बुंदेलखंड की डायरी
माईनिग माफियाओं के लिए कुबेर का खजाना है बुंदेलखंड
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली
और बेबसी की होती है | बदहाली और बेबसी भले ही बुन्देलखडियों के लिए हो पर देश
के माइनिंग माफियाओं के लिए यह इलाका किसी कुुुुबेर के खजाने से कम नहीं है
| खनिजो के अकूूूत भंडार वाले इस इलाके मे माईनिग कारोबारी कितने बेेेेखौफ
है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों से लेकर नेेेेताओ
तक को धमकाने से नही चूूूूकते फिर आम जनता की क्या बिसात ।जनसेेेवको के सहयोग
से इन्हें लूूूट की छूट के साथ सामाजिक वातावरण और पर्यावरण के विनाश का भी
अधिकार मिला है ।
छतरपुर जिले के लवकुश नगर के पास एक गांव है
प्रतापपुर इस गांव में ग्रेनाईट पत्थर खदान ने लोगो के जीवन का सुख चैन छीन
लिया है । 1500 की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश आबादी दलितो की है ।
भोपाल की ड़ी जी मिनरल्स नाम की कंपनी यहा से ग्रेनाईट का उत्खनन कर रही है ।
गांव वालों को पटाने के लिए कम्पनी ने गांव वालों को गांव में भव्य मंदिर
बनाने का भरोसा दिया था । गाँव के कई लोग इससे सहमत भी हो गए थे ।पर खदान
शुरू करने के नाम पर कंपनी ने जिस तरह से गांव मे विनाश का तांडव शुरू किया
उससे गांव वाले खफा हो गए ।
गांव के ही नंदू पाल ने इस खनन कार्य और पर्यावरण के विनाश को लेकर ग्रीन
ट्रिब्युनल मे मामला भी दर्ज कराया है । इसके बाद भी कंपनी के कर्मचारियों
का आतंक कम नही हुआ । दहशत फैलाने के लिए फायरिंग कर शासकीय स्कूल की
विल्ड़िंग जेसीबी से गिरा दी । खेल मैदान मे ग्रेनाइट पत्थर का खुला गोदाम
बना दिया । गांव मे जिस मंदिर के निर्माण की बात कंपनी ने की थी उसका निर्माण
कार्य भी बंद कर दिया ।
असल में गाँव मे स्कूल भवन की समस्या को देख कर ग्राम पंचायत और जन सहयोग
से एक बिल्डिंग बनाई गई थी। बाद मे दूसरी विल्ड़िंग बन जाने से ये विल्ड़िंग
खाली हो गई , गाँव वाले इस खाली पड़े भवन का उपयोग सामाजिक कार्य के लिए
करने लगे । कंपनी ने इस भवन को बगैर किसी प्रशासनिक स्वीकृति के गिरा दिया ।
कंपनी को अपने विस्तार के लिए जमीनों की जरुरत पड़ी तो कर्मचारियों ने
ग्रामीणों को धमकाया उनकी जमीनों को औने पौने दामों में जबरदस्ती खरीदा |
जिनने विरोध किया उनकी जमींन पर जबरन कब्जा कर पत्थर डाल दिए | गाँव में
सुगमता से कंपनी के वाहनो का परिवहन हो सके इसलिए रास्ते में पड़ने वाले
मकानों मे भी तोड फोड़ की गई । गांव वाले अपनी फरियाद लेकर प्रशासनिक
अधिकारियों के पास भी पहुचे जनपद पंचायत के सीईओ ने भी माना कि कंपनी ने भवन
बगैर किसी अनुुुुमति के गिराया है
। पर ऐसी कंपनी के खिलाफ कार्यवाही करने की जरूरत प्रशासन ने नही समझी।
अब सरकार के खनिज विभाग ने इसी कंपनी को लवकुशनगर के एतिहासिक और पुरातत्व
महत्व के बावन वाणी पहाड़ पर 11,75 हैक्टर की तीन लीज स्वीकृत कर दी है।
धार्मिक स्थल की सुरक्षा की बात करने वाली सरकार ने लीज ऐसे स्थान पर स्वीकृत
की है जहा हनुमान जी, शंकर जी और सिद्ध बाबा का चबूतरा है ।
