बुंदेलखंड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के झाँसी एस एस पी कार्यालय में पिछले साल दो सगी बहने पहुंची थी | इनने पुलिस को जो दर्द सुनाया था उसे सुन वहां मौजूद हर किसी की आँखें नम हो गई थी | इनके माता पिता ने शराब लिए इन दोनों को बेंच दिया था | शराब से घरों को और लोगों को बर्बाद करने वाली यह कोई पहली घटना नहीं है , इस तरह के अनेकों मामले सामने आ चुके हैं | फर्क इतना है की बर्बाद होने वाले ज्यादातर लोग कमजोर और माद्यम वर्ग के थे इस कारण ऐसे लोगो की जिंदगी और मौत पर कोई विशेष ध्यान सियासत का नहीं जाता | शराब के अभिशाप का सबसे ज्यादा शिकार भी महिलाये ही होती हैं , और जब उन्होंने देखा की उनके परिवार की बर्बादी का सामान उनकी ही बस्ती में आ गया तो वे मौन नहीं रह सकी | परिवार और समाज को बर्बादी से बचाने के लिए उन्होंने कमर कस ली हाथों में डंडे लेकर निकल पड़ी मुकाबला करने के लिए |
सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए निर्णय दिया कि राष्ट्रीय राज मार्ग की शराब दुकाने हटाई जाए | माना गया की यह एक बड़ा कारण है जिसके चलते लोग शराब पीकर वाहन चलाते हैं और देश में हर साल डेढ़ लाख लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं | सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों से दुकाने हटवाकर बस्ती में खुलवा दी | बस्ती में शराब खुलने का विरोध होना स्वाभाविक था और विरोध शुरू भी हुआ कई जगह उसने उग्र रूप भी धारण कर लिया | आवासीय इलाकों में खोली जा रही शराब दुकानों के विरोध में तो दमोह जिले के जबेरा में तो शराब मुक्ति मोर्चा का गठन किया गया है | सागर में तो महिलाओं ने गुलाबी गेंग गठित कर ली है | महिलाये और बच्चे भी सुरा के खिलाफ संघर्ष के लिए लामबंद होने लगे हैं |
शनिवार की रात सागर के रजाखेड़ी आनंद नगर इलाके में खुल रही शराब दुकान को लेकर लोगों में इतना आक्रोश फूटा की लोगों ने टपरा में बन रही शराब दुकान और शराब को सुबह सुबह आग लगा दी | यहां लोग ना ठेकेदार से डरे और उनके बंदूक धारी सुरक्षा गार्डों से | पुलिस के पहुँचने पर भी लोग विरोध करने से पीछे नहीं हटे | सागर की स्वयं सेवी संस्थाओं ने शनिवार की रात राधा तिराहा से तीन बत्ती तक केंडल मार्च निकाला और प्रदेश को शराब मुक्त बनाने की अपील सरकार से की | मकरोनिया में स्कूली बच्चों ने शराब दुकानों के विरोध में रैली निकाली | सागर में कुछ दिनों पहले जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल के नेतृत्व में महिलाओ की एक गुलाबी गेंग बन गई है | इस गेंग में 100 से भी ज्यादा महिलाये हाथ में डंडा लेकर शराब दुकानों तक पहुँचती हैं , और दुकान बंद कराती हैं | रहली विधान सभा क्षेत्र के रौन गाँव से इसकी शुरुआत हुई | यहां महिलाओं ने शराब दुकान का तीन टप्पर उखाड़ कर फेक दिया था | इसके बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा और गुलाबी गेंग बन गई | अब तक यह गेंग रौन , सेमरा और कड़ता गाँव की शराब दुकाने बंद करा चुकी है | गेंग का संकल्प है की रहली विधान सभा क्षेत्र को शराब मुक्त कराया जाएगा | गेंग का खौफ भी इतना है की जिस गाँव में यह महिला पल्टन पहुँचती है शराब दुकान चलाने वाले खुद दुकांन बंद कर भाग जाते हैं | ऐसा भी नहीं है की यह गेंग सिर्फ धमकाने का ही काम करती है , बल्कि ये तो लोगो को शराब के नशे के दुष्प्रभावों से लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक भी करती हैं |
