16 जुलाई, 2018

Congres_

बुंदेलखंड कीडायरी 

सत्ता के सपने में खोई कांग्रेस 

रवीन्द्र व्यास 




सत्ता के दिवा स्वप्न में डूबी कांग्रेस को शायद अब यह लगने लगा है , की प्रदेश और बुंदेलखंड की हताश जनता की यह मज़बूरी हो गई है की वह कांग्रेस को सत्ता की बागडोर सौंपेगी | अपने इस अहंकार में चूर कांग्रेसी समन्वय के प्रयासों को धता बताने में जुटे हैं | जिन लोगों को मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की रीति नीतियों के खिलाफ हमला बोलना चाहिए वह अपनों को ही निपटाने में जुटे हैं | बुंदेलखंड में एक तरह से बीजेपी का यह अनुमान सही साबित हो रहा है की  गुटों में विभक्त कांग्रेस कभी एक नहीं हो पाएगी | बीजेपी के इस अनुमान पर मुहर  अजय सिंह और ज्योतरादित्य के दौरों से लग गई है |

  
                                    11 जुलाई को  खजुराहो  में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान के मुखिया ज्योतरादित्य सिंधिया ने सागर संभाग के तीन जिलों की बैठक ली | इस बैठक में बुंदलेखंड के टीकमगढ़ ,छतरपुर और पन्ना जिले के  वे लोग शामिल हुए थे जिन्हे पार्टी के प्रचार -प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी | पार्टी सूत्रों का कहना है की इस बैठक का दाइत्व राजनगर के कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह उर्फ़ नाती राजा को सौंपा गया था | इस बैठक में  राजनीति से संन्यास ले चुके सत्यव्रत चतुर्वेदी ,ज्योतरादित्य के बुलावे पर उनसे मिलने खजुराहो तो पहुंचे पर  वे बैठक की शुरुआत में ही  उठ कर बाहर चले गए | बताते हैं की बैठक की शुरुआत में जैसे ही ज्योतरादित्य ने यह कहा की सभी लोगों का परिचय हो जाए , तभी सत्यव्रत उठे उन्होंने कहा की पहले में अपनी बात  रखना चाहता हूँ ,|  उन्होंने कहा कि वैसे तो में सक्रीय राजनीति से संन्यास ले चुका हूँ और पार्टी में किसी तरह का पद ना लेने की बात कही है  , किन्तु पार्टी के लिए काम करूंगा  दिग्विजय सिंह के साथ  बुंदेलखंड में समन्वय का कार्य करने की जिम्मेदारी  सौंपी गई |     उन्होंने  प्रदेश पदाधिकारियों के मनमाने निर्णय पर असंतोष जताते हुए कहा की क्या इस तरह से बीजेपी से मुकाबला कर हम जीत पाएंगे | इतना कह कर वे बैठक छोड़ कर चले आये , उन्हें ज्योतरादित्य ने रोकने का प्रयास भी किया पर वे नहीं रुके |  

