के सरबाई  कस्बे से एक अनोखा अपहरण का मामला सामने आया है | अपहरण कर्ता फूल सिंह ने डेढ़ साल के दलित लडके का अपहरण कर फिरोती के रूप में उसकी १८ वर्षीया  बहिन [सुमन } की मांग की है | पुलिस अपहरण कर्ता की तलाश में जुटी है |
घटना की कहानी बताते हुए सुमन ने बताया 
१५ अगस्त ०९ के दूसरे दिन रात १२ बजे फूल सिंह दरवाजे तोड़ कर मुझे उठा ले गया था ,पहले जंगल ले गया फिर बांदा ले गया ३-४ दिन रखे रहा ' वो मेरे साथ गलत काम करता रहा और दूसरों से भी कराता रहा | कल बरबंद घाट पर हम को पुलिस ने सादा वर्दी में पहुँच कर बचाया वो तो पुलिस को देख कर भाग गया हम वह्नी खडे रहे \ रात में वो हमारे मामा के लडके मोहित  को उठा ले गया और कह रहा है की तुम आ जाओ तो इसे छोड़ देंगे |
ये वो कहानी है जो सुमन ने मीडिया को बताई है | सरबाई थाना प्रभारी ए.राय के अनुसार सुमन का परिवार गोहानी में फूल सिंह के यहाँ कटाई का ,खेती का काम करता था वहीँ इन दोनों के बीच सम्बन्ध बने और फूल सिंह इसे ले गया ,बहर हाल पुलिस अप्रहत बच्चे की तलाश कर रही है |
छतरपुर जिले का यह वह इलाका है जहाँ स्त्री -पुरुष संतुलन सर्वाधिक गड़बड़ है | इस इलाके में लोग अपनी बेटी भी नहीं देना चाहते है जिसके चलते इस इलाके में कुंवारों की तादाद भी अच्छी खाशी है |  यह अपहरण और बहिन की मांग भी इसी से जुडी एक वो कहानी है जिसे सहज रूप में नहीं लिया जा  सकता |
पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में यह कह कर चुप्पी धारण कर लेते है की मामला बच्चे का है इस कारण बहुत ही संवेदन शील है \हमारा प्रयाश बच्चे को बचाने का है \ पुलिस ने ९-१० मार्च की रात १ बजे केन के किनारे से बच्चे को छुडा लिया हमेशा की तरह अपराधी भागने में कामयाब रहा |
बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क /९मर्च१० 


