20 अगस्त, 2017

बुंदेलखंड मे सूखा की दस्तक


बुंदेलखंड की डायरी


रवीन्द्र व्यास 
  देश का अधिकांश इलाका  इन दिनों  वर्षा और बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है| सियासत में आरोप प्रत्यारोपो की बारिस हो रही है , कोई  लोकतंत्र  लिए घातक विपक्ष विहीन बहुमत  लिए  अपने घोड़े दौड़ा रहा है | ऐसे दौर में  देश के नीति नियंत्रकों  को भला  बुंदेलखंड  का दर्द  कहाँ  नजर आएगा | बुंदेलखंड इलाके मे एक बार फिर सूखे की आहट ने लोगो को बेचैन कर दिया है । गांव गांव में लोग भगवान को मनाने में जुटे है । वर्षा की कामना को लेकर छतरपुर कलेक्टर ने भी भगवान से फरियाद की है । वर्षा के  आकड़ो की कहानी कुछ भी हो , पर जो हालात बन रहे है  उसमें  फसले तो ठीक लोग बूद बूद पानी को तरसेगे।



 देश का अधिकांश इलाका  इन दिनों  वर्षा और बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है|  दूसरी तरफ   बुन्देलखण्ड इलाका   फिर सूखे  की त्रासदी भोगने  को विवश हो रहा है|  संकट से निपटने के लिये लोग अब भगवान को मनाने  में लगे हैं | इसके लिए वे ऐसा कठिन तप कर रहें हैं की  जो भी  देखता है उसकी भी आँखें नम हो जाती हैं , पर  भगवान है कि अपने इन भक्तो पर दया नहीं कर रहे हैं |


 मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले  में एक गांव है  खुमानगंज  | इस गांव में  अब सुबह से चूल्हा नही जलता है ।  इस  गांव के लोग  पिछले पांच 
दिनों से नियमित पेढ भरकर ( लेट  लेट कर भगवान के दर पर जाना ) डेढ किलोमीटर दूर शारदा  देवी मां  के पास  पहुँचते हैं | यहां ये गाँव वाले सिर्फ एक ही फ़रियाद करते हैं की हे  माता पानी बरसा दो | माता की   पूजा अर्चना करने के बाद ही गाँव वालों के घरों में चूल्हा जलता है।  गांव वालों ने   संकल्प लिया  है कि जब तक पानी नही बसरता तब तक यह क्रम जारी रहेगा। गांव के बुजुर्गो बताते  है कि 50 साल पहले  भी पानी को लेकर इस प्रकार की आराधना  देवी मां से की गई थी, उसके बाद जम कर बरिश इलाके में हुई थी।


                    बुंदेलखंड इलाके के गाँव गाँव में भगवान् के दर पर मनौतियों का यह सिलसिला अपने अपने तरीके से जारी है | कहीं अखंड रामायण पाठ हो रहा है तो कहीं शंकर जी से वर्षा की कामना की जा रही है | ऐसी ही कामना को लेकर छतरपुर कलेक्टर रमेश भंडारी  जटाशंकर धाम पहुंचे थे | शनिवार को जब वे  शिव पूजन के बाद बाहर निकले तो  उन्होंने स्थानीय पत्रकारों को बताया की  वर्षा की कामना की है | इसके पहले बिजावर के बीजेपी विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक किशन गढ़ से जटाशंकर तक पद यात्रा कर अच्छी  वर्षा के लिए शिव जी से प्रार्थना कर चुके हैं |


                                दरअसल बुंदेलखंड इलाके के सागर संभाग में अब तक मानसून के 60 दिनों में औसत से कम बारिश हुई है | सबसे कम टीकमगढ़ जिले में 399  मिमी और सबसे ज्यादा पन्ना जिले में 628  मिमी वर्षा दर्ज हुई है | छतरपुर में 496  ,दमोह में 5२२  सागर में 560 मिमी वर्षा हुई है | वही चित्रकूट धाम मंडल के यदि चार जिलों का औसत देखा जाए तो सिर्फ 195 मिमी वर्षा ही हुई है | उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके के जिलों की  औसत वर्षा 356 मिमी हुई है  जो अब तक की औसत वर्षा से 40 फीसदी कम है |  सबसे कम वारिश  जालौन में 218 मिमी , हमीरपुर में 254 मिमी और सबसे ज्यादा 543 मिमी वर्षा बांदा जिले में हुई है |  बुंदेलखंड में  वर्षा का यह क्रम ऐसा रहा कि ना जल स्तर बड़ा और ना ही तालाब वा  कुओं में पानी आया है | 



