08 अप्रैल, 2020

तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें

बुंदेलखंड की डायरी

तबलीग जमात ने बढाई बुन्देलखण्ड की मुश्किलें  

रवींद्र व्यास

बुंदेलखंड का इलाका  कोरोना की शुरुआत से लेकर  मार्च अंत तक कोरोना से एक तरह पूर्णतः मुक्त रहा |  बुंदेलखंड के  उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सभी जिलों से संदिग्धों की जांच  रिपोर्ट निगेटिव ही आई थी | हाल ही में  तब्लीगी जमात के दो  व्यक्ति  बांदा में कोरोना संक्रमित पाए जाने से  बुंदेलखंड में हड़कंप मच गया |  अमूमन बुंदेलखंड के हर जिले में तब्लीगी जमात से जुड़े लोग रहते हैं |  सरकार और  प्रशासन के सामने तब्लीगी समाज एक दूसरी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है ,जबकि  पहले से ही प्रशासन तंत्र  मजदूरों ,विदेशियों  और बाहर रह रहे लोगों की वापसी की समस्या को लेकर परेशान है |     इन तमाम हालातों से निपटने के लिए प्रशासन तंत्र हर तरह   से जुटा है |


 बांदा के खुटला मोहल्ले की हिरा मस्जिद से 18 जमातियों को पुलिस  ने बाहर निकाल कर उनका मेडिकल चेकअप  कराया |  इनमे से कुछ ऐसे भी थे जो निजामुद्दीन की मरकज में सम्मलित हुए थे | प्रशासन ने 1 6  सेम्पिल जांच के लिए भेजे थे  | बांदा  के मर्दन नगर इलाके में रहने वाले इस  युवक के कोरोना पोज़िटिव पाए जाने के बाद  प्रशासन ने यहां तमाम तरह की पाबंदिया लगाईं हैं |  लोग बताते हैं कि यह युवक  तब्लीगी जमात के मरकज में सम्मलित हुआ था | इसके ठीक बाद यहां का एक और युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया , यह युवक भी  मरकज में सम्मलित हुआ था | प्रशासन  अब इस तलाश में जुट गया है कि ये लोग किस किस के सम्पर्क में आये थे |   चित्रकूट मंडल से कई  लोग मरकज में सम्मलित हुए थे, ऐसे लोगों के सम्पर्क में आये ३२ लोगों को चिन्हित किया गया है | चिन्हित लोगों के सेम्पल जांच के लिए भेजे गए जिनमे बांदा के दो लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए | पुलिस ने  बांदा जिले के हथौरा के जामिया अरबिया मदरसा प्रबंधन के खिलाफ  जमातियों को छिपाने का मुकदमा दर्ज किया है। मदरसा प्रबंधक औरमरकज से लौटे महाराष्ट्र,आंध्रा के कई छात्रोंके खिलाफ जमातियों को छिपाने और इसकी सूचना प्रशासन को न देने का मुकदमा दर्ज कियागया है।हथौरा मदरसे में जिला प्रशासन ने 31 मार्च की शाम सेही  पुलिस का पहरा बैठा दिया है। मदरसे के  600 से अधिक छात्रोंको होम क्वारंटाइन किया गया है। बांदा जिले के  बिसंडा थाने के शिव गांव के चारजमातियों पर भी दिल्ली मरकज से लौटने की जानकारी छिपाने का मुकदमा दर्ज किया गयाहै।

बांदा  जिले की सीमाएं   छतरपुर और  पन्ना  जिले के अलावा महोबा ,हमीरपुर ,चित्रकूट से  लगी हैं | सीमाएं लगी होने के कारण  मध्यप्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले के कलेक्टर ने विशेष सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं |  सीमावर्ती क्षेत्रो से आने जाने वालों पर सख्त पाबंदी लगाईं गई है |  उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में कोरोना पॉजीटिव मिलने  के बाद से  बाहर से आने वाले लोगों को बकायदा स्क्रीनिंग के बाद ही क्वारंटाईन किया जा रहा है। सागर रेंज के आईजी अनिल शर्मा ने भी  छतरपुर और पन्ना  जिले का  भ्रमण कर  व्यवस्थाएं देखीं  थी । छतरपुर जिले के  चंदला, गौरिहार  ब्लॉक की सीमाएं सीधे तौर पर बांदा जिले से मिलती हैं |  इन ब्लॉक के सीमावर्ती गाँवों का  मुख्य  कारोबार और  बाजार भी बांदा से ही होता है | इन हालातों को देखते हुए  इन स्थानों पर  विशेष निगरानी पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही है | 

