24 अप्रैल, 2016

Bundelkhand Dayri


 संकट में समाधान की तलाश 


रवींद्र व्यास 


बुंदेलखंड में जल को लेकर हालात दिन बा दिन बदतर होते जा रहे हैं । बुंदेलखंड के अथाह जल श्रोत का केंद्र माने जाने वाले छतरपुर जिले के भीमकुंड का पानी भी इस बार  नीचे खिषक गया है । भीम कुंड का इतना नीचे पहुंचा जल स्तर यहां के लोगों ने अपनी याद में पहली बार देखा है । केंद्रीय भूजल बोर्ड की सर्वे रिपोर्ट बताती  हैं की देश में 2001 के आंकड़ों के अनुसार प्रति व्यक्ति 5120 लीटर पानी बचा है ।  2025 तक पानी की उपलब्धता 25 फीसदी ही रह जायेगी । 



                                बुंदेलखंड में जल के संकट का सामना  लगभग हर नगर ,कस्बे  और गाँव के जीव  कर रहे हैं ।  छतरपुर नगर के मुख्य जल प्रदाय वाली धसान नदी और खोप ताल सूख गया है । बूढ़ा बाँध से भी 15 मई तक ही पानी की जुगाड़ हो पाएगी । शेष 45 दिनों कैसे चलेगा काम यह बड़ा सवाल लोगों को बेचैन कर रहा है । छतरपुर नगर पालिका प्यास लगने पर कुआं खोदने की कहावत को चरितार्थ कर रही है । पिछले एक हफ्ते के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से जारी बयानों में यह बताने का प्रयास किया गया की वे नगर की भीषण होती जल समस्या के प्रति बहुत चिंतित हैं । एक आदेश भी जारी किया गया की नगर के सभी मकान मालिकों को अपने यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना अनिवार्य होगा । गिरते जल स्तर को बनाये रखने के लिए यह एक अच्छा प्रयास माना जा सकता है , बशर्ते इसमें प्रचार की लालशा ना हो और नेक नियति से काम की ललक हो । 



  गिरते भू जल स्तर को बनाये  रखने के लिए  वाटर हार्वेस्टिंग की योजना सरकार ने वर्षो पहले शुरू की थी ।  पर विडंबना देखिये खुद सरकारी भवनों में ही वाटर हार्वेस्टिंग को नहीं अपनाया जाता । हमें एक एन जी ओ के प्रमुख मिले वे बताने लगे की आज नगर पालिका वाटर हार्वेस्टिंग की बात कर रही है जबकि  हम जब इनके पास  इस योजना को लेकर गए थे तो इसे खर्चीला बताकर नकार दिया  था । अब ये गए या नहीं गए , बात किससे कर आये ये अलग बात है ? पर वाटर हार्वेस्टिंग योजना जल स्तर बनाये रखने के लिए एक अच्छी पहल है , यही कहा जा सकता है की देर आये दुरुस्त आये । इसमें कुछ कार्य और भी किये जा सकते हैं  जैसे नगर के बेकार पड़े कुओं की सफाई ,और उनमे आस पास के घरों की छतों के वर्षा जल को जोड़ा जाए इससे ना सिर्फ कुए उपयोगी बने रहेंगे बल्कि उनसे जल स्तर भी बना रहेगा । देखा जाए तो जब ट्यूब वेल से पानी निकाला  जाता है तो उससे आस पास का जल बड़ी तेजी से पम्प खींचता है जो  बिगड़ते जल स्तर का एक बड़ा कारण बनता है । 
       
                 इंदौर में वहां के कलेक्टर ने टैंकों से जल विक्रय पर प्रतिबन्ध लगा दिया है , ट्यूब वेल खोदने पर रोक लगा दी है , यदि कही खोदा जाता है तो इसकी जिम्मेदारी सम्बंधित एस डी एम की होगी , और उसके विरुद्द कार्यवाही होगी । इसी तरह पर्याप्त जल क्षमता वाले  ट्यूब वेल  जिला प्रशासन ने अधिग्रहित करने के आदेश दे दिए हैं । छतरपुर जिला प्रशासन ने खनन पर रोक तो लगा दी किन्तु नगर के पर्याप्त जल क्षमता वाले ट्यूब वेल अधिग्रहण हेतु नगर पालिका परिषद आगे आई है । परिषद को अब याद आई है की नगर का प्रमुख जल श्रोत खोप ताल का गहरीकरण कराकर अधिक जल संग्रहित किया जा सकता है , इस लिए शनिवार को इसका  शुभारंभ पूजन के बाद शुरू किया गया । इसके लिए नगर पालिका ने ५० लाख की धन राशि तय की है । 


