टिन्टो (रियो ) का टंटा
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रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के छतरपुर जिला में पिछले १४ साल से हीरा की खोज और खुदाई के जतन में जुटी ,आस्ट्रेलियन हीरा कंपनी रियो टिंटो अब बकस्वाहा में हीरा नहीं खोदेगी । इस साल के अंत तकवह अपना कार्य पूर्णतः बंद कर देगी । यह विदेशी कंपनी भी सरकार की सुस्त चाल औरसियासती तिकड़मो से हार कर सैकड़ों करोड़ खर्च कर अब हीरा के मोह को त्याग रही है । ग्रहों कीचाल और ज्योतिष में भरोषा करने वाले ज्ञानी मानते है की हीरा एक रत्न है , जो नीलम जैसेरत्न की तरह हर किसी के अनकूल नहीं होता । यह शुभ और अशुभ फल देता है । जिसकेकारण आपको आर्थिक ,मानसिक और शारीरिक नुक्सान और परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं। शायद रियो टिंटो के साथ भी ऐसा ही हो गया ,उनकी गृह दशा हिंदुस्तानी हीरे के अनकूल नहींथी , जिस कारण १४ वर्ष के लम्बे संघर्ष के बाद भी उन्हें हीरा खोदने का स्थाई अधिकार नहींमिल पाया । ग्रहों की चाल बदलने के बाद उम्मीद हो सकती है की परिस्थितियां रियो के अनकूलहो जाएँ । पर इसकी उम्मीद कम ही लगती हैं , क्योंकि भारत के प्रधान गृह के दो पूंजी गृह कीदृष्टि राहु _केतु की तरह बक्स्वाहा की इस हीरा खदान पर है ।


बुंदेलखंड की इस धरा में हीरा सिर्फ पन्ना और छतरपुर जिला भर में ही नहीं हैं , बल्कि हीराभंडारो की खोज टीकमगढ़ और दमोह जिलो में भी हो चुकी है । कीमती खनिज संपदा से भर पूरइस इलाके के लोगों को सपने दिखा कर बहलाया जाता है । पर लोग नहीं समझ पाते की सुबहहोते ही सपने टूट ही जाते हैं । और फिर यहाँ के लोग को अभावो और बदनसीबी में जीने कीवास्तिकता को स्वीकारना पड़ता है । पिछले एक दशक से ज्यादा समय से लोगो को हीरा चकाचौन्ध में भ्रमित किया जा रहा था । अब उसी हीरा कंपनी रियो टिंटो ने अपने कारोबार कोसाल के अंत तक समेटने का एलान करके छतरपुर जिले को और मोदी और शिवराज की निवेशनीति को एक बड़ा झटका दिया है । वहीँ दूसरी तरफ पन्ना की उथली हीरा खदान को कारपोरेट जगत को देने की रण नीति बनाई जा रही है ।
सागर के एक भूगर्भ शास्त्री डॉ स्थापक की रिपोर्ट पर आस्ट्रेलिया की प्रमुख कंपनी रियो टिंटो ने(रियो टिंटो एक्सप्लोरेशन इंडिया प्रा.ली.) ने २००४ से इस जिले के बक्सवाहा इलाके में हीरा खोजने का काम शुरू किया था । कम्पनी को इस एरिया में ८ किम्बरलाईट रोक्स (चट्टान ) कासमूह मिला कम्पनी ने इस प्रोजेक्ट का नाम "बन्दर परियोजना" दिया \ 33 करोड़ की लागतके हीरा सेम्पल प्रोसेसिंग प्लांट का उदुघाटन मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिव राज सिंह चौहान ने२७ अक्तूबर2009 को किया था इस आधुनिक प्लांट को रियो टिंटो ने ऐसे ही नही लगाया था ।। ,कम्पनी को जो प्रारंभिक रिपोर्ट मिली थी उसके मुताबिक यहाँ ३७ मिलियन टन हीरा के भंडारहै ,। हीरे की गुणवत्ता को भी दुनिया के हीरा से बेहतर बतया गया था । ,कम्पनी को भरोषाथा की यहाँ का हीरा पन्ना हीरा खदान से ७ गुना ज्यादा मूल्यवान होगा , यहाँ की उत्पादनक्षमता भी पन्ना से २० गुना ज्यादा होगी । और यह एरिया विश्व के १० शीर्ष हीरा उत्पादकक्षेत्रो में शामिल हो जाएगा । लोगों को खुद मुख्य मंत्री ने भरोषा दिलाया था की इस परियोजनाके कारण स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा , बुंदेलखंड की किस्मत हीरा की तरह चमकनेलगेगी ।
