मरने के बाद मेरा शरीर शासन को दे दें ,मेरा एक एक अंग बेच कर कर्जा चुका लें
31 दिसंबर, 2020
Farmar _Soside_मेरे अंग बेच कर कर्ज चुका ले सरकार
28 दिसंबर, 2020
तेंदुए का शिकार
सतना/MP/ 28 /12/20
जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के जंगल में तेंदुआ का शव मिला l आशंका जताई जा रही है कि तेंदुए का शिकार किया गया है,l देर रात सूचना मिलने पर वन अधिकारी मौके पर पहुंचे ,और तेंदुए की लाश को कब्जे में लेकर जाँच शुरू की
राम नगर के गौहानी के जंगल में तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में जंगल सर्चिंग मे बीट गार्ड ने देखा l तेंदुए के शव की सूचना मिलते ही वन विभाग के डीएफओ और मुकुंदपुर वाइट टाइगर रिजर्व की टीम भी मोके पर पहुंची l बताया जा रहा है कि तेंदुए का शव 4 दिन पुराना है, उम्र लगभग 4 वर्ष है, l
कुछ दिन पूर्व ही सफेद टाइगर सफारी मे एक सफेद बाघ का शव मिला था l
27 दिसंबर, 2020
निर्यात होने लगा बुंदेलखंड का गेंहू
बुंदेलखंड की डायरी
बुंदेलखंड के सागर जिले के खुरई का गेंहू पहले से ही काफी विख्यात रहा है ,खुरई के गेंहू की मांग देश के अनेक हिस्सों में काफी व्यापक है | अब बुंदेलखंड के ही झाँसी ,ललितपुर , महोबा, चित्रकूट, ,बांदा ,हमीरपुर ,जालौन , छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया जैसे जिलों के गेहूं की मांग देश ही नहीं विदेशों तक में होने लगी है। बुंदेलखंड का गेहूं बांग्लादेश के लोगों को ऐसा भाया कि गेहूं की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। बीते पांच माह में बुंदेलखंड के गेंहू की 20 मालगाड़ी बांग्लादेश भेजी गई है। इन मालगाड़ियों में गेहूं दतिया, ललितपुर, मुरैना स्टेशन से लोड किया गया। बुंदेलखंड के गेंहू से लदी ये मालगाड़ियां बांग्लादेश की बेगमपुर व दर्शना रेलवे साइट पर अनलोड की जाती हैं । रेलवे के आधिकारिक लोग बताते हैं की प्रत्येक मालगाड़ी पर रेलवे को 55 लाख का मुनाफ़ा होता है | बुंदेलखंडी गेंहू की जावक पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा होने से रेलवे के मुनाफ़ा में भी बढ़ोतरी हुई है | गेंहू के साथ खली और अन्य बुंदेलखंड के खाद्य पदार्थ भी बांग्लादेश भेजे जा रहे हैं |
प्रकृति के भरोषे खेती
बुंदेलखंड देश का वह इलाका है जिसकी अधिकाँश भूमि पथरीली है | भू संरचनाओं की बात करें तो जमीं से 100 फिट नीचे ग्रेनाइट का स्ट्रेटा पाया जाता है ,जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि अगर भू जल की उपलब्धता है तो सिर्फ 100 फिट तक ही है इसके नीचे चट्टानों में पानी की आशा ना के बराबर है | यह स्थिति बुंदेलखंड के अधिकाँश क्षेत्रों में मानी जाती है | पथरीली भूमि के कारण यहां सिचाई के लिए पानी की जरुरत कहीं ज्यादा है | सैकड़ों वर्ष पहले बुंदेलखंड की इस बुनियादी समस्या को समझ लिया गया था , और बुंदेलखंड के अधिकाँश इलाकों में बड़ी संख्या में सिचाई के लिए तालाबों और नहरों का निर्माण किया गया था | इतना ही नहीं तालाबों के निर्माण के साथ ही तालाबों के मध्य में एक कुँए का भी निर्माण कराया जाता था ,ताकि किसी भी प्रकार के अकाल के हालात में जल की उपलब्धता बनी रहे | समय के साथ आधुनिकता का खुमार शासकों पर हावी हुआ और तालाब नष्ट होते चले गए | आज बुंदेलखंड इलाके में तमाम तरह के बाँध होने के बावजूद किसान पानी के लिए परेशान है ,| बुंदेलखंड का अधिकाँश किसान छोटी जोत का है