                                     नगर के सिकुड़ते  तालाब भी  सूखते जा रहे हैं , नरसिंह मंदिर का तालाब पूर्णतः मैदान सा बन गया है , इन हालातों में गिरते जल स्तर के कारण अधिकांश  हेंड पम्प और ट्यूब वेळ ने साथ छोड़ दिया है । नगर की पेय जल दशा को बनाये रखने के लिए  नगर पालिका टेंकरो से लोगों तक पानी पहुंचाने का दावा करती है । जब की दूसरी तरफ लोग कहतें हैं की उनके नलों में  पानी नहीं आता ,टेंकर भी नहीं आता , मजबूरन खरीद कर पानी लेना पड़ता है ।




                                दरअसल रियासत काल में नगर के जल प्रबंधन को बनाये रखने के लिए तालाब , बावड़ी और कुए बनवाए थे ।       छतरपुर नगर में प्रताप सागर , राव सागर , किशोर सागर , रानी तलैया , विंध्यवासनी तलैया , ग्वालमगरा तालाब , नरसिंह मंदिर तालाब , पठापुर का ताल और  गायत्री मंदिर तालाब  नगर के जल स्तर बनाये रखने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाते थे ।  तालाबों पर कांक्रीट के जंगल उग गए , तालाबों तक पहुँचने वाले जल श्रोतो पर अवरोध उत्पन्न हो गए परिणामतः जल भराव पूर्णतः नहीं हो पाता । नगर पालिका धसान नदी से जल भराव की बात करती है ,। पर   नगर पालिका और प्रशासन इन तालाबों और इनके श्रोतो पर हुए अतिक्रमण को हटाने की बात नहीं करती है ।  नगर की  नजर बाग़ , पुलिस लाइन , गांधी आश्रम , मोटे के महावीर , नारायण बाग़ ,संकट मोचन , सरानी दरवाजा , सिद्ध गणेशन मार्ग सहित लगभग एक दर्जन से ज्यादा बावड़ी में से अधिकाँश कचरा घर का रूप ले चुकी हैं । बुंदेलखंड के सागर नगर की तरह यदि छतरपुर नगर में भी नगर पालिका और नागरिक इन बावड़ियों के रख रखाव का प्रयास करती तो एक एक बड़े संकट से कुछ तो निजात  मिलती ।

Social Media Foundation
Social Media Foundation

18 अप्रैल, 2016

Bundelkhand Dayri

पाताल में पहुँचता पानी 

रवीन्द्र व्यास   

SOCIAL MEDIA FOUNDATION


बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर जिले के नौगांव के निकट धसान नदी में  पिछले दिनों पानी की तलास में नगर पालिका ने कई बोर करवाए पर किसी में पानी नहीं मिला । आम तौर  पर देखा जाए तो यह सामान्य घटना है , किन्तु यदि सोचा जाए तो यह एक भयानक चेतावनी है । सदियों से बहती नदी में यदि  बोर कराने पर  पानी नहीं मिल रहा है तो बाकी स्थानों की दशा क्या होगी । क्या यह ये बताने के लिए पर्याप्त नहीं है की बुंदेलखंड का इलाका अब भू -जल दोहन के लिए अनकूल नहीं है ? सरकारी रिकार्ड में भू जल से समृद्ध माने जाने वाले इस क्षेत्र में पुनः सर्वेक्षण की जरूररत है । 


