18 सितंबर, 2012

छतरपुर जिले में १७१ स्कूल शिक्षक विहीन



    
छतरपुर /जिले के  के 131 मिडिल और 40 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक नहीं, हें } जिले के दर्जनों मिडिल और प्राइमरी स्कूल इन दिनों शिक्षक विहीन हैं। जब की शहर के आसपास के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है।  इस सबके बीच जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के काफी स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज जानकारी के अनुसार  40 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। जबकि जिले में कुल 1968 प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। 

 जिले में सबसे बदतर हालत मिडिल स्कूलों की है।  697 मिडिल स्कूल जिले में संचालित हैं। इनमें से 131 स्कूल शिक्षक विहीन हैं। इसके४ अतिरिक्त 9 मिडिल स्कूल ऐसे हैं, जहां पर हेड मास्टर तो पदस्थ हैं, लेकिन अन्य शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने से अतिथि शिक्षकों से काम चलाना पड़ रहा है। हालत यह है कि मिडिल स्कूल कंदैला-चंदला में 410 छात्र हैं। वहां पर 13 शिक्षकों को पदस्थ होना चाहिए, लेकिन कोई भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। 
है।  
ये है छतरपुर जिले में शिक्षा के अधिकार का  जलवा  | अब छतरपुर कलेक्टर को भी शिक्षा की सुध आई है  उन्होने  कहा है की जिले  में सभी स्कूलों में कम से कम एक स्थायी शिक्षक की व्यवस्था अवश्य की जाये। केवल अतिथि शिक्षकों की जिम्मेदारी पर ही शिक्षा विभाग निर्भर न रहे। विभाग द्वारा व्यवस्था में सुधार के लिये आवश्यक उपाय सुनिश्चित् किये जायें। यह निर्देश कलेक्टर श्री राजेश बहुगुणा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक में जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार हेतु जनशिक्षक प्रत्येक 03 दिन में उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाली शालाओं का अवश्य भ्रमण करें। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व इसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित् करें।
        

छतरपुर जिले में 5471 बच्चे अति कुपोषित


 छतरपुर  जिले में 5471 बच्चे  अति कुपोषित 
            छतरपुर /  जिले में 5471 बच्चे अति कम वजन के पाए गए है।जिले में लगभग ढाई हजार परिवारों के साढ़े पांच हजार बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। ये हाल  तब है जब प्रदेश के साथ साथ जिले में अटल मिशन चल रहा है |  सर्वेक्षण में ये बात सामने आई है की जिले के अधिकाँश आंगनवाडी केन्द्रों पर पोषण आहार के नाम पर बच्चों के साथ मजाक किया गया है | 
शहर से ही दस किलो मीटर दूर  बछरोनिया गाँव में तो महीनो से आंगन वाडी में पोषण आहार और यहाँ के स्कूल में मध्यान भोजन नहीं बटा | अब स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है की दूर दराज के गांवों की दशा क्या होगी |
अब ज़िलामहिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किए गए सर्वे में जिले में 5471 बच्चे अति कम वजन के पाए गए है | इस स्थिति को देख कर ज़िला प्रशासन अब जाग्रत हुआ है | सोमवार को कलेक्टर ने बैठक कर कहा की  इन बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने एवं परिवारों की आय बढ़ाने के लिये उन्हें जिले के सभी विभाग शासकीय योजनाओं से लाभंावित करें|जिला पंचायत सीईअे श्रीमती भावना वालिम्बे ने कहा कि इसे हम चुनौती के रूप में स्वीकार कर रहे हं,ै इन परिवारों की मेपिंग कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोडक़र कुपोषण के खिलाफ  लड़ाई लड़ी जायेगी। जिला पंचायत सभा कक्ष में सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों की बैठक में अति कुपोषण से निपटने की रणनीति बनाई गई।
            जिला पंचायत सी.इ.ओ.श्रीमती भावना वालिम्बे ने कहा  कि अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नावास केन्द्रों में 