जो ना तो ट्यूब वेळ लगवा सकता है और ना कुआ खुदवा सकता है | ऐसे किसान पडोसी खेत वाले से पानी की हिस्सेदारी तय करता है और अपनी उपज का बड़ा हिस्सा पानी के एवज में पडोसी को देने को मजबूर होता है | पिछले दिनों छतरपुर जिले के बक्स्वाहा ब्लॉक सुनवाहा गाँव के किसान नाथू राम विश्वकर्मा ने प्रधान मंत्री मोदी जी को एक पत्र लिखा कि मेरे पास एक एकड़ की कृषि भूमि है | साल भर की एक फसल की कमाई बा मुश्किल ११ हजार रु छह माह में होती है | आप बताइये के ये दुगनी कैसे होगी | पत्र में उसने वे तमाम तरह के खर्चे भी लिखे जो खेती में होते हैं , और आय में फसल के वेस्टेज और फसल से होने वाली आय को भी लिखा |
दरअसल हालात से मजबूर बुंदेलखंड का किसान आज भी प्रकृति के भरोसे ही है | इस बार की खरीफ फसल वर्षा की अनियमितता के कारण चौपट हुई थी | रवि फसल अब तक के हालात उनके ठीक हैं जिनके पास सिचाई के साधन हैं , जिनके पास सिचाई के साधनो का अभाव है वे मायूस है वहीँ बिजली की अनियमित आपूर्ति भी किसानो के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी कर रही हैं | बुंदेलखंड के कई इलाकों में इसको लेकर प्रदर्शन भी हो चुके हैं | ऐसे इलाके से अगर कृषि पैदावार का निर्यात होने लगे तो एक अच्छी खबर ही मानी जा सकती है , जरुरत इस बात की है कि निर्यात होने वाली पैदावार को बढ़ाने की दिशा में किसानों को प्रोत्साहित किया जाए |
रेतीले राजस्थान में जायेगी बुंदेलखंड की रेत
25 दिसंबर को बांदा से राजस्थान के भरतपुर के लिए एक मालगाड़ी भरकर केन की रेत भेजी गई | केन की यह रेत निर्माण कार्यों के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है , यही कारण है कि केन नदी के यह रेत जो बाहरी इलाकों में खजुराहो सेंड के नाम से जानी जाती है नेपाल बार्डर तक डम्परों के माध्यमों से अब तक पहुँचती थी | रेल से रेत भेजने का पहले भी कई बार प्रयास हुआ है , एक बार सिंहपुर स्टेशन से भेजी जाने वाली रेत को प्रशासन ने अवैध मान कर जप्त कर लिया था |
ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट से एश (राख) रूपनगर पंजाब, गाजियाबाद, मैहर व सतना भेजी जाने लगी है। बुंदेलखंड के कई ऐसे उत्पाद हैं जो रेलवे की कमाई का एक बड़ा साधन बन गए हैं | रेलवे के सूत्र बताते हैं कि बुंदेलखंड मिनिरल्स और खाद्य वस्तुओ के परिवहन से झाँसी रेलवे मंडल को 60 से 95 करोड़ रु की सालान आय होती है | परिवहन व्यवस्था के लिए 138 लोग रेलवे में पंजीकृत हैं |
दो लाख वृक्ष विकाश की भेंट चढ़े
बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ,बांदा ,हमीरपुर ,महोबा ,जालौन ,ओरैया ,और इटावा जिले के लगभग दो लाख वृक्षों को काटा गया | सरकार कह रही है की इनकी एवज में दो लाख 70 हजार नए वृक्ष लगवाए जाएंगे | इटावा से चित्रकूट जिले तक बन रहे 296 किलोमीटर लम्बे इस एक्सप्रेस वे के निर्माण पर सरकार 14 हजार 849 करोड़ रु व्यय कर रही है | इसी तरह झाँसी खजुराहो एक्सप्रेस वे के निर्माण में भी हजारों वृक्ष काटे गए | मजे की बात ये है की सरकार कहती है की काटे गए वृक्षों की भरपाई के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर दो लाख सत्तर हजार नए वृक्ष सड़क के दोनों और लगाए जाएंगे |20 नवंबर, 2020
