बुन्देलखण्ड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
देश में जहां एक
और जल सहेजने के जतन में आम आदमी जहां चिंतित
है ,वहीँ सरकार वाहवाही लूटने
के जतन में जुटी है । मामला चाहे देश का
हो अथवा प्रदेश का कागजी घोड़े तो खूब दौड़ते हैं पर यथार्थ के धरातल पर अपेक्षित
परिणाम नहीं मिलते । मध्य प्रदेश के
मुखिया नर्मदा नदी को बचाने के लिए
अभियान चला रहे हैं। वही बुन्देलखंड की
प्रमुख और एशिया की गैर प्रदूषित केन नदी को बचाने के लिए ग्रामीणों को भूख हड़ताल
के लिए मजबूर होना पड़ता है । नदी की रेत निकालने के नाम पर हो रहे अवैध उत्खनन के कारण नष्ट हो रही केन नदी की जल
धारा को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं ।

भूंख हड़ताल पर तीन दिनों तक बैठे रहे
छतरपुर जिले के हिनौता गाँव के कमल सिंह का कहना है की बीरा रेत
खदान जो केन नदी के दुसरे छोर
पन्ना जिले की सीमा में आती है। ये खदान
जुगल किशोर कंस्ट्रक्सन के नाम है । खदान
संचालक ने नदी के मुख्य धारा में पुल
बनाया है जो की अवैध है और इसी पुल के जरिये छतरपुर जिले की सीमा जो हिनौता गाँव
में आती है से अवैध उत्खनन कर रेत का परिवहन करते है \ पन्ना प्रशासन द्वारा नदी का जो सीमांकन कराया गया वह भी सही नही है जिसमे नदी
का अधिकांश क्षेत्रफल पन्ना जिले की सीमा में बताया गया है,। 19 जनवरी 17 को पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील के पटवारी ,आर आई और तहसीलदार ने ठेकेदार से मिली भगत कर
हिनोता की दस हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कर लिया है । अब इस इलाके से अवैध उत्खनन
किया जा रहा है । इस मामले में ग्रामीण मुख्य मंत्री से लेकर जिले के आला
अधिकारियों तक अपनी फ़रियाद पहुंचा चुके हैं , जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो मजबूर होकर गाँव वालों को भूख
हड़ताल पर बैठना पड़ा । ग्रामीणों की मांग है की नदी में बना अवैध पुल तोडा जाये और
हिनौता गाँव की सीमा में किये गये अवैध उत्खनन के खिलाफ ठेकेदार पर कार्यवाही हो
साथ ही दोबारा सीमांकन करवाया जाये । भूख हड़ताल के तीसरे दिन चंदला और अजयगढ़
तहसीलदार ने इनकी सुध ली और आश्वासन दिया को नदी का पुनः सीमांकन कराया जायेगा
। तब कहीं जाकर आंदोलन समाप्त हुआ ।
दरअसल केन नदी
बंदेलखंड की जीवनदायी नदी है , जो कटनी जिले के
रीठी के समीप से निकल कर सात पहाड़ों को चीरती हुई पन्ना ,छतरपुर जिले से होती हुई बांदा के चिल्ला गाँव के यमुना में विलीन हो जाती है । २५० किमी के इस सफर में यह नदी
लोगों को अनमोल जल, रेत का खजान,और
अनमोल कारीगरी के पत्थर उपलब्ध
कराती है । अपने जल से अनेको प्रजातियों के जलचरों के जीवन को सुरक्षित बनाने वाली
इस नदी पर पिछले दो दशकों से लुटेरों की ऐसी नजर लगी की वे इसके अस्तित्व को ही
समाप्त करने पर आमादा हो गए हैं । पन्ना ,छतरपुर और बांदा जिले को करोड़ों की राजस्व आय देने वाली इस नदी के विनाश में
सरकारी चौकीदारों से लेकर जनसेवकों और समाज को जगाने का दावा करने वालों की भूमिका
भी कुछ कम नहीं है ।
केन नदी में
रेत के राजनैतिक , प्रशासनिक
और माफिया गठजोड़ की कहानी भी गजब की है
। चन्द लोगों को रेत के सीमित क्षेत्र
में उत्खनन के नाम पर पट्टे मिले हैं ,
जिसकी आड़ में असीमित क्षेत्र में उत्खनन का
कारोबार होता है । इसके अलावा ,राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के बल पर रेत के