भर्ती कराकर उन्हें कुपोषण से दूर किया जाये। समय पर उनका टीकाकरण हो और आंगनवाड़ी केन्द्रों में शिशुओं एवं उनकी माताओं को सभी निर्धारित सुविधायें सहज मुहैया कराई जायें।  प्रशासन ने माना है  कि जब तक इनके परिवारों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधारी जाती है तब तक समस्या का स्थाई समाधान सहज नहीं है। । अति कुपोषित बच्चे के परिवार में यदि जमीन है और सिंचाई के साधन नहीं तो उन्हें सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जायें। अति कुपोषित बच्चे की माँ को मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में रसोईया के पद पर नियुक्त किया जायें। डीपीआईपी, जनअभियान परिषद और तेजस्वनी भी इन परिवारों के लिए काम करेगें। उन्होंने आंगनवाड़ी केन्द्रों के आस-पास खुली भूमि में किचिन गार्डन विकसित करने का सुझाव दिया। हरी सब्जियों के लिए बीज कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध करा दिए जायेगें। इन हरी सब्जियों का उपयोग अति कुपोषित बच्चों के परिवारों हेतु होगा। 

16 सितंबर, 2012

कांग्रेस का हाथ अब किसके साथ ?



ये यू.पी.ए. सरकार है  जिसका मुख्य घटक कांग्रेस है ,जिसका मुख्य नारा है कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ _ और अब लगता है ये हाथ आम आदमी के साथ नहीं बल्की आम आदमी की गरदान का नाप लेने तक साथ है _ , ऐसी कांग्रेस और सरकार के  मुखिया हें मनमोहन सिंह , वे इन दिनों काफी व्यस्त हें ,उनके पास अब जनता के मन को मोहने का वक्त नहीं है | असल में वे किसी दूसरे का मन मोहने में व्यस्त हें | सोनिया जी का मन मोहा तो प्रधान मंत्री बन गए  ,अब वे देश की जगह  दुनिया के बडे रंग दार का मन मोहने में जुट गए हें , अब जाने वे क्या बन जायेंगे ?
घोटालों::कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला और कोयला खदान आवंटन घोटाला, इन सभी घोटालों  की आग से जल रहे देश में उन्होने एसा डीजल और जलने  वाली गैस फेंकी - की देश का हर आदमी बेचेन हो उठा | इससे भी वे संतुस्ट नहीं हुए तो गाँधी के सपनो को धता बता कर ऍफ़.डी.आई. की मंजूरी दे दी | ये सब कुछ उन्होने किया  गाँधी परिवार के आशीर्वाद और मल्टी नॅशनल कम्पनियों के बल से | कहते हें की इन्ही के बल बूते पर ही इनका दल देश का सबसे बड़ा पूंजी पति दल है |
कई दलों के समर्थन पर टिकी उनकी सरकार  के खेल भी बडे निराले हें | सरकार की बैठकों में उनका  साथ देने वाले दल बाहर  आकर उनका विरोध करते हें |शायद ये नेता  देश की जनता को जरुरत से ज्यादा मूर्ख समझने लगे हें , तभी तो इस तरह की हरकत करते हें | अन्यथा क्या वजह है की देश की चिंता का स्वांग करने वाले ये दल -{दल } अब तक इस सरकार को समर्थन दे रहे हें | 
