13 मार्च, 2020

नमस्ते ओरछा से जटायु राज बेचैन


बुंदेलखंड की डायरी 

नमस्ते ओरछा  से  जटायु राज बेचैन 

रवीन्द्र व्यास 
 पवित्र नगरी में राम भक्त जटायु राज हुए बेघर 
पवित्र नगरी की पवित्रता भंग करवाई सरकार ने 
परिंदे  और वन्य जीव हुए बेचैन 
ओरछा की स्थापत्य कला से हुई छेड़छाड़ 
राजा राम की नगरी में नमस्ते  ओरछा  का भव्य कार्यक्रम कराकर  सरकार अपनी सफलता पर  अपनी ही पीठ ठोक रही है |    भगवान् श्री राम के भक्त  जटायु राज को इस आयोजन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है उनके घरोंदे (घोंसले) मन्दिरो  और छतरियों की साफ़ सफाई के नाम पर तोड़ दिए गए दिसंबर से मार्च तक का  समय वह समय होता है जब  मादा गिद्ध अंडा देती है ऐसे समय उनके घोंसले तोड़ना  ,दोहरे नुक्सान वाला है हालांकि सरकार और उसके नुमाइंदे कहते हैं कि घोंसलों को कोई  नुक्सान  नहीं पहुंचाया गया ओरछा में गिद्धों  पर नजर रखने वाले कहते हैं कि  घोंसले  तो उजाड़े गए हैं |गिद्ध दुनिया की लुप्त होने वाली प्रजातियों में सम्मिलित हैं ।जिसके चलते भारत सहित विश्व के तमाम देश इनके संरक्षण और संवर्धन में लगे हैं ।

                                                      ६ मार्च को तीन दिवसीय  "नमस्ते ओरछा " का भव्य शुभारम्भ मध्य प्रदेश सरकार की संस्कृति मंत्री विजय लक्ष्मी साधो ने किया आयोजन का उद्घाटन करने मुख्य मंत्री कमलनाथ को आना था ,किन्तु सरकार पर संकट को देख वे नहीं आये सरकार का संकट  फिलहाल टल  गया पर सरकार ने  राम भक्त जटायु  को  जो संकट दिया है उसकी पूर्ति होना शायद संभव नहीं होगी सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ओरछा  अभ्यारण्य और उसके आसपास 1918 _19 में की गई गणना   के अनुसार 85 गिद्ध पाए गए जिनमे ८२ वयस्क और ३ बच्चे थे  | २०१५ _१६ में की गई गणना  में 61 गिद्ध पाए गए थे |  गिद्ध अपने घोंसले  सुरक्षा के लिहाज से इतनी ऊंचाई पर बनाते हैं कि सामान्य तरीके से कोई उन्हें नुक्सान नहीं पहुंचा सके अपने इसी स्वभाव के चलते जटायु राज के वंशजों को राजा राम की नगरी की ऊँची अट्टालिकाएं खूब भाई उन्होंने उनपर अपने २३ से ज्यादा  घोंसले बनाये और बसेरा भी बना लिया |  जटायु राज के इन वंशजों को शायद यह पता नहीं था की यह श्री राम का युग नहीं है यह उन लोगों का युग है जो सनातन धर्म के विनाश में जुटे हैं फिर जटायु राज के वंशजो की गिनती ही कहाँ लगती है 
                                        दरअसल ओरछा में गिद्धों की उपस्थिति पर वन विभाग ने 2010 से नजर रखना शुरू किया था उस समय यहां पर्यटकों का आवागमन  सीमित था < समय के साथ  पर्यटकों का आवागमन बड़ा ,सरकार के आंकड़ों में गिद्धों की संख्या भी बढ गई । जमीनी  वास्तविकता  इससे अलग है नमस्ते ओरछा के आयोजन में गिद्धों के घोंसले हटाने की जब ख़बरें सुर्खियां बनी तो सरकार ने  अपने वन मंत्री उमर सिंघार  को आगे किया और उन्होंने कहा कि यह गौरव की बात है की मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 526  बाघ,1800 तेंदुआ , 8500  गिद्ध और 1800 घड़ियाल हैं ये अलग बात है की उन्होंने ओरछा के गिद्धों के घोंसले उजाड़ने पर कुछ नहीं कहा |शायद  आंकड़े जारी कर यह जताने का जरूर प्रयास किया कि हमारे यहां तो सर्वाधिक गिद्ध हैं कुछ उजड़ जाएँ तो क्या फर्क पड़ता है 
                                                 ओरछा वन अभ्यारण्य में  काफी समय तक गिद्दो के आवास और पर्यावास को देखने समझने वाले सेवा निवृत्त  एसडीओ वन डॉ जे पी रावत बताते हैं कि ओरछा में मूलतः गिद्धों की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं |  राज गिद्ध (टगोंस काल्वस )श्वेत पृष्ट या बंगाली गिद्ध _ गिप्स बैंगालेंसिस  और सफ़ेद गिद्ध _फेरो कुक्केटर इसके अलावा परिस्थितियों के अनुसार कभी कभी प्रवासी गिद्ध भी यहां आते जाते बने रहते हैं मादा  गिद्ध वर्ष में सिर्फ एक बार एक ही अंडा देती है इनका प्रजनन काल भी दिसंबर से मार्च के महीने में ही रहता है गिद्ध भी वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम १९७२ के अनुसार बाघ के साथ वर्ग एक की अत्यन्त दुर्लभ प्रजाति में शामिल किया गया है ओरछा  की पहाड़ियों ,पुरातत्व विभाग द्धारा संरक्षित राज महल ,शीश महल ,चतुर्भुज मंदिर,लक्ष्मी मंदिर कंचन घाट किनारे स्थित समाधियों और भवनों के शीर्ष पर गिद्धों के घोंसले वर्षों से अस्तित्व में थे पूर्व में वन विभाग ने पुरातत्व विभाग से  इन भवनों पर किसी भी तरह के निर्माण  और सफाई ना करने के साथ घोंसलों के साथ किसी भी तरह की छेड छाड़ ना करने का अनुरोध किया था 
              आंकड़ों को देखें आंकड़ों को देखें तो दुनिया में दुनिया में सिर्फ  3 फीसदी ही गिद्ध बचे हैं ।विश्व में गिद्ध की 33 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से  भारत  मे और मध्यप्रदेश में तरह के गिद्ध की प्रजातियां पाई जाती हैं । मध्यप्रदेश के  33 जिलों के 886 स्थान गिद्ध आवास के रूप में पहचाने गये हैं । संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण रिपोर्ट बताती है कि विश्व के गिद्ध की 10 प्रजातियों पर सर्वाधिक संकट है जिसमे भारत की तीन प्रजातियां सम्मिलित हैं ।

