25 जून, 2017

किसान त्रस्त सरकार मस्त

 बुदेलखंड की डायरी
रवींद्र व्यास

                    बुंदेलखंड के किसानो के दर्द की दवा तो नहीं मिलती अलबत्ता  हमारा दर्द कितना गहरा और गंभीर है की उसे जब फ़िल्मी पर्दे पर दिखाया जाता है तो वह भी पुरुस्कृत हो जाता है | बुंदेलखंड के किसानो के दर्द पर बनी फीचर फिल्म " बी फॉर बुंदेलखंड "  कोलकता में आयोजित इंटर नेशनल कल्ट फिल्म फेस्टिवल ना सिर्फ सराहा गया बल्कि फिल्म डायरेक्टर को इसके लिए "बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर " का अवार्ड भी दिया गया | फीचर  फिल्म में  कर्ज में जी रहे  किसान राम सिंह और उसके पुत्र लल्ला  के दर्द की कथा है  | जिसमे बेटा कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचने की बात कहता है और पिता अपने जीते जी जमीन बेचना नहीं चाहता  | नाराज होकर जब बेटा घर गाँव छोड़ कर चला जाता है तो एक बेबस पिता कर्ज की नियति  आगे हार जाता और फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर लेता है | 
             
                       मंदसौर में किसान आंदोलन में पुलिस गोली में हुई मौतों के बाद से मध्य प्रदेश में   किसान लगातार मौत को गले लगा रहे हैं | बुंदलखंड में तो हालात  और भी ज्यादा खराब हैं , यहां तो दुष्काल का एक  चक्र ही चल रहा है जो किसान को मौत में मुक्ति का मार्ग बता देता है || 
 

 हाल ही में   बुंदेलखंड में चार किसानो की आत्म ह्त्या के  बाद मध्य प्रदेश में किसानो की आत्म ह्त्या का आंकड़ा 21 पर पहुंच गया है |  छतरपुर जिले के मुख्य मंत्री के गोद लिए बिजावर विधान सभा क्षेत्र के पाली गाँव के किसान देशपत  यादव के छोटे बेटे ने रघुवीर (28) ने उसी खेत पर जाकर सल्फास की गोली खाकर जान दे दी जो उसके वा उसके परिवार का जीने का सहारा था |  वह अपने पीछे दो बेटी और एक बेटा और पत्नी  छोड़ गया है | बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले इस युवक पर दस ग्यारह लाख का कर्ज होना बताया जा रहा है |  प्रशासन की नजर में मरने वाला युवक किसान की परिभाषा में नहीं आता , आत्म ह्त्या के पीछे वजह भी पारिवारिक कलह मान ली गई है |
 सागर जिले के बीना तहसील के बसाहरी गाँव गुलाई पटेल (50 ) ने अपने ही खेत पर फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर ली | उसके पास से मिले सोसाइड नॉट में लिखा है की उस पर एक लाख का कर्ज था जिसके लिए साहूकार परेशान करता था | जब की वह एक लाख के कर्ज के एवज में ढाई लाख रु साहूकार शंकर महराज को दे चुका है | 
                                            देखा जाए तो बुंदेलखंड में साहूकारी  कर्ज का यह दुस्चक्र किसान के लिए किसी जानलेवा मुसीबत से कम नहीं है | सागर ,छतरपुर ,और पन्ना जिले में हुई तीनो किसानो की आत्म हत्या के पीछे भी साहूकारी कर्जा मौत की मुख्य वजह बना | बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रो में कर्ज का मर्ज किस कदर बेकाबू है इसकी अगर असल तस्वीर देखना है तो छतरपुर जिले के बिजावर , बड़ामलहरा और बक्स्वाहा विकाश खंड में , टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ इलाके में पन्ना जिले के पवई  और अजयगढ़ इलाके में , दमोह के हटा ,मड़ियादो , सागर जिले के केसली , बंडा शाहगढ़ इलाके में देखी जा सकती है ! छतरपुर जिले के  इन ब्लाकों में तो हालात इस कदर बेकाबू हैं की सैकड़ों की संख्या में अच्छी खासी जमीन के मालिक किसान   मजदूर बन गए ,|  जब  कर्ज माफ़ी की बात आती है तो बैंक का कर्ज तो माफ़ कर दिया जाता है , पर गाँव -गाँव में बैठे इन साहूकारी डकैतों से किसान को मुक्ति नहीं मिल पाती | 5 से 20 रु सैकड़ा पर कर्ज देने वाले इन साहूकारों से कर्ज लेकर ऐसे मकड़ जाल में उलझता है की ता उम्र वह उससे निकल नहीं पाता |  
 

