25 जून, 2017

किसान त्रस्त सरकार मस्त

 बुदेलखंड की डायरी
रवींद्र व्यास

                    बुंदेलखंड के किसानो के दर्द की दवा तो नहीं मिलती अलबत्ता  हमारा दर्द कितना गहरा और गंभीर है की उसे जब फ़िल्मी पर्दे पर दिखाया जाता है तो वह भी पुरुस्कृत हो जाता है | बुंदेलखंड के किसानो के दर्द पर बनी फीचर फिल्म " बी फॉर बुंदेलखंड "  कोलकता में आयोजित इंटर नेशनल कल्ट फिल्म फेस्टिवल ना सिर्फ सराहा गया बल्कि फिल्म डायरेक्टर को इसके लिए "बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर " का अवार्ड भी दिया गया | फीचर  फिल्म में  कर्ज में जी रहे  किसान राम सिंह और उसके पुत्र लल्ला  के दर्द की कथा है  | जिसमे बेटा कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचने की बात कहता है और पिता अपने जीते जी जमीन बेचना नहीं चाहता  | नाराज होकर जब बेटा घर गाँव छोड़ कर चला जाता है तो एक बेबस पिता कर्ज की नियति  आगे हार जाता और फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर लेता है | 
             
                       मंदसौर में किसान आंदोलन में पुलिस गोली में हुई मौतों के बाद से मध्य प्रदेश में   किसान लगातार मौत को गले लगा रहे हैं | बुंदलखंड में तो हालात  और भी ज्यादा खराब हैं , यहां तो दुष्काल का एक  चक्र ही चल रहा है जो किसान को मौत में मुक्ति का मार्ग बता देता है || 
 

 हाल ही में   बुंदेलखंड में चार किसानो की आत्म ह्त्या के  बाद मध्य प्रदेश में किसानो की आत्म ह्त्या का आंकड़ा 21 पर पहुंच गया है |  छतरपुर जिले के मुख्य मंत्री के गोद लिए बिजावर विधान सभा क्षेत्र के पाली गाँव के किसान देशपत  यादव के छोटे बेटे ने रघुवीर (28) ने उसी खेत पर जाकर सल्फास की गोली खाकर जान दे दी जो उसके वा उसके परिवार का जीने का सहारा था |  वह अपने पीछे दो बेटी और एक बेटा और पत्नी  छोड़ गया है | बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले इस युवक पर दस ग्यारह लाख का कर्ज होना बताया जा रहा है |  प्रशासन की नजर में मरने वाला युवक किसान की परिभाषा में नहीं आता , आत्म ह्त्या के पीछे वजह भी पारिवारिक कलह मान ली गई है |
 सागर जिले के बीना तहसील के बसाहरी गाँव गुलाई पटेल (50 ) ने अपने ही खेत पर फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर ली | उसके पास से मिले सोसाइड नॉट में लिखा है की उस पर एक लाख का कर्ज था जिसके लिए साहूकार परेशान करता था | जब की वह एक लाख के कर्ज के एवज में ढाई लाख रु साहूकार शंकर महराज को दे चुका है | 
                                            देखा जाए तो बुंदेलखंड में साहूकारी  कर्ज का यह दुस्चक्र किसान के लिए किसी जानलेवा मुसीबत से कम नहीं है | सागर ,छतरपुर ,और पन्ना जिले में हुई तीनो किसानो की आत्म हत्या के पीछे भी साहूकारी कर्जा मौत की मुख्य वजह बना | बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रो में कर्ज का मर्ज किस कदर बेकाबू है इसकी अगर असल तस्वीर देखना है तो छतरपुर जिले के बिजावर , बड़ामलहरा और बक्स्वाहा विकाश खंड में , टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ इलाके में पन्ना जिले के पवई  और अजयगढ़ इलाके में , दमोह के हटा ,मड़ियादो , सागर जिले के केसली , बंडा शाहगढ़ इलाके में देखी जा सकती है ! छतरपुर जिले के  इन ब्लाकों में तो हालात इस कदर बेकाबू हैं की सैकड़ों की संख्या में अच्छी खासी जमीन के मालिक किसान   मजदूर बन गए ,|  जब  कर्ज माफ़ी की बात आती है तो बैंक का कर्ज तो माफ़ कर दिया जाता है , पर गाँव -गाँव में बैठे इन साहूकारी डकैतों से किसान को मुक्ति नहीं मिल पाती | 5 से 20 रु सैकड़ा पर कर्ज देने वाले इन साहूकारों से कर्ज लेकर ऐसे मकड़ जाल में उलझता है की ता उम्र वह उससे निकल नहीं पाता |  
 

                                            
                                   मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया के ही गृह जिले में एक पखवाड़े के भीतर 6 किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं | नॅशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं की किसान आत्म ह्त्या के मामले में 42 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है जब की किसान मजदूर आत्म हत्या के मामले में 31 फीसदी की कमी आई है | दरअसल इस सबके पीछे भी नोटबंदी का ही मामला उभरकर सामने आ रहा है | किसान और आम आदमी की सारी जमा पूंजी मोदी सरकार ने निकलवा ली |  अच्छी फसल आने के बाद जब वह बेचने पहुंचा तो उसे चेक थमा दिये गए | बैंक में पहुंचा तो वहां की लम्बी लाइन और उलझाऊ कार्य प्रणाली ने किसान को पैसा ना आने की बात कह कर चलता कर दिया | एक एक माह चक्कर लगाने के बाद जब उसे पैसा नहीं मिला और अच्छी फसल देख सजाये सपने टूटने लगे उस पर साहूकार के तकाजे ने उसे बुरी तरह से  हताश कर दिया | ऐसी जिंदगी से बेहतर उसे मौत लगने लगी और उसने उसी का वरण किया | 
                                    
                                       किसानो की मौत के मुद्दे ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का मौका दे दिया है | कांग्रेस के पूर्व मंत्री  ज्योतरादित्य सिंधिया और कमल नाथ तो मध्य प्रदेश की सरकार को घेरने में ही जुट गए हैं | कमल नाथ ने तो शिवराज सरकार पर किसानो के मसले पर गलत बयान बाजी का आरोप लगाते हुए प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने तक की मांग कर डाली | वही  आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन सचिव अमित भटनागर  प्रदेश सरकार को किसान विरोधी सरकार बताते हैं | वे कहते हैं की हमने अपने जीवन में ऐसी सरकार नहीं देखी जो जनता और किसानो को लूटने के जातन में जुटी हो | मसला चाहे खाद बीज का हो , अथवा बिजली के बिल का | 

                        ये शब्दों का ही भ्रम जाल है की लोग अपने को जनता का प्रधान सेवक कहते कहते कब जनता के मालिक बन जाते हैं पता ही नहीं चल पाता | जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है , अपने को मालिक समझने वाले लोग अपने हालातों को देख कर ना सिर्फ हताश होते हैं| बल्कि वे विरोध के ऐसे रास्ते पर भी चल पड़ते हैं जिसकी मंजिल का खुद उन्हें ही पता नहीं रहता | हालात से हारकर मौत को गले लगाने से  भी नहीं चूकते |

