24 मार्च, 2020

kkajuraho m karfu

खजुराहो और राजनगर में 27 मार्च तक कर्फ्यू लागू
    छतरपुर, 24 मार्च 20
जिले के राजनगर एसडीएम  स्वप्निल वानखेड़े ने खजुराहो और राजनगर नगर परिषद की सभी सीमाओं को प्रतिबंधित करते हुए 27 मार्च 2020 की रात्रि 12 बजे तक कर्फ्यू लागू करने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने यह कार्यवाही ग्वालियर में कोरोना का एक व्यक्ति कोविद-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद की  है। यह व्यक्ति खजुराहो एवं राजनगर में घूमकर और छतरपुर के एक होटल में रूककर  वापिस चला गया था। कलेक्टर ने होटल लॉ कैपिटल बंद करने का आदेश किया जारी किया है वही छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने सम्पूर्ण राजस्व सीमा क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से संशोधित आदेश जारी करते हुए आगामी 31 मार्च 2020 तक छतरपुर जिले को लॉक-डाउन घोषित किया है।
 
संक्रमित व्यक्ति द्वारा खजुराहो में सम्पर्क में आए हुए व्यक्तियों के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है |   एसडीएम  वानखेड़े ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने की दृष्टि से दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 को प्रयोग में लाते हुए संपूर्ण खजुराहो एवं राजनगर नगर परिषद की सभी सीमाओं को प्रतिबंधित करते हुए कर्फ्यू का आदेश जारी किया है। 
 कर्फ्यू लागू होने के बाद आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी। कर्फ्यू लागू रहने के दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को अपने घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। राजनगर एवं खजुराहो की सभी सीमाएं सील की गई है। इस अवधि में किसी भी माध्यम सड़क एवं रेल से खजुराहो एवं राजनगर की सीमा में बाहरी लोगों का आगमन प्रतिबंधित किया जाता है। खजुराहो एवं राजनगर में निवासरत नागरिकों को भी खजुराहो एवं राजनगर की सीमा से बाहर जाना तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा क्षेत्र के समस्त शासकीयअर्द्धशासकीय कार्यालय भी बंद रहेंगे। अत्यावश्क सेवा वाले विभाग यथा राजस्वस्वास्थ्यपुलिसविद्युतदूरसंचारनगर परिषद आदि से मुक्त रहेंगेलेकिन मेडीकल दुकानसब्जीकिराना दुकानदूध की दुकानसांची पॉलरपेट्रोल पम्प सहित समस्त व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।
 होटल लॉ कैपिटल बंद करने का आदेश किया जारी
    छतरपुरकलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी शीलेन्द्र सिंह ने ग्वालियर से आए नोवेल कोरोना वायरस से संबंधित व्यक्ति के होटल लॉ कैपिटल छतरपुर में ठहरने की सूचना प्राप्त होने पर 24 मार्च 2020 से अग्रिम आदेश तक पन्ना रोड स्थित उक्त होटल को तत्काल प्रभाव से बंद करने के लिए आदेशित किया है।
 उन्होंने मध्यप्रदेश एपिडेमिक डिसीजेस नियमावली 2020 के तहत संक्रमण फैलने से रोकने के लिए उक्त आदेश जारी किया हैसाथ ही लॉ कैपिटल के संचालक एवं कर्मचारियों को परिवार सहित क्वारंटाइन में शिफ्ट कर उनका परीक्षण किया जा रहा है। 
कलेक्टर ने संशोधित आदेश जारी कर 31 मार्च तक लॉकडाउन घोषित किया
    छतरपुर, 24 मार्च 20
ग्वालियर में कोरोना के मरीज पाये जाने से स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुये पूर्व में कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी समस्त प्रतिबंधात्मक आदेश निरस्त कर दिए हैं | कोरोना वायरस के संक्रमण को छतरपुर जिले में रोकने के लिए भारतीय दण्ड प्रक्रिया 1973 की धारा 144 के तहत जिला दण्डाधिकारी शीलेन्द्र सिंह ने सम्पूर्ण राजस्व सीमा क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से संशोधित आदेश जारी करते हुए आगामी 31 मार्च 2020 तक छतरपुर जिले को लॉक-डाउन घोषित किया है।