          दरअसल जिले की नोगाँव नगर पालिका के सामने जनवरी माह में ही जल संकट खड़ा हो गया था । संकट के समाधान के लिए नगर पालिका ने धसान के आस पास जल श्रोत तालशे , टीला जलाशय से पानी लाने का भी प्रयास किया पर हर जगह से नाकामी के बाद पालिका ने धसान नदी में ही कई बोर इस आशा में करा दिए की नदी में बोर कराने से पर्याप्त भू जल मिल जाएगा , पर नहीं मिला । भू -जल तो नहीं मिला पर इस जतन ने एक खतरे की घंटी जरूर बजा दी जिसको समझने की जरूरतः ना सिर्फ नागरिकों को है बल्कि  सरकार और उसके तंत्र को भी है । 
बोर की असफलता के बाद नगर पालिका के सामने संकट था की  अपनी 70 हजार की आबादी की प्यास कैसे बुझाए ? नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती अभिलाषा शिवहरे कहती हैं की  नगर में  पानी पास की धसान  नदी से सप्लाई होता था  ।पिछले जनवरी -फरवारी  माह में नदी पूर्णतः सूख गई थी । नगर पालिका ने नदी में भी कई बोर करवाए पर वहां भी पानी नहीं निकला । ऐसी हालात में परिषद के सामने एक बड़ा संकट आकर खड़ा हो गया की लोगों को पानी कैसे दिया जाए । नोगाँव इलाके में मात्र 11 इंच वर्षा हुई थी , नगर के बोरवेल भी ठप्प हो गए थे । पालिका के बोर वेळ से सिर्फ 2 लाख लीटर पानी ही हम जुटा पा रहे थे । जब की नगर को रोजाना २४-२५ लाख लीटर पानी की जरुरत थी । ऐसे में हमने और  नगर पालिका के  परिषद ने बगैर किसी दल गत भावना के  लोगों से जल दान की अपील की । इसका असर ये हुआ की परिषद के पार्षद जितेन्द्र यादव उनके भाई जिला पंचायत सदस्य प्रीतम यादव , महेंद्र अग्रवाल ,सोनू जैन ने  अपने बोर वेळ का पानी नगर पालिका को दान में दे दिया । गर्मी में जो टेंकर लगाए गए हैं वे लोग भी अपना पानी देते हैं   जिससे लगभग 18 लाख लीटर पानी एकत्र हो जाता है । इस तरह 20 लाख लीटर पानी नगर को हर दूसरे दिन प्रदाय किया जा रहा है । महीने भर से यह नगर पालिका दान के जल से लोगों की प्यास इसी तरह से बुझा रही है । 


              परिषद दान का  पानी   सम्पवेल में डालती  है और फिर नलों के माध्यम से लोगों तक पहुंचता है । टेंकर सिर्फ उन्ही इलाकों में जाते हैं जहाँ पानी की लाइन नहीं हैं और  नलो से वहां पानी नहीं पहुंच पाता । 
 नौगांव नगर के  समाजवादी पार्टी के नेता और जिला पंचायत सदस्य प्रीतम यादव  कहते हैं की  जब लोगों की प्यास का सवाल आता है तो हम  पीछे नहीं हटते हैं । श्री यादव ने बताया की हमने अपने  सूखे खेतों को पानी देने से कहीं जयादा जरुरी समझा लोगों को पानी देना । नगर पालिका अध्यक्ष की अपील पर  अपने दोनों खेतों के तीनो बोर नगर पालिका के हवाले कर दिए । और जरुरत पड़ने पर और बोर कराने की बात कह रहे हैं । इसी तरह से नगर के महेंद्र अग्र्रवाल और सोनू जैन ने भी अपने बोर वेळ नगर पालिका  के हवाले कर दिये ।    
    कभी ब्रिटिश पोलिटिकल एजेंट द्वारा बसाया गया नौगांव नगर प्रदेश  का एक मात्र ऐसा नगर है जो अपने 180 चौराहों के लिए जाना जाता है । यहां 36 रियासतों की विशाल कोठियाँ  हुआ करती थी  जिनमे जल के श्रोत के लिए कुओं का निर्माण हर कोठी में किया गया था , पर आज इनमे से अधिकांश नष्ट हो गए हैं , नगर के 70 फीसदी से ज्यादा ट्यूब वेळ जबाब दे चुके हैं । इसके पीछे जो कारण बताया जा रहा है यह  जिले की यह एकलौती नगर पालिका है जहाँ कोई सरोवर नहीं है । 