                                            
                                   मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया के ही गृह जिले में एक पखवाड़े के भीतर 6 किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं | नॅशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं की किसान आत्म ह्त्या के मामले में 42 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है जब की किसान मजदूर आत्म हत्या के मामले में 31 फीसदी की कमी आई है | दरअसल इस सबके पीछे भी नोटबंदी का ही मामला उभरकर सामने आ रहा है | किसान और आम आदमी की सारी जमा पूंजी मोदी सरकार ने निकलवा ली |  अच्छी फसल आने के बाद जब वह बेचने पहुंचा तो उसे चेक थमा दिये गए | बैंक में पहुंचा तो वहां की लम्बी लाइन और उलझाऊ कार्य प्रणाली ने किसान को पैसा ना आने की बात कह कर चलता कर दिया | एक एक माह चक्कर लगाने के बाद जब उसे पैसा नहीं मिला और अच्छी फसल देख सजाये सपने टूटने लगे उस पर साहूकार के तकाजे ने उसे बुरी तरह से  हताश कर दिया | ऐसी जिंदगी से बेहतर उसे मौत लगने लगी और उसने उसी का वरण किया | 
                                    
                                       किसानो की मौत के मुद्दे ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का मौका दे दिया है | कांग्रेस के पूर्व मंत्री  ज्योतरादित्य सिंधिया और कमल नाथ तो मध्य प्रदेश की सरकार को घेरने में ही जुट गए हैं | कमल नाथ ने तो शिवराज सरकार पर किसानो के मसले पर गलत बयान बाजी का आरोप लगाते हुए प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने तक की मांग कर डाली | वही  आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन सचिव अमित भटनागर  प्रदेश सरकार को किसान विरोधी सरकार बताते हैं | वे कहते हैं की हमने अपने जीवन में ऐसी सरकार नहीं देखी जो जनता और किसानो को लूटने के जातन में जुटी हो | मसला चाहे खाद बीज का हो , अथवा बिजली के बिल का | 

                        ये शब्दों का ही भ्रम जाल है की लोग अपने को जनता का प्रधान सेवक कहते कहते कब जनता के मालिक बन जाते हैं पता ही नहीं चल पाता | जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है , अपने को मालिक समझने वाले लोग अपने हालातों को देख कर ना सिर्फ हताश होते हैं| बल्कि वे विरोध के ऐसे रास्ते पर भी चल पड़ते हैं जिसकी मंजिल का खुद उन्हें ही पता नहीं रहता | हालात से हारकर मौत को गले लगाने से  भी नहीं चूकते |

14 जून, 2017

जमीन के लिए किसानो की जंग :वन कर्मियो को बनाया बंधक


छतरपुर  / 14 जून 17
जिले के दूरस्थ क्षेत्र किशनगढ़ थाना क्षेत्र मे आज वन कर्मचारियों और किसानों मे संघर्ष हो गया । जमीन को लेकर हुए इस विवाद मे  किसानों ने वन विभाग के डिप्टी रेंजर  और दो बीट गार्ड को बंधक बना कर जमकर पिटाई की  ।
       किशनगढ़ थाना प्रभारी राजेश पाड़ेय ने बताया कि नगदा गांव में वन विभाग के कर्मचारियों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी । सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डिप्टी रेंजर और दो बीट गार्ड को मुक्त कराया गया । वन विभाग वन भूमि पर किसानों द्वारा किए गए कब्जे से मुक्त कराने व वृक्षारोपण के लिए गए थे । इस जमीन का 9 जून को सीमांकन भी हो चुका था । इसके बाद भी  ये लोग जबरन तार वगैरह लगा कर कब्जा किया हुआ था । जब वन विभाग के लोगो ने इनके कब्जे से जमीन मुक्त करने लगे  उसी समय ग्रामीणो ने  इन पर   लाठी ड़ंड़ो  से हमला  कर दिया  और तीन लोगो को बधक बना कर बुरी तरह से पीटा । 
पुलिस ने बीट गार्ड वी जायसवाल की रिपोर्ट पर मथुरा यादव, कल्लू,  चंदू,नंदू, लखन और गेदाबाई यादव सहित 12 लोगो पर 294,506 बी, 353,332,427,34 के तहत मामला दर्ज किया है । 
           दूसरी ओर किसान परिवारो का आरोप है कि सरकार ने हमारी जमीन का सौदा जेपी सीमेंट वालो से कर लिया है । उनको मैहर मे वन विभाग की भूमि देने के  एवज में हमारे यहा की 400  एकड़ जमीन वन विभाग को दे दी है । जिसमें  100 एकड़ से ज्यादा जमीन  ऐसी है  जिस पर किसान पीढ़ियों से खेती करते चले  आ रहे हैं । आज विवाद तब शुरू हुआ जब वन विभाग वालो ने  महिलाओ के साथ मारपीट व बदसलूकी की ।
 