                                                     
     सत्यव्रत चतुर्वेदी की बैठक में कही गई ये बाते पार्टी के लिए कई बड़े सवाल खड़े करती हैं ? जिनके जबाब पार्टी के प्रदेश के और देश के नेताओं को तलाशने होंगे | पार्टी में एक जुटता और समन्वय के लिए  उन्होंने अपने धुर विरोधी माने जाने वाले  दिग्विजय सिंह के साथ बुंदेलखंड के सागर संभाग के सभी जिलों का दौरा भी किया |  दिग्विजय का यह समन्वय दौरा कुछ समय तक तो प्रभावी रहा किन्तु  जैसे ही इन इलाकों में अजय सिंह ने दस्तक दी  और उन्होंने अपने कार्यक्रमों में  गुट विशेष के लोगों को प्रमुखता दी उससे हालात  सुधरने की जगह बिगड़े ज्यादा |  ज्योतरादित्य  के खजुराहो के कार्यक्रम से पार्टी के लोगों को उम्मीद थी कुछ बेहतर होगा | पर इसकी कमान जिन लोगों को सौंपी गई थी वे  ही  हालात बदत्तर कर गए | उनके कार्यक्रम में प्रेस वा  समाज के अलग अलग तबके के विचार शील लोगो से मिलने की बात थी , पर   समाज के प्रबुद्ध लोगों को बुलाने की  जरुरत  आयोजकों ने नहीं समझी |  
                     देखा जाए तो बुंदेलखंड  में कांग्रेस अपने  जमीनी अभियान में बीजेपी से कोसों दूर चल रही है | जिस समय पार्टी के बड़े  नेता जिलों में यह बैठक ले रहे होते हैं की हमें बूथ ,पंचायत और मंडल स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करना है , उसके महीनो पहले बीजेपी का बूथ लेवल का संगठन खड़ा हो चुका होता है |  कांग्रेस पार्टी के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी सम्हालने वाले लोग  उन मुद्दों पर  लगभग मौन हैं  जिन  अव्यवस्थाओ से बुंदेलखंड की जनता को हर रोज रूबरू होना पड़ता है | मसला चाहे  बिजली और उसके बिलों का हो , कानून और व्यवस्था का हो , प्रशासनिक नकारेपन  का हो , पानी का हो किसानो की समस्या हो ,संविदा कर्मचारी हों ,  मेडिकल कालेज , एनटीपीसी ,विश्वविद्यालय , तालाबों  के विनाश का हो , अथवा स्कूली शिक्षा से लेकर कालेज तक की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का हो अथवा बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या हो , मनरेगा में काम ना मिलने के कारण पलायन की बात हो इन तमाम मुद्दों पर कांग्रेस के प्रचारकों का ध्यान नहीं हैं | ध्यान है तो सिर्फ इस बात पर  कैसे उन्हें अथवा उनके परिवार अथवा उनके ख़ास को टिकिट मिल जाए |

                                                     
                                                       दूसरी तरफ बीजेपी  अपने लाव लश्कर के साथ चुनावी रण में सक्रीय है | 10 जुलाई को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह छतरपुर आये थे | उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर यह साफ़ संकेत दे दिए की पार्टी की टिकिट  उसे ही मिलेगी जिसमे चुनाव जीतने  की क्षमता नजर आएगी | दरअसल बीजेपी नेता भी चुनाव पूर्व हुए सर्वे को लेकर सकते में हैं , और  समय से पहले मिले संकेतों को वे समझने और सुलझाने के जतन में जुटे हैं |  इसी क्रम में पार्टी ऐसे तमाम लोगों का फीडबैक ले रही है जो  पार्टी  के आज के या भविष्य के लिए पार्टी के बेहतर चेहरे  हो सकते हैं | बीजेपी जहां संगठन स्तर पर गाँव गाँव में अपनी मजबूत पकड़ बनाये हुए हैं ,| वही  आर एस एस ने भी सामाजिक तानेबाने को एक सूत्र में पिरोने का अभियान  बुंदेलखंड के ग्रामीण स्तर पर शुरू कर दिया है | अब शिवराज की जन आशीर्वाद यात्रा के नाम पर बीजेपी ने लोगों को  जोड़ने का अभियान शुरू किया है | वे यह भी बताने से नहीं चूक रहे हैं की शिवराज सरकार ने जनता के लिए जितना किया है उसकी तुलना में अन्य सरकारों ने जनता के लिए दस फीसदी भी काम नहीं किया है | 

                                                       बरहाल जो भी हो पर चुनाव पूर्व के सर्वे ने  चुनाव  बिशात  जल्द बिछा दी है | और इस राजनैतिक बिशात में बुंदेलखंड के मुद्दों पर आम आदमी पार्टी को छोड़ कर  कोई राजनैतिक दल  चर्चा नहीं कर रहा है  | कांग्रेस जहां चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से आत्ममुग्ध नजर आ रही है वहीँ बीजेपी इसे एक चुनौती मान कर चुनाव जितने के अभियान में जुटी है | 

