05 जून, 2020

Social panchayat अब नहीं रहे पंचो मे परमेश्वर


बुंदेलखंड की डायरी

रवीन्द्र व्यास
 बुंदेलखंड  में आज भी समाज की  पंचायतों के फरमान लोगों की जिंदगीं को प्रभावित कर रहे हैं |   इनके  फैसलों को मानना और उसका  सभी को पालन करना समाज वालों के लिए आवश्यक  होता है | ऐसा ही एक मामला छतरपुर  जिले की  राजनगर तहसील क्षेत्र के  खजवा गांव में  पिछले दिनों  देखने को मिला |  जहां पर पटेल समाज की पंचायत ने   बृजगोपाल को बेटे की मौत पर  तेरहवीं ना करने पर  समाज से निष्कासित कर दिया | बुंदेलखंड  ही नहीं देश में  सामजिक पंचायतें आये दिन एसे फेसले सुनाती रहती हैं |अतीत में  सामाजिक पंचायतें सामाजिक व्यवस्था बनाये रखने  की मिशाल हुआ करती थी , लोग भी पंचों में परमेश्वर का वाश मानते थे | सामाजिक प्रदुषण का असर अब इन पंचायतों पर भी देखने को मिलने लगा है | 

 राजनगर थाना क्षेत्र का  खजवा गाँव खजुराहो के समीप है |  यहां के   किसान बृजगोपाल पटेल के 15 वर्षीय बेटे की कुएं में डूबने से 9 मार्च को मौत हो गई थी | मौत के बाद तेरहवी का कार्यक्रम उसका पिता लाक  डाउन की वजह से नहीं कर पाया था | इस पर पटेल  समाज की पंचायत बैठी ,और पंचायत ने फरमान सुनाया कि इनको समाज से बहिष्कृत किया जाता है|जब तक वह अपने बेटे की मौत का गांव वालों को भोज नहीं करा देता तब तक उसके यहां गांव के किसी भी व्यक्ति का आना जाना नहीं होगा ना ही वह सार्वजनिक कुएं से पानी भर सकता है अन्य तरह की भी सार्वजनिक गतिविधियां पर  रोक लगा  दी गई । मामला मई के अंतिम सप्ताह में पुलिस तक पहुंचा , बाद में जनपद पंचायत ने भी अपनी तरफ से पड़ताल करवाई और कह दिया की ऐसी कोई स्थिति नहीं है |                         
  बुंदेलखंड में यह कोई अकेला मामला नहीं है , इस तरह की सामजिक पंचायतें आये दिन  एसे फेसले देश के अलग अलग कोनो में सुनाती रहती हैं | समाज को दिशा देने में अगर ये काम करें तो एक सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते  है | परन्तु वर्तमान में ये सामाजिक पंचायतें समाज को जोड़ने की अपेक्षा तोड़ने के अभियान में ज्यादा जुटी हैं | अपने स्वार्थ में आज के ये पंच परमेश्वर लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा का तो सर्वनाश करते ही हैं उसपर बड़ा आर्थिक बोझ भी लाद देते हैं |  ऐसे अनेकों मामले अभी हाल ही में देखने और सुनने को मिले हैं | 
