बुंदेलखंड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
बुन्देलखण्ड के सागर में पिछले दिनों बीजेपी प्रदेश कार्य समिति का दो दिवसीय महोत्सव सम्पन्न हुआ था । सरकार के मुखिया से लेकर दल के मुखिया तक आये । सागर में प्रदेश कार्य समिति की बैठक करने के पीछे बीजेपी की एक सोची समझी रणनीति मानी जा रही है । उत्तर प्रदेश के चुनावो को देख कर और बुंदेलखंड में बीजेपी के जनाधार को बरकरार रखने पार्टी ने यह बैठक सागर में की थी । पर पार्टी जो सन्देश उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके वालो को देना चाहती थी वह नहीं दे पाई । खुद मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड वालो को जो सन्देश दिया वह भी काफी निराशा जनक ही रहा ।
कार्य समिति की बैठक को लेकर बुंदेलखंड के लोग उत्साहित थे की सरकार वाली पार्टी की प्रदेश कार्य समिति की बैठक होगी , बड़े बड़े नेता आएंगे मंत्री आएंगे । जिनके सामने बुंदेलखंड के हालात बताएँगे तो शायद कुछ भला हो जाए । कुछ हो ना हो यहां का मेडिकल कालेज ही असली मेडिकल कालेज जैसी व्यवस्थाओ से समृद्ध हो जाए । उत्साहित होकर अपने मेडिकल कालेज और स्वास्थ्य सेवाओ का मुद्दा लेकर मुख्य मंत्री जी से लोगों ने मुलाक़ात भी की , उनसे अनुरोध भी किया की कम से कम मेडिकल कालेज तक चल कर उसकी दशा और दिशा देख लें । इलाके के लोगों ने अपने प्रदेश के मुखिया को लिखित में ज्ञापन भी दिए ,और समाचार पत्रो की कटिंग भी दी । भोले भाले बुन्देलखंडियों को नहीं पता था की प्रदेश की दशा और दिशा सुधारने में जुटे व्यक्ति के पास भला सागर के मेडिकल कालेज की समास्या के लिए कहाँ समय बचता है ।
शिवराज ने तो बुंदेलखंड के सागर संभाग से ही पांच निर्वाचित जन प्रतिनधियों को अपने मंत्री मंडल में स्थान दिया हुआ है । ये सभी पहुंचे हुए और कद्दावर नेता हैं , चाहे सागर के भूपेंद्र सिंह हो या गोपाल भार्गव , दमोह के जयन्त मलैया , पन्ना की कुसुम मेहदेले हो अथवा छतरपुर की ललिता यादव । ललिता यादव को छोड़ बाकी सभी कबीना मंत्री हैं और सबके सब शिवराज सिंह से वरिष्ट माने जाते हैं , इनमे से कुसुम मेहदेले , भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव ऐसे नेता हैं जो मुख्य मंत्री पद के दावेदार भी माने जाते हैं । इन नेताओं के मंत्री मंडल में रहते यदि सागर के मेडिकल कालेज की दशा और दिशा नहीं सुधर रही है तो दोष किसका माना जाएगा ? बीजेपी ने तो पिछले दो विधान सभा चुनाव बुंदेलखंड मेडिकल कालेज के नाम पर बुंदेलखंड में जीत लिए । २००७ से स्थापित इस मेडिकल कालेज की अवव्यवस्थाओं को लेकर सागर के पत्रकारों , यहां के कुछेक नेताओं ने जम कर प्रयास किये कोर्ट तक गए , किसी तरह मान्यता तो बहाल करा ली दशा नहीं सुधार पाए । इस मेडिकल कॉलेज में ना तो पर्याप्त स्टाफ है ना ही सुविधाएं । इन हालात के कारण छतरपुर , टीकमगढ़ और दमोह के लोग तो ठीक खुद सागर के लोगों को इलाज लिए भोपाल , जबलपुर ,नागपुर और दिल्ली जाना पड़ता है ।
हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के लिए 177 करोड़ रुपये स्वीकृत किए है ।
इसको लेकर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी ने फेसबुक के माध्यम से लोगों से अपील की है कि | " शिवपुरी, रतलाम, विदिशा और शहडोल वालो आप झांसे में मत आना !
सरकार आपके यहाँ मेडिकल कॉलेज खोल रही है। पर ज़रा, हमारे सागर में पांच साल पहले खुले सरकारी मेडिकल का हाल तो देख लीजिये कोसते रहोगे !
हमारे यहाँ(सागर ) मेडिकल कॉलेज तो है पर उसमे इलाज नहीं होता, क्योंकि डॉक्टर नहीं है, उपकरण नहीं हैं। ये तीनों न होने के कारण ए एमसीआई की मान्यता कभी हो जाती है कभी निरस्त हो जाती है। सरकार वादे पर वादे घोषणा पर घोषणा कर रही है पर हो कुछ नहीं रहा.....
हाई कोर्ट में पेटिशन लगाई है पर सरकार कुछ नहीं कर रही या कर सकती। आप लोग भी कहीं इसी रट्टे में न फँस जाएँ, इसलिए सावधान हो जाइए वरना हमारे लोगों की तरह पछतायेंगे ।
असली मेडिकल कॉलेज बनाओ अभियान, सागर !"
पिछले दो चुनाव मेडिकल कॉलेज के नाम पर जीतने वालों को लोगों के विरोध के चलते फिर से कोई नया मुद्दा तलाशना होगा ।
प्रथक बुंदेलखंड :-
विशाल जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश की राजनैतिक दशा को बदलने के लिए बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व कोई भी कदम उठा सकता है । इसके संकेत उत्तर प्रदेश के बीजेपी नेताओं को काफी पहले से दिए जा चुके हैं । राजनीतिक समीक्षक मानते हैं की उमा भारती बगैर किसी इसारे के बुंदेलखंड राज्य की वकालात नहीं कर सकती हैं । ऐसे में ये अनुमान लगाया गया था की सागर में होने वाले पार्टी कार्यसमिति की बैठक में प्रथक बुंदेलखंड राज्य की मांग का समर्थन दिया जाएगा जिसका लाभ उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में पार्टी को होगा । पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री और सागर के निवासी भूपेंद्र सिंह ने यह कह कर बुंदेलखंड राज्य की मांग पर पानी डाल दिया की वे किसी भी कीमत पर मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड को प्रथक राज्य नहीं बनने देंगे । साथ ही उन्होंने जोड़ा की यहां के लोग नहीं चाहते की बुंदेलखंड राज्य बने ,। अगर जरुरत पड़ी तो महाकोशल राज्य जरूर बन सकता है । रीवा , जबलपुर और सागर संभाग को इसमें जोड़ा जा सकता है ।
भूपेंद्र सिंह के इस बयान को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार में बीएसपी जम कर बुंदेलखंड इलाके में उपयोग कर रही है और बीजेपी दोहरे चरित्र को बता रही है । यहाँ यह याद रहे की मायावती ने अपने शासन काल में प्रथक बुंदेलखंड का प्रस्ताव विधान सभा पास किया था । जिसमे उत्तर प्रदेश के झाँसी , ललितपुर , महोबा , बांदा ,हमीरपुर , चित्रकूट , जालौन को मिलाकर एक राज्य बनाने की बात कही थी । मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से भी पृथक राज्य की मांग उठती रही है । अब मंत्री जी द्वारा महाकौशल राज्य की बात करके बुंदेलखंड के लोगों की भावनाओ पर जले पर नमक डालने का काम किया है ।

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