सागर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके का संभागीय मुख्यालय है , आम आदमी उम्मीद करता है की जहां बड़े अधिकारी बैठते हैं वहां नियम कानून ज्यादा चलते हैं | दारू के मामले में यहां नियम कानून का कोई वास्ता ही नहीं है | यहां के अधिकाँश दारु ठेकों में शराब ठेकेदारों ने अपनी सुविधा अनुसार अहाते बने लिए | मीडिया जब इन अवैध अहातो की पड़ताल करता है और अधियकारियों से कुछ पूंछना चाहता है तो उनके फोन ही बंद हो जाते हैं |
शराब के विरोध की यह चिंगारी सिर्फ सागर जिले तक सीमित नहीं है | विरोध की यह ज्वाला पूरे संभाग भर में फैली है | टीकमगढ़ में तो बीजेपी विधायक के के श्रीवास्तव के भाई के शराब ठेके को लेकर महिलाये आंदोलन कर रही हैं | शनिवार को तो महिलाओं के इस आंदोलन में कांग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह भी कूद गए | उन्होंने भी जम कर नारे बाजी की दुकान पर ताला जड़ दिया | बाद में ठेकेदार और विधायक भाई के आश्वासन पर 19 अप्रेल तक का समय दिया गया और ताला खोल दिया गया | इस दूकान को लेकर महिलाये और बच्चे भी मैदान में हैं , पहले यहां महिलाये प्रशासन को ज्ञापन दे चुकी , फिर दुकान के सामने भजन भी कर चुकी हैं , मानव श्रंखला भी बना चुकी हैं | पर परिणाम में मिला है सिर्फ आश्वासन | टीकमगढ़ जिले की 31 शराब दुकानों को अन्यत्र शिफ्ट करने का काम किया जा रहा है | टीकमगढ़ जिले के पलेरा में स्टेट हाइवे के निकट शराब दुकान ऐसे स्थान पर खुलवा दी गई जहां पास में ही स्कूल है | यह दुकान भी एक बीजेपी नेता की है | जिले में लगभग आधा सैकड़ा ऐसे स्थल हैं जहां शराब दुकानों को लेकर विवाद के हालात हैं |
दमोह में तो आबकारी अधिकारी अवध किशोर चौबे के जबाब से महिलाओं के सब्र का बाँध ही टूट गया था | अधिकारी जी ने फ़रमाया था की शराब दुकाने नियम के तहत ही संचालित हो रही हैं | इस बात से नाराज महिलाओं ने दो टूक कहा की जब आपकी बेटी शराब दुकान के सामने से गुजरेगी और शराबी फब्तियां कसेंगे तब आपको पता चलेगा की किस नियम से चल रही हैं दुकाने | दमोह नगर में अस्पताल और सागर नाका पर हाइवे के निकट बस्ती में दुकाने खुलवा दी गई हैं जिसका महिलाये विरोध कर रही हैं | दमोह जिले के जबेरा में शिक्षण संस्थाओं के समीप खोली गई शराब दूकान से आहत नागरिकों ने तो शराब मुक्ति मोर्चा का ही गठन कर लिया है |प्रशासन को चेतावनी दी है की यदि सोमवार तक दुकान नहीं हटी तो जबेरा बंद किया जाएगा | जिले में 27 से ज्यादा ऐसी दुकाने हैं जिनको हाइवे से हटाकर बस्ती में स्थापित किया जा रहा है जिसका लोगों में विरोध हो रहा है |
छतरपुर शहर की तीनो शराब दुकाने हाइवे से हटाकर रिहायसी इलाकों स्थापित कर दी गई | स्थानीय महिला संघटन और घरेलू महिलाये इस को लेकर सड़को पर प्रदर्शन कर चुकी हैं | प्रशासन को ज्ञापन भी दे चुकी हैं पर हालत जस के तस हैं | एक अंग्रेजी शराब की दुकान तो गर्ल्स स्कूल जाने वाले मुख्य मार्ग और मंदिर के समीप ही खोल दी गई | जिले के नौगांव , हरपालपुर , बमीठा ,लवकुश नगर., महराजपुर ,बक्स्वाहा में भी शराब दुकानों को लेकर महिलाये सड़कों पर निकली |
