बुंदेलखंड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
इसे बुंदेलखंड की बदनसीबी ही कहें कि विभाजित बुंदेलखंड में विकाश के लिए अलग अलग मापदंड अपनाये जा रहे हैं | 2020 के फरवरी माह की 29 तारीख उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके के लिए विकाश की नई सौगात लेकर आया | जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्रकूट में 15 हजार करोड़ की लागत वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया | यह एक्सप्रेस वे बुंदेलखंड का वह विकाश पथ होगा जिसके समानांतर औधोगिक डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण होगा | इस औधोगिक विकाश से प्रत्यक्ष तौर पर बुंदेलखंड के चित्रकूट ,बांदा ,महोबा,हमीरपुर ,जालौन और इटावा जिले लाभान्वित होंगे | दूसरी ओर मध्य प्रदेश वाला बुंदेलखंड विकाश की इस धारा से दूर रहेगा | एसा नहीं कि मध्यप्रदेश वाले बुन्देलखण्ड के लोगों ने इसके प्रयास नहीं किये , प्रयास तो किये पर सफलता नहीं मिली ।
29 फरवरी को जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चित्रकूट पहुंचे तो बुंदेलखंड के लोगों का उत्साह देखते ही बनता था , आखिर उन्हें विकाश का नया पथ जो मिलना था | मोदी जी ने भी लोगों को निराश नहीं किया , चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने भाषण की शुरुआत गोस्वामी तुलसी दास के भजन से की | " चित्रकूट के घाट पर भई सन्तन की भीड़ ----- आप सभी को यहां देख कर ऐसी ही अनुभूति इस सेवक को हो रही है | अपने छोटे से वाक्य में उन्होंने जनता जनार्दन को मालिक बता कर खुद को सेवक के रूप में लोगों के सामने पेश किया | चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने इस पवित्र भूमि को भारतीय समाज की तप स्थली बताया जहा प्रभु श्री राम ,लक्ष्मण ,सीता जी ने अपना एक बड़ा समय बिताया , वन में रहकर किस तरह से मर्यादा के अनेक संस्कार गढ़े ,इसकी अनंत कथाये हैं | भारत रत्न नाना जी देशमुख का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा दो दिन पहले ही नाना जी की पुण्य तिथी पर देश में उन्हें याद किया गया | नाना जी ने इसी पुण्य भूमि से भारत के स्वावलम्बन की नीव रखी थी |
बुंदेलखंड के लोगों को मोदी जी का यह अंदाज खूब भाया | बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और डिफेन्स कॉरिडोर को प्रधान मंत्री मोदी ने विकाश का ऐसा पथ बताया जिससे बुंदेलखंड की दशा और दिशा दोनों बदल जायेगी | इस एक्सप्रेस वे से उत्तर प्रदेश में व्यापार कनेक्टिविटी बढ़ेगी , चित्रकूट ,बांदा ,महोबा ,हमीरपुर ,जालौन,औरैया ,इटावा आदि जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा | इसके साथ बनने वाले डिफेन्स कॉरिडोर के लिए बजट में 3700 करोड़ रु का प्रावधान किया गया है | आने वाले समय में बुंदेलखंड मेक इन इण्डिया का एक बडा केन्द्र बनने वाला है ।यहां लगने वाले बडे उद्योगों से बुन्देलखण्ड के ना सिर्फ छोटे उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि यहाँ के किसानों को भी लाभ होगा, लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे ।
बुन्देलखण्ड में 269,070 किमी का यह एक्सप्रेस वे 6लेन विस्तारीकरण योजना के साथ 4 लेन का बनाया जा रहा है ।