बुंदेलखंड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के अधिकांश जिले ग्रीन जोन में हैं फिर भी यहाँ एक अजब सा सन्नाटा छाया है , गालियां सूनी हैं ,बाजार बंद हैं ,कारोबार ठप्प हैं , खेत खलिहाँन सूने पड़े हैं | किसान परेशान हैं उनको अपनी उपज को कम दरों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है | सब्जी किसानो की हालात तो और भी खराब है ,| लोगों की जेबें खाली हैं बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में लोग वस्तु विनमय से अपनी जरुरत की पूर्ति करने को मजबूर हो रहे हैं | बिन अर्थ सब व्यर्थ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है | | हालांकि इन सब हालातो से निपटने के लिए शासन ,प्रशासन , सामजिक सरोकार से जुड़े लोग और जन प्रतिनधि अपने अपने स्तर से प्रयास करने में जुटे हैं | बक्स्वाहा के राजू दुबे बताते हैं कि इस बार हमने टमाटर और शिमला मिर्च लगाईं थी | फसल भी अच्छी हुई थी , लाकडाउन की वजह से टमाटर और शिमला मिर्च नहीं बिक पाई जिसके चलते हमें करीब चार लाख का नुकशान हुआ | वो बताते हैं कि असल में बक्स्वाहा से हमारे टमाटर सागर ,दमोह ,टीकमगढ़ और छतरपुर की मंडियों में आसानी से पहुंच जाते थे जिस कारण अच्छे दाम भी मिल जाते थे | यह कहानी अकेले राजू की नहीं है इस तरह के हालात अनेकों गाँवों में देखने को मिले | कहीं किसानो ने माटी मोल टमाटर बेंचे तो कहीं जानवरो को फसलें खिला दी | यह हालात सिर्फ किसी एक जिले में नहीं बल्कि बुंदेलखंड के हर जिले में देखने को मिल रहे हैं | एक दिन बाद खुलते बाजारों और परिवहन के प्रतिबंधों ने इनकी मुश्किलें बड़ाई हैं | गर्मियों के मौसम में टमाटर,भिंडी ,लौकी ,तोरई टिंडा ,करेला,पालक ,शिमला मिर्च की खेती होती है | जल की पर्याप्ता के कारण इस बार फसलें अच्छी हुई थी | पर लोक डाउन के कारण किसानो के अरमानो पर पानी फिर गया | हर दिन टूटने वाली फसल अगर एक भी दिन आगे पीछे होती है तो इसका असर उस फसल पर देखने को मिलता है | ऐसी दशा में वह बेचने में योग्य नहीं रह पाती है |
असर सिर्फ सब्जियों पर ही देखने को नहीं मिला बल्कि पान और फूलों पर भी देखने को मिला है | बुंदेलखंड के छतरपुर ,पन्ना, दमोह , सागर ,टीकमगढ़ , महोबा ,ललितपुर के कई इलाकों में बड़े भू भाग पर पान की फसलों का उत्पादन होता है | पान की फसल सर्वाधिक नाजुक फसलों में से एक मानी जाती है | पान दुकानों के बंद रहने के कारण पान अपने बरेजे में ही नष्ट हो रहा है \ यही हालात फूलों की फसलों का भी है |
सरकार ने आम लोगों की परेशानी को देखते हुए तीन तीन माह की राशन सामग्री बांटने का आदेश दिया था| संकट के इस दौर मे कई समाज सेवी गरीबों और भूखों को राशन वितरण कर मदद कर रहे है| यहां तक बुंदेलखंड में कई जिलों में वृहन्नलला भी सामग्री बाँट कर पुण्य कमा रहे हैं | वही धवाड समिति की तीन उचित मूल्य की दुकानों में जरुरत मंन्दो के एक माह का राशन हड़पा जा रहा है | सरकार ने तीन माह की राशन सामग्री बांटने का आदेश दिया था , किन्तु इस समिति में मात्र दो माह का ही राशन लोगों को दिए जाने की शिकायत गाँव वालों ने की है छतरपुर जिले के राजनगर तहसील क्षेत्र की |धवाड सोसाइटी की उचित मूल्य की दुकानों पर एक ही परिवार के नाते रिस्तेदार सेल्स मेन हैं | गाँव बालो ने कई बार अधिकारियो से शिकायत की पर इस संकट काल में किसी को सुनने की फुर्सत नहीं हैं | जिस जिले में अधिकारियों की नियत 30 किलो चावल के लिए खराब हो जाए उस जिले में समितियों के कारिंदों की नियत खराब हो जाए तो क्या आश्चर्य | छतरपुर जिले के लवकुशनगर जनपद के भगौरा गाँव में अजब नजारा देखने को मिला था | गाँव की शासकीय राशन वितरण केंद्र से जनपद सीईओ सिकंद्दर खान 30 -40 किलो चावल की बोरी ले गए | ये सब नजारा एक ग्रामीण ने अपने मोबाइल फोन में रिकार्ड कर लिया | खान साहब तो बच्चो के मध्यान्ह भोजन के चावल का हिस्सा ले गए थे | मामले की शिकायत पर छतरपुर कलेक्टर ने जांच करवाई और जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंम्बित कर दिया गया |
गेंहू की खरीद फरोख्त
सरकार ने १५ अप्रेल से गेंहू की खरीद का कार्य शुरू किया है | पहले छह किसानो को एसएमएस भेज कर खरीद केंद्र पर अनाज लेकर आने को कहा गया था बाद में यह संख्या बढ़ाई गई | खरीद बिक्री के इस खेल में प्रशासन और किसान दोनों ही सामने आई चुनौतियों का सामना कर रहें हैं | समितियों और मंडी के लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके पास पर्याप्त श्रमिक नहीं हैं | लॉक डाउन के कारण बिहार से आने वाली श्रमिकों की टीम नहीं आई है | बिहारी श्रमिकों की यह टीम तौलने , पल्लेदारी और बोरियों को सिलने में निपुण होती थी , उनके ना आने के कारण अब स्थानीय स्तर पर श्रमिकों को जुटाया जा रहा है जिनके कार्य की गति थोड़ी धीमी है |
दूसरी तरफ बेबस किसान व्यापारियों को कौड़ियों के दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं || इसके पीछे किसानो की मज़बूरी के साथ ही अर्थतंत्र का वह प्रवाह भी है जिसके चलते किसान को तत्काल पैसे मिलते हैं | जो उनकी तात्कालिक जरूरतों की पूर्ति के लिए आवशयक होते हैं | पिछले दिनों सागर जिले में ऐसे ही एक व्यापारी को पुलिस ने पकड़ा भी था |
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के 14 जिलों में सिर्फ तीन जिलों में ही कोरोना संक्रमित व्यक्ति पाए गए हैं | अधिकाँश जिले ग्रीन जोन में हैं यह बुंदेलखंड के लिए राहत की बात है | पर लोकडाउन के कारण किसानो , कारोबारियों ,रोज कमाने खाने वालों में अर्थाभाव की पीड़ा देखने को मिल रही है |
रवीन्द्र व्यास
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