 गतिविधियों का संचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा
सभी प्रकार के धार्मिक स्थल पर्यटन एवं तीर्थ स्थल सभी प्रकार के कार्यकम जिन में 20 या 20 से अधिक व्यक्तियों से अधिक की उपस्थिति संभावित हो। समस्त शासकीय एव निजी विद्यालय विश्वविद्यालय सभी प्रकार के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संस्थान कोचिंग क्लासेस। सार्वजनिक पार्क सेवाओं से जुडे वाणिज्यिक प्रकल्यो को छोडकर) होल सेल/थोक मण्डियों के माध्यम से खेरची/रिटेल विकय संबधी कार्य । मैरिज गार्डन ऑडिटोरियम एंव सिनेमा घर/सिनेमा हॉल/मल्टी प्लेस्क फूड जोन/चौपाटी/हॉकर्स/कॉर्नर। नदी तटों एवं तालाबों पर सामूहिक स्नान । जिले के शहरी/ग्रामीण समस्त साप्ताहिक हॉट बाजारकर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थितिजिले की राजस्व सीमाओं से आने वाली बसों का अवागमनसामाजिकसांस्कृतिकराजनीतिक पारिवारिक धार्मिकसाहित्यिक एवं सामूहिक जिमस्विमिंग पूलखेलकूद गतिविधियां स्टेडियमब्यूटीपार्लरमॉल (अत्यावश्यक वह स्थान जहाँ पर 20 से अधिक लोग जमा होते हो वह परिसर मॉलबिग बाजार एवं मेगा मार्ट इत्यादि।
लॉक-डाउन के दौरान यह सेवाएं प्रतिबंध से मुक्त रहेंगी
सर्विसेज/वाईफाई,साइबर सुरक्षा तंत्रआईटी,इन वर्ल्ड सर्विसेजविद्युत पारेषण एवं विद्युत वितरण से संबंधित समस्त सेवाएँ अग्नि शमन सेवाऐं। (24 घन्टे) सभी प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएंदवा की दुकान,मेडिकल स्टोर फॉर्मास्यूटिकल्स. चिकित्सीय उपकरण विक्रेता (अनुविभागीय दण्डाधिकारी इन दुकानो के समय व दिन निर्धारित कर सकेगे) प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एंव सोशल मीडिया से संबंधित सेवाएं समस्त प्रकार के ईधन एल.पी.जी. पेट्रोल डीजल का भण्डारन परिवहन एव विक्री। डाक,कोरियरपार्सल सेवा सार्वजनिक उचित मूल्य की दुकाने पशु आहार का भण्डारन परिवहन एंव विकी तथा पोल्ट्री एव पोल्ट्री फीड होम डिलीवरी करने वाले अथवा खाद्य सामग्री पक कर ले जाने सबंधी सुविधा प्रदान करने वाले होटल रेस्टोरेंट खादय सामग्री आवश्यक वस्तुएँ तथा दवा एव चिकित्सा से सबंधित सामग्रियों का संग्रह करने वाले वेयर हाउस एवं गोदामरबी विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य के उपार्जन के लिए जरूरी समान जैसे-गनी बैगपीपी बैगकोट्सटारपोलिन कवरकीटनाशक एंव भण्डारण की अधोसंरचना निर्मित करने हेतु ली जाने वाली सेवाएं दूध एव डेयरी प्रोडक्टफलसब्जी किराना की दुकाने समय प्रातः 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुलेंगी।
  सोशल मीडिया में अनावश्यक/असत्य/अपुष्ट भ्रामक जानकारी फैलाना दण्डनीय होगा। जिन लोगों को होम क्वारेंटाइन किया गया हैउन के नाम/तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना प्रतिबंधित होगा। अपने क्षेत्राधिकारी में इस आदेश का पालन कराने के लिये अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)/अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) जिम्मेदार होगे। अपने क्षेत्राधिकार में इस आदेश का उलघन होने पर संबंधित थाना प्रभारी समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। आदेश का उल्लंघन भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दण्डनीय होगा।