           
छतरपुर जिले में लगातार अल्प वर्षा ने इस बार लोगों के सामने एक ऐसा संकट खड़ा कर दिया है , जिसने उसका सुख चैन  सब छीन लिया है । जिले के बिजावर विकाश खण्ड के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र किशनगढ़ के  पाठापुर , कर्री , टिपारी (नगदा ) महर खुवा , बेहरवारा , बिला , रायचोर , धबरा , नैगुवां , पुरवा , गर्दा ऐसे गाँव हैं जहां लोगों की दिनचर्या पानी से शुरू होती है और पानी पर ही ख़त्म होती   हे ।  पर इस क्षेत्र में पानी प्रदाय के लिए टेंकर उन गाँवों को दिए गए जिन गाँवों में जल के श्रोत पर्याप्त थे । टेंकर वितरण की यह दशा देख कर यही कहा जा सकता है की सरकार और प्रशासन भी चाहता है जो परेशान हैं वे और परेशान हो ? 

                        प्रकृति और वन सम्पदा से परिपूर्ण इस क्षेत्र के पूर्व में केन , उत्तर में श्यामरी ,पश्चिम में बराना और दक्षिण में सोनार नदी का जल प्रवाहित होता रहता है । इसके अलावा दर्जनों  वर्षा कालीन नाले  इस इलाके में प्रवाहित होते हैं , । इन नदियों के मध्य का 100 किमी का इलाका जल के लिए तरश्ता है । सरकारे  आती जाती हैं , नेताओ का सैलाब चुनाव के समय उमड़ता है फिर ना जाने कहाँ खो जाता है । पाठापुर तो ऐसा गाँव है जहां सिर्फ एक मात्र महिला विधायक( उमा यादव ) इस गाँव तक पहुंची थी , इसके बाद आज तक कोई नहीं पहुंचा । शायद आदिवासियों का उपयोग जन प्रतिनधि सिर्फ वोट के लिए ही करना जानते हैं । 
                          जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बस्तों में बंद कागजों और कम्प्यूटर में जिले में 385 नल जल योजनाएं ,12 हजार 375 हेंड पम्प लगे होने का दावा किया जा रहा है । भू जल सर्वेक्षण की रिपोर्ट को अगर देखा जाए तो छतरपुर जिले में 45 से 65 मीटर जल स्तर नीचे खिसका है । मतलब साफ़ है की जिले में प्रथम लेयर जो 35 मीटर की मानी जाती है का जल दोहन कर चुके हैं दूसरी लेयर जो 70 मीटर की मानी जाती है उसके नजदीक हैं ।  ऐसे हालातो में 60 फीसदी हेंड पम्पो ने साथ छोड़ दिया है । गिरते जल स्तर के कारण नल जल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं । इन नल जल योजनाओं में अधिकाँश नल जल योजनाएं बंद पड़ी हैं कही जल श्रोत सूखे तो कही विद्दुत कनेक्शन कटा तो कही पम्प खराब तो कहीं पंचायत ने संचालित करने से ही मना कर दिया ।  बुंदेलखडं पैकेज की नल जल योजनाओं के तो और भी बुरे हाल हैं । बक्श्वाहा ब्लाॅक की 9 नलजल योजनाओं में चार बंद ५ चालू , बड़ामलहरा की १५ में ६ बंद ९ चालू ,राजनगर की २० बंद ९ चालू , छतरपुर की २० बंद ११ चालू , नोगाँव की 14 , गौरिहार की ११ ,और लवकुशनगर की बुंदेलखंड पॅकेज की  ८ नल जल योजनाएं बंद पड़ी हैं । जिले के 131 गाँव सिर्फ इस कारण से वीरान हो गए क्योंकि उनमे कोई जल श्रोत ही नहीं था । सरकारी आंकड़े बताते हैं की पिछले चार सालो में पानी के नाम पार पानी की तरह पैसा बहाया गया और 271 करोड़ रुपये खर्च किये गए । 