  गोबर खाने की सजा                                           
  झांसी  के  भूपेश पाल ने 30 जून 2015 को  गैर बिरादरी की युवती  विवाह कर लिया था | इसके कारण  पाल समाज से  भूपेश के परिवार को  सामाज से बाहर  कर दिया गया था | जनवरी 2020 में उसके परिवार ने समाज में सम्मलित होने के लिए  पंचायत बुलाई थी |  पंचायत ने  फरमान  सुनाया  कि भूपेश और उसकी पत्नी  को गोमूत्र पीने और गोबर खाने की शर्त पर ही समाज  में शामिल किया जाएगा | पंचायत के इस फैसले को जिसने भी सुना वह सन्न रह गया की आखिर मानव दानव जैसा आचरण क्यों करने लगा है | .आखिर में मामला पुलिस के पास पहुंचा और पुलिस ने  पंचायत में शामिल छह पंचों के खिलाफ शांति भंग के आरोप में  कार्यवाही  कर दी |
 वायरल फोटो की पंचायत मौत पर समाप्त   
प्रेम प्रसंग के ऐसे ही एक मामले में  दिसंबर 2017 में  टीकमगढ़ जिले के महाराजपुर क्षेत्र की   एक 20 वर्षीय युवती  की फोटो  गांव के एक लड़के के साथ  सोशल मीडिया   मे वायरल  हो गई थी |  समाज की पंचायत ने इसे गंभीर अपराध मान लिया और उसके परिवार का सामाजिक  बहिष्कार कर दिया  था.|  इससे दुखी होकर युवती ने आत्म ह्त्या कर ली थी | कोतवाली पुलिस ने  आत्महत्या के लिये प्रेरित करने के आरोप में राजा वाल्मिक (22), मुन्नी रायकवार (35) और सानू रायकवार(40) के खिलाफ मामला दर्ज  किया था | 
भोज कराओ पापों से मुक्ति पाओ
 टीकमगढ़ जिले के ही  ग्राम खेरा का है जहां के  मनोज लोधी  का पलयन खेरा में एक लोधी समाज की लड़की से प्रेम प्रसंग चलता था |  जिसके चलते वह लड़की गर्भवती हुई थी, तो उसके बच्चे को जमीन में दफन कर दिया गया था,|  समाज ने उनके परिवार का वहिष्कार कर रखा था।समाज में शामिल होने के लिए समाज की  पंचायत कराई थी। पंचों के फैसले के पर लोधी परिवार ने   नवम्बर 2017 में एक भोज समाज का करवाया |  भोज का कार्यक्रम चल रहा था , तभी मेजवान परिवार ने अतिथियों की सुटाई शुरू कर दी | ।  जिसमे एक महिला सहित 6 लोग घायल हो गए | मामला खरगापुर थाना पहुंचा और पुलिस ने आरोपियों पर मामला दर्ज किया था |