लवकुशनगर कसबे के युवाओं ने इस पर्वत श्रंखला और पर्यावरण को बचाने के लिए
पहल शुरू की है ,।इन लोगो ने पहाड़ियों के हर पत्थर पर श्री राम लिखना शुरू
किया है । इसके पीछे यहा के लोगों की मंशा यही है कि राम नाम के इन पत्थरो
को कोई खनिज माफिया नही तोड़ेगा और इस तरह से,
लवकुशनगर जो छोटी बड़ी बावन पहाड़ियों से घिरा है और जिसके शिखर पर माँ बम्बर
बेनी का प्रसिद्ध मंदिर है वह बच जाएंगे ।
दरअसल शिखर पहाड़ी से लगी हुई 3 पहाड़ियों के पत्थर की लीज डी जी मिनिरल्स
नाम की कम्पनी ने गलत तथ्य दिखाकर अपने नाम करवा ली है। ,,कंपनी जहाँ अपने
काम की शुरुवात करने मे जोर शोर से तैयारी में जुटी है ।वही नगर में इसका
विरोध और समर्थन भी हो रहा है। जिन पहाड़ियों की लीज हुई है वो बस्ती से
लगभग सटी हुई है । नगर में इन पहाड़ियों का धार्मिक महत्व तो है ही पर ये
प्राकृतिक सौंदर्य भी है।
यहाँ के लोग सवाल करते हैं कि मध्यप्रदेश की जनहितकारी सरकार चाहती क्या है?
सरकार ये जानती है कि पत्थरो की ड़स्ट जानलेवा सिलकोसिस बीमारी को जन्म देती
है,। देश की और प्रदेश की सरकार इस बीमारी के उपचार का कोई कारगर इलाज भी
नही खोज पाई है । यह सब जानने के बावजूद भी सरकार का एक बड़ी आबादी के पास
ग्रेनाईट पत्थर खदान की स्वीकृति देना लोगो को मौत के मुंह मे पहुचाने वाला
कार्य ही लगता है ।
कंपनी वाले भी अपने अर्थ तंत्र के बलबूते लोगो को रिझाने मे
जुटे है । कंपनी ने प्रतापपुर गांव में मंदिर की तरह इस नगर पंचायत
क्षेत्र के लोगों को विश्वास दिलाया है कि कंपनी, ऊंची पहाड़ी पर पहुंचने के
लिए सड़क बनायेगी जिससे यहा देश विदेश के पर्यटक बढेगे। पर कंपनी की नीति
नियत देख कर यही कहा जा सकता है कि सड़क का हाल भी प्रतापपुरा के मंदिर जैसा न
हो।
इस इलाके मे कटहरा के ग्रामीण एसपी फारच्यून से त्रस्त है तो मड़वा गांव के
लोग किसान मिनरल्स से । मड़वा गांव के तालाब को ही इस कपनी ने वेस्ट मेटेरियल
से भर दिया है । यही हालात सिलपतपुरा के भी है ।
बुंदेलखंड ग्रेनाईट की देश सहित विदेशो मे भी बड़ी मांग है । खनिज कम्पनी वाले
मुनाफा कमाने के लिए अपने सामाजिक सरोकार को दरकिनार करती है । इनके लिए
शासन के खनन नीति का पालन करना भी शासन-प्रशासन की कृपा से जरूरी नही होता ।
इसी कृपा का लाभ लेकर ये लोग मजदूरो से 10 से 12 घंटे काम लेते है, मजदूरो
को सुरक्षा उपकरण देना जरूरी नही समझते । बुंदेलखंड में यह मामला सिर्फ छतरपुर
जिले का नहीं है बल्कि ऐसे ही हालात पन्ना , टीकमगढ़ , सागर , ललितपुर , झाँसी
,महोबा और बांदा जिले में भी देखने को मिलते है | इन इलाकों में ग्रेनाइट के
अलावा फर्शी पत्थर , रेत का भी कारोबार बड़े पैमाने पर अवैध रूप से संचालित
होता है |
खनन के अवैधानिक कारोबार में
ऐसा भी नहीं है की सिर्फ खनिज कम्पनिया ही लिप्त हैं बल्कि इस कारोबार में
बुंदेलखंड के कई सफ़ेद पोश नेता , यहा पदस्थ होने वाले शासकीय सेवक भी लिप्त
हैं | जिनके संरक्षण में यहां वैैैैध अवैध खनन की स्ववतंत्रता खनन
कारोबारियो को मिली हुई है ।