08 जुलाई, 2018

Election_चुनाव देख बुंदेलखंड पर मेहरबान होती सरकार

बुंदेलखंड की डायरी
 चुनाव देख  बुंदेलखंड पर मेहरबान होती सरकार 
 रवीन्द्र व्यास

बड़ी देर कर दी  हुजूर आते आते _ मध्य प्रदेश  में इन दिनों सरका  और राजनैतिक दल चुनावी मोड  में हैं,|  प्रदेश के चुनावी सर्वे में यह बात साफ़  हो चुकी है की इस बार अब तक बीजेपी  और कांग्रेसके मत प्रतिशत में 12 फीसदी का अंतर है | खासकर बुंदेलखंड जैसे इलाके में जहां  की 2विधान सभा सीटों में से वर्तमान में बीजेपी के 20  और कांग्रेस के 6  विधायक है | ऐसे में बीजेपी और उसकी प्रदेश सरकार  बुन्देलखंडयों को पटाने  में जुटे हैं |बीजेपी के सामने अपनी २० विधान सभा सीटों को बचाने की चुनौती खड़ी है | इस चुनौती से बचने के लिए  चुनावी वर्ष में मेहरबानियों  की  वारिश हो रही है , |  दूसरी तरफ   बीजेपी औरकांग्रेस सियासी समीकरण बनाने के लिए जातीयता का   समीकरण बनाने में  और रूठो को मनाने में  भी जुटे हैं ,|


पिछले एक हफ्ते में प्रदेश सरकार के मुखिया ने बुंदेलखंड के दो दौरे किये , इन दौरों के दौरान उन्होंने आश्वासन , शिलान्यास , उद्घाटन  और  घोषणाओं की बारिश करने में कोई कोताही नहीं बरती |  जुलाई को सागर जिले के खुरई में  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान लगभग 4 हजार करोड़ लागत की बीना नदी संयुक्त सिंचाई परियोजना   का ऑनलाइन -शिलान्यास किया |  दावा किया गया कि  परियोजना पूर्ण होने पर खुरईबीना एवं सुरखी विधानसभा क्षेत्र के  4033 गाँव की 90 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई  होगी 21मेगावाट जल-विद्युत का उत्पादन भी किया जायेगा  इस परियोजना के अन्तर्गत बीना नदी पर मड़िया और चकरपुर में बाँध बनाये जायेंगे। इस परियोजना से अंचल के 331 ग्रामों की पेयजल समस्या का निराकरण होगा। यह परियोजना बुंदेलखंड अंचल में त्रि-फसलीयव्यवस्था को कारगर करने में सहायक सिद्ध होगी।  परियोजना के निर्माण से 1324 परिवार प्रभावित होंगेजिनके पुनर्वास के लिये ग्राम बेरखेड़ी में 48 हेक्टेयर जमीन आवंटित कर दी गई है।
शिवराज ने दावा किया कि  बुन्देलखण्ड में बण्डाबाणसुजारापवई सिंचाई परियाजनाओं पर काम जारी है। केन-बेतवा लिंक परियोजना पर उत्तरप्रदेश से चर्चा चल रही है। चुनाव के पहले  क्षेत्र में प्रस्तावित अन्य सिंचाई परियोजनाओं का भी जल्द ही भूमि-पूजन कियाजायेगा।
 चुनाव देख अब सरकार को विकाश पर्व की याद आने लगी है | 7 जुलाई को  सागर  के बमोरा  में विकाश  पर्व के नाम पर शिवराज सिंह ने  सागर में विकास प्राधिकरण और कर्रापुर को नगर पंचायत बनाने की घोषणा की। इस मौके पर  14 हजार करोड़ रूपये से अधिकलागत के नगरीय विकास के कार्यों का -शिलान्यास और -लोकार्पण भी किया ।इस मौके को सरकार ने कुछ इस तरह बताने का जतन किया जैसे सारा प्रदेश विकाश से सराबोर हो गया हो | इसीलिए सरकार ने  प्रदेश के सभी 378 नगरीय निकायों में विकास पर्व मनवायाताकि लोगों को लगे प्रदेश में विकास की गंगा प्रवाहित हो रही है   ये  अलग बात है कि  स्वर्णिम मध्य प्रदेश का  नारा  जब प्रदेश वाशियों को आकर्षित ना कर सका तो उसे धीरे से  दरकिनार कर दिया गया  था | 

