19 मार्च, 2017

पर्यटन का प्रलाप


बुन्देलखण्ड की डायरी 
 रवीन्द्र व्यास 

उत्तर प्रदेश में जिस समय मुख्य मंत्री का चयन हो रहा था उसी समय   बुंदेलखंड के   खजुराहो में पर्यटन को लेकर प्रलाप जारी था । उत्तर प्रदेश के सात जिले और मध्य प्रदेश के 6 जिलों तक फैले बुंदेलखंड में सांझी संस्कृति   इलाके के पर्यटन कारोबार को बढ़ाने में महत्त्व पूर्ण कारक मानी जाती है । इसके बावजूद सरकार के सकारात्मक प्रयास सिर्फ सेमिनारों ,सम्मेलनों , और कॉन्क्लेव तक सिमट कर रह गए हैं ।  बुंदेलखंड के और देश के मुख्य पर्यटक स्थल  खजुराहो में आये दिन होने वाले पर्यटन सेमीनार और कॉन्क्लेव यहां के लोगों के लिए सिर्फ  तमाशा बन कर रह गए  हैं ।

खजुराहो के सहस्त्राब्दी वर्ष (1998 ) से खजुराहो और बुंदेलखंड के पर्यटन विकाश का प्रलाप सुन सुन कर शायद वे हताश हो गए  हैं । यहां के  पांच सितारा होटल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिएआयोजित कॉन्क्लेव में  पर्यटन पर एक साल के अंदर पांचवी बार  मंथन हुआ  इस मंथन में भी वही सब बातें दोहराई गई जो पूर्व में दोहराई जाती रही हैं । मंथन तो होता है पर इस मंथन से क्या निकलता है यह अब भी रहस्य ही है ।  अब जब की उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी सरकार बन गई है ।  बुंदेलखंड के समग्र विकाश की बात करने वाली बीजेपी बुंदेलखंड इलाके के सँयुक्त पर्यटन विकाश पर कार्य योजना बना सकती है और उसको अमली जामा पहनाकर देश का बड़ा टूरिज्म हब  बना सकती  है । 
  पर्यटन के  कारोबार   में रोजगार की असीम सम्भावनाये जानने के बाद भी   बुंदेलखंड इलाके में इस उद्योग को   विकसित करने  में सरकारों का रवैय्या काफी सुस्त रहा है  । जबकि बुंदेलखंड  देश का ऐसा इकलौता पर्यटन क्षेत्र  है जहाँ   स्थापत्य कला ,,धर्म ,संस्कृति , वन्य प्राणी अभ्यारण्य  , जैव विविधिता, और वाटर स्पोर्ट्स ,जैसी समग्रता समाई हुई है । 


  खजुराहो को  पर्यटन का केंद्र बना कर  पर्यटकों को  पन्ना टाइगर रिजर्व , टाइगर रिजर्व के अंदर मौजूद शील चित्रो , पन्ना के पांडव फाल ,पन्ना के मंदिर ,  कौआ सेहा , ब्रस्पति कुंड , नचना का शिव मंदिर , भगवान् राम के आश्रम सारंग धाम , अगस्त मुनि के आश्रम  जहाँ रखा भगवान् राम का धनुष , अजयगढ़ किला ,  बांदा जिले के  कालिंजर फोर्ट , चित्रकूट , गोस्वामी तुलसी  दास की जन्म स्थली राजापुर   ,चरखारी ,आल्हा उदल की नगरी महोबा , झांसी , लालितपुर जिले के रणछोर जी , देवगढ़ ,नीलकंठेश्वर मंदिर , दमोह के बांदकपुर , टीकमगढ़ के बल्देवगढ़ के किला , पपौरा , कुंडेश्वर , ओरछा, गढ़ कुढार  का किला ,सूर्य मंदिर मड़खेरा ,  दतिया के पीताम्बरा पीठ   को इस टूरिस्ट सर्किल में जोड़ा जा सकता है  ।  वहीँ छतरपुर जिले के  खजुराहों ,व्यास बदौरा के मंदिर , जटाशंकर , भीमकुण्ड , अर्जुन कुंड , नैना गिर , द्रोण गिर   धुबेला होते  हुए  ओरछा प्रस्थान का सर्किल बनाया जा सकता है ।  ये स्थान बताते हैं की यहाँ यदि खजुराहो में  काम कला का शिल्प है तो धर्म अध्यात्म से जुड़ा केंद्र भी है बुंदेलखंड में , जरूरत इन स्थलों के विकास की । और खजुराहो में हर साल आने वाले  औसतन एक लाख विदेशी और तीन लाख देशी पर्यटकों को बुंदेलखंड के और स्थलों तक पहुँचाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना की जरुरत है  ।   