                        सरकार विधान सभा में इसे प्रकृति का कहर मानती है , पर इंतजाम से तौबा कर लेती है । शायद इसी लिए मध्य प्रदेश सरकार ने लोगों को प्रकृति के भरोशे छोड़ दिया । जब की जरुरत इस बात की है की सरकार और जन मानस को पाताल में पहुँचने वाले पानी को ऊपर उठाने के लिए वृहद जल सरचनाो का निर्माण करे ।  , वृक्षारोपण किया जाए , आवश्यक सी सी का जाल ना बिछाया जाए , ज्यादा से ज्यादा भूमि खुली रखी जाए, तालाबों और नदियों के अतिक्रमण को सख्ती से रोका जाए ।  , भू जल का अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाईं जाए । 

14 अप्रैल, 2016

Chaild Lbour

 कुआ खोदते बच्चे 


पन्ना /एम पी / बुंदेलखंड /
जिले के अजयगढ जनपद पंचायत के  ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के ग्राम पैरहा मे  घटिया सीसी रोड, और कुआ खुदाई में 

बच्चों को मजदूरी करता देख जनपद अध्यक्ष भरत मिलन पांडेय ने नाराजगी जताई है । 



चौदहवे वित्त से 100 मीटर लम्बी सीसी रोड को जब खुदवाकर देखा गया तो  मोटाई मात्र  2.5 इंच निकली । 

 पंच परमेश्वर योजना से निर्मित  सीसी रोड की मोटाई  3.5 इंच निकली ।  स्टीमेट के अनुसार सीसी रोड की मोटाई 8 इंच होना चाहिए । 

 मौके पर संरपच सचिव को जब तलाशा गया तो दोनों  नदारत हो गए ।

 ग्राम पंचायत पैरहा मे कपिल धारा योजना के  अन्तर्गत   जयपाल कोरी के नाम कूप स्वीकृत है,   उसने कूप निर्माण को 50 हजार 

रुपये के ठेके पर दे दिया है तथा मजदूरो को मजदूरी 150 रुपये दी जाती है।   कूप निर्माण मे सुरेन्द्र पटेल  (13 ) एवं अशोक पटेल (16) 

को कुआ खुदाई में मजदूरी करता देख अध्यक्ष ने नारजगी जताई ।

 सीसी एवं कूप निर्माण का मौके पर अध्यक्ष द्वारा  पंचनामा बनवाया , । उन्होंने जब  13 अप्रैल का मस्टर देखा तो  86 मजदूरो 

के नाम मस्टर मे दर्ज थे।  लेकिन मौके पर कूप निर्माण मे सिर्फ 5 मजदूर उपस्थित थे ।  2 नाबालिग बच्चे भी कार्य करते देखे गये। 

 जनपद अध्यक्ष के साथ मे निर्माण कमेटी अध्यक्ष रामौतार तिवारीजनपद अजयगढ के अरुण चतुर्वेदी एवं पत्रकारगण साथ मे रहे।

10 अप्रैल, 2016

Bundelkhand Dayri


जल के लिए जूझता टीकमगढ़

रवींद्र व्यास


बुंदेलखंड तेरी अजब कहानी ना पेट को पानी ना खेत को पानी , ऐसा ही कुछ नजारा बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में देखने को मिल है।जहां गिरते  जल स्तर ने  इस साल करेला और नीम चढ़ा वाली  कहावत चरितार्थ हो रही है ।नष्ट होते इस जिले के तालाबों के कारण  एक तो जल स्तर पहले से नीचे हो रहा था उस पर इस बार के सूखे ने जीने का सुख भी छीन लिया यही कारण है की जब फरवरी में स्वराज्य अभियान के योगेन्द्र यादव बुंदेलखंड के दौरे पर आये थे तो उन्हें कहना पड़ा कि  बुंदेलखंड के हालात देख  कर मुझे  डर  लगता है ।तालब , कुए सूख गए हेंड पम्प जबाब देने लगे हैं पीने  के पानी का बड़ा ही गंभीर संकट है आज जब यहहालात हैं तो आने वाले समय में और क्या हालात होंगे यदि सरकार ने पानी के लिए अभी से युद्ध स्तर पर प्रयास नहीं किये  तो मराठवाड़ा जैसे हालात हो जाएंगे पानी की कारण गाँव के गाँव खाली हो जाएंगे