13 मार्च, 2020

नमस्ते ओरछा से जटायु राज बेचैन


बुंदेलखंड की डायरी 

नमस्ते ओरछा  से  जटायु राज बेचैन 

रवीन्द्र व्यास 
 पवित्र नगरी में राम भक्त जटायु राज हुए बेघर 
पवित्र नगरी की पवित्रता भंग करवाई सरकार ने 
परिंदे  और वन्य जीव हुए बेचैन 
ओरछा की स्थापत्य कला से हुई छेड़छाड़ 
राजा राम की नगरी में नमस्ते  ओरछा  का भव्य कार्यक्रम कराकर  सरकार अपनी सफलता पर  अपनी ही पीठ ठोक रही है |    भगवान् श्री राम के भक्त  जटायु राज को इस आयोजन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है उनके घरोंदे (घोंसले) मन्दिरो  और छतरियों की साफ़ सफाई के नाम पर तोड़ दिए गए दिसंबर से मार्च तक का  समय वह समय होता है जब  मादा गिद्ध अंडा देती है ऐसे समय उनके घोंसले तोड़ना  ,दोहरे नुक्सान वाला है हालांकि सरकार और उसके नुमाइंदे कहते हैं कि घोंसलों को कोई  नुक्सान  नहीं पहुंचाया गया ओरछा में गिद्धों  पर नजर रखने वाले कहते हैं कि  घोंसले  तो उजाड़े गए हैं |गिद्ध दुनिया की लुप्त होने वाली प्रजातियों में सम्मिलित हैं ।जिसके चलते भारत सहित विश्व के तमाम देश इनके संरक्षण और संवर्धन में लगे हैं ।