बुंदेलखंड का मोनिया नृत्य , मौन व्रत धारण कर लोक नृत्य में लीन होते नर्तक रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड में ऐसी कई परम्परा और लोक साहित्य है जो यहाँ की अपनी एक अलग पहचान बनाता है ।पर काल के गर्त में धीरे- धीरे ये परम्पराएं समाप्त होती जा रहीं हें ।अच्छी बात ये भी है कि इन लोक परम्पराओं को बचाने और जीवन्त बनाये रखने के लिए कई लोग और संगठन कार्य भी कर रहे हैं | ऐसी ही एक परम्परा है दिवारी गीत और मौनिया नृत्य । चरवाही संस्कृति के प्रतीक , मौनिया नृत्य के नर्तक मौन धारण कर यह नृत्य करते हैं | ये काल की गति है की जिस गोवंश के लिए यह नृत्य होता है उस गोवंश से अब लोगों का नाता टूटता जा रहा है |
क्या है मौनिया नृत्य
07 नवंबर, 2020
पर्यटकों के लिए होम स्टे योजना अब गाँव में भी
खजुराहो//दर्शना महिला कल्याण समिति छतरपुर द्वारा ग्रामीण पर्यटक होम स्टे योजना के लिए कार्य किया जा रहा है l खजुराहो के नजदीक के गाँव धमना ,बसाटा,नारायणपुरा में यह कार्य शुरू किया गया है l
प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर दिनेश शुक्ला ने बताया कि हमारी संस्था गांवों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का कार्य कर रही हैं । सरकार की भी मंशा है कि शहरी जिंदगी और दौड़-भाग से दूर सैलानी इन गांवों में शांति के साथ कुछ समय गुजारे। ये गांव विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का खास केंद्र बन सकते हैं। यहां पर्यटकों को ठेठ देसी बुंदेली अंदाज में ही घूमने-फिरने से लेकर खाने-पीने तक की सुविधा मिल सकेगी।
इस योजना के लिए खासकर खजूराहो के आसपास के ग्रामो का चयन किया है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल खजुराहो विदेशी सैलानियों का बड़ा केंद्र है। यहां विलेज क्राफ्ट की भी संभावना हैं।
गाँव में पर्यटकों को जहां बुंदेली व्यंजन के साथ बुंदेली संस्क्रति की झलक मिलेगी वहीँ गांवों में बैलगाड़ी, ऊंट-घोड़े की सवारी से लेकर वहां के लोकगीतों और लोककलाओं से पर्यटकों का मनोरंजन किया जाएगा।
--- खजुराहो आई जर्मनी की महिला पर्यटक एलिस ऐ जीवा ( भी अपने देश मे होंम स्टे पर ही कार्य करती हैं) होंम स्टे का विजिट कियाl उन्होंने कहा कि
। इस योजना के तहत गांवों में ऐसी पारंपरिक हवेलियां, पुराने किले या मकान चुने जाएं जो पर्यटकों के रहने के लिए उपयुक्त हो। इसमें कुछ मकान ऐसे भी होंगे जहां मकान मालिक स्वंय भी अपने परिवार के साथ रहता हो और एक हिस्से में पर्यटकों को ठहरा सके। इससे गांवों में मकान मालिकों की आय भी होगी और संस्कृति का आदान प्रदान भी हो सकेगा। ग्रामीण होंम।स्टे में पर्यटन की अपार संभावनाएं है मुझे अगर वर्किंग बीजा मिलेगा तो में आप सभी महिलाओं को ट्रेनिग निःशुल्क देकर ,स्वाबलंबी बनाउंगी
22 सितंबर, 2020
पाकिस्तान में प्रतिपक्ष के पीछे किसकी सियासत
राजेश बादल
पड़ोसी पाकिस्तान की सियासत बदले अंदाज़ में है।प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ऐसे विपक्षी तेवरों का सामना करना पड़ रहा है,जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।रविवार को तमाम विपक्षी दलों के एक मंच पर आने से यह स्थिति बनी है। इसमें दो धुर विरोधी पार्टियाँ पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग भी एक साथ आ गई हैं।इन दलों ने ऑनलाइन ऑल पार्टी कांफ्रेंस की और इमरान सरकार के ख़िलाफ़ निर्णायक संघर्ष छेड़ने का ऐलान कर दिया।