15 अक्टूबर, 2025

मध्यप्रदेश में 20 से अधिक बच्चों की मौत: डॉक्टर ने माना, कंपनी से 10% कमीशन लेता था

 

मध्यप्रदेश में 20 से अधिक बच्चों की मौत: डॉक्टर ने माना, कंपनी से 10% कमीशन लेता था



भोपाल: मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से हुई 20 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने जिला अदालत को बताया है कि गिरफ्तार डॉक्टर प्रवीण सोनी ने पूछताछ के दौरान माना कि उसे यह सिरप लिखने पर फार्मा कंपनी से 10% कमीशन मिलता था।

अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टर सोनी सहित कई अन्य चिकित्सकों को औषधि से जुड़े संक्रमण और प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद उन्होंने मरीजों को यह सिरप देना जारी रखा। अदालत में पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टर ने मरीजों या स्वास्थ्य विभाग को संभावित खतरे की कोई सूचना नहीं दी।

पुलिस के अनुसार, यह आचरण "चिकित्सकीय नैतिकता और कर्तव्य का गंभीर उल्लंघन" है। जांच टीम ने बताया कि आरोपी डॉक्टर ने लाभ के लिए मरीजों की सुरक्षा से समझौता किया।

कंपनी पर सख़्त कार्रवाई

मामला सार्वजनिक होने के बाद तमिलनाडु की फार्मा कंपनी श्रीसन फ़ार्मास्यूटिकल्स, जो कोल्ड्रिफ सिरप बनाती थी, को बंद कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सिरप में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मिलने की पुष्टि हुई यह वही रासायनिक तत्व है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पूर्व विषाक्तता मामलों में दर्ज हुआ है।

कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है, और कंपनी मालिक जी. रंगनाथन को 11 अक्तूबर को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया गया।

आर्थिक अनियमितता की जांच

13 अक्तूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कंपनी के परिसरों और अधिकारियों के घरों पर छापे मारे। जांच एजेंसियां अब पता लगा रही हैं कि डॉक्टरों और कंपनी के बीच कमीशन नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर सक्रिय था।

अधिकारियों के मुताबिक, मामला अब केवल स्वास्थ्य कदाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही के पहलू भी शामिल हो गए हैं।

परिवारों में आक्रोश, जांच जारी

मृत बच्चों के परिवारों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी सज़ा और हत्या के समान अपराध के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। राज्य सरकार ने संबंधित डॉक्टरों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं और एक विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी है।

जांच अधिकारी का कहना है, “यह मामला एक चेतावनी है कि लाभ के लिए लापरवाही किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है।

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