                                                      ६ मार्च को तीन दिवसीय  "नमस्ते ओरछा " का भव्य शुभारम्भ मध्य प्रदेश सरकार की संस्कृति मंत्री विजय लक्ष्मी साधो ने किया आयोजन का उद्घाटन करने मुख्य मंत्री कमलनाथ को आना था ,किन्तु सरकार पर संकट को देख वे नहीं आये सरकार का संकट  फिलहाल टल  गया पर सरकार ने  राम भक्त जटायु  को  जो संकट दिया है उसकी पूर्ति होना शायद संभव नहीं होगी सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ओरछा  अभ्यारण्य और उसके आसपास 1918 _19 में की गई गणना   के अनुसार 85 गिद्ध पाए गए जिनमे ८२ वयस्क और ३ बच्चे थे  | २०१५ _१६ में की गई गणना  में 61 गिद्ध पाए गए थे |  गिद्ध अपने घोंसले  सुरक्षा के लिहाज से इतनी ऊंचाई पर बनाते हैं कि सामान्य तरीके से कोई उन्हें नुक्सान नहीं पहुंचा सके अपने इसी स्वभाव के चलते जटायु राज के वंशजों को राजा राम की नगरी की ऊँची अट्टालिकाएं खूब भाई उन्होंने उनपर अपने २३ से ज्यादा  घोंसले बनाये और बसेरा भी बना लिया |  जटायु राज के इन वंशजों को शायद यह पता नहीं था की यह श्री राम का युग नहीं है यह उन लोगों का युग है जो सनातन धर्म के विनाश में जुटे हैं फिर जटायु राज के वंशजो की गिनती ही कहाँ लगती है 
                                        दरअसल ओरछा में गिद्धों की उपस्थिति पर वन विभाग ने 2010 से नजर रखना शुरू किया था उस समय यहां पर्यटकों का आवागमन  सीमित था < समय के साथ  पर्यटकों का आवागमन बड़ा ,सरकार के आंकड़ों में गिद्धों की संख्या भी बढ गई । जमीनी  वास्तविकता  इससे अलग है नमस्ते ओरछा के आयोजन में गिद्धों के घोंसले हटाने की जब ख़बरें सुर्खियां बनी तो सरकार ने  अपने वन मंत्री उमर सिंघार  को आगे किया और उन्होंने कहा कि यह गौरव की बात है की मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 526  बाघ,1800 तेंदुआ , 8500  गिद्ध और 1800 घड़ियाल हैं ये अलग बात है की उन्होंने ओरछा के गिद्धों के घोंसले उजाड़ने पर कुछ नहीं कहा |शायद  आंकड़े जारी कर यह जताने का जरूर प्रयास किया कि हमारे यहां तो सर्वाधिक गिद्ध हैं कुछ उजड़ जाएँ तो क्या फर्क पड़ता है 
                                                 ओरछा वन अभ्यारण्य में  काफी समय तक गिद्दो के आवास और पर्यावास को देखने समझने वाले सेवा निवृत्त  एसडीओ वन डॉ जे पी रावत बताते हैं कि ओरछा में मूलतः गिद्धों की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं |  राज गिद्ध (टगोंस काल्वस )श्वेत पृष्ट या बंगाली गिद्ध _ गिप्स बैंगालेंसिस  और सफ़ेद गिद्ध _फेरो कुक्केटर इसके अलावा परिस्थितियों के अनुसार कभी कभी प्रवासी गिद्ध भी यहां आते जाते बने रहते हैं मादा  गिद्ध वर्ष में सिर्फ एक बार एक ही अंडा देती है इनका प्रजनन काल भी दिसंबर से मार्च के महीने में ही रहता है गिद्ध भी वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम १९७२ के अनुसार बाघ के साथ वर्ग एक की अत्यन्त दुर्लभ प्रजाति में शामिल किया गया है ओरछा  की पहाड़ियों ,पुरातत्व विभाग द्धारा संरक्षित राज महल ,शीश महल ,चतुर्भुज मंदिर,लक्ष्मी मंदिर कंचन घाट किनारे स्थित समाधियों और भवनों के शीर्ष पर गिद्धों के घोंसले वर्षों से अस्तित्व में थे पूर्व में वन विभाग ने पुरातत्व विभाग से  इन भवनों पर किसी भी तरह के निर्माण  और सफाई ना करने के साथ घोंसलों के साथ किसी भी तरह की छेड छाड़ ना करने का अनुरोध किया था 
              आंकड़ों को देखें आंकड़ों को देखें तो दुनिया में दुनिया में सिर्फ  3 फीसदी ही गिद्ध बचे हैं ।विश्व में गिद्ध की 33 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से  भारत  मे और मध्यप्रदेश में तरह के गिद्ध की प्रजातियां पाई जाती हैं । मध्यप्रदेश के  33 जिलों के 886 स्थान गिद्ध आवास के रूप में पहचाने गये हैं । संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण रिपोर्ट बताती है कि विश्व के गिद्ध की 10 प्रजातियों पर सर्वाधिक संकट है जिसमे भारत की तीन प्रजातियां सम्मिलित हैं ।