बेबस पिता की पिटाई और समाज से बहिष्कार की सजा

टीकमगढ जिले में ही अक्टूबर 2015 में एक गाँव रजक समाज की लड़की को वंशकार समाज का लड़का भगा कर ले गया | इस पर  लड़की के पिता ने समाज की  पंचायत बुलाई थी |    इस सामाजिक पंचयात में  लडकी व लडके  पक्ष को  बुलाया गया ।  पंचायत ने  फैसला सुनाया  कि लडकी अब भूपेश बंशकार की पत्नि बन चुकी है इसलिए  वह उसी के साथ रहेगी। पंचायत के फैसले पर  लडकी के माता पिता और दादा ने पंचायत के फैसले का विरोध किया । विरोध करने पर   पंचों ने   लडकी के पिता को  भरी पंचायत में बुरी तरह से  पीटा ,  पति को बचाने गयी पत्नि को भी पंचो  ने पीटा ।  इसके साथ ही    पंचायत ने लड़की  के इस परिवार को सर्व समाज से भी बहिस्कृत कर  दिया । लडकी पक्ष को  न तो कोई बुलायेगा न कोई उसके यहां जायेगा और ना ही  वह मंदिर व सार्वजनिक कुओं से पानी आदि भरने दिया जायेगा।  फैसले से आहत  महिला ने की  आत्म ह्त्या                   
 टीकमगढ़ जिले के  गांव बजरूआ खिरक में मार्च 2016 में पंचायत के फैसले से आहत एक महिला ने आत्म ह्त्या कर ली थी |  समाज की पंचायत  ने  राजेश की पत्नी सखी पाल पर चरित्र हीन होने का आरोप लगाया था |  पंचो के सामने , सखी ने अपने इकलौते पुत्र रवि के सर पर  हाथ  रख कर  अपनी बेगुनाही की कसम खाई, निर्दोष होने की गुहार लगाती रही थी | पाल समाज की  पंचायत ने उसे  दोषी मानते हुए पांच हजार का अर्थदण्ड और कुण्डेश्वर में स्नान कर कथा करने के  दंड  की सजा सुना दी |  सखी के ससुर आशाराम ने  अर्थदंड की राशि तीन हजार रुपए जमा  कर दिए।  |   इसके बाद सारी पंचायत के लिए उसके घर में खाना बनाया गया। पंचों को जब भोजन  के लिए बुलाया, तो उन्होंने आने से मना कर दिया। झूठे  आरोपों से आहत सखी ने अपने घर के ऊपर के कमरे में जाकर फांसी लगा ली।  जैसे ही यह बात लोगों को पता चली तो पंचों में शामिल धनीराम, पप्पू, भागीरथ, दशरथ, रामप्रसाद, छन्नू और बाबू पाल वहां से गायब हो गए। महिला की आत्महत्या के बाद फिर समाज की पंचायत बुलाई गई। जिसमें मृतका सखी पालपर आरोप लगाने वालों पप्पू पाल, अच्छेलाल, रामप्रसाद, जसरथ, बाली, सरियां, हरीराम, रजनेेश, दिलीप, भागीरथ को पंचायत ने 12 वर्ष के लिए समाज से बहिष्कृत कर दिया।
  दुराचार पीडिता पर ही 20 हजार का  जुर्माना 
 2014 में  छतरपुर जिले की राजनगर जनपद की ग्राम पंचायत बमारी के  हरपुरा गांव में एक नाबालिग के साथ दुराचार की वारदात हुई थी । मामले को निपटाने के लिए आरोपियों ने  गांव में सामाजिक पंचायत बुलाई थी । हद तो तब हो गई जब सामाजिक पंचायत ने दुराचार पीडिता पर ही 20 हजार का  जुर्माना लगा दिया | आरोपियों पर 60 हजार का का जुर्माना लगाया गया |  सामाजिक  पंचायत ने इस ना इंसाफ़ी को बड़े ही तरीके से इस राशि को समाज के विकाश में खर्च करने की बात कही | समाज का विकाश  गांव में समाज के भवन के निर्माण से होगा | समाज पंचायत की बेईमानी से दुखी  पीडि़त परिवार ने इस फरमान को न मानते हुए थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी ।
रेप पीड़िता का गर्भपात कराया पंचायत ने 
 टीकमगढ जिले के स्यावनि गाँव में अगस्त 2013 में  एक मजदूर की  नाबालिक बेटी  के साथ महीनो  गेंगरेप का  खुलासा भी  तब हुआ  जब गर्भपात कराया गया,|  मामले को निपटाने के लिए  गाँव में  पंचायत बैठी |  आरोपियों पर पांच-पांच हजार का जुर्माना लगाया गया  और नाबलिग का  गर्भपात कराने का  आदेश दिया गया  । पंचों ने धमकी दी कि यदि मामला थाने पहुंचा, तो पूरे परिवार का हुक्का पानी बंद करा दिया जाएगा।  | दलित परिवार ने बाद में मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई | रिपोर्ट करते ही आरोपी पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी देने लगे |  हद तो तब हो गई जब  पुलिस  और गाँव वाले  पंचायत  के होने से ही  इनकार  करने लगे  । बाद में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफतार किया  ,जिनमें दो महिलाए भी शामिल थी |   थाना लिधौरा के स्यावनी गांव का एक दलित परिवार दिल्ली में रहकर   मजदूरी करता  था |  उसकी चौदह वर्षीय पुत्री अपने छोटे भाई के साथ गाँव  में ही रहती  थी | उसके घर के  ,सामने रहे रहे  एक कथित डाक्टर और उसके साथी ने अबोध बालिका के  साथ बारी-बारी से  रेप किया था । इस कार्य में डाक्टर  की पत्नि  भी सहयोग करती रही ।  गर्भ ठहर जाने पर  उसका गर्भपात करा दिया गया । गर्भपात होते ही नाबालिग ने इसकी सूचना अपने माता पिता को दी थी |

