21 अगस्त, 2016

BUndelkhand Dayri


पानी को तरसते बुंदेलखंड में हुई आफत की बारिश 

रवींद्र व्यास 

बुंदेलखंड का इलाका पिछले तीन चार साल से बून्द -बून्द पानी के लिए तरश रहा था । इस बार कुछ ऐसा पानी बरषा की ये आफत की बारिश हो गई । हाल की बारिश के इस प्रकोप में इस क्षेत्र के 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई ।तीन दिन तक बुंदेलखंड के कई जिलों का  सड़क संपर्क काटा रहा ।  सड़के ,पल पुलिया क्षति ग्रस्त हो गए तो कही स्टॉप डेम बाह गए तो कही तालाब फुट गए । अंग्रेजो के शासन काल में बने गंगऊ डेम की दीवाल भी इस बार पानी का दबाव नहीं झेल पाई । बुंदेलखंड के हर बाँध के गेट खुल गए तो   तालाबो ,नदी नालों ने  भी अपनी सीमा लांघी और  जहां जो मिला उसे बर्बाद करता पानी चला गया । फिर वो चाहे मानव हो  मानव की सुख सुविधाओं के लिए बनी सड़क हो या पुल पुलिया अथवा मानव और जीवो के पेट की आग बुझाने वाले खेत हो फिर सर पर साया बनाने वाले घर । 

मध्य प्रदेश के छः और उत्तर प्रदेश के सात जिलो में तीन चार दिन की लागातार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया की उत्तर प्रदेश के  करीब एक दर्जन और मध्य प्रदेश वाले इलाके के १८ से ज्यादा लोग पानी की भेंट चढ़ गए । सबसे दर्दनाक सागर जिले में हुआ जहां एक मकान बारिस के कारण ऐसा धरासाईं हुआ की उसमे तीन मासूम बच्चो सहित सात लोगों की मौत हो गई पांच लोग घायल हो गए । छतरपुर जिले के  बक्शवाहा विकाश खंड में  एक कार छीपा नाले में बह गई । कार  में सवार छः लोगों में से तीन को स्थानीय लोगो की मदद से बचा लिया लिया गया किन्तु तीन लोग बह गए , सागर के रहने वाले इन तीनो लोगों के शव जब घर पहुंचे तो सागर नगर शोक से सराबोर हो गया ।  
                           मौसम विभाग की चेतावनियों का लाभ जिला प्रशासन को अवश्य मिला । छतरपुर ,पन्ना, टीकमगढ़, दमोह ,सागर , महोबा, बांदा , चित्रकूट , हमीरपुर , झाँसी , ललितपुर में लोगों समय रहते सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया । पर इन जिलो में डूब क्षेत्र में आये सैकड़ों कच्चे घर धरासाई  । महोबा में बीस साल बाद इतनी बारिश हुई है । महोबा के कीरत सागर के ओवर फ्लो के फाटक जब नहीं खुले तो जेसीबी मशीन से तालाब की पट्टी तोड़ कर पानी बहाया गया । 

नदियों  का कहर : 
केन नदी का कहर बांदा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में देखने को मिला । केन नदी पर बने बाँध गंगऊ , बरियारपुर  और इसमें मिलने वाले रनगुआ बाँध का पानी जब केन में छोड़ा गया तो यह अपने रौद्र रूप में आ गई ।छतरपुर जिला के रामपुर घाट ,बरीखेरा , गोयरा ,फत्तेपुर ,मडैयन ,कुरधना ,बरीखेरा ,बडनपुर ,परेई ,हाजीपुर जैसे गाँवों में संकट पैदा हो गया । वहीँ बांदा उत्तर प्रदेश में नदी किनारे बसी बस्तियों में पानी भर गया । अकेले बांदा जिले में घर गिरने से छह लोगों की मौत हो गई ।   
                  बेतवा ,यमुना , केल , उर्मिल ,धसान ,चन्द्रावल , सोनार ,जूडी , व्यारमा , शून्य ,मंदाकनी आदि नदिया अपना रौद्र रूप दिखाती रही । हमीरपुर जिसके लगभग चारों ओर से  बेतवा और यमुना का बहाव क्षेत्र है  और नदियों के तीव्र प्रवाह और कटाव के कारण हमीरपुर सिकुड़ता  जा रहा है ।  अकेली बेतवा नदी के बहाव क्षेत्र में ८६ से ज्यादा गाँव की डेड लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित होती है । जबकि यमुना नदी के बहाव क्षेत्र में इस जिले के २० गाँव की लगभग ३० हजार की आबादी प्रभावित होती है । 
                                 राम की नगरी चित्रकूट में मंदाकनी नदी ने जब अपनी सीमाएं लांघी तो राम वन जैसे इलाके के लोगों को स्थान छोड़ना पड़ा । 

टीकमगढ़ नगर का  जामनी नदी पर बने  फ़िल्टर प्लांट में भी पानी भर गया । जिस कारण नगर  लोगों को पानी की सप्लाई अवरुद्ध हुई । पन्ना जिले में अमानगंज कस्बा मिढ़ासन नदी के तट पर बसा है जब यह नदी उफान पर आई तो इसका पानी यहां के थाने तक जा पहुंचा । छतरपुर जिले के बिजावर  विलाके के धरमपुरा और जैतपुर गाँव में जब पानी भरा तो विधायक गुड्डन पाठक  खुद गाँव तक पहुंचे और लोगों को भरोषा दिलाया और गाँव से पानी निकालने की व्यवस्था कराई । खजुराहो की खुडर नदी पर बना स्टाप डेम ही बह गया । नोगांव में दिलीप बिल्डकॉम द्वारा निर्मित पुलिया और सड़क क्षति ग्रस्त हो गई । 

                                       बारिश के पूर्वानुमान से  आपदा प्रबंध तो किये गए ,। वहीँ बारिस ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किये हैं । साथ ही निर्माण एजेंसियों के दूरगामी दृष्टिकोड का अभाव भी साफ़ नजर आया ।  यह सभी जानते हैं की यदि सड़क मार्ग अवरुद्ध होंगे  तो किसी भी स्थान पर भीषण विपत्ति के समय प्रशासन का पहुंचना असम्भव होगा । इसके बावजूद  अनेकों स्थानों पर सड़क से निचे रपटे , पुल ,पुलिया , और निर्माणाधीन पुल पुलिया  के ऊपर से बहता पानी लोगों का मार्ग रोके रहा । 
                                        पिछले तीन चार साल से  सूखा की त्रासदी झेलने वाला बुंदेलखंड इलाका अब बारिस की त्रासदी से दो चार हो रहा है ।  अति वर्षा , और खेतों पर हुए पानी के भराव ने  उडद , तिल की फसलों को पूर्णतः चौपट कर दिया है । बुंदेलखंड के किसानों की हालत सर  मुड़ाते ही ओले पड़े जैसी हो गई है ।  






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