             बुंदेलखंड का  इतिहास बताता  है कि 19वीं  20वीं सदी  केदौरान 12 बार सूखा और अकाल के हालत झेले हैं बुंदेलखंड ने ।औसत तौर पर कहा जा सकता है की हर 16 _17 साल में यहां सूखापड़ता था   1968 से 1992 के 24 सालों में  तीन बार सूखा पड़ामतलब हर 8 वे साल सूखा पड़ा  जलवायु परिवर्तन का असर पिछले 15 वर्षों में  यहां देखने  को मिला और लगभग  हर बार मौसम की मारयहां के लोग झेलने को मजबूर हैं   पिछले कुछ वर्षो में यहां  मानसूनअनियमित सा हो गया ।कभी कभार  अत्याधिक वर्षा तो कभी वर्षा कीकमी जो निरंतर चल रही है  ,उस पर ओला और पाला के मार , तालाबोंबांधो ,कुआँ का सूख जाना  ऐसे कुछ कारण रहे जिन्होंने यहां खेतीको पूर्णतः बर्बाद  कर दिया। परिणामतः खेती पर निर्भर 80  फीसदीआबादी  के सामने  अब भुखमरी के हालात निर्मित हो गए  सूखतेजल श्रोतो ने आने वाले दिनों के लिए एक भयानक हालात की तरफइशारा कर दिया है 


                                  अनियमित वर्षा के इस प्रभाव के चलते फसलों के सूखने और मुरझाने का क्रम तो शुरू हो ही गया है , अब फसलों पर कीट पतंगों के हमले से स्थिति और भी चिंताजनक होती जा रही है |  मौसम की इस बेरुखी के कारण  सोया बीन की फसल से तो किसानो को उम्मीद नहीं बची है पर तिल , उर्द ,मूंग  से लगी कुछ आश भी निराशा में बदलती  जा रही है |  फसल के इस चक्र में जूझते किसानो के सामने अब सिर्फ फसल की ही चिंता नहीं है बल्कि उन्हें आने वाले जल संकट और  पशुओं के लिए भूषा - चारे का संकट भी बेचैन किये है | उस पर बैंक , और साहूकारों की तकादेदारी के साथ विद्दुत कंपनियों की  मनमानी  उन्हें  जीने नहीं दे  रही है | 
         मानसून के सावन में ना वर्षा की झड़ी लगी और ना भादों के जल से खेत,  तालाब भरे |  हालांकि  मौसम के पूर्वानुमान में कहा गया था की इस बार मानसून अच्छा रहेगा , पर्याप्त वर्षा होगी पर अब तक वे सब पूर्वानुमान बुंदेलखंड को लेकर गलत साबित हुए | इस कारण  गाँव के किसान   अब  भविष्य वक्ताओं की शरण में पहुंच रहे हैं |  भविष्य वक्ताओं ने अगस्त और सितम्बर में भारी वर्षा का भविष्य तो बता दिया  है पर  यह कितना सटीक साबित होगा इसका इन्तजार बुंदेलखंड के लोगों को है | 
                              देश दुनिया के वैज्ञानिक मानते हैं की ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में बड़ा परिवर्तन हो रहा है | इसके प्रभाव से , कहीं अति वृष्टि तो कहीं सूखे के हालात बनेगें, ग्लेसियर पिघलने से एक अलग समस्या निर्मित होगी | इस समस्या से निपटने का तात्कालिक तौर पर एक मात्र उपाय बेहतर प्रबंधन है , पर ये दुर्भाग्य पूर्ण ही है कि सरकार और उसके तंत्र को इस तरह के प्रबंधन से कोई सरोकार ही नहीं है | छोटे मोटे स्तर पर जो प्रयास होते भी हैं वे दिखाऊ ज्यादा और काम के कम होते हैं |  हम फिर भी उम्मीद लगाए हैं की कोई तो होगा जो अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन करेगा | 

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