इस कांफ्रेंस को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने भी संबोधित किया। इन दिनों वे लंदन में इलाज़ करा रहे हैं। कांफ्रेंस में उनके भाषण पर हुक़ूमत को सख़्त एतराज़ था। इसलिए मीडिया पर उसे दिखाने या प्रकाशित करने पर पाबंदी लगा दी गई थी।फिर भी विदेशी पत्रकारों और सोशल मीडिया के अन्य अवतारों के ज़रिए लोगों तक ख़बरें पहुँच ही गईं।अब समूचे प्रतिपक्ष ने एक लोकतांत्रिक मोर्चा बना कर मुल्क़ में बड़ा आंदोलन छेड़ने का फ़ैसला लिया है। यह मोर्चा पाकिस्तान के चारों राज्यों में गाँव -गाँव रैलियाँ निकालेगा ,सभाएँ करेगा और नए साल की शुरुआत पर जनवरी में राजधानी इस्लामाबाद में महा रैली करेगा।इस मोर्चे ने छब्बीस सूत्री एक कार्यक्रम बनाया है। इस कार्यक्रम के सहारे विपक्ष आगे बढ़ेगा।
पाकिस्तान के इतिहास में इस तरह की प्रतिपक्षी एकता पहले कभी नज़र नहीं आई। पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने इस कांफ्रेंस के लिए पहल की थी। शुक्रवार को उन्होंने टेलिफ़ोन पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ से अनुरोध किया था कि वे इस आयोजन में शिरक़त करें और मार्गदर्शन दें । पहला भाषण पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी का था। उन्होंने पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली पर ज़ोर दिया। ज़रदारी ने कहा कि इमरान सरकार जिस तरह से सत्ता में आई है,वह वैध नहीं है । फ़ौज के समर्थन से इमरान की पार्टी तहरीक़ ए इंसाफ़ ने चुनावों में धाँधली की है। ज़रदारी ने फ़ौज पर इशारों ही इशारों में आक्रमण किए। उनकी पार्टी इमरान ख़ान को कठपुतली ही मानती है। असल केंद्र बिंदु तो पाकिस्तान की सेना ही थी। ज़रदारी के बाद नवाज़ शरीफ़ बोले। उनके सुर बेहद तीख़े थे। ज़रदारी की तुलना में नवाज़ ने फ़ौज पर खुलकर प्रहार किए। उन्होंने हालाँकि इमरान सरकार को कोसते हुए कश्मीर का मुद्दा उछाला और चीन के राष्ट्रपति शी ज़िन पिंग की तारीफ़ की। ग़ौरतलब है कि जब इमरान विपक्ष में थे तो शी ज़िन पिंग की पाकिस्तान यात्रा के ख़िलाफ़ धरने पर बैठ गए थे और चीनी राष्ट्रपति को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी थी। तब नवाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री थे। अपने संबोधन में नवाज़ शरीफ़ इसका ज़िक्र करना नहीं भूले ।यह भी याद रखना ज़रूरी है कि कारगिल जंग के बाद अपने बयानों से नवाज़ शरीफ़ की छबि भारत के प्रति सहानुभूति रखने वाले राजनेता की बन गई थी।इस कारण उन्हें बाद में ग़द्दार तक कहा गया। इसके बाद वे सँभले और अपनी छबि चीन के संग अच्छे रिश्तों वाले राजनेता की बनाई।
हालिया घटनाक्रम के चलते चीन ने पड़ोसी देशों पर भारत के ख़िलाफ़ खुलकर सामने आने का दबाव बनाया था। नेपाल तो इस दबाव में आ गया। श्रीलंका ने बता दिया कि उसकी पहली प्राथमिकता भारत ही रहेगा और बांग्लादेश ने भी चीन का बहुत साथ नहीं दिया। पाकिस्तान ने दबाव में भारत को घेरने की कोशिश तो की लेकिन वह कश्मीर से आगे नहीं बढ़ पाया। चीन पाकिस्तानी सेना से और आक्रामक होने की अपेक्षा कर रहा था। लेकिन पाक सेना का मनोविज्ञान 1971 के बाद हिन्दुस्तान से पंगा नहीं लेने का है। वह गुरिल्ला तरीक़े से तो लड़ सकती है ,लेकिन खुले युद्ध में उसके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। चीन पाक फ़ौज के संकोच से ख़ुश नहीं है। वह एकदम सीधा साथ चाहता है। बीते दिनों चीन - पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की धीमी रफ़्तार पर चीन ने इमरान सरकार से ग़ुस्से का इज़हार किया था। नाराजगी दूर करने के लिए इमरान सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा के साथ तीन बार चीन जा चुके हैं। विदेश मंत्री महमूद क़ुरैशी भी चीन से बेआबरू होकर लौट चुके हैं।