ओरछा की मर्यादा नष्ट हुई नमस्ते ओरछा से 
                रामराजा सरकार की  इस पवित्र नगरी में ना सिर्फ गिद्धों के घोंसले उजाड़े गए   बल्कि राम की नगरी की पवित्रता को भी खंडित किया गया | गिद्धों  और पक्षियों के घोंसले उजाड़ने के साथ अनेक तरह के ऐसे जतन किए गए जिसके कारण यहां से गिद्धों का स्थाई पलायन हो जाए |  जिन छतरियों  और मंदिरों और महलों में  गिद्धों का बसेरा था उनको रंग रोगन , साफ सफाई के  नाम पर पहले तो मिटाया गया,  कार्यक्रम के नाम पर  तीखी रोशनी की गई ,  ड्रोन कैमरा का इस्तेमाल कर फोटोग्राफी और विडिओ ग्राफी कराई गई हद तो तब हो गई जब अभ्यारण्य क्षेत्र के समीप ही  ध्वनि विस्तारक यंत्रों का जम कर उपयोग किया गया |  इन हालातो  ने इन बेजुबान पक्षियों को बेचैन कर दियाओरछा की जिस पवित्रता की बात अरसे से की जाती रही है और उसकी पवित्रता बनाए रखने में पूर्व की सरकार हर तरह के जतन करती रही उस पवित्रता को कांग्रेस की सरकार ने खंडित कर दिया | पहले ही दिन राम गाथा से  शुरू हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम तब विवादित हो गया जब आमंत्रित डेलीगेट्स को खुले में ही  मांस और मदिरा परोसी गई|  अंतिम दिन  कल्पवृक्ष के खुले आसमान तले हुए कार्यक्रम में मैं भी डेलीगेट्स को शराब और मांस परोसा गया सरकार के इस तरह के आयोजन को  लेकर लोगों में जमकर आक्रोश देखने को मिल रहा है |


स्थानीय लोग बताते  हैं  कि एक तो  पुरातत्व विभाग ने ओरछा के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की हैयहां आने वाले विदेशी पर्यटक मूल स्वरुप देखने आते हैं पर पुरातत्व विभाग ने इनको रंग कर इनके  मूल स्वरुप को नष्ट किया है विकाश की बात को स्वीकारते हुए वे लोग बताने लगे कि हमें ऐसा विकाश नहीं चाहिए जिससे हमारी सनातन संस्कृति और मर्यादा ही नष्ट हो जाए सरकार के इस अमार्यादित आचरण को किसी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा | जहां एक ओर आम जनमानस दुखी है वही इस इलाके के धर्म के ठेकेदारों का मौन भी लोगों की समझ से बाहर है ।

 राजा राम  की नगरी ओरछा
 ओरछा को बुंदेलखंड और देश दुनिया के लोग  अयोध्या के राजा भगवान राम की नगरी के रूप में जानते हैं। जब रानी गणेश कुवंरी अयोध्या से भगवान् श्री  राम  को लेकर ओरछा आई तो भगवान राम के दिए गए तीन वचनों में से एक के अनुसार जिस एक जगह रानी कुंवरी द्वारा राम भगवान रखे गए वहीं वे विराजमान हो गए और आज तक वहीं प्रतिष्ठित हैं। वही स्थान आज राम राजा मंदिर के नाम से विख्यात है। ओरछा के 52 राज्य पुरातत्वीय संरक्षित स्मारक स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हैं यहां भगवान् श्री राम को राजा के रूप में माना जाता है और एक राजा की ही तरह उनकी मान मर्यादा का ध्यान रखा जाता है 

03 मार्च, 2020

विकास पथ पर बुन्देलखण्ड

बुंदेलखंड की डायरी   
रवीन्द्र व्यास 
इसे बुंदेलखंड की बदनसीबी  ही कहें कि  विभाजित बुंदेलखंड में विकाश के लिए अलग अलग मापदंड अपनाये जा रहे हैं |  2020 के फरवरी माह की 29 तारीख उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके के लिए विकाश की नई सौगात लेकर आया जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्रकूट में 15 हजार करोड़ की लागत वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का शिलान्यास किया यह एक्सप्रेस वे बुंदेलखंड का वह विकाश पथ होगा जिसके  समानांतर  औधोगिक डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण होगा |  इस औधोगिक विकाश से प्रत्यक्ष तौर पर बुंदेलखंड के चित्रकूट ,बांदा ,महोबा,हमीरपुर ,जालौन और इटावा जिले लाभान्वित होंगे दूसरी ओर  मध्य प्रदेश वाला बुंदेलखंड  विकाश की इस  धारा से दूर रहेगा |  एसा नहीं कि मध्यप्रदेश वाले बुन्देलखण्ड के लोगों ने इसके प्रयास नहीं किये प्रयास तो किये पर सफलता नहीं मिली ।                                       
   

