बाबा बनाएंगे आदिवासियों की सनातन आर्मी
रवीन्द्र व्यास
देश प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समुदाय के नाम पर सियासत तो जम कर हुई ,पर उनकी मूलभूत समस्याओं को अनदेखा करने का अपराध भी राजनीति के ज्ञानियों ने ही किया | दुनिया भर में आदिवासी आबादी ५ फीसदी मानी जाती है जबकि भारत में उनके ८.2 फीसदी होने का दावा किया जाता है | सीधे और सरल माने जाने वाले आदिवासी समुदाय के लोग धर्म के ठेकेदारों के सुरक्षित टार्गेट रहे | जिसके अनेकों दुष्परिणाम उनकी जीवन शैली में देखने को मिले | अब बुंदेलखंड से बाबा बागेश्वर आदिवासियों को धर्मांतरण के इस खेल से बचाने के लिए मैदान में आये हैं , वे आदिवासियों की सनातन आर्मी भी बनवाएंगे | ये अलग बात है कि आदिवासियों बनाम वन वासियों की बुनियादी समस्याओं के निदान की दिशा में सार्थक पहल अब तक नहीं हो सकी है |
दरअसल देश में आदिवासी जनजाति समूह ऐसे संक्रमण काल से गुजर रहा है जहां उसे विकास और धर्मांतरण की कीमत अपनी धरा , संस्कृति और भाषा से चुकानी पढ़ रही है | सीधे और सरल माने जाने वाले ये समूह जंगल, गुफाओं और पहाड़ की ऊँची चोटियों पर रहकर अपना जीवन गुजारते रहे | सरकारों ने उन्हें विकास के नाम पर विस्थापित किया , धर्म के ठेकेदारों ने दूसरों की लाइन छोटी करने के लिए लाइन काटने का जातन किया | इस मामले में देश के आदिवासी समूह सबसे पहले निशाने पर रहे |
जनजाति समुदाय में व्यापक स्तर पर उनका धर्म परिवर्तन हुआ | धर्म परिवर्तन के अग्रणी माने जाने वाले ईसाई और मुस्लिम पंथ के ठेकेदारों ने इनका धर्म परिवर्तन तो कराया लेकिन जीवन में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ | दूर नहीं जाइये मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र डिंडोरी में तो ईसाई समाज को पीछे छोड़ते हुए मुस्लिम समाज ने व्यापक धर्मांतरण कराया | यहां इनका तरीका भी झारखण्ड जैसा ही देखने को मिला | जहाँ गरीबी के दलदल में फसे आदिवासी परिवार में शादी कर धर्म परिवर्तन व्यापक तौर पर कराया गया | देश में असम, नागालैंड ,मिजोरम , मणिपुर जैसे राज्यों में ईसाई मिशनरी द्वारा कराये गए धर्म परिवर्तन के कारण ,आदिवासी समूहों की अनेको बोलियों और भाषाएँ विलुप्त हो गई हैं | वे ऐसे दोराहे पर खड़े हो गए जहां वे अपनी ही अनादिकाल से चली आ रही संस्कृति से विमुख हो गए |
संयुक्त राष्ट्र की द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड इंडीजीनस पीपल्स नामक रिपोर्ट बताती है कि भारत की आदिम जनजातियों को भारत सहित विश्व भर में अपनी संपदा संसाधनों जमीन से विस्थापित किया गया | विस्थापन के कारण कई आदिम जनजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर भी पहुँच गई हैं | विस्थापन के कारण इनके सामने गरीबी ,बीमारी और बेरोजगारी का संकट अलग से खड़ा हुआ |
जिसका लाभ मिशनरियों ने इनको लालच और फरेब का जाल बिछाकर उठाया |
हिंदु जगाओ हिंदुस्तान बचाओ
19 जनवरी को बागेश्वर धाम में आदिवासी समाज का सम्मेलन हुआ , इस सम्मेलन का उद्देश्य था " हिंदू जगाओ हिंदुस्तान बचाओ" | बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री मानते हैं कि वर्तमान समय में भारत में विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित तरीके से धर्मांतरण को विशेष तौर से प्रोत्साहित किया जा रहा है | .उसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश ,केरल तेलंगाना, मिजोरम, असम, नागालैंड, उड़ीसा यह वह प्रदेश है जहां हिंदुओं का धर्मांतरण लालच ,प्रलोभन या फिर चमत्कारों की ट्रिक दिखाकर करवाया जा रहा है. हम सबको अगर हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए किसी चीज की सबसे पहले जरूरत है तो सबसे पहले धर्मांतरण को रोकना पड़ेगा । धीरेन्द्र शास्त्री अब इस समाज में जागरूकता लाकर इन्हें सनातन धर्म की आर्मी के रूप में खड़ा करने की दिशा में कार्य करेंगे । उन्होंने सम्मेलन में आये आदिवासी समाज के लोगों को सनातन आर्मी बनाने का संकल्प भी दिलाया।
