स्वागत में चली गोलियां
रवीन्द्र व्यास
वो दिन था एक अगस्त २०१० का ,अगस्त माह यानि कि क्रांति माह ,आजादी के माह , का पहला दिन , मध्य प्रदेश के छतरपुर में आज खुले आम गोलियां चलाई गई | यहाँ के प्रमुख छत्रसाल चोराहे पर पुलिस की मोजूदगी में ये गोलियां चलती रही |यहाँ ना किसी क्रांतिकारी का सम्मान था ना बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कोई क्रांति का आगाज था | था स्वागत का जस्न, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अपने राष्ट्रीय सह संयोजक राजेश पांडे के स्वागत के नाम पर ये सब किया |
दरअसल विश्व हिन्दू परिषद् ने यहाँ के नगर भवन में संत अर्चक ,पुरोहित सम्मान समारोह आयोजित किया था | इस समारोह में जिले भर से तक़रीबन दो सो से ज्यादा साधू संत आए थे | इसी समारोह में भाग लेने बजरंग दल के पांडे जी यहाँ आये थे | उनका स्वागत बंदूक कि गोलियों से हवाई फायर कर के किया गया | हालांकि बजरंगियों को उनका स्वागत हिन्दू धर्म कि उस रीति निति के अनुसार करना चाहिए ,जो हिन्दू धर्म में आदि अनादि काल से चली आई हे | पर वे भी क्या करें मीडिया में वह खबर प्रमुखता नहीं पा सकती थी ,इस लिए आधुनिक हथियारों से स्वागत कर दिया | बजरंग दल के जिला संयोजक सुरेन्द्र तिवारी गर्व से कहते हें की रेली निकलने की हमने कोई परमिशन नहीं ली फायरिंग के सवाल पर भी उनका कहना था इसके लिए क्या जरुरत सब के पास लाइसेंसी बंदूक थी \ स्वागत में फायरिंग की है |
ये है मध्य प्रदेश का जंगल राज कानून यहाँ के पुलिस की मोजूदगी में ये सब होता है | हो भी क्यों नहीं अब अगली बार राम मंदिर के नाम की फिर से तैयारी जो करनी है |इसी तरह कि तैयारी के लिए ही यहाँ साधू संतों का सम्मलेन बुलाया गया था | हालांकि पुलिस ने हमेशा कि तरह ही इस बार भी मामला अज्ञात के खिलाफ कायम कर लिया हे |

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