12 जून, 2017

जल अभाव ग्रस्त होता बुंदेलखंड


जल अभाव ग्रस्त होता बुंदेलखंड 

रवीन्द्र व्यास 


बुंदेलखंड का नाम आते ही लोगों की आँखों के सामने अजब गजब तस्वीरें घूमने लगती हैं | शोषित , शापित इस इलाके की बदनसीबी ही है की भू - गर्भ खनिजों ,रत्नो से सराबोर है पर जीवन जीने के लिए आवश्यक जल धीरे धीरे उससे दूर होता जा रहा है | जल , जंगल, जानवर  और जमीन  जिससे जुड़ा है जीवन और समृद्धि का एक चक्र , पर आर्थिक समृद्धि की लालसा में जीवन के इस चक्र को ही ना सिर्फ  खंडित कर दिया बल्कि इसे नेस्तानाबूद करने में जुटे हुए हैं | सामाजिक जिम्मेदारी समझने वाले लोग इसको लेकर प्रयास भी करते हैं , सरकार योजनाए भी बनाती है बजट भी देती है किन्तु तंत्र को संचालित करने वाला गिरोह योजनाओ को कागजों में साकार कर देता है और धन को अपनी तिजोरी में बंद कर देता है | जिसके चलते कागजों में जंगल लहलहा रहें हैं , और धरा जल से परिपूर्ण है | जल संरचनाओं की उपेक्षा ही  बुंदेलखंड के दुष्काल का सबसे बड़ा कारण बन कर सामने आया है | 

                                                    पिछले कुछ समय में बुंदेलखंड के इन हालातों को देख कर लोगो ने और सत्ता पर काबिज लोगों ने अपनी चिंता तो  जताई है | मई माह में झांसी में जल संरक्षण  के लिए  जीवन समर्पित करने वाले राजेंद्र सिंह ने बुंदेलखंड दुष्काल मुक्ति अभियान की शुरुआत की है | इसके लिए उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके में  हर  जिले में एक संयोजक नियुक्त किया गया है | इस दुष्काल मुक्ति अभियान के मौके पर राजेंद्र सिंह ने माना की यहां का दुष्काल सिर्फ प्राकृतिक नहीं बल्कि यहां के शासक और शोषित वर्ग बुद्धि का भी दुष्काल है | प्रकृति के बदलते मिजाज के कारण वर्षा चक्र बदल गया है ,जिसके चलते अनियमित वर्षा , भू जल स्तर में गिरावट और उजड़ता समाज ( पलायन करते लोग ) बुंदेलखंड का दुष्काल है | उन्होंने इसके लिए लोगों को जागरूक करने और जल संचय संरचनाओं के विकाश  को आवश्यक माना | इस मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा   मांग पत्र तैयार किया गया जिसमे हर इलाके की जल संरचनाओं  पहचान करने , उनका सीमांकन करने , गाँवो में पेयजल और खाद्यान सुरक्षा सुनिश्चित करने , पलायन रोकने के लिए मनरेगा के प्रभावी बनाने की बात कही गई | यह मांग पत्र हर जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को भेजा जाएगा | 

                                                ललितपुर में भी भू -जल संरक्षण और जल समाधान को लेकर एक कार्यशाला हुई | केंद्रीय भूमि जल बोर्ड लखनऊ और भूगर्भ जल विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में भी वर्षा  जल संचय और वृक्षारोपण पर जोर दिया गया | 