उस पर सरकार का तुर्रा ये की देश को इन पेट्रोलियम  उत्पादों में सब्सिडी देना पड़ती है जिस से करोड़ों {१.लाख ३२ हजार करोड़ } का घाटा हो रहा है | देश की जनता नहीं चाहती की देश की अर्थ दशा खराब हो वो भी आम आदमी के कारण | उसकी तो बस एक छोटी सी बिनती है की देश को विदेशियों के हाथों ना बेंचो ? बार - बार तेल गेस के दाम बढाने से अच्छा है की एक ही बार में जितने दाम हों बड़ा लो , गेस  पर से भी सब्सिडी हटा लो ? आखिर इस देश में जो की तर्रक्की  वाला  विकाश शील _ से विकशित देश बन रहा है उसके  विकाश में आम आदमी का अवरोध  रहना ही नहीं चाहिए ? एसे लोगों  की इस देश में जरुरत ही क्या है ?  देश को जरुरत है  संम्पन  और सम्रद्ध लोगों की मल्टी नेशनल वाले पूंजी पतियों की | उनके चमचमाते बंगलों और फेक्टरियों , शो रूमों से देश की शान बढेगी | इस लिए एसे लोगों की मदद की जाना चाहिए ,   सरकार  कर भी रही  है ,  देश के  बड़े कॉरपोरेट घरानों को 10 लाख करोड़ रुपए पिछले तीन साल में टैक्स छूट  दी| 
अब अगर सरकार आम आदमी के लिए डीजल और एलपीजी पर सब्सिडी  देगी तो ये लोग खुश हाल जिन्दगी  जी लेंगे  , फिर  ये बेचारे  इन कॉरपोरेट घरानों में नौकरी नहीं करेंगे  इस लिए इनको आर्थिक तौर पर इतना तोड़ दो की ये बेचारे लाचारी में ही सही  इनके द्वार पर मत्था टेकने को मजबूर हो जाएँ | शायद इसी कारण अब लोग सवाल करने लगे हें की कांग्रेस का हाथ अब किसके साथ | 
.कॉरपोरेट घरानों के बीच की साठगांठ(I.A.C.)
देश दुनिया में यदि कोई सबसे  लाभ कारी प्रोडक्ट  है तो वह है तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस,\  सरकार अब  बड़े कॉरपोरेट घरानों  से साठगांठ कर  निजी हाथों में  सौपने  जा रही  हैं. |तेल और गैस भंडारों को  कॉरपोरेट घरानों को बांटे जाने  पर न्यायपालिका भी ऐतराज जता चुकी है. पिछले 20 सालों में  सरकारों ने तेल और गैस संपदा से भरपूर क्षेत्रों को गलत तरीके से निजी क्षेत्रों को सौंपा है. उससे राष्ट्र के खजाने को जो नुकसान हुआ है वह कोयला घोटाले से भी अधिक है.
राजस्थान तेल ब्लॉक को ओएनजीसी से लेकर कैर्न एनर्जी को औने-पोने दाम पर सौंप दिया गया. अनुबंध की समय सीमा खत्म होने के बाद भी कंपनी को उस क्षेत्र को अपने स्वामित्व में रखने की इजाजत दे दी गई.
कैर्न ने स्वीकार किया था कि इस ऑयल फील्ड रिजर्व में पांच लाख करोड़ का तेल था जबकि उस तेल को निकालने की लागत केवल तीन प्रतिशत है. ओएनजीसी को इस तेल क्षेत्र से केवल 30 फीसदी हिस्सा मिला लेकिन उसे रॉयल्टी की पूरी रकम चुकानी पड़ी. अगर यह तेल क्षेत्र ओनजीसी से वापस नहीं ले लिया गया होता तो देश को यह तेल काफी सस्ते में उपलब्ध होता. 
उसी तरह गोदावरी गैस बेसिन में, जो कि देश का सबसे बड़ा बेसिन है, उसे उत्पादन में साझेदारी के एक अजीबोगरीब समझौते के तहत रिलायंस के हवाले कर दिया गया. रिलायंस ने लाभ को कम दिखाने की नीयत से गैस निकालने की लागत को मनमाने तरीके से बढ़ाकर दिखा दिया. चूंकि सरकार ने लाभ में साझीदारी का समझौता किया था और फर्जी तरीके से लागत बढाकर रिलायंस ने लाभ की राशि घटाकर दिखा दी, इस कारण देश को उसका वाजिब हिस्सा नहीं मिल पाया.
 तेल और गैस जैसे देश के प्राकृतिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की नीति तत्काल बंद की जाए. निजी क्षेत्रों को अब तक जो आवंटन हुए हैं उसकी एक स्वतंत्र जांच कराई जाना  चाहिए |

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...