14 जून, 2017

जमीन के लिए किसानो की जंग :वन कर्मियो को बनाया बंधक


छतरपुर  / 14 जून 17
जिले के दूरस्थ क्षेत्र किशनगढ़ थाना क्षेत्र मे आज वन कर्मचारियों और किसानों मे संघर्ष हो गया । जमीन को लेकर हुए इस विवाद मे  किसानों ने वन विभाग के डिप्टी रेंजर  और दो बीट गार्ड को बंधक बना कर जमकर पिटाई की  ।
       किशनगढ़ थाना प्रभारी राजेश पाड़ेय ने बताया कि नगदा गांव में वन विभाग के कर्मचारियों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी । सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डिप्टी रेंजर और दो बीट गार्ड को मुक्त कराया गया । वन विभाग वन भूमि पर किसानों द्वारा किए गए कब्जे से मुक्त कराने व वृक्षारोपण के लिए गए थे । इस जमीन का 9 जून को सीमांकन भी हो चुका था । इसके बाद भी  ये लोग जबरन तार वगैरह लगा कर कब्जा किया हुआ था । जब वन विभाग के लोगो ने इनके कब्जे से जमीन मुक्त करने लगे  उसी समय ग्रामीणो ने  इन पर   लाठी ड़ंड़ो  से हमला  कर दिया  और तीन लोगो को बधक बना कर बुरी तरह से पीटा । 
पुलिस ने बीट गार्ड वी जायसवाल की रिपोर्ट पर मथुरा यादव, कल्लू,  चंदू,नंदू, लखन और गेदाबाई यादव सहित 12 लोगो पर 294,506 बी, 353,332,427,34 के तहत मामला दर्ज किया है । 
           दूसरी ओर किसान परिवारो का आरोप है कि सरकार ने हमारी जमीन का सौदा जेपी सीमेंट वालो से कर लिया है । उनको मैहर मे वन विभाग की भूमि देने के  एवज में हमारे यहा की 400  एकड़ जमीन वन विभाग को दे दी है । जिसमें  100 एकड़ से ज्यादा जमीन  ऐसी है  जिस पर किसान पीढ़ियों से खेती करते चले  आ रहे हैं । आज विवाद तब शुरू हुआ जब वन विभाग वालो ने  महिलाओ के साथ मारपीट व बदसलूकी की ।
 

12 जून, 2017

जल अभाव ग्रस्त होता बुंदेलखंड


जल अभाव ग्रस्त होता बुंदेलखंड 

रवीन्द्र व्यास 


बुंदेलखंड का नाम आते ही लोगों की आँखों के सामने अजब गजब तस्वीरें घूमने लगती हैं | शोषित , शापित इस इलाके की बदनसीबी ही है की भू - गर्भ खनिजों ,रत्नो से सराबोर है पर जीवन जीने के लिए आवश्यक जल धीरे धीरे उससे दूर होता जा रहा है | जल , जंगल, जानवर  और जमीन  जिससे जुड़ा है जीवन और समृद्धि का एक चक्र , पर आर्थिक समृद्धि की लालसा में जीवन के इस चक्र को ही ना सिर्फ  खंडित कर दिया बल्कि इसे नेस्तानाबूद करने में जुटे हुए हैं | सामाजिक जिम्मेदारी समझने वाले लोग इसको लेकर प्रयास भी करते हैं , सरकार योजनाए भी बनाती है बजट भी देती है किन्तु तंत्र को संचालित करने वाला गिरोह योजनाओ को कागजों में साकार कर देता है और धन को अपनी तिजोरी में बंद कर देता है | जिसके चलते कागजों में जंगल लहलहा रहें हैं , और धरा जल से परिपूर्ण है | जल संरचनाओं की उपेक्षा ही  बुंदेलखंड के दुष्काल का सबसे बड़ा कारण बन कर सामने आया है | 

                                                    पिछले कुछ समय में बुंदेलखंड के इन हालातों को देख कर लोगो ने और सत्ता पर काबिज लोगों ने अपनी चिंता तो  जताई है | मई माह में झांसी में जल संरक्षण  के लिए  जीवन समर्पित करने वाले राजेंद्र सिंह ने बुंदेलखंड दुष्काल मुक्ति अभियान की शुरुआत की है | इसके लिए उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में  हर  जिले में एक संयोजक नियुक्त किया गया है | इस दुष्काल मुक्ति अभियान के मौके पर राजेंद्र सिंह ने माना की यहां का दुष्काल सिर्फ प्राकृतिक नहीं बल्कि यहां के शासक और शोषित वर्ग बुद्धि का भी दुष्काल है | प्रकृति के बदलते मिजाज के कारण वर्षा चक्र बदल गया है ,जिसके चलते अनियमित वर्षा , भू जल स्तर में गिरावट और उजड़ता समाज ( पलायन करते लोग ) बुंदेलखंड का दुष्काल है | उन्होंने इसके लिए लोगों को जागरूक करने और जल संचय संरचनाओं के विकाश  को आवश्यक माना | इस मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा   मांग पत्र तैयार किया गया जिसमे हर इलाके की जल संरचनाओं  पहचान करने , उनका सीमांकन करने , गाँवो में पेयजल और खाद्यान सुरक्षा सुनिश्चित करने , पलायन रोकने के लिए मनरेगा के प्रभावी बनाने की बात कही गई | यह मांग पत्र हर जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को भेजा जाएगा | 

                                                ललितपुर में भी भू -जल संरक्षण और जल समाधान को लेकर एक कार्यशाला हुई | केंद्रीय भूमि जल बोर्ड लखनऊ और भूगर्भ जल विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में भी वर्षा  जल संचय और वृक्षारोपण पर जोर दिया गया | 

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में केंद्र सरकार के जल संरक्षण योजना के तहत   भू-जल स्तर की आन लाइन निगरानी की जायेगी | हर विकाश खंड के 20 गाँव में मापक यंत्र  लगेंगे, इन यंत्रो के लग जाने के बाद दिल्ली और लखनऊ में बैठे अधिकारी अब रोजाना बुंदेलखंड के जल स्तर के हालात देख सकेंगे |
                            वही उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ किसानो को  दो साल  इन्तजार करने की सलाह देते है , दो साल बाद बुंदेलखंड में ना पीने के पानी की समस्या होगी और ना ही सिचाई के लिए पानी की समस्या होगी | यहां का जो किसान अब तक एक फसल उगाता था वह भी तीन तीन फसल उगा पायेगा | इसके लिए योजना बनाई जा रही है | उत्तर प्रदेश सरकार के ही कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी माना है की बुंदेलखंड में सबसे गंभीर संकट जल का है | इस संकट के तात्कालिक समाधान के लिए 30 जून के पहले बुंदेलखंड में एक हजार और मिर्जापुर में 4 सौ नए तालाब खुदवाये जाएंगे | इसके लिए सरकार किसानो को 50 फीसदी अनुदान भी देगी | 
                               