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में केंद्र सरकार के जल संरक्षण योजना के तहत   भू-जल स्तर की आन लाइन निगरानी की जायेगी | हर विकाश खंड के 20 गाँव में मापक यंत्र  लगेंगे, इन यंत्रो के लग जाने के बाद दिल्ली और लखनऊ में बैठे अधिकारी अब रोजाना बुंदेलखंड के जल स्तर के हालात देख सकेंगे |
                            वही उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ किसानो को  दो साल  इन्तजार करने की सलाह देते है , दो साल बाद बुंदेलखंड में ना पीने के पानी की समस्या होगी और ना ही सिचाई के लिए पानी की समस्या होगी | यहां का जो किसान अब तक एक फसल उगाता था वह भी तीन तीन फसल उगा पायेगा | इसके लिए योजना बनाई जा रही है | उत्तर प्रदेश सरकार के ही कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी माना है की बुंदेलखंड में सबसे गंभीर संकट जल का है | इस संकट के तात्कालिक समाधान के लिए 30 जून के पहले बुंदेलखंड में एक हजार और मिर्जापुर में 4 सौ नए तालाब खुदवाये जाएंगे | इसके लिए सरकार किसानो को 50 फीसदी अनुदान भी देगी | 
                               
                               मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भू- जल स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने दो सौ करोड़ से ज्यादा की राशि उपलब्ध कराई है | देखा जाए तो बुंदेलखंड धीरे धीरे डार्क जोन की ओर बढ़ रहा है | सेन्ट्रल वाटर कमीशन ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है की बुंदेलखंड  में अधिकाँश  वर्षा जल बह जाता है |  यहां के पाराम्परिक चंदेल कालीन तालाबों से जल संचय में मदद मिलती थी किन्तु उनमे से अधिकांश या तो नष्ट कर दिए गए या फिर उनका रकबा घट गया | अविरल बहती छोटी बड़ी  नदियों की जल धाराओं को रोक कर छोटे बड़े बाँध तो बनाये गए पर उनमे जल प्रबंधन का ध्यान नहीं रखा गया | हालात ये हुए की नदिया ही अपना अस्तित्व खोने लगी | अब एक और बड़ी नदी केन को समाप्त करने की योजना बन कर तैयार है |डॉ  एम्  विश्वेशरय्या ने देश की जल समस्याओं से निजात के लिए बाढ़ वाली नदियों पर बाँध बनाने और  और बाढ़ वाली नदियों को सूखी नदियों से जोड़ने की योजना बनाई थी | पर बुंदेलखंड में इसके ठीक उलटा हो रहा है गैर बाढ़ वाली नदी केन को  बाढ़ वाली नदी बेतवा से जोड़ा जा रहा है |  
                        जंगल के हालात भी कुछ दुरुस्त नहीं हैं सरकारी आंकड़े कहते हैं की  उत्तर प्रदेश वाले इलाके में मात्र 7. 92 फीसदी और मध्य प्रदेश वाले इलाके में 29. 9 फीसदी वन क्षेत्र बचा है । जब की गैर सरकारी आंकड़े बताते  हैं की  जंगलों का तेजी से विनाश हुआ है | वे जंगल जो भू जल वृद्धि में सहायक होते थे नष्ट किये गए | मध्य प्रदेश  इलाके के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी असल में 13 फीसदी ही जंगल बचे हैं | शहरी करण और सुविधाओं की लालसा में भेंट चढ़े वनों के विनाश का नतीजा सबके सामने है , जल स्तर में गिरावट के अलावा  यह इलाका तेजी से बीहड़ में भी बदल रहा है | 
                                                 
                                               जल ,जंगल, जमीन और जानवरों से नाता तोड़ कर सरकार ने हमें शहरी बाबू बनाने के प्रयास में जुटी है |  अब  सरकार अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए तरह तरह की योजनाए तो बना रही हैं | कभी बुंदेलखंड को पैकेज देती है तो कभी कर्ज माफ़ी की बात करती है | तो कभी सिचाई सुविधाओं की वृद्धि की बात करती है  | पर जिस जल से समाज, संस्कृति और आर्थिक प्रगति का रास्ता खोजा जा सकता है उसके सरक्षण और संवर्धन के लिए ईमानदार प्रयास नहीं हो रहे हैं |  
      

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

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