किसान त्रस्त सरकार मस्त

 बुदेलखंड की डायरी
रवींद्र व्यास

                    बुंदेलखंड के किसानो के दर्द की दवा तो नहीं मिलती अलबत्ता  हमारा दर्द कितना गहरा और गंभीर है की उसे जब फ़िल्मी पर्दे पर दिखाया जाता है तो वह भी पुरुस्कृत हो जाता है | बुंदेलखंड के किसानो के दर्द पर बनी फीचर फिल्म " बी फॉर बुंदेलखंड "  कोलकता में आयोजित इंटर नेशनल कल्ट फिल्म फेस्टिवल ना सिर्फ सराहा गया बल्कि फिल्म डायरेक्टर को इसके लिए "बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर " का अवार्ड भी दिया गया | फीचर  फिल्म में  कर्ज में जी रहे  किसान राम सिंह और उसके पुत्र लल्ला  के दर्द की कथा है  | जिसमे बेटा कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचने की बात कहता है और पिता अपने जीते जी जमीन बेचना नहीं चाहता  | नाराज होकर जब बेटा घर गाँव छोड़ कर चला जाता है तो एक बेबस पिता कर्ज की नियति  आगे हार जाता और फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर लेता है | 
             
                       मंदसौर में किसान आंदोलन में पुलिस गोली में हुई मौतों के बाद से मध्य प्रदेश में   किसान लगातार मौत को गले लगा रहे हैं | बुंदलखंड में तो हालात  और भी ज्यादा खराब हैं , यहां तो दुष्काल का एक  चक्र ही चल रहा है जो किसान को मौत में मुक्ति का मार्ग बता देता है || 
 

 हाल ही में   बुंदेलखंड में चार किसानो की आत्म ह्त्या के  बाद मध्य प्रदेश में किसानो की आत्म ह्त्या का आंकड़ा 21 पर पहुंच गया है |  छतरपुर जिले के मुख्य मंत्री के गोद लिए बिजावर विधान सभा क्षेत्र के पाली गाँव के किसान देशपत  यादव के छोटे बेटे ने रघुवीर (28) ने उसी खेत पर जाकर सल्फास की गोली खाकर जान दे दी जो उसके वा उसके परिवार का जीने का सहारा था |  वह अपने पीछे दो बेटी और एक बेटा और पत्नी  छोड़ गया है | बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले इस युवक पर दस ग्यारह लाख का कर्ज होना बताया जा रहा है |  प्रशासन की नजर में मरने वाला युवक किसान की परिभाषा में नहीं आता , आत्म ह्त्या के पीछे वजह भी पारिवारिक कलह मान ली गई है |
 सागर जिले के बीना तहसील के बसाहरी गाँव गुलाई पटेल (50 ) ने अपने ही खेत पर फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर ली | उसके पास से मिले सोसाइड नॉट में लिखा है की उस पर एक लाख का कर्ज था जिसके लिए साहूकार परेशान करता था | जब की वह एक लाख के कर्ज के एवज में ढाई लाख रु साहूकार शंकर महराज को दे चुका है | 
                                            देखा जाए तो बुंदेलखंड में साहूकारी  कर्ज का यह दुस्चक्र किसान के लिए किसी जानलेवा मुसीबत से कम नहीं है | सागर ,छतरपुर ,और पन्ना जिले में हुई तीनो किसानो की आत्म हत्या के पीछे भी साहूकारी कर्जा मौत की मुख्य वजह बना | बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रो में कर्ज का मर्ज किस कदर बेकाबू है इसकी अगर असल तस्वीर देखना है तो छतरपुर जिले के बिजावर , बड़ामलहरा और बक्स्वाहा विकाश खंड में , टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ इलाके में पन्ना जिले के पवई  और अजयगढ़ इलाके में , दमोह के हटा ,मड़ियादो , सागर जिले के केसली , बंडा शाहगढ़ इलाके में देखी जा सकती है ! छतरपुर जिले के  इन ब्लाकों में तो हालात इस कदर बेकाबू हैं की सैकड़ों की संख्या में अच्छी खासी जमीन के मालिक किसान   मजदूर बन गए ,|  जब  कर्ज माफ़ी की बात आती है तो बैंक का कर्ज तो माफ़ कर दिया जाता है , पर गाँव -गाँव में बैठे इन साहूकारी डकैतों से किसान को मुक्ति नहीं मिल पाती | 5 से 20 रु सैकड़ा पर कर्ज देने वाले इन साहूकारों से कर्ज लेकर ऐसे मकड़ जाल में उलझता है की ता उम्र वह उससे निकल नहीं पाता |  
 

                                            
                                   मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया के ही गृह जिले में एक पखवाड़े के भीतर 6 किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं | नॅशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं की किसान आत्म ह्त्या के मामले में 42 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है जब की किसान मजदूर आत्म हत्या के मामले में 31 फीसदी की कमी आई है | दरअसल इस सबके पीछे भी नोटबंदी का ही मामला उभरकर सामने आ रहा है | किसान और आम आदमी की सारी जमा पूंजी मोदी सरकार ने निकलवा ली |  अच्छी फसल आने के बाद जब वह बेचने पहुंचा तो उसे चेक थमा दिये गए | बैंक में पहुंचा तो वहां की लम्बी लाइन और उलझाऊ कार्य प्रणाली ने किसान को पैसा ना आने की बात कह कर चलता कर दिया | एक एक माह चक्कर लगाने के बाद जब उसे पैसा नहीं मिला और अच्छी फसल देख सजाये सपने टूटने लगे उस पर साहूकार के तकाजे ने उसे बुरी तरह से  हताश कर दिया | ऐसी जिंदगी से बेहतर उसे मौत लगने लगी और उसने उसी का वरण किया | 
                                    
                                       किसानो की मौत के मुद्दे ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का मौका दे दिया है | कांग्रेस के पूर्व मंत्री  ज्योतरादित्य सिंधिया और कमल नाथ तो मध्य प्रदेश की सरकार को घेरने में ही जुट गए हैं | कमल नाथ ने तो शिवराज सरकार पर किसानो के मसले पर गलत बयान बाजी का आरोप लगाते हुए प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने तक की मांग कर डाली | वही  आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन सचिव अमित भटनागर  प्रदेश सरकार को किसान विरोधी सरकार बताते हैं | वे कहते हैं की हमने अपने जीवन में ऐसी सरकार नहीं देखी जो जनता और किसानो को लूटने के जातन में जुटी हो | मसला चाहे खाद बीज का हो , अथवा बिजली के बिल का | 

                        ये शब्दों का ही भ्रम जाल है की लोग अपने को जनता का प्रधान सेवक कहते कहते कब जनता के मालिक बन जाते हैं पता ही नहीं चल पाता | जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है , अपने को मालिक समझने वाले लोग अपने हालातों को देख कर ना सिर्फ हताश होते हैं| बल्कि वे विरोध के ऐसे रास्ते पर भी चल पड़ते हैं जिसकी मंजिल का खुद उन्हें ही पता नहीं रहता | हालात से हारकर मौत को गले लगाने से  भी नहीं चूकते |
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