अब कंपनी ने २२०० करोड़ की इस परियोजना को इस साल के अंत तक बंद करने और किसीतीसरे पक्ष को देने का विचार करने का कहकर देश की निवेश नीति पर सवालिया निशान लगादिया । रियो टिंटो के इस कदम के पीछे माना जा रहा है की पिछले कुछ समय से इस हीरा खदानको लेने के लिए देश के कई बड़े उद्योगिक घराने लगे थे । इन उद्योग पतियों की ऊँचीराजनीतिक पहुँच भी मानी जाती है । उस पर पर्यावरण की स्वीकृति अब तक ना मिलना एकबड़ा कारण बताया जा रहा है \
सामाजिक संघर्ष
दरअसल रियो टिंटो को 26 मई 2006 को हीरे की तलाश के लिए सर्वे लायसेंस की अनुमतिमध्यप्रदेश सरकार ने जारी की थी। कंपनी को बकस्वाहा ईलाके की 2484.23 हेक्टेयर भूमि परयह सर्वे करना था जिसमें 2329.7 हे. भूमि वन परिक्षेत्र की थी। । प्लांट स्थापना के बादरियोटिन्टो ने 5 अप्रेल 2012 को 954 हे. राजस्व भूमि को अधिकृत करने के लिये कलेक्टरछतरपुर को आवेदन दिया था ।
12 फरवरी 2014 को जब बक्सवाहा ब्लॉक के कसेरा गांव में पर्यावरण को लेकर जान सुनवाई हुईतो स्थानीय लोगों ने रियो टिंटो के कारण हो रहे और होने वाले पर्यावरण के नुकशान पर अपनीजोरदार दलीलें देकर इस योजना को समाज के लिए एक बड़े नुकशान के रूप में दर्शाया था । ५लाख व्रक्षो ,नदी के अलावा जंगली जीव जंतुओं के लिए भी इसे अहितकर बताया था । वहीँ यह भी बताया गया था की यह इलाका लुप्त होते बाघों का रहवास क्षेत्र भी है ।
कंपनी के लोगों ने तर्क दिए थे की कुछ हजार वृक्ष ही कटेंगे , उससे तीन गुना ज्यादा वृक्षारोपणकिया जाएगा । नदी के नष्ट होने या जल स्तर में गिरावट और बाघ के रहवास क्षेत्र की बात को कंपनी ने कपोल कल्पित बताया था ।
सामाजिक सरोकार
रियो टिंटो हीरा खनन परियोजना को लेकर जहां लोगों में विरोध देखने को मिला वहीँ , ऐसे भीलोग हैं जो इस परियोजना को बुंदेलखंड के लिए एक आवश्यक परियोजना मानते हैं । दरअसलयह परियोजना ऐसे इलाके में लग रही थी , जिसका अधिकाँश क्षेत्र बंजर है , अथवा कम उपजवाला है । इस योजना से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर बढ़ते , साथ ही आस पास काकारोबार भी बढ़ता ।
दूसरी तरफ रियो टिंटो ने अपने अनकूल माहौल बनाने के लिए कई सामाजिक कार्य भी शुरूकराये थे । यूनिसेफ जैसी संस्था इस इलाके के गाँव में आंगनवाड़ी केंद्रों को मदद देने का कामकर रही है , शिक्षा के क्षेत्र में कमजोर बालक बालिकाओ के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था ,गाँव में पेयजल उपलब्ध कराने की पहल जैसे कई कार्यक्रम शुरू किये हैं । रियो टिंटो के जाने केबाद संभवतः ये सभी कार्यक्रम ठन्डे बास्ते में चले जाएंगे ।
दरअसल रियो टिंटो मामला वन सलाहकार समिति के पास लंबित है , जिससे कंपनीको अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है । माना जाता है की दुनिया की प्रमुख खनिज उत्खनन कंपनी रियो टिंटो की कुल आय में हीरा की आय मात्र 5 फीसदी है । इस आर्थिक समीकरण औरपरियोजना पर आये दिन होते विवादों कारण कंपनी ने इस परियोजना से दूर ही रहने काफैसला किया है । हालांकि यह अलग बात है की दुनिया में आज भी हिंदुस्तान के हीरे की अपनीएक अलग पहंचान है । बकस्वाहा इलाके की इस खदान से दुनिया का श्रेष्टतम हीरा निकलने कीउम्मीद जताई गई थी ।
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