 टीकमगढ़ जिले  के सिमरा खुर्द गाँव में मई 2012 में  सात साल की मासूम से छेड़छाड़ करने के आरोप में  गांव की पंचायत ने आरोपी को सिर मुंडाकर इलाहाबाद में गंगा स्नान करने और गांव में भागवत कथा कराने का फरमान जारी किया था ।  आरोपी द्वारा मासूम के परिजनों को जान से मारने की धमकी देने के बाद मामला पुलिस तक भी पहुंचा था |  पंचायत के फरमान का पालन करते हुए आरोपी महेंद्र और उसके  परिजन अखिलेश और रामस्वरूप मिश्रा को मुंडन कराना पड़ा। परिवार वालों ने इलाहाबाद जाकर गंगा नदी में स्नान किया औरगांव में भागवत कथा कराई थी |
गौ माता की मौत पर गंगा स्नान
| टीकमगढ़ जिले के एक  गाँव में जुलाई 2017 में एक गाय  की मौत हो गई | मरने वाली गाय को  गाँव के मोहन तिवारी ने खेत में घुसने पर डंडा मारा था | घटना की खबर मिलने पर  ब्राह्मण समाज ने पंचायत की और तिवारी के लिए गंगा नहाने, भोज खिलाने की सजा का फरमान जारी किया गया |  शंकर अहिरवार  ने   अपनी गाय के मौत के  मामले की रिपोर्ट थाने में भी  दर्ज कराई।   गाय की  पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में  पता चला कि उसकी मौत घायल होने से हुई थी। इसके बाद  तिवारी के खिलाफ मध्य प्रदेश गौ-वध प्रतिबंध कानून  के तहत मामला भी  दर्ज किया गया था ।
 छतरपुर के नजदीक एक  गाँव है  धामची  | मई 2010 में खेत में जुताई के समय  लखन लाल यादव के ट्रेक्टर से कुचल कर बछिया की मोंत हो गई थी |  इस पर   गाँव में बेठी पंचायत ने फेसला सुनाया  की जब तक गो हत्या से जुडे कर्म कांड नहीं हो जाते तब तक उनके परिवार का सामजिक बहिष्कार रहेगा \ इस आदेश के तहत  यादव परिवार को गंगा स्नान ,पुराण पूजा , मुंडन  वा गाँव का भोज कराना होगा |  सामजिक बंधन से बंध कर यादव परिवार ने  परम्पराए निभाई  | यादव परिवार  गंगा जी गया   ,  पुराण बेठी , भोज हुआ , तब कहीं जाकर इस परिवार को सामाजिक स्वीकृति मिली | इस सारे क्रिया कर्म में एक लाख से ज्यादा की रकम  खर्च हो गई थी  |

 टीकमगढ़ जिले के मानिकपुरा गांव  में सितम्बर 2013 में   रैकवार समाज के ट्रैक्टर के नीचे आने से गाय की मौत होने पर पंचायत बैठी थी | पंचायत ने रैकवार परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया था | फैसले पर   पूरे कुटुम्ब के 65 पुरूशों और बच्चों ने सर  मुंडवाया इलाहाबाद जाकर गंगा स्नान और समाज के सभी लोगों को भोज कराने के बाद ही  समाज  ने स्वीकार किया था | रैकवार परिवार को दो साल तक बहिष्कार की त्रासदी झेलना पड़ी थी |

भाई भाई का विवाद और १२ वर्ष का वनवास
 छतरपुर जिले में भाई भाई का विवाद पंचायत से ऐसा निपटा कि एक को १२ वर्ष का वनवास मिल गया |  सितम्बर 2016 में ईशानगर थाना के  बंधी कला  गाँव में दो भाइयों के  पारिवारिक विवाद   के चलते  अहिरवार समाज की पंचायत बुलाई गई।  इस  पंचायत में मौजी लाल के ना  आने पर पंचायत ने  मौजी लाल को 12 वर्ष  तक समाज से बहिष्कृत अथवा एक लाख रु के दंड की सजा सुनाई   | साथ ही आदेश दिया कि  जो इसका साथ देगा उसे  भी समाज  दण्डित करेगा ।पंचायत के  फरमान के बाद मौजी और उसके परिवार को  खेत पर बने मकान में अकेले रहना पडा । 