ओरछा की मर्यादा नष्ट हुई नमस्ते ओरछा से 
                रामराजा सरकार की  इस पवित्र नगरी में ना सिर्फ गिद्धों के घोंसले उजाड़े गए   बल्कि राम की नगरी की पवित्रता को भी खंडित किया गया | गिद्धों  और पक्षियों के घोंसले उजाड़ने के साथ अनेक तरह के ऐसे जतन किए गए जिसके कारण यहां से गिद्धों का स्थाई पलायन हो जाए |  जिन छतरियों  और मंदिरों और महलों में  गिद्धों का बसेरा था उनको रंग रोगन , साफ सफाई के  नाम पर पहले तो मिटाया गया,  कार्यक्रम के नाम पर  तीखी रोशनी की गई ,  ड्रोन कैमरा का इस्तेमाल कर फोटोग्राफी और विडिओ ग्राफी कराई गई हद तो तब हो गई जब अभ्यारण्य क्षेत्र के समीप ही  ध्वनि विस्तारक यंत्रों का जम कर उपयोग किया गया |  इन हालातो  ने इन बेजुबान पक्षियों को बेचैन कर दियाओरछा की जिस पवित्रता की बात अरसे से की जाती रही है और उसकी पवित्रता बनाए रखने में पूर्व की सरकार हर तरह के जतन करती रही उस पवित्रता को कांग्रेस की सरकार ने खंडित कर दिया | पहले ही दिन राम गाथा से  शुरू हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम तब विवादित हो गया जब आमंत्रित डेलीगेट्स को खुले में ही  मांस और मदिरा परोसी गई|  अंतिम दिन  कल्पवृक्ष के खुले आसमान तले हुए कार्यक्रम में मैं भी डेलीगेट्स को शराब और मांस परोसा गया सरकार के इस तरह के आयोजन को  लेकर लोगों में जमकर आक्रोश देखने को मिल रहा है |


स्थानीय लोग बताते  हैं  कि एक तो  पुरातत्व विभाग ने ओरछा के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की हैयहां आने वाले विदेशी पर्यटक मूल स्वरुप देखने आते हैं पर पुरातत्व विभाग ने इनको रंग कर इनके  मूल स्वरुप को नष्ट किया है विकाश की बात को स्वीकारते हुए वे लोग बताने लगे कि हमें ऐसा विकाश नहीं चाहिए जिससे हमारी सनातन संस्कृति और मर्यादा ही नष्ट हो जाए सरकार के इस अमार्यादित आचरण को किसी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा | जहां एक ओर आम जनमानस दुखी है वही इस इलाके के धर्म के ठेकेदारों का मौन भी लोगों की समझ से बाहर है ।

 राजा राम  की नगरी ओरछा
 ओरछा को बुंदेलखंड और देश दुनिया के लोग  अयोध्या के राजा भगवान राम की नगरी के रूप में जानते हैं। जब रानी गणेश कुवंरी अयोध्या से भगवान् श्री  राम  को लेकर ओरछा आई तो भगवान राम के दिए गए तीन वचनों में से एक के अनुसार जिस एक जगह रानी कुंवरी द्वारा राम भगवान रखे गए वहीं वे विराजमान हो गए और आज तक वहीं प्रतिष्ठित हैं। वही स्थान आज राम राजा मंदिर के नाम से विख्यात है। ओरछा के 52 राज्य पुरातत्वीय संरक्षित स्मारक स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हैं यहां भगवान् श्री राम को राजा के रूप में माना जाता है और एक राजा की ही तरह उनकी मान मर्यादा का ध्यान रखा जाता है 

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