  योगेन्द्र यादव का डर अब बुंदेलखंड में सच साबित होने लगा है गाँवों की  विकराल  जल समस्या के बाद अब शहरों की भी हालत बिगड़ने लगीहै ।टीकमगढ़ में  पानी पर लगे  बन्दूक धारियों  के पहरे भी पानी को बचा नहीं पा रहे हैं वहीँ दमोह नगर में फ़िल्टर प्लांट से टंकियों तक पहुँचने वाली मुख्य  पाइप लाइन को छेद कर  लोग पानी की चोरी करने को मजबूर हैं पानी की इस चोरी के चलते  दमोह नगर की पानी की टंकी सुबह से शाम तक नहीं भर पाती दमोह के लोगों की चिंता अब इस बात को लेकर है की सागर से उधार का पानी कब तक उनकी प्यासबुझाएगा ?


 टेहरी से टीकमगढ़ बने इस नगर की लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए नगर पालिका को  खासी मसक्कत करना पड़  रही है उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के जामनी बाँध से अपने हिस्से का पानी लेने के लिए कई तरह के जातन  करने पड़े थे जब पानी मिला और बरी घाटपहुंचा तो नगर पालिका के सामने उसकी सुरक्षा की चिंता हो गई इसके आसपास के उत्तर प्रदेश के गाँव के लोग और किसान इस पानी को चुरानेलगे थे   मजबूर होकर पालिका अध्यक्ष ने जल की सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए पर हथियार बंद सुरक्षा गार्डो के बाद  भी  पानी कीरात में  चोरी होती रही   नगर पालिका  को जिस जल भण्डार से  उम्मीद थी की यह  पानी   मई -जून तक  चल जाएगा , वह अप्रैल में ही ख़त्म होगया अब नगर पालिका  ने इसी नदी पर एम पी और यू पी के जंगलों के बीच मढ़िया घाट पर एक कुंड खोजा है , लोगों की मान्यता है की इस कुंड मेंबड़ा जल भण्डार है, कुंड के इस पानी को लिफ्ट कर बरिघाट पहुंचाया जा रहा है , जिससे मई तक का काम चल जाएगा इस कुंड पर भी सुरक्षा गार्डतैनात किये गए हैं

                           टीकमगढ़ नगर  की एक लाख की आबादी को हर तीसरे दिन पानी मिल  पा रहा है दरअसल बुंदेलखंड के इस जिले में भी पिछलेदो वर्षो से औसत वर्षा १०००. मिमी की नहीं हुई है इस बार अनियमित रूप से ५०५ मिमी वर्षा होने से स्थिती और विकराल हो गई परिणामतह जिले का जल स्तर  नीचे खिसक गया है जिले में लगे 9312 हेंड पम्पो में से 8706 चालू बताये जा रहे हैं और 606 बंद बताये जा रहे हैं ।जमीनी हकीकत इससे कही अलग है जिले  पम्प दुरुस्त करने के लिए 45 दल गठित करने और  को रोजाना 5 -5हेंड पम्प सुधारने का लक्ष्य दियागया है

              ये दल और प्रशासन तंत्र किस तरह से जिले की जल की व्यवस्था दूर कर रहा है यह आये दिन ग्रामीणों द्वारा दिये जा रहे ज्ञापनों से हीसाफ़ हो जाता है ज्योरामोर गाँव में सरकारी रिकार्ड में हेंड पम्प लगे हैं जो गांव की तीन हजार की आबादी को पानी केलिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। पर गाँव में आज के हालात में सिर्फ एक हेंड पम्प ही पानी दे रहा है , यही इनका सहारा है बल्देव गढ़ विकाश खण्ड के दुर्गापुर पंचायत का  गाँव हैखेरा , इस गाँव में दो हेंड पम्प लगे थे , जो पानी भी दे रहे थे , पर पीएचई वाले एक साल पहले सुधार के नाम पर इसके पाइप निकाल ले गए , फिरअब तक नहीं लौटे अपनी व्यथा कलेक्टर साहब को भी सुना  चुके हैं