                               मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भू- जल स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने दो सौ करोड़ से ज्यादा की राशि उपलब्ध कराई है | देखा जाए तो बुंदेलखंड धीरे धीरे डार्क जोन की ओर बढ़ रहा है | सेन्ट्रल वाटर कमीशन ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है की बुंदेलखंड  में अधिकाँश  वर्षा जल बह जाता है |  यहां के पाराम्परिक चंदेल कालीन तालाबों से जल संचय में मदद मिलती थी किन्तु उनमे से अधिकांश या तो नष्ट कर दिए गए या फिर उनका रकबा घट गया | अविरल बहती छोटी बड़ी  नदियों की जल धाराओं को रोक कर छोटे बड़े बाँध तो बनाये गए पर उनमे जल प्रबंधन का ध्यान नहीं रखा गया | हालात ये हुए की नदिया ही अपना अस्तित्व खोने लगी | अब एक और बड़ी नदी केन को समाप्त करने की योजना बन कर तैयार है |डॉ  एम्  विश्वेशरय्या ने देश की जल समस्याओं से निजात के लिए बाढ़ वाली नदियों पर बाँध बनाने और  और बाढ़ वाली नदियों को सूखी नदियों से जोड़ने की योजना बनाई थी | पर बुंदेलखंड में इसके ठीक उलटा हो रहा है गैर बाढ़ वाली नदी केन को  बाढ़ वाली नदी बेतवा से जोड़ा जा रहा है |  
                        जंगल के हालात भी कुछ दुरुस्त नहीं हैं सरकारी आंकड़े कहते हैं की  उत्तर प्रदेश वाले इलाके में मात्र 7. 92 फीसदी और मध्य प्रदेश वाले इलाके में 29. 9 फीसदी वन क्षेत्र बचा है । जब की गैर सरकारी आंकड़े बताते  हैं की  जंगलों का तेजी से विनाश हुआ है | वे जंगल जो भू जल वृद्धि में सहायक होते थे नष्ट किये गए | मध्य प्रदेश  इलाके के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी असल में 13 फीसदी ही जंगल बचे हैं | शहरी करण और सुविधाओं की लालसा में भेंट चढ़े वनों के विनाश का नतीजा सबके सामने है , जल स्तर में गिरावट के अलावा  यह इलाका तेजी से बीहड़ में भी बदल रहा है | 
                                                 
                                               जल ,जंगल, जमीन और जानवरों से नाता तोड़ कर सरकार ने हमें शहरी बाबू बनाने के प्रयास में जुटी है |  अब  सरकार अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए तरह तरह की योजनाए तो बना रही हैं | कभी बुंदेलखंड को पैकेज देती है तो कभी कर्ज माफ़ी की बात करती है | तो कभी सिचाई सुविधाओं की वृद्धि की बात करती है  | पर जिस जल से समाज, संस्कृति और आर्थिक प्रगति का रास्ता खोजा जा सकता है उसके सरक्षण और संवर्धन के लिए ईमानदार प्रयास नहीं हो रहे हैं |  
      

22 मई, 2017

बुन्देलखण्ड मे गिरता जल स्तर

  बुंदेलखंड की डायरी 


रवीन्द्र व्यास 

मध्य प्रदेश का यह बुंदेलखंड इलाका भी  भू -जल  दोहन में अग्रणी रहा है | हालात ये बने की ग्राउंड वाटर के मामले में यह  इलाका  भी डार्क जोन में पहुँचने का ख़तरा मंडराने लगा है  | पर यहां के हालात अजीब हैं  बुंदेलखंड के इन जिलों में एक ओर जहां जल स्तर में गिरावट ने स्थितियों को और चिंताजनक बनाया है वहीँ सरकार के प्रयासों पर यहां के अधियकारियों ने जम कर पलीता लगाया है |  सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज और मुख्यमंत्री नल जल योजना के माध्यम से  गाँव में नल जल योजनाए शुरू कराई थी |  पर गाँव की इन योजनाओं के सुचारु संचालन में ना अधिकारियों की रूचि थी और ना ही गाँव के सरपंचों की | गाँव के सरपंच इन योजनाओ में घटिया सामग्री को जिम्मेदार मानते हैं | इन हालातों में बुंदेलखंड के सागर संभाग की आधी से ज्यादा नल जल योजनाए ठप्प पड़ी हैं | केंद्र सरकार ने जरूर गिरते जल स्तर के सुधार के लिए 231 करोड़ रु की धन राशि उपलब्ध कराई है | 


 पिछली बार टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी ब्लॉक को छोड़ कर बुंदेलखंड में जम कर वर्षा हुई थी | वर्षा से तमाम जल श्रोत लबालब भर गए थे , इसके बावजूद बुंदेलखंड में जल स्तर का गिरना  एक गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है | असल में प्रशासन के प्रयास कागजी और सतही ज्यादा नजर आते हैं ,| जिला के  कलेक्टरो  के तमाम निर्देशों के बावजूद सम्बंधित विभागों ने स्टॉप डेम पर गेट लगवाने की जरुरत नहीं समझी , और ना ही अन्य तरीको से स्टॉप डेमो पर पानी रोकने का प्रयास किया | नतीजतन बुंदेलखंड के छोटे नालों , नदियों  से पानी अविरल बहता रहा , जिसका परिणाम ये हुआ की जो स्टॉप डेम जल स्तर बढ़ाने में सहायक हो सकते थे वे बेकार साबित हुए | नतीजे में  सागर संभाग में छतरपुर और टीकमगढ़ जिले में जल स्तर में सर्वाधिक गिरावट आई है |  बुंदेलखंड के अन्य जिलों में जहां 5 से 10 फीट  की जलस्तर में  गिरावट आई है वहीँ  छतरपुर और टीकमगढ़ जिले में यह गिरावट 10 से 22 मीटर  की आई है |  
                                            