उनसे तो शी ज़िन पिंग ने मिलने से भी इनकार कर दिया था। इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुँचने में कोई उलझन नहीं होनी चाहिए कि भारत की आक्रामक घेराबंदी के लिए चीन पाकिस्तान से खुलकर साथ देने की आस लगाए बैठा है।वह अपनी सेना को जंग में शायद नहीं झोंकना चाहे। अलबत्ता पाकिस्तानी सेना के बहाने से भारत को परेशान करने उसे सहूलियत है। अब वह पाकिस्तान में ऐसी सरकार चाहता है ,जो उसके इशारों पर नाचे।क्या ज़रदारी और नवाज़ शरीफ की जोड़ी उसकी ख़्वाहिश पूरी कर सकती है।भारत के साथ सीधी जंग तो वहाँ की कोई भी सरकार पसंद नहीं करेगी। बहुत संभव है कि ऑल पार्टी कांफ्रेंस बीझिंग में लिखी गई पटकथा का एक अध्याय हो। लेकिन यह तय है कि अगर इसके पीछे चीन का हाथ है तो उसे नाक़ामी हाथ लगेगी। फिर भी हिन्दुस्तान को इस नज़रिए से पाकिस्तान पर ध्यान देना होगा। भारत के लिए पाकिस्तान में चीन के इशारे पर नाचने वाली कठपुतली सरकार की तुलना में दिमाग़ी तौर पर लंगड़ाती हुक़ूमत अधिक अनुकूल होगी।
Political_ उमा श्री और शिवराज की जुगल बंदी
रवीन्द्र व्यास
बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती बुंदेलखंड से ताल्लुख रखती हैं | अपने बेबाक विचारो के लिए मशहूर उमा भारती एक दशक से ज्यादा समय के बाद फिर से मध्यप्रदेश की सियासत में सक्रीय हो रही हैं | इस बार उन्हें साथ मिल रहा है शिवराज सिंह चौहान का | ये वही चौहान हैं जो अपने सियासी लक्ष्य को पाने के लिए चूकते नहीं हैं | इसी के चलते उन्होंने उमा को मध्यप्रदेश के आसपास फटकने नहीं दिया था | अब वही चौहान उमा जी को साथ लेकर चुनावी सभाएं कर रहे हैं उनका गुण गान कर रहे हैं | कहते हैं कि राजनीति में हर बात के अपने एक अलग मायने होते हैं |उमा और शिव की इस जुगल बंदी के क्या मायने हैं यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो ही जाएगा
15 सितम्बर को इंजीनियर्स डे के दिन उमा श्री और शिवराज जी एक अलग ही राजनैतिक इंजीनयरी में व्यस्त थे | इसका नजारा लोगों को छतरपुर जिले के बड़ामलहरा विधान सभा क्षेत्र के लिधौरा गाँव में देखने को मिला | मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री ने यहां होने वाले उप चुनाव को लेकर चुनावी सभा में अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का बखान किया , यह जतलाने का जतन किया कि जनता का उनसे बड़ा शुभ चिंतक और कोई नहीं है | विरोधी दल पर भी हमला करना चाहिए इसलिए उन्होंने कांग्रेस के कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को जनता का सबसे बड़ा दुश्मन बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी|ये सब तो सियासी संग्राम के शब्द वाण थे जो चलते ही रहते हैं | इन सबसे अलग उमा और शिव के शब्दों से एकाकार होने के नव राजनैतिक दर्शन से लोग जरूर आश्चर्य चकित हो गए |
सभा में उमा भारती ने शिवराज सिंह चौहान के पुराने रिश्तों का स्मरण करते हुए कहा कि 2003 में कार्यकर्ताओं के बल पर हमने मध्य प्रदेश में सरकार बनाई ,बाद में शिवराज सिंह चौहान मुख्य मंत्री बने | शिवराज सिंह चौहान ने जितनी अच्छी सरकार चलाई उतनी अच्छी में भी नहीं चला सकती थी |1980 के लोक सभा चुनाव में शिवराज जी द्वारा उनके चुनाव प्रचार का भी उन्होंने स्मरण कर यह जताने का प्रयास किया कि शिवराज से समबन्ध आज के नहीं बल्कि चार दशक पुराने हैं | सभा में उन्होंने ज्योतरादित्य सिंधिया को विजया राजे का एक तरह से पर्याय बताया |