05 मार्च, 2010

ladki ki bebasi



फिर जिन्दा जलाया लड़की को
-----------------रवीन्द्र व्यास --------
मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक सत्रह साल की लड़की को जिन्दा जलादिया गया | शतप्रतिशत जली इस लड़की को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया गया जहाँ उसकी ४ मार्च को देर रात मोत हो गई |
 छतरपुर के पास  हमा गाँव में  शाम के समय रोज की तरह हलचल नहीं थी |गाँव में मातम का माहोल था \ आखिर इस गाँव में भी शहर की बीमारी जो लग गई थी \सत्रह साल की छात्रा संध्या रिछारिया को उसीके  घर में जिन्दा जला दिया गया | संध्या  के  पिता सरजू प्रसाद जब घर आए तो उन्हे अपनी बेटी जलती हुई मिली \ उसी ने अपने पिता और तहसीलदार को दिए बयानों में बताया कि कुछ लोगों ने घर में  घुसने का प्रयास  किया |दरवाजा ना खोले जाने पर रमाकांत रावत ,हीरालाल रावत [५८],अशोक रावत ,वा दीपक नायक  बगल वाले के घर से कूद कर अन्दर घुसे \ इन लोगों ने उसके साथ जोर जबरदस्ती का प्रयास  किया ,असफल होने पर केरोसिन डाल कर जिन्दा जला दिया | पिता सरजू प्रसाद रिछारिया ने इसकी खबर गाँव के सरपंच को दी उन्होंने वाहन का इंतजाम किया और संध्या को शतप्रतिशत जली दशा में छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती किया | अस्पताल में उपचार के दोरान देर रात उसने दम तोड़ दिया |
           ओरछा रोड थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है | पुलिस के सामने जो स्थितियां सामने आ रही है वे एक दूसरे से मेल नहीं खाती | ये हम नहीं बल्की जनता कि रक्षा का दावा करने वाली पुलिस कह रही है | सी.एस.पी.समीर यादव  हमेशा कि तरह इस मामले कि जाँच में मुस्तेद नजर आये वे बताने लगे कि मामले का वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर विश्लेषण किया जायेगा जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही कि जाएगी \
लड़की जली या जलाई गई 
संध्या के मामले में कई बातें उभर कर सामने आ रही है \ गाँव में कुछ लोग कहते है कि उसका चक्कर एक उमेश नाम के लडके से चल रहा था | घर के लोग जब खेत पर चले गए तो उसने उसको बुला लिया | इस नज़ारे को देख गाँव वालों ने दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया जब नहीं खुले तो अशोक बगल के घर से अन्दर कूदा और उसने दरवाजे कि कुण्डी खोली | इसी बीच उसने स्वयं पर तेल डाल कर आग लगा ली | वो सवाल करते है कि क्या अशोक रावत अपने पिता हीरा लाल रावत के साथ जा कर बलात्कार का प्रयास करता |
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जिन्दा जलाया 
२६ जून ०९ को छतरपुर के अमानगंज मोहल्ले में १५ साल कि रुकसाना को जिन्दा जला दिया गया था | सातवी की इस छात्रा का वहीँ के एक लडके के साथ चक्कर बताया गया था | पुलिस ने बयानों के आधार पर राजेश,ब्रजेश,सियाराम ,और नासिर को ३०२ में गिरफ्तार कर जेल भेजा था |
२७ जून ०९ को दमोह के पास राजकुमारी रेकवार को प्रकाश चौबे रखेल बना कर रखे था ,दोनों में विवाद हुआ | पहले उसे गला दबा कर मारना चाहा नहीं मरने पर उसके ऊपर तेल डाल कर जिन्दा जला दिया |पुलिस ने बाद में प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया |
२६ जुने०९ के ही दिन छतरपुर जिले के ईशानगर थाना इलाके के निवारिया  नामक गाँव में प्रेम लाल की पत्नी चन्दा साहू [२०] को उसकी जेठानी ने तेल डाल कर जिन्दा जला दिया |
चंदोली [घुवारा ] में  ११ जुलाई ०९ को देव प्रकाश घोस की पत्नी रेखा घोष को उसकी ही सास रती बाई ,देवरानी कोशल्या  वा चंदा ने  मिलकर ज़िंदा जला कर मार डाला \ खेत की जमीन पर प्रकाश का विवाद अपने भाइयों से हुआ था |
दमोह के पिप्रोदा छक्का [पथरिया ] में ९ जुलाई ०९ की शाम श्रीमती  विनीता पटेल     के साथ छेड़ छाड़  गाँव के पुजारी देवकी तिवारी द्वारा की गई | बात ना बनने पर उसपर तेल डाल कर ज़िंदा जला दिया गया | पुलिस ने देवकी पर ३०६ का मामला दर्ज किया | 
इस मामले को लेकर  गाँव में कुर्मी समाज की पंचायत भी बेठी थी |
टीकमगण के प्रथ्विपुर के दरेठा तिराहा पर दो युवकों ने एक युवती को जिन्दा जलाया \
 समाज शास्त्री कहते है कि इस तरह के  अमानुषिक  कृत्य करने वाले वास्तव में मानसिक बीमारी के शिकार होते है |
बुंदेलखंड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क  









