31 जनवरी, 2010

Rani hui farar

राजा गए जेल ,रानी हुई फरार
खबर दर खबर - बुंदेलखं
[रवीन्द्र व्यास ]
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में इन दिनों पंचायत चुनाव के बाद यदि किसी की चर्चा सबसे ज्यादा है तो वो है भैया राजा, अपनी ही नातिन वसुंधरा की हत्या के षड्यंत्र के आरोप में जेल में बंद भैया राजा पर ये एक एसा कलंक लगा है जो उनके द्वारा किये गए तमाम अपराधों पर भारी पडा इस मुश्किल से वे निजात पाते की उनके एक और पाप की फाइल खुल गई , उन्होने अपने साथियों की मदद से साटा[पन्ना]गाँव से १३ साल पहले विवाहिता तिज्जी बाई का अपहरण कराया उसे बंधक बना कर रखा ,२१ /०५/०७ को उसने आग लगा कर भोपाल में आत्महत्या कर ली उनके इस पाप में उनकी पहली पत्नी विधायक आशा रानी की भी सहभागिता बताई जाती है , भोपाल पुलिस ने उनके ऊपर भी मामला दर्ज कर लिया है , फिलहाल विधायिका जी की तलाश में पुलिस घूम रही है और वे बी.जे.पी.के राजनाथ सिंह से मदद की गुहार लगा रही है भैया राजा की दूसरी पत्नी की इस तरह के आपराधिक मामले में भूमिका तलाशने में पुलिस जुटी है
अशोक वीर विक्रम सिंह उर्फ़ भैया राजा ने अपनी राजनीत का मुकाम अपराध से पाया है दिसंबर 1950 में जन्मे भैया राजा ने अपराध की दुनिया में 1968 से ही कदम रख दिया था उनके बडे भाई इंद्र विक्रम सिंह मध्य प्रदेश पुलिस में डी.आई.जी. थे ,जिस कारण पुलिस में उनका खाशा रुतबा था ,पुलिस ने उनके छोटे -मोटे अपराधों को हमेशा अनदेखा किया इसके बावजूद जब अपराध और उनके अत्याचार बडे तो छतरपुर कलेक्टर ने 1970 में पहली बार प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की ,हालांकि यह कार्यवाही उनपर 1972 में दो बार ,1987 में एक बार तथा 1989 में रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया था छतरपुर पुलिस ने हाई कोर्ट में कहा था की विक्रम सिंह के आतंक के चलते कई गंभीर अपराध दर्ज ही नहीं हो पाते है उनपर दर्ज यदि आपराधिक मामलों को देखा जाये तो एसा कोई अपराध नहीं है जो उनपर दर्ज ना हुआ हो अपहरण ,हत्या ,हत्या का प्रयाश ,बलात्कार ,लूट ,डकेती,पुलिस की पिटाई तक के मामले दर्ज हो चूके है भैया राजा पर अपनी ही मोसी के दो लड़कों के अपहरण वा हत्या का भी अपराध महराजपुर थाने में दर्ज हो चुका है 1982 में अपराध क्रमांक 110/82 धारा - 364, 302 ,201 ता.हि. के तहत ये मामला दर्ज हुआ था 1986 में छतरपुर सिविल लाइन पुलिस थाने में अप.क्र.21/86 धारा 353,293,506 b. के तहत एस.डी.. पुलिस के साथ मारपीट का मामला दर्ज हुआ १९८९ में किच्छा नेनीताल [उत्तर प्रदेश ] में अप.क्र,67/८९ धारा , 302,307,201 के तहत तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह के भतीजे सिदार्थ राव सांगा की हत्या का मामला दर्ज हुआ गंभीर अपराध करने के बावजूद वो कानून की कमियों का फायदा उठाकर हमेशा बचता रहा
सियासत में कांग्रेस के नजदीकी रहने वाले भैया राजा को जब १९९० में टिकिट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव पवई[पन्ना जिला] विधान सभा सीट से जेल में रहकर लड़ा और जीता1995-96 में इसी विधान सभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता पन्ना कापरेटिव बैंक पर वर्षों से अपना बर्चस्व बनाये रखने वाले भैया राजा ,ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था ,\बड़ा मलहरा के उप चुनाव में भाजपा .को उमा भारती की पार्टी जनशक्ति को हर कीमत पर शिकस्त देना थी ,जिसके चलते भाजपा के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भैया राजा से हाथ मिला लिया था जिसके एवज में प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भैया राजा की पहली पत्नी आशा रानी को बिजावर विधानसभा से पार्टी का टिकिट दिया गया इस तरह भाजपा. ने अपराधियों को टिकिट दिये जाने के कलंक से मुक्ति तो पा ली किन्तु अब उनके कर्मों से मिल रहे कलंक से मुक्ति का मार्ग शायद भाजपा को नहीं सूझ रहा है |भैया राजा जेल में है पुलिस उनकी विधायक पत्नी वा उनके साथी नर्मदा प्रसाद ,गोपाल सिंह,कन्हैया लाल दुबे ,मिजाजी रैकवार ,भोंरी वा ख्वाजा की तलाश में जुटी है |
बुंदेलखंड अंचल के छतरपुर ,पन्ना ,और आस पास के जिलों में सामंतवाद आजादी के बाद से ही चरम पर रहा है|गाँव -गाँव में सामंतवाद के बल पर सियासत का निति निर्धारण होता रहा है |ठाकुर को राजा और पंडित को महराज का रुतबा मिलता रहा है \