  29  फरवरी को जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चित्रकूट पहुंचे तो बुंदेलखंड के लोगों का उत्साह देखते ही बनता था आखिर उन्हें विकाश का नया पथ जो मिलना था |  मोदी जी ने भी लोगों को निराश नहीं किया चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने भाषण की शुरुआत गोस्वामी तुलसी दास के  भजन से की | "  चित्रकूट के घाट पर भई सन्तन की भीड़ ----- आप सभी को यहां देख कर ऐसी ही अनुभूति इस सेवक को हो रही है |  अपने छोटे से वाक्य में  उन्होंने  जनता जनार्दन को मालिक बता कर खुद को सेवक के रूप में लोगों के सामने पेश किया चित्रकूट की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने  इस पवित्र भूमि को भारतीय समाज की तप स्थली  बताया जहा प्रभु  श्री राम ,लक्ष्मण ,सीता जी ने अपना एक बड़ा समय बिताया वन में रहकर किस तरह से मर्यादा के अनेक संस्कार गढ़े ,इसकी अनंत कथाये हैं भारत रत्न नाना जी देशमुख का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा दो दिन पहले ही नाना जी की पुण्य तिथी पर देश में उन्हें याद किया गया नाना जी ने इसी पुण्य भूमि से भारत के स्वावलम्बन की नीव रखी थी 

बुंदेलखंड के लोगों को  मोदी जी का यह अंदाज खूब भाया | बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और डिफेन्स कॉरिडोर को  प्रधान मंत्री मोदी ने विकाश का ऐसा पथ बताया जिससे बुंदेलखंड की दशा और दिशा दोनों बदल जायेगी |   इस  एक्सप्रेस वे से उत्तर प्रदेश में व्यापार कनेक्टिविटी बढ़ेगी चित्रकूट ,बांदा ,महोबा ,हमीरपुर ,जालौन,औरैया ,इटावा आदि जिलों के  लोगों को लाभ मिलेगा इसके साथ बनने वाले डिफेन्स कॉरिडोर  के लिए बजट में 3700 करोड़ रु का प्रावधान किया गया है |  आने वाले समय में बुंदेलखंड मेक इन इण्डिया का एक बडा केन्द्र बनने वाला है ।यहां लगने वाले बडे उद्योगों से बुन्देलखण्ड के ना सिर्फ छोटे उद्योगों का विस्तार होगाबल्कि यहाँ के किसानों को भी लाभ होगालोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे । 
बुन्देलखण्ड में 269,070 किमी का यह एक्सप्रेस वे 6लेन विस्तारीकरण योजना के साथ 4 लेन का बनाया जा रहा है ।चित्रकूट के भरतकूप के  पास से शुरू होकर  यह  बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बांदा ,हमीरपुर ,महोबा जालौन होते हुए इटावा के पास यमुना एक्सप्रेसवे में मिल जाएगा |  15 हजार  करोड़ रुपये की लागत वाले इस एक्सप्रेस वे में 14 बडे पुल,268 छोटे पुल,18 फ्लाईओवर, 218 अंडरपास, 4रेलवे ओवरब्रिज 4 टोल प्लाजाऔर 7 रैम्पप्लाजा का भी निर्माण किया जाएगा । सरकार ने इसके लिए ९५ फीसदी से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण कर लिया है सरकार ने 21 फरवरी को  2018 में लखनऊ में आयोजित शिखर सम्मलेन में उत्तर प्रदेश में डिफेन्स कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की थी इसके लिए  सरकार ने जिन छह  क्लस्टरों की पहचान की थी उनमे से दो  क्लस्टर बुंदेलखंड क्षेत्र में होंगे इसमें एक क्लस्टर झांसी क्षेत्र में और एक चित्रकूट क्षेत्र  में विकसित किया जाएगा |  क्लस्टरों के विकाश में सरकार ने इस बात का ख़ास ख्याल रखा गया है ,जो भूमि का उपयोग उद्योग के लिए हो वह खेती योग्य ना हो निश्चित तौर पर सरकार का यह दूर दर्शी कदम माना जा सकता है ऐसे समय जबकि खेती की भूमि घट रही है और आबादी निर्बाध बढ़ रही है |                                                                 
                                   