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली
और बेबसी की होती है | बदहाली और बेबसी भले ही बुन्देलखडियों के लिए हो पर देश
के माइनिंग माफियाओं के लिए यह इलाका किसी कुुुुबेर के खजाने से कम नहीं है
| खनिजो के अकूूूत भंडार वाले इस इलाके मे माईनिग कारोबारी कितने बेेेेखौफ
है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारियों से लेकर नेेेेताओ
तक को धमकाने से नही चूूूूकते फिर आम जनता की क्या बिसात ।जनसेेेवको के सहयोग
से इन्हें लूूूट की छूट के साथ सामाजिक वातावरण और पर्यावरण के विनाश का भी
अधिकार मिला है ।
छतरपुर जिले के लवकुश नगर के पास एक गांव है
प्रतापपुर इस गांव में ग्रेनाईट पत्थर खदान ने लोगो के जीवन का सुख चैन छीन
लिया है । 1500 की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश आबादी दलितो की है ।
भोपाल की ड़ी जी मिनरल्स नाम की कंपनी यहा से ग्रेनाईट का उत्खनन कर रही है ।
गांव वालों को पटाने के लिए कम्पनी ने गांव वालों को गांव में भव्य मंदिर
बनाने का भरोसा दिया था । गाँव के कई लोग इससे सहमत भी हो गए थे ।पर खदान
शुरू करने के नाम पर कंपनी ने जिस तरह से गांव मे विनाश का तांडव शुरू किया
उससे गांव वाले खफा हो गए ।
गांव के ही नंदू पाल ने इस खनन कार्य और पर्यावरण के विनाश को लेकर ग्रीन
ट्रिब्युनल मे मामला भी दर्ज कराया है । इसके बाद भी कंपनी के कर्मचारियों
का आतंक कम नही हुआ । दहशत फैलाने के लिए फायरिंग कर शासकीय स्कूल की
विल्ड़िंग जेसीबी से गिरा दी । खेल मैदान मे ग्रेनाइट पत्थर का खुला गोदाम
बना दिया । गांव मे जिस मंदिर के निर्माण की बात कंपनी ने की थी उसका निर्माण
कार्य भी बंद कर दिया ।
असल में गाँव मे स्कूल भवन की समस्या को देख कर ग्राम पंचायत और जन सहयोग
से एक बिल्डिंग बनाई गई थी। बाद मे दूसरी विल्ड़िंग बन जाने से ये विल्ड़िंग
खाली हो गई , गाँव वाले इस खाली पड़े भवन का उपयोग सामाजिक कार्य के लिए
करने लगे । कंपनी ने इस भवन को बगैर किसी प्रशासनिक स्वीकृति के गिरा दिया ।
कंपनी को अपने विस्तार के लिए जमीनों की जरुरत पड़ी तो कर्मचारियों ने
ग्रामीणों को धमकाया उनकी जमीनों को औने पौने दामों में जबरदस्ती खरीदा |
जिनने विरोध किया उनकी जमींन पर जबरन कब्जा कर पत्थर डाल दिए | गाँव में
सुगमता से कंपनी के वाहनो का परिवहन हो सके इसलिए रास्ते में पड़ने वाले
मकानों मे भी तोड फोड़ की गई । गांव वाले अपनी फरियाद लेकर प्रशासनिक
अधिकारियों के पास भी पहुचे जनपद पंचायत के सीईओ ने भी माना कि कंपनी ने भवन
बगैर किसी अनुुुुमति के गिराया है
। पर ऐसी कंपनी के खिलाफ कार्यवाही करने की जरूरत प्रशासन ने नही समझी।
अब सरकार के खनिज विभाग ने इसी कंपनी को लवकुशनगर के एतिहासिक और पुरातत्व
महत्व के बावन वाणी पहाड़ पर 11,75 हैक्टर की तीन लीज स्वीकृत कर दी है।
धार्मिक स्थल की सुरक्षा की बात करने वाली सरकार ने लीज ऐसे स्थान पर स्वीकृत
की है जहा हनुमान जी, शंकर जी और सिद्ध बाबा का चबूतरा है ।
लवकुशनगर कसबे के युवाओं ने इस पर्वत श्रंखला और पर्यावरण को बचाने के लिए