                                       सूर्य देव  की कृपा  से तपते बुंदेलखंड  में  बचा खुचा जल भी दिनों दिन गायब होता रहा | सागर  संभाग के छतरपुर जिले में जल स्तर को लेकर सबसे ज्यादा चिंताजनक हालत बने | छतरपुर जिले के 20 फीसदी हेंड पम्प , 50 फीसदी बोरवेल , 65 फीसदी जलाशय और 30 फीसदी कुओं ने जबाब दे दिया | इसी तरह  दमोह जिले में 10 फीसदी हेंड पम्प , 30 फीसदी  बोरवेल, 60 फीसदी जलाशय और 46 फीसदी कुए,  पन्ना जिले के 11 फीसदी हेंड पम्प ,   5 0 -50  फीसदी बोरवेल वा  जलाशय , 14  फीसदी कुँए  , टीकमगढ़ जिले के 9 फीसदी हेण्डपम्प , 40 फीसदी बोरवेल , 48 फीसदी जलाशय ,25 फीसदी कुँए ,  और  सागर जिले में 10 फीसदी हेंड पम्प 30 फीसदी बोरवेल , 40 फीसदी जलाशय  और 30 फीसदी कुओं का जल स्तर जबाब दे चुका है | इन जिलों में इन पर आश्रित आबादी  जल की  भीषण त्रासदी भोगने को मजबूर है | सबसे चिंताजनक बात यही है की पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद प्रशासनिक और जन लापरवाही के कारण वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन करने में हम असफल रहे | जिसके चलते वर्षा जल बहता रहा और हम सब भू - जल दोहन में जुटे  रहे जिसके चलते इन जिलों के जल स्तर में व्यापक गिरावट दर्ज की गई |    

                                      जल संकट से जूझते टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी ब्लाक में  लोग 300 से 500 रु में पानी का टेंकर खरीदने को मजबूर हैं | यहां दो तीन दिनों में मात्र 20 मिनट के लिए पानी प्रदाय किया जाता है | निवाड़ी ब्लाक की इस  समस्या को देख कर समाजवादी पार्टी ने अपना राजनैतिक लाभ तलाश लिया है | पार्टी नेताओं ने  7 टेंकरो को निवाड़ी की जनता की सेवा में लगा दिया है | टीकमगढ़ जिले की 353 नल जल योजनाओ में से 215 नल जल योजनाए बंद पड़ी हैं |  दमोह जिले की 347  में से 121  नल जल योजनाये बंद पड़ी हैं | यह जिला मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया का इलाका है , इस जिले में अधिकाँश वनांचल की आबादी दुर्गम पहाड़ों ,पठारों की जल धाराओं और जल कुंडो पर निर्भर है | मध्य प्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  कुसुम मेहदेले के जिले में भी नल जल योजनाओ की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है | जिले की 339 नल जल योजनाओ में से दो सौ से ज्यादा बंद बताई जा रही हैं | हालांकि जिले की 87 नल जल योजनाओं को संचालित और संधारण करने के लिए टेंडर हो चुके हैं | छतरपुर जिले के बक्स्वाहा क़स्बे में रोजाना 20 हजार रु से ज्यादा का पानी बिकता है | पानी बेचने वालों में यहां के अधिकांशतः वे लोग हैं जो अपने आपको समाज सेवी कहलाने में गर्व अनुभव करते हैं | ऐसे लोग १७ टेंकरो के माध्यम से रोजाना पानी बेंचते हैं | जिले की 385 नल जल योजनाओं में से मात्र 195 नल जल योजनाए ही चालू बताई जा रही हैं | 


                               सागर संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद जल त्रासदी से जूझ रहा है | इस जिले की 664 नल जल योजनाओ में से 250 से ज्यादा नल जल योजनाए बंद पड़ी हैं|  गिरते जल स्तर के कारण जिले में 119 नल जल योजनाओ के जल श्रोत ही सूख गए हैं , वहीँ  1600 हेंड पम्प ने पानी देना बंद कर दिया है | 10 बिजली कनेक्शन के कारण , 42 पम्प खराब होने के कारण वा 39 योजनाए पाइप लाइन की खराबी के कारण 10 योजनाए चलने काबिल ही नहीं मानी गई हे और 30 नल जल योजनाए ऐसी हैं जो सरपंच साहब की लापरवाही के कारण बंद पड़ी हैं | मतलब साफ़ है की 121 नल जल योजनाए ऐसी हैं जिन्हे थोड़े से प्रयास से शुरू किया जा सकता है , पर यह करे कौन |  प्रशासन ने ४०  पंचायतों को नल जल योजनाए चालू करने लिए 67 लाख रु दिए हैं , मतलब हर पंचायत १ लाख 67 हजार 5 सौ रु |  इस राशि का कितना सदुपयोग हुआ और कितना दुरूपयोग यह जानने का समय किसी के पास  नहीं है | जब संभागीय मुख्यालय का यह आलम है तो संभाग  जिलों के हालात को समझा जा सकता है |                  
                                             


जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने नेशनल ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट स्कीम के तहत सवा तीन सौ करोड़ की राशि स्वीकृत की है | इस योजना के तहत सागर संभाग के उन 9 विकाश खंडो में जलस्तर बढ़ाने का काम होगा जहां जल स्तर अत्याधिक तेजी से नीचे पहुंच गया है | सागर संभाग के सागर ,छतरपुर जिला के छतरपुर , राजनगर ,नौगांव  दमोह जिला के ,पथरिया ,टीकमगढ़ जिले के  बल्देवगढ़ ,निवाड़ी ,पलेरा , और पन्ना जिले के अजयगढ़ विकाश खंड में भू जल स्तर बढ़ाने के लिए पांच विभाग काम करेंगे | जल संसाधन ,ग्रामीण विकाश ,कृषि विभाग , लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी ,और भू -जल सर्वेक्षण विभाग   तालाबों , स्टॉप डेम , नाला , बावड़ियों ,कुओं का निर्माण और जीर्णोद्धार का काम करेंगे | इस कार्य पर लगभग 231 करोड़ रु की राशि व्यय की जायगी , शेष 95 -96 करोड़ रु  बुंदेलखंड के अन्य इलाकों में खर्च किये जाएंगे | केंद्र  सरकार मानती है की इससे ना सिर्फ भू -जल स्तर बढ़ेगा बल्कि इससे जल संकट से भी निजात मिलेगी | पर देखना यही है की सरकार के लोग इस धन राशि का कैसा उपयोग करते हैं अथवा इसका भी उपयोग पूर्व की योजनाओ की तरह ही होता है , जिसके बन्दर बाँट में सरकार के तंत्र से लेकर सरकार के दल के लोग भी सम्मलित रहते थे ? 
                               