पंचों ने किया महिला को अर्धनग्न
टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ थाना क्षेत्र के  जटेरा गाँव  में तांत्रिक के कहने पर भरी पंचायत में एक महिला को सितम्बर 2013 में अर्धनग्न किया गया। मामला  गांव के भूपेंद्र लोधी के घर की  आधा किलो वजनी चांदी की करधन चोरी का था । चोर की तलाश में वह पुलिस के पास ना जाकर  बटियागढ़ के एक तांत्रिक के पास गया। तांत्रिक ने  एक महिला पर चोरी का शक जता दिया । जिस पर भूपेंद्र ने गाँव की  एक 50 वर्षीय महिला पर शक जाहिर करते हुए गांव में पंचायत बुलाई गई । पंचायत  में महिला को बुलाकर उससे   वह तिल का  निशान बताने को कहा गया जो तांत्रिक ने बताया था । महिला के मना करने पर  पंचायत ने  उसे अर्धनग्न कर निशान देखने की कोशिश की, हालांकि ऐसा कोई निशान नहीं मिला था ।  घटना के  दो सप्ताह बाद  पीडि़ता ने पुत्र के साथ बल्देवगढ़ थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने महिला का अंगूठा लेकर राजीनामा लिख दिया था||

मुस्लिम समाज की पंचायत में भी किया जाता है बहिष्कृत 
 ऐसा नहीं की सामाजिक पंचायतों के बंधन में सिर्फ हिन्दू समाज ही हो , मुस्लिम समाज में भी इस तरह के मामले देखने को मिलते हैं |  अगस्त 2018 में छतरपुर नगर में ही  राइन समाज की एक पंचायत ने  फतवा जारी कर  कुछ हाजियों सहित करीब एक दर्जन से अधिक परिवारों को समाज से बहिष्कृत कर दिया था  ।पीड़ितों ने  कोतवाली थाने में समाज के मुखिया व पंचों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पर शिकायत के बाद भी इन पर एफआइआर दर्ज नहीं की।  समाज के लोगों ने  तत्कालीन एसपी विनीत खन्ना से शिकायत कर बताया था  कि राइन समाज पंचायत के मुखिया बनकर कुछ लोग  किसी को भी समाज से बहिष्कृत कर उनका दाना-पानी बंद करने का फतवा जारी कर देते हैं। समाज में दोबारा से वापस लेने के लिए 1 लाख से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना करते हैं। यह राशि कहां जाती है, इसका कोई पता नहीं है।  शिकायत में बताया गया है कि यह मुखिया पहले समाज के परिवारों को बिरादरी से अलग कर देते हैं। इसके बाद उनके घर होने वाले शादी-विवाह, जन्मोत्सव सहित किसी भी तरह के आयोजनों में समाज के लोगों के शामिल होने पर रोक लगा देते हैं। यदि कोई समाज का व्यक्ति इन लोगों के घर किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाता है तो उन पर लाखों रुपए का दंड लगाया जाता है। नहीं देने पर उसे भी समाज से बेदखल कर दिया जाता ||

                                    दरअसल  सामाजिक   पंचायत का यह प्रचलन भारत के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश ,बिहार ,छत्तिश्गढ़ आदि इलाकों में  वर्षों से देखने सुनने को मिलता  है। समाज शास्त्री  इसके पीछे वजह  बताते हैं कि  समाज में सामाजिक व्यवस्थाओं को बनाये रखने और  असामाजिक कार्य करने वालों को नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता काफी पहले महशूष की गई थी | हजारों वर्ष पहले स्थापित यह परम्परा तभी से चली आ रही है |   सामाजिक पंचायत में समाज के प्रमुख  व्यक्तियों  को पंच बनाया जाता था | उनके सामने जो भी प्रकरण आता था उसका वे समाज की बेहतरी के लिए निर्णय करते थे | आज भी समाज में कई ऐसी जातियां हैं जो अपने मसले निपटाने के लिए कोर्ट और पुलिस के पास नहीं जाते | ।




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