सुरा पर यह संग्राम बेवजह नहीं बताया जा रहा है | पिछले कुछ समय से बुंदेलखंड इलाके में मानसिक अवसाद के मामले बड़े हैं | गम और ख़ुशी के ये जाम लोगों के परिवार को बदहाल करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं | छतरपुर जिले के बिजावर विधान सभा क्षेत्र का एक गाँव है भारतपुरा , इस गाँव की 70 फीसदी आबादी नशे की आदि है , जिसमे पुरुष के साथ महिलाये और बच्चे भी सम्मलित हैं | पहले गाँव में शराब का ठेका नहीं था अब गाँव के अंदर खुल गया है | जो ठेके की शराब नहीं खरीद पाते उनके लिए यहाँ कच्ची शराब भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है | यहां के पास के कंजरपुरा में और गाँव के बाहर यह कारोबार वर्षो से जारी है | छतरपुर जिले के बारीगढ़ थाना इलाके के धवारी गाँव में शराब के कारण हुई मौत का एक ऐसा मामला सामने आया है जो धन पशुओ की आत्मा को तो जाग्रत नहीं कर सकता पर समाज से सरोकार रखने वालों को सोचने पर विवश जरूर कर सकता है | गाँव के कल्ला अहिरवार ने अपनी पत्नी से शराब के लिए पैसे मांगे ना देने पर उसने अपने शरीर पर मिटटी का तेल डाल लिया और डराने लगा | पत्नी के समझाने पर उसे पीटने लगा और घर से बाहर निकाल दिया इसी दौरान खुद को आग लगा ली | बाद में उसकी मौत जिला अस्पताल में हो गई | दरअसल कल्ला की बेटी की शादी 29 अप्रेल को होनी है बेटी की शादी के कार्ड बांटने के नाम पर घटना के दो दिन पहले पत्नी से 500 रु लेकर गया था | घटना वाले दिन वह बगैर कार्ड बांटे शराब के नशे में धुत्त होकर घर पहुंचा वा और पैसो की मांग करने लगा था |
टीकमगढ़ जिले के पृथ्वीपुर थाना इलाके के जैर गाँव के संतोष रैकवार का दर्द भी कुछ काम नहीं है | संतोष का कहना है की उसकी और छोटे भाई की शादी सिर्फ इस कारण नहीं हो पा रही है क्योंकि हमारे पिता शराबी हैं | पिता सिज्जू रैकवार २४ घंटे शराब के नशे में चूर रहते हैं , दिन भर दारु के ठेके पर पड़े रहते हैं | पिता की इन आदतों के कारण कोई अपनी बेटी हम लोगों को नहीं देना चाहता |
शराब के कारण अपने माता -पिता को खो चुके किस्सू का किस्सा कुछ अलग है | १९ वर्ष पहले किस्सू के शराबी पिता रामदास ने अपनी कीमती जमींन ही नहीं बेचीं घर का सामान भी बेच डाला था , और शराब के नशे में ही कुए में गिरने से मौत हो गई थी | पिता की मौत के बाद माँ भी एक साल बाद चल बसी | तीन भाई के किस्सू के परिवार में अब कोई शराब नहीं पीता और शराब पीने वालों को समझाईस देता है |
दरअसल शराब को लेकर मध्य प्रदेश सरकार बातें तो लच्छे दार करती है , उसके वित्त मंत्री भी शराब बंदी की बात करते हैं , मुखिया जी कुछ चरणों में शराब बंदी का एलान करते हैं , पर होता जाता कुछ नहीं | अगर कुछ चरणों की ही बात है तो बुंदलेखंड के पवित्र नगर पन्ना और ओरछा में ही शराब और मांस पर प्रतिबन्ध लगाकर अपनी नेक नीयती का सरकार प्रमाण दे सकती है | राजनैतिक रूप से देखा जाए तो शराब दुकानों के बढ़ते विरोध को देखते हुए कांग्रेस भी अब मैदान में आ गई है |
रवीन्द्र व्यास






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