15 मई, 2017

जल कुंड और जल धारा से प्यास बुझाने को मजबूर लोग

बुंदेलखंड की डायरी 

रवींद्र व्यास 

वो 2013 का साल था , मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका भी चुनावी रंग में रंगा हुआ था | इस  चुनाव के प्रचार के दौरान  मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह  जगह जगह  मंच से  लोगों को और  महिलाओं को विकाश के सपने दिखा  रहे थे | उन्ही स्वप्नों में उन्होंने बुंदेलखंड की महिलाओ को एक सपना जल का भी दिखाया था | " अब हमारी माताओ और बहनो को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा , अब उन्हें दूर हेंड पम्प या कुए  तक पानी भरने नहीं जाना पडेगा , अब ऐसी व्यवस्था होगी की टोंटी खोली और पानी हाजिर " | उनकी यह बात महिलाओं को खूब भाई और दिल खोल कर महिलाओं ने कमल का बटन दबाया और कमल मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड  में फिर खिला दिया | तीन वर्ष पांच माह बीत जाने के बाद भी  बुंदेलखंड के लोग शिवराज के सपने को याद कर स्वप्न लोक की सैर कर लेते हैं | क्योंकि उनके जीवन में तो आज भी पानी की त्रासदी भोगने की विवशता है |



                                                 मध्य प्रदेश के  बुंदेलखंड के हालात स्वयं अपनी कहानी बयां कर रहे हैं की प्रदेश के मुखिया के मुख से निकली बात का कितना असर हुआ है |  पिछले दिनों अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था जिसमे सागर और पन्ना जिले की बंद नल जल योजनाओ के संचालन और संधारण के लिए निविदा प्रकाशित हुई थी | ९ मई तक आन लाइन टेंडर जमा करना था | पन्ना जिले के पांच विकाश खण्डों की ८५ बंद नल जल योजनाए और सागर जिले की तीन विकाश खंडो की 57 नल जल योजनाओ के लिए टेंडर आमंत्रित किये गए हैं | अब आप कल्पना कीजिये मध्य प्रदेश की सरकार और उसकी लोकस्वास्थ्य मंत्री पेयजल के संकट से निपटने के लिए कितनी संजीदा हैं | यह हालात उस इलाके के हैं जहां की जल समस्याओं को लेकर देश के तमाम समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में जनवरी माह से ही ख़बरें आने लगी थी | एम् पी के बुंदेलखंड इलाके के सागर संभाग के जिलों की हालत तो ये है की टोंटी से पानी तो दूर की बात है हेंड पम्पों से भी पानी नहीं मिल रहा है | महिलाये और बच्चे भी सुबह से शाम तक पानी की जुगाड़ में घूमते रहते हैं | छतरपुर ,पन्ना ,टीकमगढ़ और दमोह ,सागर जिला के अनेकों गाँव के लोग  दुर्गम जल श्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं |  


                            दमोह जिला में जबेरा जनपद क्षेत्र के   बनवार - घटेरा  इलाके में एक स्थान है  सिद्ध धाम , इस धाम की गुफा के अंदर पाषाण शिलाओं के बीच पानी का एक कुंड बना है | लोगों की मान्यता है की इस कुंड में कभी पानी कम नहीं होता है | यहां आस पास के गाँव के लोग और श्रद्धालु अपनी प्यास बुझाते हैं | जब की आस पास के कई किमी इलाके में पानी का कोई और श्रोत  नहीं है | कुंड की ख़ास बात ये है की इस कुंड से सिर्फ पवित्र हाथों से ही पानी निकाला जा सकता है , अपवित्र हाथ या अशुद्ध पात्र के जल  स्पर्श होने पर जल सूख जाता है | इस कारण लोग नारियल के पात्र से अपने जल के बर्तन भरते हैं | लोगों की ये भी मान्यता है की जब अपवित्रता के कारण जल सूख जाता है तो लोग इस स्थान की पवित्रता बनाये रखने की ना सिर्फ शपथ लेते हैं बल्कि क्षमा याचना भी करते हैं | जिसके बाद यहां जल धारा पुनः प्रगट होती है | 
                                        असल में इस जनपद क्षेत्र के अधिकांश गाँव पानी के लिए परेशान रहते हैं | पर यह भी प्रकृति का  एक  वरदान है की यहां सिद्ध धाम के अलावा चुड़का सिद्ध धाम भी जंगल में है ,इसके  आस पास भी पानी का कोई श्रोत नहीं है किन्तु जल धारा चट्टानों के बीच  प्रवाहित होती रहती है | इस जनपद क्षेत्र के दर्जनों आदिवासी गाँव के लिए प्राकृतिक जल श्रोत ही उनके जीवन का सहारा है | 
                                        
                                        जिले के नरसिंहगढ़ से  सिद्ध धाम पहाड़ी पर पत्थरों के बीच से पानी की धारा बहती रहती है | इसी के नजदीक एक  छोटा सा कुंड बना है जिसे लोग तुळु की झिरिया भी कहते हैं | हमेशा पानी से भरा रहने वाला  यह कुंड लोगों के लिए एक बड़ा सहारा है | इसी के समीप पंचायत द्वारा खुदवाया गया कुआ अब गाँव भर के लोगों की प्यास बुझा रहा है |  

                                         बटियागढ़ विकाश खंड अंतर्गत आदिवासी ग्राम पंचायत शहजादपुरा के गीदन गाँव की 400 लोगों की आबादी बून्द बून्द पानी के लिए परेशान है | गाँव में लगे पांच से ज्यादा हेंड पम्पों ने जबाब दे दिया है | गाँव वालों को ५०० फिट नीचे उतरकर ३ किमी दूर जंगल में नाले के पास से पानी लाना पड़ता है| आदिवासी गाँव जलना के हेंड पम्पों ने भी जबाब दे दिया है | इस गाँव का भी सहारा जंगल में पत्थरों के बीच बने  कुंड से पानी लाना पड़ता है | इस छोटे से कुंड तक पहुँचने के लिए  गाँव वालों को 40 -50 फिट नीचे उतरकर दो किमी तक का सफर तय करना पड़ता है |  


                                           
जब हेंड पम्प जबाब दे देते हैं , नदी नाले और कुँए सूख जाते हैं तब बुंदेलखंड की इन पाषाण शिलाओं से बहती जल धारा कई गाँवों की प्यास बुझा देते हैं | छतरपुर जिले में ही पठा गाँव  के आदिवासी पहाड़ से नीचे उतारकर पत्थरों के बीच से बहती जल धारा से अपनी प्यास बुझाते थे | इस गाँव में ऊपर तक चढ़ पहली बार  कलेक्टर रमेश भंडारी  पहुंचे थे , गाँव की चढ़ाई और खड़े पहाड़ पर लोगों को पानी ले जाते देख उनकी संवेदनाये भी जाग्रत हो गई | उनके आदेश पर गाँव में पम्प से पानी पहुंचने  लगा है | पम्प से पानी स्थाई तौर पर गाँव के लोगों को मिलता रहे वे यही कामना करते हैं | बक्स्वाहा विकाश खंड का मल्हार गाँव  की कहानी भी कुछ कुछ पाठापुर से मिलती जुलती है फर्क इतना है की पाठा गाँव में खड़े पहाड़ से नीचे उतरना पड़ता है और इस गाँव में गाँव वालों ने सीडी नुमा जुगत बना ली है | यहाँ प्रशासन ने कुछ साल पहले नल जल योजना बनाई थी पर वह भी बेहतर जल श्रोत के अभाव में उपयोगी नहीं रही |          
                                        दरअसल पानी के नाम पर पैसा भी बह रहा है ,प्रचार भी खूब हो रहा है , पर नहीं हो पा रहे हैं तो सिर्फ सार्थक प्रयास | 