  एक ओर जहां उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की बेहतरी के  लिए  सरकार ने यह एक बड़ा प्रयास किया है वही मध्यप्रदेश वाला भाग विकाश से अछूता रहेगा | 2018 में जब बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और  डिफेन्स कॉरिडोर के निर्माण की बात चल रही थी ,उस समय सागर ,और मध्यप्रदेश चैम्बर आफ कॉमर्स के लोगों ने सरकार से मध्य प्रदेश वाले इलाके में भी इसी तरह के उद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण की मांग की थी इन लोगों ने तब के मुख्य मंत्री  शिवराज सिंह चौहान प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी  को भी पत्र भेजे थे | 2018 में मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार अपने चुनावी मोड़ में थी ,इस लिए शायद उसके पास इसको सुनने की फुर्सत नहीं थी |  पिछले  एक साल से ज्यादा समय से प्रदेश में  कांग्रेस सरकार है इस सरकार के मुखिया खुद एक बड़े उद्योगपति माने जाते हैं ,पर  उन्होंने भी  बुंदेलखंड के औद्योगिक  विकाश की  कोई योजना अब तक नहीं बताई है |     
                                                    बुंदेलखंड  प्राकृतिक  सम्पदाओं से संम्पन्न इलाका माना जाता है |  खनिज सम्पदा से भरपूर इस इलाके  की अधिकांश आबादी कृषि पर आधारित है प्राकृतिक  उतार चढ़ाव के चलते यहां  की खेती में कभी लाभ कभी हानि का चक्र चलता रहता है प्रकृति की  मेहरबानी पिछले तीन दशकों से कुछ  ऐसी हुई है कि  अधिकाँश समय  खेती से हानि उठाते उठाते  किसान  टूट गया कुछ ने आत्म हत्या का रास्ता अपनाया तो कुछ ने पलायन का ऐसे समय में इस तरह की योजना  लोगों को  रोजगार के नए अवसर प्रदान कर सकती है उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ  भी मानते हैं की इन दोनों परियोजनाओं से बुंदेलखंड की तस्वीर जरूर बदलेगी |  डिफेन्स कॉरिडोर के बनने से अब बुंदेलखंड का नौजवान पलायन नहीं करेगा |                                                                                                       
    दरअसल देखा जाए तो  बुंदेलखंड  रक्षा उत्पादों के निर्माण उनके प्रशिक्षण  के लिहाज से  देश का सर्वाधिक  सुरक्षित इलाका  माना जाता है |  दुशमन की सामान्य पहुंच की रेंज से दूर इस इलाके का सर्वेक्षण और जल उपलब्धता का आंकलन  कई वर्ष पहले किया गया था डिफेन्स कॉरिडोर का निर्माण उसी का एक हिस्सा माना जा रहा है इसी के चलते झांसी में  एक सैन्य हवाई पट्टी पर हवाई अड्डा के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई है |  हालांकि मोदी सरकार की इस विकाश योजना पर सपा के अखिलेश यादव सवाल उठा रहे हैं वे कहते हैं सपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में झाँसी से सिदार्थ नगर तक एक्सप्रेस वे बनाने का वायदा किया था |  बीजेपी ने इस  एक्सप्रेस वे में झांसी को अलग कर दिया है , और इटावा पर मेहरबानी दिखा रही है ,यह वाकई अचरज की बात है |  खैर विपक्ष का काम है विरोध करना इस लिए वे अपने धर्म का पालन कर रहे हैं | कुछ अहम् सवाल समाज के लोग जरूर खड़े कर रहे हैं कि क्या  वाकई इससे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी ? स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा ? 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...