अवैध उत्खनन का अधिकार मिल जाता है । जिसमे सबकी बराबर की
भागीदारी होती है । सारा धंधा चोर-चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर बेधड़क चलता रहता है
। करोड़ों के इस काले कारोबार में जो अवरोध
पैदा करने की कोशिस करता है ,उसे भाई गिरी की
तर्ज में समझा दिया जाता है । पिछले कुछ समय से
चंदला विधान सभा क्षेत्र के बीजेपी
विधायक आर डी प्रजापति विधान सभा में अवैध
रेत उत्खनन का मुद्दा उठाते रहे पर सरकार की तरफ से उन्हें कोई संतोषजनक समाधान
नहीं मिला । पन्ना जिला कलेक्टर ने जरूर अवैध रेत खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने का
प्रयास किया । राजस्व, खनिज पुलिस विभाग
द्वारा की गई इस संयुक्त
कार्यवाही की अजयगढ तहसील क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 112वाहन जप्त किए गए हैं। कार्यवाही के दौरान 300 से अधिक वाहनों की जांच की गयी। भीना, चांदीपाठी तथा चंदौरा रेत खदानों की जांच की गयी। इसमें रेत का अवैध परिवहन करते हुए
कई वाहन जप्त किए गए। रेत का अवैध परिवहन करने के लिए केन नदी पर नहरा घाट में
अस्थाई पुल का निर्माण किया गया था। इसे
राजस्व तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा 4 जेसीबी मशीनों से ध्वस्त किया गया ।
नेहरा घाट पर केन की धार
रोक कर बनाये गए अवैध पल को तो पन्ना जिला प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया /किन्तु छतरपुर और बांदा
जिले में कई अवैध पुल अब भी बने
हैं । जो केन के धारा को अवरुद्ध किये हैं । नियम ये कहते हैं की नदी के मूल स्वरुप से
कोई छेड़ छाड़ नहीं होगी , इसके बावजूद नदी
के बीच में लिफ्टर मशीन से रेत का उत्खनन होता है । जब की नदी जल धारा से तीन मीटर
दूर से रेत खनन का नियम है । जल धारा को
रोककर अपनी परिवहन की बचत के लिए अस्थाई
पुलों का निर्माण कर लिया जाता है ।
स्वीकृत क्षेत्र से कहीं अधिक के क्षेत्रफल में
रेत का अवैध उत्खनन होता है ।
छतरपुर जिले में तो रेट के काले कारोबार का एक और रास्ता
रेत माफियाओं ने निकाल है , ये बाढ़ के समय
खेत में जमा हुई रेत के खनन और परिवहन की लीज लेते हैं और धड़ल्ले से नदी
में खुदाई करते हैं ।
दरअसल केन की रेत उत्तर
प्रदेश के कई प्रमुख नगरों से होती हुई गोरखपुर तक जाती है । इस साफ़ सुथरी रेत की
कीमत भी अच्ची मिलती है, रोजाना लगभग २
हजार से ज्यादा ट्रकों का परिवहन इस रेत को लेकर होता है । केन नदी को मारकर रेत
को लूटने का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है और यह बात सरकार की जानकारी में भी है ।
इसी के चलते महोबा की जन सभा में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुंदेलखंड में
खनन माफियाओं पर जम कर निशाना साधा था । और इनका सम्बन्ध सपा और बसपा से जोड़ा था
।
देखा जाए तो नदियों से रेत के अवैध और वैध
उत्खनन में पर्यावरण संतुलन को दर किनार कर दिया जाता है । उत्खनन कर्ता को सिर्फ
अपना लाभ नजर आता है , उसकी इस लालसा के
कारण नदी नालो के प्राकृतिक तटबंध का तो
नाश होता ही है , नदी के अंदर से
बालू के अत्याधिक दोहन से नदी के प्राकृतिक रूप से प्रवाहित जल में अवरोध उत्पन्न
होता है , साथ ही नदी का ज्यादा पानी जमीन में रिश्ने लगता है । लगभग
यही हाल केन नदी पर देखने को मिल रहा है । जिसको बचाने के लिए लोगों को अब और
ज्यादा सजग होना होगा ।



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