धीरेन्द्र शास्त्री आदिवासी समुदाय को अनादिवासी और प्रकृति मित्र मानते हैं | इस समुदाय को चुनाव के समय तो याद किया जाता है पर उसके बाद उसे भुला दिया जाता है,| वह समुदाय ऐसा है जो शहरी शोर शराबा और आपकी चमक दमक से बहुत दूर है और अपनी संस्कृति को बचाए हुए हैं। उसके पास संसाधन बहुत कम है लेकिन प्रकृति के बहुत करीब और हमें लगता है परमात्मा के भी बहुत करीब है । जब भगवान राम वनवास गए तो सबसे पहले अगर किसी ने साथ दिया तो आदिवासी समुदाय के लोगों ने।
सम्मेलन में झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की तादाद में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। उन्हें तीन संकल्प भी दिलाया गया , किसी भी कीमत पर धर्मांतरण नहीं करेंगे शिक्षा पर जोर देंगे और हिंदुत्व का झंडा बुलंद रखेंगे गांव-गांव में और हर जगह हिंदुत्व के लिए हनुमान चालीसा बागेश्वर मडल बनाया जाएगा ताकि सेवादार जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरने को तैयार रहें।
सम्मलेन में आये राज्यसभा सांसद एवं आदिवासी समाज के नेता सुम्मेर सिंह सोलंकी ने कहा कि आमो आखा हिंदू छे अर्थात
हम सब हिंदू हैं। उन्होंने आदिवासी समाज को सरल और सीधा प्रकृति का पुजारी बताया । उन्होंने कहा हमारा समाज जीवन भर धर्म को
माथे पर लिखे रहता है | उन्होंने समाज अपील की है कि वह सनातन
धर्म के लिए अपनी एकजुटता दिखाएं ताकि कोई धर्म परिवर्तन के लिए आंख ना उठा सके।
सरकार के प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 नवंबर, 2023 को लगभग 24 हजार करोड़ रुपये के बजट के साथ पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान की शुरुआत की है | योजना के माध्यम से आदिवासी समाज के लोगों को बेहतर आजीविका के अवसरों जैसी बुनियादी सुविधा और जरूरत को सुनिश्चित करने का काम जाना है .
देश में 10 (8. 2 %)करोड़ से अधिक आदिवासी रहते है. विकसित भारत का सपना तब तक सपना ही रहेगा , जब तक घने वनों, पहाड़ो और कंदराओं में रहने वाले जनजातिय समूहों को देश की मुख्यधारा से नहीं जोड़ा जाता है | जनमन योजना के तहत सरकार अब आदिवासी परिवारों तक सड़क , दूरसंचार , बिजली ,पानी , आवास, और शिक्षा,स्वास्थ्य , पोषण जैसी सुविधा पहुंचाने का काम कर रही है . इसके अलावा सरकार इनके - शत प्रतिशत टीकाकरण, सिकल सेल रोग उन्मूलन, पीएमजेएवाइ, टीबी उन्मूलन, पीएम सुरक्षित मातृत्व योजना, पीएम मातृ वंदना योजना, पीएम पोषण, पीएम जन योजना के माध्यम से जनजातियों का विकास के लिए कार्य किया जायेगा
वनवासी बनाम आदिवासी
आजादी के बाद छत्तीसगढ़ क्षेत्र में हो रहे व्यापक धर्म परिवर्तन को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री प रविशंकर शुक्ल ने आदिवासी विकास योजना की शुरुआत की | १९५२ में जशपुर में रमाकांत केशव देशपांडे को क्षेत्रीय अधिकारी नियुक्त किया | रमाकांत ने ही ६ दिसंबर १९५२ को वनवासी कल्याण आश्रम की आधारशिला जशपुर में रखी | उस समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में ईसाई मिशनरी द्वारा तमाम तरह के हथकंडे अपनाकर आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था | साधन संपन्न मिशनरी का मुकाबला करने में आई परेशानियों से जूझते हुए भी , कल्याण आश्रम ने स्कूलों की श्रंखला शुरू की | आज देश भर में इनके कार्यकर्ता आदिवासी समाज के बीच रह कर कार्य कर रहे हैं |
आदिवासी समाज को जाग्रत करने और उन्हें धर्मांतरण के कुचक्र से बचाने के लिए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को जाहिर तौर पर देश के सबसे बड़े वनवासी कल्याण आश्रम का भी सहयोग मिलेगा | अब वे अपने अभियान में कितना सफल हो पाते हैं यह तो वक्त ही बताएगा ?


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