21 फ़रवरी, 2010

Fwd: Story Script/ Khajuraho Matangeswar

मतंगेस्वर मंदिर जहाँ हर मुराद होती है पूर्ण 
[रवीन्द्र व्यास ]
खजुराहो के मंदिर वेसे तो दुनिया भर में काम कला के मंदिरों के रूप में विख्यात है| किन्तु यंहां का  मतंगेस्वर शिव मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है |यही एक मात्र एसा मंदिर है जहाँ आदि काल से निरंतर पूजा होती चली आ रही है | चंदेल राजाओं द्वारा नोवी सदी  में बंनाये गए इस मंदिर में के शिव लिंग के नीचे एक एसी मणि है जो हर मनोकामना पूरी करती है \ कभी यहाँ भगवान् राम ने भी पूजा की थी | शिव रात्रि के दिन यहाँ शिव भक्तों का तांता लगा रहता | खजुराहो के सभी मंदिरों में सबसे ऊँची जगती पर बने इस मंदिर में जो भी आता है वो भक्ति में डूब जाता है चाहे वो हिन्दुस्तानी हो या विदेशी | कहते है की यह शिव लिंग किसी ने बनवाया नहीं है बल्कि यह स्वयंभू शिव लिंग है \ १८ फिट की मूर्ति है  जितना ऊपर है उतना ही नीचे भी है |ये मूर्ति प्रति वर्ष तिल के बराबर बढती भी है |
मतंग ऋषि करते थे पूजा 
 यंहां मतंग ऋषि इस शिव लिंग की पूजा करते थे | इसका नाम मतंगेस्वर स्वयं  भगवान् श्री राम ने मतंग ऋषि के नाम पर रखा था |हमे यहाँ मिले यमुना प्रसाद मिश्रा [योगी] जिनका जीवन ही यहाँ की आराधना के बाद बदल गया सिपाही से वे योगी बन गए |वे बताने लगे यहाँ की महिमा ,यंहां पर मूर्ति पहले से स्थापित थी ,त्रेता युग में इसका उलेख मिलता है ,रामायण में उल्लेख मिलता है ,यहाँ मतंग ऋषि थे उनसे मिलने भगवान् राम आए थे ,उन्होने भगवान शिव की पूजा अर्चना की और उन्होने मतंग  के नाम पर भगवान शिव को मतंगेस्वर नाम दिया |
मरकत मणि :
 यंहां के चंदेल राजाओं को  मरकत मणि  चन्द्र वंशी होने के कारण विरासत में मिली थी | चंदेल राजाओं ने इस मणि की सुरक्षा के लिए और नियमित पूजा अर्चना के लिए इसे शिव लिंग के नीचे रखवा दिया था ,लोक मान्यता है की  जो भी  आदमी मरकत मणि की पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है |इंद्र  के द्वारा मरकत मणि युधिस्टर को दी गई थी , आगे जाकर यशो वर्मन ,चन्द्र वर्मन के पास रही है उन्होने उसकी सुरक्षा करने के हिसाब से वा पूजा अर्चना होती रहे इसलिए  शिव लिंग के नीचे स्थापित करा दिया था |
आज खजुराहो के इस मंदिर में हर कोई एक मनोकामना लेकर आता है ,भोले भंडारी  हर किसी की मनोकामना पूर्ण भी करते है एसा विश्वास यंहां के लोगों का है |लोगों की आस्थाए है  तभी तो यंहां हर शिव रात्रि ,अमावश्या पर यहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुडते है |पीड़ियों से यहाँ पुजारी का दायित्व निभाने वाले बाबूलाल गोतम यहाँ भक्तों के भाव काफी नजदीकी से देख रहे है ,वे बातों ही बातों में बताने लगे की किस तरह लोग यहाँ आकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है ,लोग उल्टे हाथे लगाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है ,मनोकामना पूर्ण होने के बाद सीधे हाथे लगाते है |पंडित जी कब भावुक हो गए पता ही नहीं चला ,कहने लगे हमारे परिवार की प्रगति की जो रफ़्तार है वह इन्ही की कृपा से है |
खजुराहो के ही राम विशाल दीक्षित का काम पर्यटकों को घुमाना है ,उनकी आँखों के सामने आज भी वह द्रश्य घूम जाता है जब वो कुछ पाने और बनने के लिए खजुराहो आया था ,पर हताशा में उसे ३०० रु की नोकरी करना पड़ी तभी वह भी मतंगेस्वर के दरबार में फरियाद लेकर पहुंचा  तब से आज तक उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा ,वो अपनी तरह से अपनी बात समझाता है |देखिये ये १८ फिट uncha  शिव लिंग है जितना ऊपर है उतना ही नीचे है उसके नीचे मणि लगी है ,मणि के सामने आप मनसा वाचा कर्मणा से आप जाते है तो आपकी मनोकामना पूर्ण होगी |, जब में खजुराहो आया मुझे अंग्रेजी बोलना आती नहीं थी,में किसीको जनता नहीं था | मेने इनके दर्शन किये | इनकी कृपा से आज खजुराहो में मेरा मकान है ,गाड़ी है ,सब कुछ है|
में बहुत देर तक लोगों की आस्था और विश्वास को तोलने का प्रयाश करता रहा ,यह समझ नहीं पा रहा था की किस पर विश्वास करूँ और किस पर ना करूँ | तभी मुझे लगा की शंका का समाधान ए.एस.आइ. वालों से किया जा सकता है \ हम पहुंचे राहुल तिवारी के पास वे  यहाँ के अधिकारी है ,कहने लगे की हाँ यहाँ कई तरह की किवदंतियां है ,लोगों की आस्थाएं बहुत है ,आसपास के बहुत सारे लोग यहाँ आते है |
                                          




