रवीन्द्र व्यास
मनोज अहिरवार ने भी और नवयुवकों की तरह सपने देखे थे धूम धाम से विवाह का / पर उसे शायद यह नहीं पता था कि उसके इस सपने में उसका दलित होना सबसे बड़ा अवरोध था / जिस उत्सव के लिए वह घर से हंसी खुशी निकला था वह ख़ुशी उसका कुछ समय तक ही साथ दे सकी / एक दलित का घोड़ी पर बैठ कर निकालना गांव के दबंगो को रास नहीं आया , और उन्होंने दूल्हे घोड़ी से नीचे पटक कर जैम कर धुनाई कर दी / ये सब भी उस इलाके में हुआ जिस इलाके को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गोद लिया है , वह भी इस बड़ामलहरा इलाके की यह कोई पहली घटना नहीं है / अब इसे क्या कहा जाए सुशासन का दावा करने वाले सी एम के ही राज में दबंगों को एक दलित दूल्हे का घोड़ी चढ़ना भी गंवारा नहीं है.
छतरपुर
जिले के सडवा गांव में दलित समाज के एक दूल्हे को दबंगों ने घोड़ी से उतार कर पीटा और बीच-बचाव करने आई महिलाओं से भी मारपीट की. इस मारपीट में दूल्हे की बुआ का सिर भी फट गया. पुलिस ने सरपंच पति और उसके दो बेटों सहित 13 लोगों पर मामला दर्ज किया है.
बड़ामलहरा थाना इलाके के सड़वा गांव से फुल्ली अहिरवार के बेटे मनोज (21) की बारात जून माह के पहले शुक्रवार को सागर जिले के ग्राम अमरमऊ जानी थी. बुंदेलखंड में बारात रवानगी से पहले राछ घुमाने की परम्परा है. इसी परम्परा के तहत दलित दूल्हा मनोज राछ में घूमने के लिए घोड़ी पर सवार हुआ था. घटना के बाद से गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
सडवा गांव में दलित दूल्हे को घोड़ी से उतार कर पीटने वाले पांच लोग फरार हैं. पुलिस ने अपराधियों की तलाश में गांव को छावनी में बदल दिया है. पुलिस ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 5 अब भी फरार हैं.
दरअसल,
बुंदेलखंड इलाके में यह परम्परा है की शादी वाले दिन जब बरात घर से कन्या के यहाँ के लिए रवाना होती है. उसके पहले गांव में दूल्हे की शोभा यात्रा निकाली जाती है. जिसे यहां राछ फिराना कहते हैं. इस दौरान दूल्हे के परिवार वाले दूल्हे का गाँव में तिलक और मिठाई खिलाकर स्वागत करते हैं और दुआ करते हैं कि अच्छे से जाना और दुल्हन लेकर आना.
शुक्रवार को सडवा गाँव में पहली बार फुल्ली अहिरवार के बेटे मनोज की राछ गाँव में घोड़ी पर निकली. राछ के बाद सागर जिले के ग्राम अमरमऊ बरात जानी थी. गांव में राछ भ्रमण के दौरान मनोज अपने परिवार की महिलाओं और बच्चों के साथ यादव मोहल्ला पहुंचा.इसके बाद सरपंच पति खुमान सिंह सहित 13 लोगों ने मनोज पर हमला कर दिया. दबंगों ने दूल्हे को घोड़ी से पटक दिया और उसकी मौके पर ही लात-घूंसों से पिटाई शुरू कर दी. इसके अलावा राछ में शामिल महिलाओं के साथ मारपीट की और फरार हो गए./
दूल्हे
कि बुआ रामप्यारी ने कहा, 'हम लोगों को पता नहीं था यादव हमला कर देंगे. पहले उनकी जनानी लाठी लेकर आई, फिर उनके आदमी आए और दूल्हे को मारने लगे. फिर दूल्हा को नीचे गिरा दिया.'
छतरपुर
ए एस पी नीरज पांडे कहते हैं की बड़ामलहरा थाने में पुलिस ने फुल्ली की रिपोर्ट पर सरपंच पति और उसके दो बेटों सहित 13 आरोपियों पर 147, 341, 294, 323, 706 आईपीसी और 3-1-10 एससी, एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सड़वा गांव के अम्मू, लाडले ,खड़िया ,मिट्ठू ,जाहर ,रामसिंह, पर्वत पाल को गिरफ्तार कर लिया है.६ आरोपी भी फरार हैं //
सोशल मिडिया फाउंडेशन के उपाध्यक्ष आर. के थापक कहते हैं छतरपुर जिले में दलित दूल्हे को घोड़ी से पटकने की यह कोई पहली घटना नहीं है / इसके पहले भी बड़ामलहरा विधान सभा इलाके के बक्स्वाहा थाना इलाके के सुनवाहा गांव में दिसंबर२००८ में दबंगों ने दूल्हे को घोड़ी से उतारकर उसके एवं उसके परिजनोंके साथ मारपीट की. दबंगों का कहना था कि सवर्ण बाहुल्य इस गांव में दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहींबैठने दिया जाएगा.
दलितों ने इसकी शिकायत दूसरे दिन बकस्वाहा थाने में दर्जकराई.15 दिसम्बर 2008को पुलिस के पहरे में दलित समाज का विवाहकार्यक्रम संपन्न कराया गया.
2007 में सागर जिले के रहली थाना क्षेत्र के भैसा गांव मे एक दलित परिवारके घर कन्याभोज आयोजित किया गया था। गांव के हनुमान मंदिर मेें भोज काभोग लगाने गए दलित समुदाय के साथ ऊॅची जाति के दबंगो ने मारपीट कीऔर उन्हे धमकी देकर गांव से भगा दिया। इस घटना में गांव से 15 महिलाओं सहित 43 दलित बहिष्कृत हो गए। गांव के हैण्डपंप से उन्हें पानी भरने से भीरोक दिया गया। 26 जनवरी12 को गणतंत्र दिवस के दिन छतरपुरजिले में दलितमहिलाओं को गांव में पानी भरने से रोका गया और मारपीट की। फरवरी १२ में टीकमगढ़ जिले में पुलिस के अत्याचार का शिकार दलित हुआहै, जिले के ग्राम भेलसी में तो 31 जनवरी 12 को निस्तार करने निकली महिलाओं के साथ दबंगों ने मारपीट की, जब यह महिलाएं थाने में रिपोर्ट कराने गई तो थाना बल्देवगढ़ के प्रधान आरक्षक और सिपाहियों ने इन महिलाओं के साथ बदसलूकी की और उन्हें डांट डपट कर भगा दिया। सागर जिले के बीना के एक गांव बेलई में तो दलितबाल किशन अहिरवार की इसलिए पिटाई कर दी गई कि उसने दबंगों को सामनेझुककर सलामी देने से इंकार कर दिया।
सामाजिक
संगठन सोशल मिडिया फाउंडेशन उपाध्यक्ष कहते हैं की यह तो बुंदेलखंड इलाके की कुछ चंद घटनाएं हैं , दरअसल इसके पीछे इस इलाके की मानसिक सोच है , जिसके कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं / वे कहते हैं कि फाउंडेशन आने समय में इस तरह की घटनाओ पर एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी /

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