 निवाड़ी के  जिला बनने से खफा होते लोग 

लगभग पांच साल पहले  ऐसा ही एक चुनाव का दौर था , बीजेपी के सामने एक चुनौती थी कांग्रेस की अजेय निवाड़ी विधान सभा सीट को जीतने की | प्रदेश के घोषणा वीर शिवराज सिंह चौहान ने इस सीट को जीतने के लिए एक सियासी शस्त्र चलाया कि  अगर यहां सेबीजेपी जीती तो  निवाड़ी को जिला बना दिया जाएगा | उनकी इस घोषणा का असर यह जरूर हुआ कि निवाड़ी विधान सभा से पहली बार बीजेपी प्रत्यासी २७ हजार से ज्यादा मतों से जीता |   साढ़े चार  साल तक मुख्य मंत्री जी और उनकी पार्टी को निवाड़ी को जिला बनानेकी जरुरत महसूस नहीं हुई , क्योंकि ना तो यह व्यवहारिक था और ना ही प्रशासनिक लिहाज से उचित था  | अब जब सर्वे और तमाम तरह के राजनैतिक इनपुट में बीजेपी को बुंदेलखंड खिसकता हुआ नजर  रहा है तो सरकार ने प्रदेश का 52 वा जिला निवाड़ी को बनानेकी अधिसूचना जारी कर दी | दो माह का समय दावे और आपातियों के लिए दिया गया है | इसमें तीन तहसीलों को जोड़ा जा रहा है , जिसमे निवाड़ी ,ओरछा और पृथ्वीपुर तहसील को संम्मलित किया जा रहा है |
 
बीजेपी सरकार के निर्णय का अब टीकमगढ़ जिले के लोग खुल कर विरोध करने लगे हैं | छात्र संघ ने  जहां हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है | वही रविवार को टीकमगढ़ में लोगों ने बैठक कर निर्णय लिया है की सरकार के निवाड़ी को जिला बनाने के निर्णय पर ना सिर्फवृहद जन आंदोलन शुरू किया जायगा बल्कि हाई कोर्ट में सरकार के निर्णय पर रोक लगाने के लिए याचिका भी दायर की जायेगी | इसके पीछे इस अभियान के संयोजक पुष्पेंद्र सिंह तर्क देते हैं की ओरछा के राम राजा सरकार के बगैर टीकमगढ़ जिले का अस्तित्व किसीहाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता |  वे बताते हैं टीकमगढ़ नगर की बसाहट भी केवल राम राजा सरकार के कारण हुई थी | जब टीकमगढ़ के राज महल में राम राजा सरकार बिराज(बैठगए , तब ओरछा रियासत के राजा वीर सिंह ने अपनी नई रियासत टीकामगढ़ मेंबनाई थी | अब बीजेपी सरकार अपने राजनैतिक फायदे  के लिए रामराजा सरकार को टीकमगढ़ जिले के लोगों से अलग कर रही है |   
ख्याली घोषणाएं
 सियासी लाभ के लिए घोषणाओं का झुन झुना एक दो बार तो ठीक चलता है पर बार बार यह यह नहीं चलता | असल में बुन्देलखण्ड  लोगों को  इसका अच्छा खासा अनुभव हो गया है  ||  घोषणा वीर ने जितने भी कालेज बुंदेलखंड में खोले उनमे पढ़ाने वाले कोई नहीं हैं , अतिथि विद्वानों के सहारे  काम चल रहा है | इसी तरह सागर  में खुले मेडिकल कालेज को भी लोग नकली मेडिकल कालेज ही मानते हैं | छतरपुर में खोले गए छत्रसाल विश्विद्यालय  दो कमरों में चल रहा है , विश्वविद्यालय खुलने से नोजवानो  को यह भी आशा थी की इसमें कुछ तो बुंदेलखंड के लोगों को काम मिलेगा पर सारी नौकरियों बाजार में बिक गई | विश्व विद्यालय में सहयोग करने वाले तो साफ़ बताते हैं की यहां हर काम के दाम तय हैं | पन्ना में खुलने वाला डायमंड पार्क ना पन्ना में खुल पाया और ना खजुराहो में | एक दशक पहले मुख्य मंत्री जी  छतरपुर में रिंग रोड की घोषणा कर गए थे आज तक नहीं बनी | हाँ यहां विकाश में मील का पत्थर साबित होने वाले एनटीपीसी प्रोजेक्ट को बीजेपी सरकार की कृपा से  बस्ते  में बाँध दिया गया है  | 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...