   1998  जब खजुराहो का सहस्त्राब्दी वर्ष मनाया गया तो उस समय जटकारा गाँव में  टीले में दफ़न मंदिर खोजा गया । पुरातत्व के अधिकारियों ने दावा किया था की अगले पांच साल में इस मंदिर को पूर्ण स्वरुप में तैयार कर दिया जायगा । ना वो मंदिर पूर्ण हुआ और ना ही उस समय दिखाए गए सपने पूर्ण हुए । और ना ही आस पास के ४० गाँव हेरिटेज विलेज का रूप ले सके ।  खजुराहो डेवलपमेंट एसोसिएसन के अध्यक्ष सुधीर शर्मा चर्चा के दौरान इस बात से दुखी हो जाते हैं की बुंदेलखंड में नेताओं का ध्यान इस इलाके की ओर  नहीं है । ब्रिक्स  का पर्यटन  सम्मलेन हुआ पर हासिल कुछ नहीं हुआ ,। वे असल में मानते हैं की इस तरह के सम्मलेन ,सेमीनार  वगेरह अधिकारियों के घूमने फिरने के मकसद  होते हैं । वे यहां आते हैं और पांच सितारा होटलों में  ठहर कर  कागजी खाना पूर्ति कर चले जाते हैं । 

 बात सिर्फ लोगों के भरोषा तोड़ने का ही नहीं है बल्कि उनके साथ धोखा किये जाने का भी है । भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय भी जानता है की मध्य प्रदेश में सर्वाधिक विदेशी टूरिस्ट खजुराहो आते हैं । यह जानने  के बावजूद यहां का  केंद्रीय टूरिस्ट कार्यालय इंदौर शिफ्ट कर दिया गया , इसके पीछे कोई देश हित नहीं था बल्कि अधिकारियों का स्वहित था , उनके बच्चों को शिक्षा में दिक्कत आती थी जिसके कारण कार्यालय शिफ्ट किया गया था । शिवराज ने भरोषा दिलाया था की डायमंड पार्क खजुराहो में बनेगा वह भी इंदौर चला गया । पर्यटकों के मनोरंजन के लिए शुरू किया गया लोकरंजन समारोह बंद कर दिया गया । अब अगला नंबर खजुराहो डांस फेस्टिवल का हो सकता है , इस बार के आयोजन देख कर तो ऐसी ही शंकाये  जताई जा रही हैं । 
                 
पर्यटन बढ़ाने और पर्यटकों को ज्यादा से ज्यादा समय तक रोकने के लिए यह जरुरी माना जाता है की इन स्थलों तक के पहुंच मार्ग बेहतर हो । रेल और एयर कनेक्टिविटी ज्यादा से ज्यादा हो , पर खजुराहो में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का एयर पोर्ट होने के बावजूद भी एयर इंडिया की रेगुलर फ्लाइट नहीं है । अन्य स्थानों से कनेक्टिविटी की बात तो भूल ही जाईये ।  ब्रिक्स देशों के सम्मिट में   उत्तर प्रदेश से आये पर्यटन मंत्रायलय के लोगों ने  दावा किया था  की  हम एक ऐसा टूरिस्ट सर्किल बना  रहे हैं जिसमे बनारस को देख कर पर्यटक इलाहबाद ,चित्रकूट , खजुराहो ,और ओरछा होते हुए झांसी पहुंच जाए  इस टूरिस्ट सर्किल में भविष्य मेंपन्ना , कालिंजर , अजयगढ़ , महोबा  और चरखारी को  जोड़ने की बात भी कही गई थी  साल भर का समय बीत गया  फिर भी योजनाओ को लेकर मंथन और मजे का दौर जारी है । 


1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

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