                           बल्देवगढ़ विकाश खण्ड की भेलशी गाँव में पिछले आठ वर्षो से नल जल योजना बंद पड़ी है गाँव के 13 हजार की आबादी केसहारा बने हेंड पम्पो ने भी अब जबाब दे दिया है पानी की जुगाड़ में गाँव के लोगों को दूर दराज तक भटकना पड़ता है आठ साल से बंद नल जलयोजना की पाइप लाइन भी जगह जगह से खराब हो चुकी है यह योजना १५ साल पहले शुरू हुई थी सात साल तो ठीक ठाक चली फिर ऐसी बंद हुईकी पूर्णतः बंद हो गई


 जतारा जनपद पंचायत के ९३ गाँवों में से टी दर्जन से ज्यादा  गाँवों में मुख्य्मंत्री नलजल योजना
 पूर्णतः ठप्प है इन नलजल योजनाओं में अधिकाँश ईएसआई हैं जो सिर्फ बिजली कनेक्शन के कारण , और पम्प जलने के कारण बंद पड़ी हैं इसी जनपद का एक 600 की आबादी बाला गाँव है टानगा जहाँ के लोग तालाब में गड्ढा खोद कर पिने के पानी जुगाड़ करते हैं गाँव हेंड पम्पअधिकांशतः खराब ही रहता है गाँव वालों ने  तहसीलदार को ज्ञापन भी दिया था कुछ समय के लिए दशा सुधरी फिर जस के तस हालात हो गए

               निवाड़ी के लोगों ने सी एम हेल्प लाइन में भी शिकायत की थी , यहां के लोगों को हफ्ते में एक बार पानी मिलता है लोगों को रोजानानिजी टेंकर  मालिकों से पानी खरीदने को मजबूर होना पड़ता है   यू पी की सीमा से लगा गाँव है तगेडी  गाँव की नल जल योजना दो साल से बंद पड़ीहै , गाँव के चार में से दो हेंड पम्प खराब पड़े हैं पिछले दिनों पानी की  लेकर इस गाँव के बच्चों ने स्कूल जाना भी बंद कर दिया था

                बड़ागांव धसान नगर पंचायत में पांच दिन में एक दिन पानी सप्लाई किया जाता है 15 हजार की आबादी के इस कसबे में पिछले सालजल को लेकर बढ़ते संघर्ष के कारण  टोकन से पानी की व्यवस्था शुरू की गई थी
वहीँ टीकमगढ़ जिले के चंदेरा में पुलिस पानी का परमार्थ करने में जुटी है यहाँ के थाने में जब पुलिस वालों ने बोर कराया और उसमे अच्छा पानीनिकलने पर गाँव के लोगों को बाँटने का निर्णय लिया गया यहां के थाना प्रभारी राकेश तिवारी बताते हैं की पानी को लेकर  झगडे ना हो  इसलिएलोगों के बर्तन रखवा लिए जाते हैं , उनमे पुलिस के जवान सुाबह सुबह पानी भर देते हैं

           इस बुंदेलखडं की दाना -पानी की इस समस्या को  स्वराज्य अभियान के संयोजक योगेन्द्र यादव ने प्रदेश से लेकर देश के हर मंच पर उठाया जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो वे सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सोती सरकारें भी अब जाग्रत हुई बिकाऊ ख़बरों की तलाश में भटकने वाले राष्ट्रीय चैनलों को भी बुंदेलखंड की ख़बरें टी आरपी वाली नजर आने लगी बिकाऊ ख़बरें जान कर कई राष्ट्रीय चैनलों ने अपने विशेष संवादाता और बी वैन भेज कर खबरे बनवाई

पर इस दौर में लोगों ने यहां के जनप्रतिनिधि वर्ग को पूर्णतः निर्लिप्त भाव से तमाशा देखने वाला पाया   चाहे वे बुंदेलखंड इलाके के मंत्री पद पर विराजमान नेता भूपेंद्र सिंह हो अथवा सूखे के दौर में  राई का नृत्य कराने वाले गोपाल भार्गव हों , जयंत मलैया ,कुसुम मेहदेले अथवा खुद उमा भारती ही क्यों ना हो जो काम इन लोगों को करना चाहिए था वह एक बाहर का व्यक्ति योगेन्द्र यादव कर गया नेताओ को शायद ये भरोषा है की जब सारी कायनात जल के लिए अपनी जान दे देगी तब भी उनके घरों में पानी का भण्डार रहेगा

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...