चित्रकूट के भरतकूप के पास से शुरू होकर यह बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बांदा ,हमीरपुर ,महोबा , जालौन होते हुए इटावा के पास यमुना एक्सप्रेसवे में मिल जाएगा | 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले इस एक्सप्रेस वे में 14 बडे पुल,268 छोटे पुल,18 फ्लाईओवर, 218 अंडरपास, 4रेलवे ओवरब्रिज 4 टोल प्लाजा, और 7 रैम्पप्लाजा का भी निर्माण किया जाएगा । सरकार ने इसके लिए ९५ फीसदी से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण कर लिया है | सरकार ने 21 फरवरी को 2018 में लखनऊ में आयोजित शिखर सम्मलेन में उत्तर प्रदेश में डिफेन्स कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की थी | इसके लिए सरकार ने जिन छह क्लस्टरों की पहचान की थी उनमे से दो क्लस्टर बुंदेलखंड क्षेत्र में होंगे | इसमें एक क्लस्टर झांसी क्षेत्र में और एक चित्रकूट क्षेत्र में विकसित किया जाएगा | क्लस्टरों के विकाश में सरकार ने इस बात का ख़ास ख्याल रखा गया है ,जो भूमि का उपयोग उद्योग के लिए हो वह खेती योग्य ना हो | निश्चित तौर पर सरकार का यह दूर दर्शी कदम माना जा सकता है , ऐसे समय जबकि खेती की भूमि घट रही है और आबादी निर्बाध बढ़ रही है |
एक ओर जहां उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की बेहतरी के लिए सरकार ने यह एक बड़ा प्रयास किया है , वही मध्यप्रदेश वाला भाग विकाश से अछूता रहेगा | 2018 में जब बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और डिफेन्स कॉरिडोर के निर्माण की बात चल रही थी ,उस समय सागर ,और मध्यप्रदेश चैम्बर आफ कॉमर्स के लोगों ने सरकार से मध्य प्रदेश वाले इलाके में भी इसी तरह के उद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण की मांग की थी | इन लोगों ने तब के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजे थे | 2018 में मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार अपने चुनावी मोड़ में थी ,इस लिए शायद उसके पास इसको सुनने की फुर्सत नहीं थी | पिछले एक साल से ज्यादा समय से प्रदेश में कांग्रेस सरकार है | इस सरकार के मुखिया खुद एक बड़े उद्योगपति माने जाते हैं ,पर उन्होंने भी बुंदेलखंड के औद्योगिक विकाश की कोई योजना अब तक नहीं बताई है |
बुंदेलखंड प्राकृतिक सम्पदाओं से संम्पन्न इलाका माना जाता है | खनिज सम्पदा से भरपूर इस इलाके की अधिकांश आबादी कृषि पर आधारित है | प्राकृतिक उतार चढ़ाव के चलते यहां की खेती में कभी लाभ कभी हानि का चक्र चलता रहता है | प्रकृति की मेहरबानी पिछले तीन दशकों से कुछ ऐसी हुई है कि अधिकाँश समय खेती से हानि उठाते उठाते किसान टूट गया , कुछ ने आत्म हत्या का रास्ता अपनाया तो कुछ ने पलायन का | ऐसे समय में इस तरह की योजना लोगों को रोजगार के नए अवसर प्रदान कर सकती है | उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ भी मानते हैं की इन दोनों परियोजनाओं से बुंदेलखंड की तस्वीर जरूर बदलेगी | डिफेन्स कॉरिडोर के बनने से अब बुंदेलखंड का नौजवान पलायन नहीं करेगा |
दरअसल देखा जाए तो बुंदेलखंड रक्षा उत्पादों के निर्माण , उनके प्रशिक्षण के लिहाज से देश का सर्वाधिक सुरक्षित इलाका माना जाता है | दुशमन की सामान्य पहुंच की रेंज से दूर इस इलाके का सर्वेक्षण , और जल उपलब्धता का आंकलन कई वर्ष पहले किया गया था | डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण उसी का एक हिस्सा माना जा रहा है | इसी के चलते झांसी में एक सैन्य हवाई पट्टी पर हवाई अड्डा के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई है | हालांकि मोदी सरकार की इस विकाश योजना पर सपा के अखिलेश यादव सवाल उठा रहे हैं वे कहते हैं सपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में झाँसी से सिदार्थ नगर तक एक्सप्रेस वे बनाने का वायदा किया था | बीजेपी ने इस एक्सप्रेस वे में झांसी को अलग कर दिया है , और इटावा पर मेहरबानी दिखा रही है ,यह वाकई अचरज की बात है | खैर विपक्ष का काम है विरोध करना इस लिए वे अपने धर्म का पालन कर रहे हैं | कुछ अहम् सवाल समाज के लोग जरूर खड़े कर रहे हैं कि क्या वाकई इससे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी ? स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा ?



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