रवीन्द्र व्यास
छतरपुर // लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आयुक्त ने निजी स्कूल माफियाओं पर नकेल कसने के आदेश दिए हैं । शिवराज सरकार की मंशा है की आम नागरिक को शिक्षा माफियाओं की लूट से मुक्ति मिले । अायुक्त ने इस सम्बन्ध में प्रदेश भर के कलेक्टरों को निर्देश भी दिए ताकि हर जिले में व्यवथा चुस्त दुरुस्त रहे । २७ फरवरी को दिए गए इस आदेश के अनुसार अशासकीय विद्यालयों द्वारा अगले शिक्षा सत्र से विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों पर विद्यालय परिसर में स्थित विक्रेता या किसी दुकान विशेष से पुस्तकें एवं गणवेश खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे।
लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आयुक्त के पत्र क्र ८७५ दिनाक २७ फरवरी को प्रदेश के समस्त कलेक्टरों के नाम जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ,शासन को यह शिकायतें मिलीं थी कि अशासकीय विद्यालयों द्वारा शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले शाला में प्रवेश लेने वाले तथा पढ़ रहे विद्यार्थियों पर दबाव बनाया जाता है कि वे दुकान विशेष से ही पुस्तकें, गणवेश और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदें। यह व्यवस्थ कदापि उचित नहीं कही जा सकती है ।
प्रदेश में संचालित निजी हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल या तो सीबीएसई अथवा माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्ध हैं । सभी निजी विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य है की वे आगामी शिक्षण सत्र शुरू होने के कम से कम एक माह पूर्व पुस्तकों की सूचि लेखक एवं प्रकाशक के नाम तथा मूल्य के साथ ,अपने विद्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करें ,। सुचना पटल पर यह भी अंकित होना आवश्यक है कि किसी दूकान विशेष से सामग्री क्रय करने की बाध्यता नहीं है । किसी भी स्थिति में विद्यार्थीओ एवं उनके अभिभावकों को पर बल पूर्वक पुस्तकें एवं अन्य सामग्री किसी विशेष निजी विक्रेताओं से क्रय करने का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए । और शाला के विद्यार्थियों को ऐसी सूचि उपलब्ध कराएं ,ताकि विद्यार्थी एवं उनके अभिवावक इन पुस्तकों को अपनी सुविधा से खुले बाजार से खरीद सकें ।
शिवराज सरकार का आदेश छतरपुर में बे असर
सामाजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन के उपाध्यक्ष आर. के थापक का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल का यह कोई पहला आदेश नहीं है इसके पूर्व भी हर वर्ष इस तरह के आदेश जारी किये जाते हैं । सरकार की मंशा यह साफ़ रहती है की किसी भी तरह आम नागरिक निजी स्कूलों की लूट का शिकार ना हो । सरकार की मंशा पर आदेश जारी कर लोक शिक्षण संचालनालय मौन हो जाता है । वहीँ जिले के अधिकाँश कलेक्टर भी इस मसले पर नैतिकता का परिचय नहीं देते । यही हाल छतरपुर , पन्ना , टीकमगढ़ , सागर और दमोह में भी देखने को मिलता है । छतरपुर के पूर्व कलेक्टर ई रमेश कुमार ने २०११ में और राहुल जैन ने २०१२ में निजी विद्ययालयों की इस दुकान दारी पर नकेल कसने हेतु पत्र जारी किये थे । जिसमे लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल , और केंद्रीय विद्यालय संग़ठन नई दिल्ली के आदेशों का हवाला गया था । इन तमाम आदेशो के बावजूद छतरपुर जिले में विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ लूट का यह खेल जारी है ।
नहीं लगी सूचना पटल पर सूचि
सरकार के रिकार्ड में छतरपुर जिले में 1049 निजी स्कूल दर्ज हैं , समाचार लिखे जाने तक किसी भी स्कूल में पुस्तकों और सामग्री की सूचि सूचना पटल पर नहीं लगी है । इस मामले में अलग अलग स्कूलों के छात्रों से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि हर विद्यालय की अपनी एक अलग निर्धारित दूकान है जिससे किताबें, कापियां और सामग्री क्रय करने की बाध्यता है \
सामजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन ने इस मसले पर अभिवावकों से एक जुट होने की अपील की है , ताकि वे संस्थागत लूट से बच सकें । संस्था ने अभिवावकों से ये भी अपील की है की वे अपने बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाने के पहले उस विद्यालय की मान्यता वगेरह की जांच अवश्य कर लें ।
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