31 जनवरी, 2010

Rani hui farar

राजा गए जेल ,रानी हुई फरार
खबर दर खबर - बुंदेलखं
[रवीन्द्र व्यास ]
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में इन दिनों पंचायत चुनाव के बाद यदि किसी की चर्चा सबसे ज्यादा है तो वो है भैया राजा, अपनी ही नातिन वसुंधरा की हत्या के षड्यंत्र के आरोप में जेल में बंद भैया राजा पर ये एक एसा कलंक लगा है जो उनके द्वारा किये गए तमाम अपराधों पर भारी पडा इस मुश्किल से वे निजात पाते की उनके एक और पाप की फाइल खुल गई , उन्होने अपने साथियों की मदद से साटा[पन्ना]गाँव से १३ साल पहले विवाहिता तिज्जी बाई का अपहरण कराया उसे बंधक बना कर रखा ,२१ /०५/०७ को उसने आग लगा कर भोपाल में आत्महत्या कर ली उनके इस पाप में उनकी पहली पत्नी विधायक आशा रानी की भी सहभागिता बताई जाती है , भोपाल पुलिस ने उनके ऊपर भी मामला दर्ज कर लिया है , फिलहाल विधायिका जी की तलाश में पुलिस घूम रही है और वे बी.जे.पी.के राजनाथ सिंह से मदद की गुहार लगा रही है भैया राजा की दूसरी पत्नी की इस तरह के आपराधिक मामले में भूमिका तलाशने में पुलिस जुटी है
अशोक वीर विक्रम सिंह उर्फ़ भैया राजा ने अपनी राजनीत का मुकाम अपराध से पाया है दिसंबर 1950 में जन्मे भैया राजा ने अपराध की दुनिया में 1968 से ही कदम रख दिया था उनके बडे भाई इंद्र विक्रम सिंह मध्य प्रदेश पुलिस में डी.आई.जी. थे ,जिस कारण पुलिस में उनका खाशा रुतबा था ,पुलिस ने उनके छोटे -मोटे अपराधों को हमेशा अनदेखा किया इसके बावजूद जब अपराध और उनके अत्याचार बडे तो छतरपुर कलेक्टर ने 1970 में पहली बार प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की ,हालांकि यह कार्यवाही उनपर 1972 में दो बार ,1987 में एक बार तथा 1989 में रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया था छतरपुर पुलिस ने हाई कोर्ट में कहा था की विक्रम सिंह के आतंक के चलते कई गंभीर अपराध दर्ज ही नहीं हो पाते है उनपर दर्ज यदि आपराधिक मामलों को देखा जाये तो एसा कोई अपराध नहीं है जो उनपर दर्ज ना हुआ हो अपहरण ,हत्या ,हत्या का प्रयाश ,बलात्कार ,लूट ,डकेती,पुलिस की पिटाई तक के मामले दर्ज हो चूके है भैया राजा पर अपनी ही मोसी के दो लड़कों के अपहरण वा हत्या का भी अपराध महराजपुर थाने में दर्ज हो चुका है 1982 में अपराध क्रमांक 110/82 धारा - 364, 302 ,201 ता.हि. के तहत ये मामला दर्ज हुआ था 1986 में छतरपुर सिविल लाइन पुलिस थाने में अप.क्र.21/86 धारा 353,293,506 b. के तहत एस.डी.. पुलिस के साथ मारपीट का मामला दर्ज हुआ १९८९ में किच्छा नेनीताल [उत्तर प्रदेश ] में अप.क्र,67/८९ धारा , 302,307,201 के तहत तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह के भतीजे सिदार्थ राव सांगा की हत्या का मामला दर्ज हुआ गंभीर अपराध करने के बावजूद वो कानून की कमियों का फायदा उठाकर हमेशा बचता रहा
सियासत में कांग्रेस के नजदीकी रहने वाले भैया राजा को जब १९९० में टिकिट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव पवई[पन्ना जिला] विधान सभा सीट से जेल में रहकर लड़ा और जीता1995-96 में इसी विधान सभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता पन्ना कापरेटिव बैंक पर वर्षों से अपना बर्चस्व बनाये रखने वाले भैया राजा ,ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था ,\बड़ा मलहरा के उप चुनाव में भाजपा .को उमा भारती की पार्टी जनशक्ति को हर कीमत पर शिकस्त देना थी ,जिसके चलते भाजपा के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भैया राजा से हाथ मिला लिया था जिसके एवज में प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भैया राजा की पहली पत्नी आशा रानी को बिजावर विधानसभा से पार्टी का टिकिट दिया गया इस तरह भाजपा. ने अपराधियों को टिकिट दिये जाने के कलंक से मुक्ति तो पा ली किन्तु अब उनके कर्मों से मिल रहे कलंक से मुक्ति का मार्ग शायद भाजपा को नहीं सूझ रहा है |भैया राजा जेल में है पुलिस उनकी विधायक पत्नी वा उनके साथी नर्मदा प्रसाद ,गोपाल सिंह,कन्हैया लाल दुबे ,मिजाजी रैकवार ,भोंरी वा ख्वाजा की तलाश में जुटी है |
बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर ,पन्ना ,और आस पास के जिलों में सामंतवाद आजादी के बाद से ही चरम पर रहा है|गाँव -गाँव में सामंतवाद के बल पर सियासत का निति निर्धारण होता रहा है |ठाकुर को राजा और पंडित को महराज का रुतबा मिलता रहा है \