16 अप्रैल, 2017

सुरा(शराब )पर संग्राम

बुंदेलखंड की डायरी 

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड के झाँसी एस एस  पी कार्यालय में पिछले साल दो सगी बहने पहुंची थी | इनने पुलिस को जो दर्द सुनाया था उसे सुन वहां मौजूद हर किसी की आँखें नम हो गई थी | इनके माता पिता ने शराब लिए इन दोनों को बेंच दिया था |  शराब से  घरों को  और लोगों को  बर्बाद करने वाली यह कोई पहली घटना नहीं है , इस तरह के अनेकों मामले सामने आ चुके हैं | फर्क इतना है की बर्बाद होने वाले ज्यादातर लोग कमजोर  और माद्यम वर्ग के  थे इस  कारण ऐसे लोगो की जिंदगी और मौत  पर कोई विशेष ध्यान सियासत का  नहीं जाता |  शराब के अभिशाप का सबसे ज्यादा शिकार भी महिलाये ही होती हैं , और जब उन्होंने देखा की उनके परिवार की बर्बादी का सामान उनकी ही बस्ती में आ गया तो वे मौन नहीं रह सकी | परिवार और समाज को बर्बादी से बचाने के लिए उन्होंने कमर कस ली  हाथों में डंडे लेकर निकल पड़ी मुकाबला करने के लिए | 

                                          सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए  निर्णय दिया कि  राष्ट्रीय राज मार्ग की शराब दुकाने हटाई जाए | माना गया की यह एक बड़ा कारण है जिसके चलते लोग शराब पीकर वाहन चलाते हैं और देश में हर साल डेढ़ लाख लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं | सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों से दुकाने हटवाकर  बस्ती में खुलवा दी | बस्ती में शराब  खुलने का विरोध होना स्वाभाविक था और विरोध शुरू भी हुआ कई जगह उसने उग्र रूप भी धारण कर लिया |  आवासीय इलाकों में खोली  जा  रही शराब दुकानों के विरोध  में तो दमोह जिले के जबेरा में तो शराब मुक्ति मोर्चा का गठन किया गया है | सागर में तो महिलाओं ने गुलाबी गेंग गठित कर ली है | महिलाये और बच्चे भी सुरा के खिलाफ संघर्ष के लिए लामबंद होने लगे हैं | 
                                                    

  शनिवार की रात सागर के रजाखेड़ी आनंद नगर इलाके में खुल रही शराब दुकान को लेकर लोगों में इतना आक्रोश फूटा की लोगों ने टपरा में बन रही शराब दुकान और शराब को  सुबह सुबह आग लगा दी |  यहां  लोग ना ठेकेदार से डरे और  उनके बंदूक  धारी सुरक्षा गार्डों से | पुलिस के पहुँचने पर भी लोग विरोध करने से पीछे नहीं हटे | सागर की स्वयं सेवी संस्थाओं ने शनिवार की रात राधा तिराहा से तीन बत्ती तक केंडल मार्च निकाला और प्रदेश को शराब मुक्त बनाने की अपील सरकार से की | मकरोनिया में स्कूली बच्चों ने शराब दुकानों के विरोध में रैली निकाली |  सागर में  कुछ दिनों पहले जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल के नेतृत्व में महिलाओ की एक गुलाबी गेंग बन गई है | इस गेंग में 100 से भी ज्यादा महिलाये हाथ में डंडा लेकर शराब दुकानों तक पहुँचती हैं , और दुकान बंद कराती हैं | रहली विधान सभा क्षेत्र के रौन गाँव से इसकी शुरुआत हुई | यहां महिलाओं ने शराब दुकान का तीन टप्पर उखाड़ कर फेक दिया था | इसके बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा और गुलाबी गेंग बन गई | अब तक यह गेंग रौन , सेमरा और कड़ता गाँव की शराब दुकाने बंद करा चुकी है | गेंग का संकल्प है की रहली विधान सभा क्षेत्र को शराब मुक्त कराया जाएगा | गेंग का खौफ भी इतना है की जिस गाँव में यह महिला पल्टन पहुँचती है शराब दुकान चलाने वाले खुद  दुकांन बंद कर भाग जाते हैं | ऐसा भी नहीं है की यह गेंग सिर्फ धमकाने का ही काम करती है , बल्कि ये तो लोगो को शराब के नशे के दुष्प्रभावों से  लोगों को जागरूक करने के  लिए नुक्कड़ नाटक भी करती हैं | 
                                                    
                                                      सागर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके का संभागीय मुख्यालय है , आम आदमी उम्मीद करता है की जहां बड़े अधिकारी बैठते हैं वहां नियम कानून ज्यादा चलते हैं | दारू के मामले में यहां नियम कानून का कोई वास्ता ही नहीं है | यहां के अधिकाँश दारु ठेकों में शराब ठेकेदारों ने अपनी सुविधा अनुसार अहाते बने लिए | मीडिया जब इन अवैध अहातो की पड़ताल करता है और अधियकारियों से कुछ पूंछना चाहता है तो उनके फोन ही बंद हो जाते हैं | 
                                                      शराब के विरोध की यह चिंगारी सिर्फ सागर जिले तक सीमित नहीं है | विरोध की यह ज्वाला पूरे संभाग भर में फैली है | टीकमगढ़ में तो बीजेपी विधायक के के श्रीवास्तव के भाई के शराब ठेके को लेकर महिलाये आंदोलन कर रही हैं | शनिवार को तो महिलाओं के इस आंदोलन में कांग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह भी कूद गए | उन्होंने भी जम कर नारे बाजी की  दुकान पर ताला  जड़ दिया |  बाद  में ठेकेदार और विधायक भाई के आश्वासन पर 19 अप्रेल तक का समय दिया गया और ताला खोल दिया गया |  इस दूकान को लेकर महिलाये और बच्चे भी मैदान में हैं , पहले यहां महिलाये प्रशासन को ज्ञापन दे चुकी , फिर दुकान के सामने भजन भी कर चुकी हैं , मानव श्रंखला भी बना चुकी हैं | पर परिणाम में मिला है सिर्फ आश्वासन |  टीकमगढ़ जिले की 31 शराब दुकानों को अन्यत्र शिफ्ट करने का काम किया जा रहा है | टीकमगढ़ जिले के पलेरा में स्टेट हाइवे के निकट शराब दुकान ऐसे स्थान पर खुलवा दी गई जहां पास में ही स्कूल है | यह दुकान भी एक बीजेपी नेता की है | जिले में लगभग आधा सैकड़ा ऐसे स्थल हैं जहां शराब दुकानों को लेकर विवाद के हालात हैं | 
                               