पहल शुरू की है ,।इन लोगो ने पहाड़ियों के हर पत्थर पर श्री राम लिखना शुरू
किया है । इसके पीछे यहा के लोगों की मंशा यही है कि राम नाम के इन पत्थरो
को कोई खनिज माफिया नही तोड़ेगा और इस तरह से,
लवकुशनगर जो छोटी बड़ी बावन पहाड़ियों से घिरा है और जिसके शिखर पर माँ बम्बर
बेनी का प्रसिद्ध मंदिर है वह बच जाएंगे ।
दरअसल शिखर पहाड़ी से लगी हुई 3 पहाड़ियों के पत्थर की लीज डी जी मिनिरल्स
नाम की कम्पनी ने गलत तथ्य दिखाकर अपने नाम करवा ली है। ,,कंपनी जहाँ अपने
काम की शुरुवात करने मे जोर शोर से तैयारी में जुटी है ।वही नगर में इसका
विरोध और समर्थन भी हो रहा है। जिन पहाड़ियों की लीज हुई है वो बस्ती से
लगभग सटी हुई है । नगर में इन पहाड़ियों का धार्मिक महत्व तो है ही पर ये
प्राकृतिक सौंदर्य भी है।
यहाँ के लोग सवाल करते हैं कि मध्यप्रदेश की जनहितकारी सरकार चाहती क्या है?
सरकार ये जानती है कि पत्थरो की ड़स्ट जानलेवा सिलकोसिस बीमारी को जन्म देती
है,। देश की और प्रदेश की सरकार इस बीमारी के उपचार का कोई कारगर इलाज भी
नही खोज पाई है । यह सब जानने के बावजूद भी सरकार का एक बड़ी आबादी के पास
ग्रेनाईट पत्थर खदान की स्वीकृति देना लोगो को मौत के मुंह मे पहुचाने वाला
कार्य ही लगता है ।
कंपनी वाले भी अपने अर्थ तंत्र के बलबूते लोगो को रिझाने मे
जुटे है । कंपनी ने प्रतापपुर गांव में मंदिर की तरह इस नगर पंचायत
क्षेत्र के लोगों को विश्वास दिलाया है कि कंपनी, ऊंची पहाड़ी पर पहुंचने के
लिए सड़क बनायेगी जिससे यहा देश विदेश के पर्यटक बढेगे। पर कंपनी की नीति
नियत देख कर यही कहा जा सकता है कि सड़क का हाल भी प्रतापपुरा के मंदिर जैसा न
हो।
इस इलाके मे कटहरा के ग्रामीण एसपी फारच्यून से त्रस्त है तो मड़वा गांव के
लोग किसान मिनरल्स से । मड़वा गांव के तालाब को ही इस कपनी ने वेस्ट मेटेरियल
से भर दिया है । यही हालात सिलपतपुरा के भी है ।
बुंदेलखंड ग्रेनाईट की देश सहित विदेशो मे भी बड़ी मांग है । खनिज कम्पनी वाले
मुनाफा कमाने के लिए अपने सामाजिक सरोकार को दरकिनार करती है । इनके लिए
शासन के खनन नीति का पालन करना भी शासन-प्रशासन की कृपा से जरूरी नही होता ।
इसी कृपा का लाभ लेकर ये लोग मजदूरो से 10 से 12 घंटे काम लेते है, मजदूरो
को सुरक्षा उपकरण देना जरूरी नही समझते । बुंदेलखंड में यह मामला सिर्फ छतरपुर
जिले का नहीं है बल्कि ऐसे ही हालात पन्ना , टीकमगढ़ , सागर , ललितपुर , झाँसी
,महोबा और बांदा जिले में भी देखने को मिलते है | इन इलाकों में ग्रेनाइट के
अलावा फर्शी पत्थर , रेत का भी कारोबार बड़े पैमाने पर अवैध रूप से संचालित
होता है |
खनन के अवैधानिक कारोबार में
ऐसा भी नहीं है की सिर्फ खनिज कम्पनिया ही लिप्त हैं बल्कि इस कारोबार में
बुंदेलखंड के कई सफ़ेद पोश नेता , यहा पदस्थ होने वाले शासकीय सेवक भी लिप्त
हैं | जिनके संरक्षण में यहां वैैैैध अवैध खनन की स्ववतंत्रता खनन
कारोबारियो को मिली हुई है ।



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