बुंदेलखंड कीडायरी
सत्ता के सपने में खोई कांग्रेस
रवीन्द्र व्यास
सत्ता के दिवा स्वप्न में डूबी कांग्रेस को शायद अब यह लगने लगा है , की प्रदेश और बुंदेलखंड की हताश जनता की यह मज़बूरी हो गई है की वह कांग्रेस को सत्ता की बागडोर सौंपेगी | अपने इस अहंकार में चूर कांग्रेसी समन्वय के प्रयासों को धता बताने में जुटे हैं | जिन लोगों को मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की रीति नीतियों के खिलाफ हमला बोलना चाहिए वह अपनों को ही निपटाने में जुटे हैं | बुंदेलखंड में एक तरह से बीजेपी का यह अनुमान सही साबित हो रहा है की गुटों में विभक्त कांग्रेस कभी एक नहीं हो पाएगी | बीजेपी के इस अनुमान पर मुहर अजय सिंह और ज्योतरादित्य के दौरों से लग गई है |
11 जुलाई को खजुराहो में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान के मुखिया ज्योतरादित्य सिंधिया ने सागर संभाग के तीन जिलों की बैठक ली | इस बैठक में बुंदलेखंड के टीकमगढ़ ,छतरपुर और पन्ना जिले के वे लोग शामिल हुए थे जिन्हे पार्टी के प्रचार -प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी | पार्टी सूत्रों का कहना है की इस बैठक का दाइत्व राजनगर के कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह उर्फ़ नाती राजा को सौंपा गया था | इस बैठक में राजनीति से संन्यास ले चुके सत्यव्रत चतुर्वेदी ,ज्योतरादित्य के बुलावे पर उनसे मिलने खजुराहो तो पहुंचे पर वे बैठक की शुरुआत में ही उठ कर बाहर चले गए | बताते हैं की बैठक की शुरुआत में जैसे ही ज्योतरादित्य ने यह कहा की सभी लोगों का परिचय हो जाए , तभी सत्यव्रत उठे उन्होंने कहा की पहले में अपनी बात रखना चाहता हूँ ,| उन्होंने कहा कि वैसे तो में सक्रीय राजनीति से संन्यास ले चुका हूँ और पार्टी में किसी तरह का पद ना लेने की बात कही है , किन्तु पार्टी के लिए काम करूंगा दिग्विजय सिंह के साथ बुंदेलखंड में समन्वय का कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई | उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों के मनमाने निर्णय पर असंतोष जताते हुए कहा की क्या इस तरह से बीजेपी से मुकाबला कर हम जीत पाएंगे | इतना कह कर वे बैठक छोड़ कर चले आये , उन्हें ज्योतरादित्य ने रोकने का प्रयास भी किया पर वे नहीं रुके |
सत्यव्रत चतुर्वेदी की बैठक में कही गई ये बाते पार्टी के लिए कई बड़े सवाल खड़े करती हैं ? जिनके जबाब पार्टी के प्रदेश के और देश के नेताओं को तलाशने होंगे | पार्टी में एक जुटता और समन्वय के लिए उन्होंने अपने धुर विरोधी माने जाने वाले दिग्विजय सिंह के साथ बुंदेलखंड के सागर संभाग के सभी जिलों का दौरा भी किया | दिग्विजय का यह समन्वय दौरा कुछ समय तक तो प्रभावी रहा किन्तु जैसे ही इन इलाकों में अजय सिंह ने दस्तक दी और उन्होंने अपने कार्यक्रमों में गुट विशेष के लोगों को प्रमुखता दी उससे हालात सुधरने की जगह बिगड़े ज्यादा | ज्योतरादित्य के खजुराहो के कार्यक्रम से पार्टी के लोगों को उम्मीद थी कुछ बेहतर होगा | पर इसकी कमान जिन लोगों को सौंपी गई थी वे ही हालात बदत्तर कर गए | उनके कार्यक्रम में प्रेस वा समाज के अलग अलग तबके के विचार शील लोगो से मिलने की बात थी , पर समाज के प्रबुद्ध लोगों को बुलाने की जरुरत आयोजकों ने नहीं समझी |
देखा जाए तो बुंदेलखंड में कांग्रेस अपने जमीनी अभियान में बीजेपी से कोसों दूर चल रही है | जिस समय पार्टी के बड़े नेता जिलों में यह बैठक ले रहे होते हैं की हमें बूथ ,पंचायत और मंडल स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करना है , उसके महीनो पहले बीजेपी का बूथ लेवल का संगठन खड़ा हो चुका होता है | कांग्रेस पार्टी के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी सम्हालने वाले लोग उन मुद्दों पर लगभग मौन हैं जिन अव्यवस्थाओ से बुंदेलखंड की जनता को हर रोज रूबरू होना पड़ता है | मसला चाहे बिजली और उसके बिलों का हो , कानून और व्यवस्था का हो , प्रशासनिक नकारेपन का हो , पानी का हो किसानो की समस्या हो ,संविदा कर्मचारी हों , मेडिकल कालेज , एनटीपीसी ,विश्वविद्यालय , तालाबों के विनाश का हो , अथवा स्कूली शिक्षा से लेकर कालेज तक की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का हो अथवा बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या हो , मनरेगा में काम ना मिलने के कारण पलायन की बात हो इन तमाम मुद्दों पर कांग्रेस के प्रचारकों का ध्यान नहीं हैं | ध्यान है तो सिर्फ इस बात पर कैसे उन्हें अथवा उनके परिवार अथवा उनके ख़ास को टिकिट मिल जाए |
दूसरी तरफ बीजेपी अपने लाव लश्कर के साथ चुनावी रण में सक्रीय है | 10 जुलाई को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह छतरपुर आये थे | उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर यह साफ़ संकेत दे दिए की पार्टी की टिकिट उसे ही मिलेगी जिसमे चुनाव जीतने की क्षमता नजर आएगी | दरअसल बीजेपी नेता भी चुनाव पूर्व हुए सर्वे को लेकर सकते में हैं , और समय से पहले मिले संकेतों को वे समझने और सुलझाने के जतन में जुटे हैं | इसी क्रम में पार्टी ऐसे तमाम लोगों का फीडबैक ले रही है जो पार्टी के आज के या भविष्य के लिए पार्टी के बेहतर चेहरे हो सकते हैं | बीजेपी जहां संगठन स्तर पर गाँव गाँव में अपनी मजबूत पकड़ बनाये हुए हैं ,| वही आर एस एस ने भी सामाजिक तानेबाने को एक सूत्र में पिरोने का अभियान बुंदेलखंड के ग्रामीण स्तर पर शुरू कर दिया है | अब शिवराज की जन आशीर्वाद यात्रा के नाम पर बीजेपी ने लोगों को जोड़ने का अभियान शुरू किया है | वे यह भी बताने से नहीं चूक रहे हैं की शिवराज सरकार ने जनता के लिए जितना किया है उसकी तुलना में अन्य सरकारों ने जनता के लिए दस फीसदी भी काम नहीं किया है |
बरहाल जो भी हो पर चुनाव पूर्व के सर्वे ने चुनाव बिशात जल्द बिछा दी है | और इस राजनैतिक बिशात में बुंदेलखंड के मुद्दों पर आम आदमी पार्टी को छोड़ कर कोई राजनैतिक दल चर्चा नहीं कर रहा है | कांग्रेस जहां चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से आत्ममुग्ध नजर आ रही है वहीँ बीजेपी इसे एक चुनौती मान कर चुनाव जितने के अभियान में जुटी है |