             दमोह में तो आबकारी अधिकारी अवध किशोर चौबे के जबाब से महिलाओं के सब्र का बाँध ही टूट गया था | अधिकारी जी ने फ़रमाया था की शराब दुकाने नियम के तहत ही संचालित हो रही हैं | इस बात से नाराज महिलाओं ने दो टूक कहा की जब आपकी बेटी शराब दुकान  के सामने से गुजरेगी और शराबी फब्तियां कसेंगे तब आपको पता चलेगा की किस नियम से चल रही हैं दुकाने |  दमोह नगर में अस्पताल और  सागर नाका पर हाइवे के निकट बस्ती में दुकाने खुलवा दी गई हैं जिसका महिलाये विरोध कर रही हैं | दमोह जिले के जबेरा में शिक्षण संस्थाओं के समीप खोली गई शराब दूकान से आहत नागरिकों ने तो शराब मुक्ति मोर्चा का ही गठन कर लिया है |प्रशासन को चेतावनी दी है की यदि सोमवार तक दुकान  नहीं हटी तो जबेरा बंद किया जाएगा | जिले में 27 से ज्यादा ऐसी दुकाने हैं जिनको हाइवे से हटाकर बस्ती में स्थापित किया जा रहा है जिसका लोगों में विरोध हो रहा है | 
                              

 छतरपुर शहर की तीनो शराब दुकाने हाइवे से हटाकर रिहायसी इलाकों  स्थापित कर  दी गई | स्थानीय महिला संघटन और घरेलू महिलाये इस को लेकर सड़को पर प्रदर्शन कर चुकी हैं | प्रशासन को ज्ञापन भी दे चुकी हैं पर हालत जस के तस हैं | एक अंग्रेजी शराब की दुकान तो गर्ल्स स्कूल जाने वाले मुख्य मार्ग और मंदिर के समीप ही खोल दी गई | जिले के नौगांव , हरपालपुर , बमीठा ,लवकुश नगर., महराजपुर ,बक्स्वाहा  में भी शराब दुकानों को लेकर महिलाये सड़कों पर निकली |

  सुरा पर यह संग्राम बेवजह नहीं बताया जा रहा है | पिछले कुछ समय से बुंदेलखंड इलाके में मानसिक अवसाद के मामले बड़े हैं | गम और ख़ुशी के ये जाम लोगों के परिवार को बदहाल करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं | छतरपुर जिले के बिजावर विधान सभा क्षेत्र का एक गाँव है भारतपुरा , इस गाँव की 70 फीसदी आबादी नशे की आदि है , जिसमे पुरुष के साथ  महिलाये और बच्चे भी सम्मलित हैं | पहले गाँव में शराब का ठेका नहीं था अब गाँव के  अंदर खुल गया है | जो ठेके की शराब नहीं खरीद पाते उनके लिए यहाँ कच्ची शराब भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है | यहां के पास के कंजरपुरा में और गाँव के बाहर  यह कारोबार वर्षो से जारी है | छतरपुर जिले के बारीगढ़ थाना इलाके के धवारी गाँव में शराब के कारण हुई मौत का एक ऐसा मामला सामने आया है जो धन पशुओ की आत्मा को तो जाग्रत नहीं कर सकता पर समाज से सरोकार रखने वालों को सोचने पर विवश जरूर कर सकता है | गाँव के कल्ला अहिरवार ने अपनी पत्नी  से शराब के लिए पैसे मांगे ना  देने पर उसने अपने शरीर पर मिटटी का तेल डाल लिया और डराने लगा | पत्नी के समझाने पर उसे पीटने लगा और घर से बाहर निकाल दिया इसी दौरान खुद को आग लगा ली  | बाद में उसकी मौत जिला अस्पताल में हो गई | दरअसल कल्ला की बेटी की शादी 29 अप्रेल को होनी है  बेटी की शादी के कार्ड बांटने के नाम पर घटना के दो दिन  पहले पत्नी से 500 रु लेकर गया था | घटना वाले दिन वह बगैर कार्ड बांटे शराब के नशे में धुत्त  होकर घर पहुंचा वा  और पैसो की मांग करने लगा था |  

                      टीकमगढ़ जिले के पृथ्वीपुर थाना इलाके के जैर गाँव के संतोष रैकवार का दर्द भी कुछ काम नहीं है | संतोष का कहना है की उसकी और छोटे भाई की शादी सिर्फ इस कारण नहीं हो पा रही है क्योंकि हमारे पिता शराबी हैं | पिता सिज्जू रैकवार २४ घंटे शराब के नशे में चूर रहते हैं , दिन भर दारु के ठेके पर पड़े रहते हैं | पिता की इन आदतों के कारण कोई अपनी बेटी हम लोगों को नहीं देना चाहता | 
                       शराब के कारण अपने माता -पिता को खो चुके किस्सू का किस्सा कुछ अलग है | १९ वर्ष पहले  किस्सू के  शराबी पिता रामदास  ने अपनी कीमती जमींन  ही नहीं बेचीं घर का सामान भी बेच डाला था , और शराब के नशे में ही कुए में गिरने से मौत हो गई थी | पिता की मौत के बाद माँ भी एक साल बाद  चल बसी | तीन भाई के किस्सू के परिवार में अब कोई शराब नहीं पीता और शराब पीने वालों को समझाईस देता है | 
                          
                            दरअसल शराब को लेकर मध्य प्रदेश सरकार बातें तो लच्छे दार करती है , उसके वित्त मंत्री भी शराब बंदी की बात करते हैं , मुखिया जी कुछ चरणों में शराब बंदी का एलान करते हैं , पर होता जाता कुछ नहीं | अगर कुछ चरणों की ही बात है तो बुंदलेखंड के पवित्र नगर पन्ना और ओरछा में ही शराब और मांस पर प्रतिबन्ध लगाकर अपनी नेक नीयती का सरकार प्रमाण दे सकती है | राजनैतिक रूप से देखा जाए तो शराब दुकानों के बढ़ते विरोध को देखते हुए कांग्रेस भी अब मैदान में आ गई है |  


रवीन्द्र व्यास 

02 अप्रैल, 2017

बुन्देलखण्ड से श्री राम का नाता


बुंदेलखंड की डायरी 
  
रवीन्द्र व्यास
 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम का जितना नाता अयोध्या से है , उतना ही नाता उनका बुंदेलखंड से भी है । बुंदेलखंड की पावन धरा चित्रकूट में उन्होंने अपना वनवास काल बिताया । और  दैत्यों के संहार के लिए उन्होंने पन्ना के सारंग धाम में उन्होंने दैत्यों के सर्वनाश के लिए धनुष उठाया था । बुंदेलखंड के ही  गोस्वामी तुलसी दास ने राम चरित्र मानस लिख कर उनकी  भक्ति की गंगा प्रवाहित कर दी । उसी बुंदेलखंड के छतरपुर शहर से भगवान् श्री राम जन्मोत्सव की परम्परा 2005   से एक अनोखे अंदाज में शुरू हुई ।  