 पन्ना जिले की  अजयगढ तहसील  बांदा जिले की सीमा से लगी है । यहां  उत्तरप्रदेश  को जोडने वाले सभी रास्तों पर  पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया है।  आम आदमियों की आवाजाही  रोक  दीगयी है।  एसडीएमबी बी पांडेय बताते हैं कि   अजयगढ पन्ना मार्ग को भी पूर्णता बन्द कर दिया गया है। तहसील के कुछ गाँव  जो उत्तरप्रदेशकी सीमा के अंदर  है  चंदौरा, बरोली, खरौनी, नरदहा, रामनई, कटर्रा, मौकज, बीरा, नयागांव,  बीहरसरवरिया, नयापुरवा, कीरतपुरवा का तिराहा, हरनामपुर, खोरा में भी  उत्तरप्रदेश की सीमा से आवाजाही कोबन्द कर दिया गया है। उत्तरप्रदेश कीसीमा से लगे हुए सभी 41 गांव में फिर से सर्वै कराया जा रहा है |

तब्लीगी जमात के  लोगों के झाँसी,महोबा,छतरपुर ,दमोह  और सागर में मिलने के बाद  प्रशासन  बेहद सतर्क है | उसके सामने एक बड़ी चिंता  मध्य प्रदेश के  इंदौर और भोपाल में कोरोना वायरस के तेजी से फैलने को लेकर भी है |  असल में बुंदेलखंड  के सागर ,टीकमगढ़ ,दमोह, छतरपुर ,पन्ना , ललितपुर, झाँसी ,महोबा  और बांदा के  छात्र छात्राये बड़ी संख्या में इंदौर  और भोपाल  में पढ़ाई करते हैं ,कोचिंग  पढ़ने जाते हैं |  हालांकि आवागमन प्रतिबंधित है  इसके बावजूद  भी  सोमवार को एक वाहन में सवार 7  लोगों के इंदौर  से छतरपुर जिले में आने पर  प्रशासन  हलाकान हो गया | सभी को पकड़ कर कोरोंटाइन किया गया |  असल समस्या ये भी है की बाहर से आने वाले अधिकांश लोग अपनी जांच  करवाने  से परहेज करते हैं |

मजबूर हुए मजदूर 



 22 मार्च से जनता का काम रुक गया, 24 मार्च से तालाबंदी शुरू हो गई, सारे काम बंद हो गए  हमारे पास कोई काम नहीं था आगे भी काम मिलने की उम्मीद नहीं थी  इस कारण हमने  अपने पैतृक गांव वापस आना ही उचित समझा |  यह कहानी लगभग  बुंदेलखंड  वापस लौटे  लगभग सभी मजदूरों की है |   इन मजदूरों की मज़बूरी का फायदा  उन  ठेकेदारों ने भी उठाया जो  इन्हे मजदूरी के लिए ले गए थे |  ठेकेदारों ने  इनको मिलने वाली आधी रकम का ही भुगतान किया | कहा गया जब लौट कर आओगे तो  पैसा मिल जाएगा |  मजदूरों के सामने दूसरी समस्या आई  उनके परिवहन की  , जाएँ तो जाएँ कैसे  ?  समस्या बड़ी थी पर   अपने घर आने की जल्दी भी थी  , पैदल ही निकल पड़े  , बीच बीच में मिले  परिवहन के साधनो का भी इस्तेमाल करते रहे |  यहां भी इन मजबूर मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाने से  वाहन मालिक नहीं चूके |  एक बात अच्छी रही कि  जहाँ भी इन्हे पुलिस मिली उसने इन लोगों का भरपूर सहयोग किया , जो भी खाने  पीने  को था  वह उपलब्ध कराया गया |  जिला में पहुँचते ही इनका मेडिकल टेस्ट कराया गया, भोजन की व्यवस्था की गई   और  उनके गाँव तक पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराये गए |  गाँव में भी  मेडिकल जाँच हुई  १४ दिन के कोरन्टाइन में रहने की व्यवस्था की गई | इनकी देख रेख के लिए  , पटवारी, आगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, पंचायत सचिव की ड्यूटी लगाईं गई ।   
                  



  मध्यप्रदेश  और उत्तर प्रदेश में फैले  बुंदेलखंड के १४ जिलों के लोग  बड़ी तादाद में मजदूरी के लिए महानगरों की और पलायन करते हैं |   देश में लाक  डाउन   के बाद  इन १४ जिलों  में  5  से 6  लाख लोगों के वापस आने की उम्मीद जताई जा  रही है |  हालंकि  प्रशासनिक आंकड़े  दो ढाई लाख लोगों की वापसी  ही बता रहे हैं |   मजदूरों की वापसी के बाद  लगभग हर जिले में  स्वयं सेवी संस्थाओं  के माफिया सक्रीय हो गए |  वे दावा  करने लगे कि  मजदूरों की कोई जांच नहीं हो रही  गाँव में वे क्वेरनटाइन नहीं किये जा रहे हैं |

                                              अब एक बात  बड़ी साफ़ है कि  कोरोना से संघर्ष लंबा है ,  साधन सिमित हैं , हालात बेहतर बनाने के लिए हर  हिन्दुस्तानी को आगे आना होगा |

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