शिवराज भी उमा जी के महिमा मंडन में कोई चूक नहीं की | उन्होंने उमा जी को देश की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने वाली बताते हुए कहा कि हमारी माता जी निधन तो बचपन में ही हो गया था , किन्तु उमा दीदी से हमें मात्र वत स्नेह मिला | दीदी ने ही मध्यप्रदेश से बंटाढार की सरकार को उखाड़ फेंका था | उनके पंचज अभियान पर 15 वर्ष तक मौन रहने वाले शिवराज जी कहने लगे कि सम्बल योजना उनके पंचज अभियान पर ही आधारित है | वे यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा आत्म निर्भर भारत के लिए आत्म निर्भर मध्य प्रदेश बनाना है उसका ड्राफ्ट आप (दीदी)
फाइनल करेंगी | बुंदेलखंड में उद्योग का जाल फेलायेंगे
|
दोनों दिग्गज नेताओं की इन बातों को सुन बड़ामलहरा के लोगो का
आश्चर्यचकित होना स्वाभाविक भी था | उन्हें आज भी याद है कि 2006 के उपचुनाव में
ठीक मतदान के दिन उमा भारती को सेरोरा गाँव में घेर लिया गया था | उनके सुरक्षा
गार्डों ने किसी तरह से उनकी जान बचाई थी | उस समय भी मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री
शिवराज सिंह चौहान ही थे | उमा भारती ने 2003 में इसी विधान सभा क्षेत्र से
चुनाव जीत कर मुख्य मंत्री बनी थी ,| लोधी और यादव
बाहुल्य इस इलाके में उमा भारती 31698 मतों से जीती थी
|उनके मुख्य मंत्री बनने और हटने फिर राम रोटी यात्रा निकालने
और अपनी अलग जनशक्ति पार्टी बनाने, फिर वापस बीजेपी में
लौटने की उमा भारती की कहानी काम दिलचस्प नहीं है | इन सब हालातों का गवाह भी
बड़ामलहरा क्षेत्र रहा है |
मध्यप्रदेश की 27
सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कई सीटें लोधी बाहुल्य हैं |
भिंड और अशोकनगर जिलों के अलावा छतरपुर जिले की बड़ामलहरा विधान सभा सीट
पर भी लोधी मतदाताओं का प्रभाव अच्छा खासा है | ऊपरी तौर पर तो यही
लगता है कि इन चुनावी सभाओं में अपनी विरादरी के मतदाताओं को लुभाने के लिए
शिवराज सिंह चौहान ने उमा भारती का साथ लिया है | सियासत के जानकार कहते हैं
कि कहानी सिर्फ इतनी नहीं है इसके पीछे भी कोई बड़ी सियासी कथा लिखी जा रही
है | दरअसल सियासत में जब लोगों के व्यवहार में इस तरह के परिवर्तन देखने को मिलने
लगते हैं तो अनेकों तरह के सवाल उठने लगते हैं |
बदलते चाल चरित्र और चेहरे को देख लोग उन तमाम चीजों की तलाश में जुट जाते
हैं जो इनकी वजह बनते हैं | बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती की उन तमाम
बातों का सियासी जानकार विश्लेषण करने में जुट गए हैं | अब कहा जाने लगा कि
उमा जी का लोधी वर्ग के विधायकों पर अच्छी खासी पकड़ है , इसी के तहत
उन्होंने कांग्रेस विधायक प्रदुम्न लोधी का विधायक पद से इस्तीफा दिलाकर बीजेपी
की ना सिर्फ सदस्यता दिलाई बल्कि नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष
बनवाकर केबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिलवाया | इसके पहले उन्होंने मंत्री
मंडल में पिछड़े वर्ग की उपेक्षा पर नाराजगी भी जताई थी | राजनैतिक
तौर पर देखा जाए तो उमा जी ने यह सन्देश पार्टी और सरकार को दिया है कि
मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग पर उनकी पकड़ कमजोर नहीं हुई है | दूसरा इस बड़े वोट
बैंक के बहाने वे फिर से मध्य प्रदेश की राजनीति में वापस आना चाहती हैं |
पार्टी के आंतरिक सूत्रों की माने तो उमा जी मध्यप्रदेश की ऐसी नेता हैं जिन्हे आर एस एस द्वारा भी सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है | विष्णु दत्त शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के समय भी उमा जी की सहमति ली गई थी जब कि इस मसले पर शिवराज के सुझाव को अनदेखा किया गया था | संगठन में उमा जी की पकड़ बनने के बाद उनके कई समर्थकों को संगठन में अहम् पद मिले | मध्यप्रदेश की राजनीति में उमा जी को फिर से सक्रीय करने के लिए पार्टी का एक बड़ा वर्ग लगा हुआ है | यही कारण है कि उमा भारती के फिर से बड़ामलहरा चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं | कहा तो यह भी जा रहा है कि एन वक्त पर उमा जी को बड़ा मलहरा से चुनावी रण में उतार सकती हैं | इन सब हालातों से वाकिफ शिवराज ने उमा दीदी से सम्बन्ध बेहतर रखने में ही भलाई समझी |
राजनीति
के इस संग्राम में सच और झूठ भी चलता ही रहता है | अब शिवराज जी को ही देख लें वे
कहते हैं कि आत्म
निर्भर भारत के लिए आत्म निर्भर मध्य प्रदेश बनाना है उसका ड्राफ्ट आप (दीदी)
फाइनल करेंगी | बुंदेलखंड में उद्योग का जाल फेलायेंगे
| जबकि 11 अगस्त 2020 को मुख्यमंत्री श्री चौहान
ने 4 दिवसीय वैबिनार के समापन सत्र को संबेधित करते हुए कहा
था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत को साकार करने के लिए आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। 4 दिवसीय वैबिनार में महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों को शामिल कर रोडमैप को अंतिम रूप देने के लिए प्रदेश के मंत्रियों के समूह गठित किए जा रहे हैं। मंत्री समूह अपना ड्राफ्ट 25 अगस्त तक प्रस्तुत कर देंगे। इस ड्राफ्ट पर नीति आयोग के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श उपरांत 31 अगस्त तक आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप को अंतिम रूप दे दिया जाएगा तथा एक सितम्बर से इसे आगामी 3 वर्ष के लक्ष्य के साथ प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
दोनों ही स्थितियों में कोई एक जगह तो झूठ बोला जा रहा है |
इन तमाम सियासी हालातों में उमा जी को आर आर एस एस और प्रदेश अध्यक्ष का भरपूर साथ मिल रहा है | ऐसे
समय में वे एक बार फिर से विधायक बन कर मध्यप्रदेश की राजनीति में सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकती हैं | जिसकी
सम्पूर्ण रूप
रेखा तैयार बताई जा रही है | अब
देखना ये होगा की उमा का अभियान सफल हो पाता है अथवा शिवराज का दांव सफल
होता है |
विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड
बुंदेलखंड की डायरी विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड रवीन्द्र व्यास दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए 2025 में कई...
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बुंदेलखंड की डायरी रवीन्द्र व्यास बुन्देलखण्ड से प्रकृति कुछ इस तरह से नाराज हैं कि कभी अवर्षा तो कभी अति वर्...
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सियासी शब्द संग्राम बुंदेलखंड की डायरी रवीन्द्र व्यास बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में प्रधान ...