छतरपुर से शुरू हुई ये परम्परा अब सारे बुंदेलखंड इलाके  और  देश के अनेक इलाकों में फ़ैल गई है | यहाँ एसा लगने लगता है की वास्तव में क्या भगवान् श्री राम फिर से जन्म ले रहे हें , उनके जन्म के बाद लोगों के उत्साह और उम्मंग को देखकर यही लगता है जेसे भगवान् ने ही अवतार ले लिया हो | 
  चैत्र शुक्ल नवमी का दिन हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए एक ख़ास दिन होता है । इसी दिन  त्रेता  युग में अयोध्या के रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ भगवान् श्री राम  ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था।  पुत्र रूप में  मर्यादा परुषोत्तम श्रीराम को पाकर  माता कौशल्या  अभिभूत  हो ग‌ईं थी । अयोध्या सहित सारे देश में राम नवमी का ये त्यौहार परम्परागत ढंग से मनाया जाता है ,पर  बुंदेलखंड में  राम जन्मोत्सव एक अनोखे अंदाज में मनाया जाने लगा है | 


भगवान् श्री राम के जन्मोत्सव पर  छतरपुर शहर को धार्मिक स्थल की तरह सजाया जाता है| जगह जगह केसरिया पताकाएं लगाईं जाती हें , नगर में वंदन वार बाँधी जाती हें , लाइट की  व्यवस्था , जगह जगह  श्री राम के कट-आउट लगाए जाते हें , नगर के मुख्य गांधी चौक बाजार में राम दरबार सजाया जाता है | छत्रशाल चौराहा , बस स्टैंड पर  विशेष सजवाट की जाती है । इस बार छत्रशाल चौक पर  राम भक्त हनुमान का दरबार सजाया गया है । यहां के राम चरित्र मानस मैदान में  राम जन्म के बाद जब श्रद्धा से सराबोर लोग केसरिया पताकाएं लेकर निकलते हैं  , आगे भगवान् श्री गणेश का रथ चलता है  , इसके बाद देवी देवताओं की झांकियां , ठीक वेसे ही जैसे  राम जन्म को देखने आये देवताओं आगमन अयोध्या में हुआ था | फर्क इतना  था वो त्रेता युग की बात थी और ये कलयुग की बात है जहाँ  उनके प्रतीक को ही मान कर मानव माँ संतोष कर लेता है | सारे नगर वासी सड़कों पर निकल कर अपनी ख़ुशी का इजहार करते हें और  राम जन्मोत्सव के इस भव्य समारोह में भाग लेते हें | इस समारोह को देखने के लिए अब दूर -दूर से लोग भी आने लगे हें | छतरपुर में यह आयोजन तो पिछले दो सौ सालों से हो रहा था । ., किन्तु पिछले 11  सालों में इसे एक अनोखी भव्यता  और दिव्यता मिली ,  जिसका असर ये हुआ की यह शोभा यात्रा  अब छतरपुर  नगर वा  जिले के कस्बों ,के अलावा ,आसपास के पन्ना ,टीकमगढ़ ,सागर , महोबा सहित  बुंदेलखंड इलाकों और उनके कस्बो  में   में भी इसी भव्यता से निकलने लगी  है |

  
                                    अतीत के पन्नो को यदि पलटा जाए तो छतरपुर में  भगवान् श्री राम के जन्मोत्सव को भव्यता एक क्रिया के प्रतिक्रिया के स्वरूप ही मिली थी । 2005  तक राम जन्मोत्सव में जहां लोग आमांत्रण देने के बावजूद नहीं जुड़ते थे वही 2006  में  जन्मोत्सव में सारा शहर उमड़ पड़ा । शुरुआत के कुछेक वर्षो तक भगवान् श्री राम की शोभा यात्रा में नोजवान हथियार लेकर भी निकले । हथियारों का यह प्रदर्शन समाचार की सुर्खिया जरूर बने , पर  इसमें आयोजन की मंशा  और भव्यता दरकिनार होती रही । उन कुछ वर्षो को दिया जाये तो अब भगवान् श्री राम का जन्मोत्सव समारोह एक सांस्कृतिक स्वरुप ले चुका है । जिसमे शोभा यात्रा के साथ निकलने वाली सर्व समाज की  झांकिया ,  लोक कलाकारों की टोलिया एक अलग ही  सांस्कृतिक माहौल निर्मित करती हैं । श्री राम सेवा समिति द्वारा इस आयोजन की सम्पूर्ण व्यवस्था बनाई जाती है जिसमे समाज के हर तबके की भागीदारी होती है । 


          पिछली रामनवमी पर छतरपुर की इस भव्य शोभा यात्रा को देखने और समझने के लिए बुंदेलखंड के लोगों के अलावा दिल्ली , भोपाल और इंदौर से भी लोग आये थे । वे भी अपने इलाकों में इसी तर्ज पर भगवान् श्री राम का जन्मोत्सव और शोभा यात्रा निकालने की  योजना बनाने की  चाहत रखते हैं । 

 
                    दरअसल बुंदेलखंड इलाका ऋषि मुनियों की तपो भूमि रहा है । चित्रकूट में भगवान् श्री राम , सीता और लक्षण जी ने अपने वनवास काल का अधिकांश  समय बिताया था । यहां के कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा कर उन्होंने  बुंदेलखंड की धरा को पावन किया था । यहां से जब वे आगे बड़े और पन्ना जिले के सारंग पहाड़ इलाके में पहुंचे थे । जिसे अब सारंग धाम कहते हैं यहाँ भगवान् राम ,सीता जी और लक्ष्मण जी से जुडी कई यादे आज भी हैं । यही वो स्थान भी माना जाता है जहां श्री राम ने दैत्यों के संहार के लिए धनुष उठाया था । पन्ना के सलेहा से दस किमी दूर अगस्त ऋषि आश्रम हैं , उनसे मिलने स्वयं श्री राम गए थे । यहां उन्हें ऋषि ने एक धनुष बाण भेंट किया था यही से वे नासिक की ओर गए थे ।  यहाँ भगवान् श्री राम की वनवासी वेश में एक मात्र दुर्लभ प्रतिमा विद्यमान है । दक्षिण भारतीय लोगों में अगस्त मुनि की अत्याधिक मान्यता के कारण बड़ी संख्या में दक्षिण भारत से लोग इस दुर्गम स्थल तक आते हैं । 


                        भगवान् श्री राम और के बुंदेलखंड से इसी जुड़ाव को छतरपुर के लोगों ने एक नया आयाम देकर भक्ति की नव गंगा प्रवाहित की है । श्रद्धा और भक्ति की यह निर्मल धारा निरंतर प्रवाहमान बनी रहे इसके लिए श्री राम सेवा समिति और यहां के लोग जतन कर रहे हैं । सरकार राम पथ गमन को पर्यटन में विकशित करने की बात कर रही है ,। छतरपुर के राम जन्मोत्सव के इस आयोजन को भी यदि राम पथ गमन के  साथ जोड़ा जाए तो  एक बड़ी उपलब्धि होगी ।
                                            





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